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ZEE जानकारी: आपके मन में ये सवाल होगा कि राम मंदिर का का स्वरूप कैसा होगा?

आपके मन में ये सवाल होगा कि इस नए मंदिर का स्वरूप कैसा होगा? देश के 100 करोड़ से ज्यादा हिंदू ये चाहते हैं कि भगवान राम के जन्मस्थान पर दुनिया का सबसे भव्य मंदिर बने. 

ZEE जानकारी: आपके मन में ये सवाल होगा कि राम मंदिर का का स्वरूप कैसा होगा?

आपके मन में ये सवाल होगा कि इस नए मंदिर का स्वरूप कैसा होगा? देश के 100 करोड़ से ज्यादा हिंदू ये चाहते हैं कि भगवान राम के जन्मस्थान पर दुनिया का सबसे भव्य मंदिर बने. हालांकि इसका डिजाइन कैसा होगा ये निश्चित नहीं है. आपको समझाने के लिए हमने एक Animation तैयार किया है. ताकि आप समझ सकें कि ये भव्य मंदिर ऐसा भी हो सकता है. दुनिया में ईसाई धर्म के 230 करोड़ अनुयायी हैं. और उनका सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है...Vatican में मौजूद St. Peter's Basilica. इसका परिसर करीब 108 एकड़ में है. इसी तरह सऊदी अरब के मक्का में मुसलमानों का सबसे बड़ा पवित्र धर्मस्थल है.

इस धर्म को विश्व में 180 करोड़ मानते हैं. इसी तरह अब इंतजार है राम मंदिर के निर्माण का. आपको बता दें कि दुनिया में करीब 110 करोड़ लोग हिंदू धर्म के अनुयायी हैं. और अब इनकी इच्छा है कि बाकी धर्मों की तरह इनके लिए भी एक भव्य मंदिर का निर्माण हो. अयोध्या मामले पर हम लगातार आपको बता रहे थे कि इसका समाधान...

हम फॉर्मूले से निकाला सकता है. हम यानी हिंदू और मुसलमान. और आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी इसी हम की भावना को...और मजबूत करता है. इस फैसले में ना कोई पक्ष हारा है...ना ही कोई पक्ष जीता है. इस फैसले में जीत धर्मनिरपेक्षता की हुई है . इस फैसले में सांप्रदायिक सौहार्द की जीत हुई है. इस फैसले में नये भारत के सामाजिक सद्भाव की जीत हुई है .

और इस फैसले से देश के हिंदू और मुसलमानों ने पूरे विश्व को ये संदेश दिया है कि वो बड़े से बड़े विवादों का समाधान निकाल सकते हैं. इस वक्त भारत की कुल जनसंख्या 135 करोड़ है. और इसमें से करीब 80% यानी 108 करोड़ से ज्यादा हिंदू हैं. जबकि मुसलमान 14 प्रतिशत यानी करीब 19 करोड़ हैं. भारत में दुनिया के 11 प्रतिशत मुसलमान भारत में रहते हैं.

जबकि सिख सवा 2 करोड़, ईसाई 3 करोड़ और बाकी धर्मों के लोग करीब 2 करोड़ 75 लाख हैं. यहां आपके लिए ध्यान देने वाली बात ये है कि. हमारे देश में बहुसंख्यक होने के बावजूद हिंदुओं ने अयोध्या मामले में 150 वर्षों तक धैर्य बनाये रखा. क्योंकि इस मामले की सुनवाई अदालतों में 150 वर्षों से चल रही थी. जबकि मुसलमानों ने भी पूरे मामले में संयम नहीं खोया और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने दुनिया भर में एक मिसाल कायम की है.

पूरे विश्व में ये कहा जाता है कि भारत के मुसलमान धर्मनिरपेक्ष हैं और सबसे अलग हैं. और मुसलमानों ने इस बात को साबित भी कर दिया. देश के हिंदू और मुसलमान. सबसे बड़े फैसले पर एकजुट हैं. और शांति, सौहार्द और भाईचारे वाली भारतीय संस्कृति के दूत बनकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

हमें भरोसा है कि इसी हम फॉर्मूले से अब देश में धार्मिक सौहार्द का एक नया युग शुरू हो जाएगा.अयोध्या मामले में आए फैसले से पूरा देश खुश है . हिंदु और मुसलमान आपसी सौहार्द का परिचय दे रहे है. और पूरा देश एकसुर में ये बात कह रहा है कि अब न्यू इंडिया को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता . लेकिन हमारे ही देश में बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो अयोध्या विवाद के नाम पर ही अपनी दुकानदारी चलाते आए हैं. 

आप इन लोगों को अयोध्या मामले के राजनीतिक लाभार्थी भी कह सकते हैं. ये लोग चाहते थे कि इस विवाद का कभी अंत ना हो और इस मामले की एक खिड़की हमेशा खुली रहे. लेकिन आज के बाद..इन सबकी ये दुकाने बंद हो जाएंगी. 

जो लोग वोट के नाम पर ही वोट का धंधा करते थे..उनका समय समाप्त हो जाएगा. जिन भगवान राम को त्रेता युग में सिर्फ 14 वर्ष का वनवास मिला था. उन्हें राजनीति करने वालों ने कलयुग में 491 वर्ष का वनवास दे दिया. 

रावण का वध करने के बाद..उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने उनसे कहा था कि लंका बहुत सुंदर जगह और हमें यहीं रुक जाना चाहिए. लेकिन तब राम ने उन्हें कहा था कि पराई धरती कितनी भी सुंदर हो...वो जन्मभूमि से बढ़कर नहीं हो सकती. 

भगवान राम ने कहा था कि जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है. यानी भगवान राम ने 7 हज़ार वर्ष पहले जिस जन्मभूमि के लिए सारे सुखों को छोड़ दिया था. उस जन्मभूमि को कलयुग में उनसे छीन लिया गया . लेकिन राम खुद न्याय-प्रिय देवता थे और कलयुग में भी वो न्याय के लिए लड़ते रहे और आखिरकार आज उन्हें उनका हक मिल ही गया.