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Zee Jaankari: स्वामी विवेकानंद के 'विवेक' से सीखेगी दुनिया

तारीखें आती हैं, चली जाती हैं. लेकिन कुछ तारीखें ऐसी भी होती हैं, जो हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती हैं. 11 सितम्बर, दुनिया के लिए एक ऐसी ही तारीख है. 

Zee Jaankari: स्वामी विवेकानंद के 'विवेक' से सीखेगी दुनिया

तारीखें आती हैं, चली जाती हैं. लेकिन कुछ तारीखें ऐसी भी होती हैं, जो हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती हैं. 11 सितम्बर, दुनिया के लिए एक ऐसी ही तारीख है. क्योंकि, आज ही के दिन दो बहुत बड़ी घटनाएं हुईं थी. पहली घटना आज से 126 साल पहले वर्ष 1893 में हुई थी. जब शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने, Parliament of the World's Religions में एक भाषण दिया था.और दूसरी घटना 18 साल पहले वर्ष 2001 में हुई थी. जब New York के World Trade Center पर आतंकवादी हमला हुआ था. जिसमें हज़ारों लोग मारे गए थे.

हालांकि, ये भी एक विडंबना ही है, लोग इस आतंकवादी हमले को तो याद करते हैं. लेकिन, कोई वर्ष 1893 के 9/11 को याद नहीं करता. सच तो ये है, कि अगर दुनिया ने 11 सितम्बर 1893 की उस घटना के महत्व को समझा होता, तो 11 सितम्बर 2001 जैसा आतंकवादी हमला हुआ ही नहीं होता. क्योंकि, उस वक्त भारत के एक संन्यासी ने...

.दुनिया को सहनशीलता का पाठ पढाया था. विश्व धर्म संसद में अपने भाषण की शुरुआत में जैसे ही स्वामी विवेकानंद ने कहा था - "Sisters And Brothers Of America" यानी "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों" ...उनके इन शब्दों को सुनकर वहां मौजूद 7 हज़ार लोगों ने करीब 2 मिनट तक लगातार खड़े होकर तालियां बजाई थीं....और उनका अभिवादन किया था. सिर्फ 30 साल की उम्र में एक संन्यासी ने, दुनिया को हिंदुत्व के नज़रिये से भाईचारे का पाठ पढ़ाया था. आज आपको जानना चाहिए कि आखिर भारत के संन्यासी ने ऐसा क्या बोला था, जिससे दुनिया मंत्रमुग्ध हो गई थी .

स्वामी विवेकानंद ने सबसे आखिर में अपना भाषण दिया था. वो जब भाषण देने के लिए उठे , तो कुछ देर के लिए शांत खड़े रहे. और फिर उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 'मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों' से की थी. उन्होंने अपने धर्म का ज़िक्र करते हुए कहा, कि वो एक ऐसे धर्म से हैं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सबको स्वीकार करने का पाठ पढ़ाया है.

उन्होंने विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करने की बात कही थी. भारत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा था, कि उन्हें गर्व है कि वो एक ऐसे देश से हैं, जिसने इस पृथ्वी के सभी देशों और धर्मों के, परेशान और सताए गए लोगों को शरण दी है. 126 साल पहले स्वामी विवेकानंद ने सांप्रदायिकता और कट्टरता के प्रति भी दुनिया को आगाह किया था.

और कहा था, कि कितनी बार ही ये धरती खून से लाल हुई है. कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं. अगर ये भयानक राक्षस नहीं होते तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता. विश्व धर्म संसद के मंच से स्वामी विवेकानंद ने समाज में फैली हर दूषित सोच और दुर्भावना के खिलाफ पूरी दुनिया के लोगों को एकजुट किया था.

9/11 के हमले ने आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी दुनिया को बदल दिया. सबके सोचने-समझने का तरीका बदल दिया. इसी का नतीजा था, कि अमेरिका ने ना सिर्फ ओसामा बिन लादेन को मारकर 9/11 के हमले का बदला लिया. बल्कि अपने देश की सुरक्षा व्यवस्था इतनी मज़बूत कर दी, कि दोबारा इस प्रकार का हमला ना हो. अमेरिका ने इसके लिए Department of Homeland Security बनाया. और 22 सरकारी एजेंसियों को Homeland Security में शामिल कर दिया. अमेरिका की National Security Agency प्रति वर्ष हज़ारों E-Mails की जांच करती है. अक्टूबर 2001 में The PATRIOT Act लागू किया गया.

जिसके तहत सुरक्षा एजेंसियों को असीमित शक्तियां दी गईं. ताकि वो शक होने पर किसी की भी जांच कर सकें. आतंकवाद विरोधी अभियान में तेजी लाई गई. संदिग्ध संगठनों और लोगों की निगरानी की गई. Airport पर Transportation Security Administration का गठन किया गया. और सुरक्षा व्यवस्था सख्त की गई. इन सभी उपायों की मदद से अमेरिका की National Security Agency ने 50 से ज़्यादा संभावित आतंकवादी हमलों को नाकाम किया.

हालांकि, इसी दृष्टिकोण से आज संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था के काम करने के तरीकों पर भी बात करने की ज़रुरत है. क्योंकि, आज भी संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद को लेकर कोई तय परिभाषा नहीं है, जिसपर सभी सदस्य देश राज़ी हों. और इसी का फायदा उठाकर पाकिस्तान जैसे देश, बार-बार बच निकलते हैं.

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वामी विवेकानंद के भाषण को याद किया. और आतंकवाद के विषय पर कहा, कि भारत अपने दम पर इस समस्या का समाधान करके रहेगा. स्वामी विवेकानंद...आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं.एक ऐसा महापुरूष जिसके अंदर राष्ट्रभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई थी. जिसके लिए राष्ट्र सर्वप्रथम था. और आज भारत सहित पूरी दुनिया को इस महापुरूष के विवेक से शिक्षा लेने की ज़रूरत है.