ZEE जानकारी: गुरु नानक देव की ये 5 बातें आपकी जिंदगी बदल देंगी

हम अक्सर जीवन में आने वाली छोटी छोटी चुनौतियों से परेशान हो जाते हैं . अपना धैर्य खो देते हैं और एकदम टूट जाते हैं. लेकिन गुरु नानक कहा करते थे कि 'हुकुम रजाई' चलना चाहिए . यानी ऊपर वाले की मर्ज़ी के बगैर कुछ नहीं होता और हमें उसके ही आदेशों का पालन करना चाहिए ...इसलिए जीवन की परेशानियों से विचलित होने की ज़रूरत नहीं है .

ZEE जानकारी: गुरु नानक देव की ये 5 बातें आपकी जिंदगी बदल देंगी

आज सिख धर्म की स्थापना करने वाले...गुरु नानक देव की 550वीं जयंती है. सिख धर्म के अनुयायी. इस दिन को प्रकाश उत्सव और गुरु पर्व के नाम से मनाते हैं. गुरु नानक देव का जन्म...सन 1469 में...ननकाना साहिब में हुआ था . और इस वक्त ये जगह पाकिस्तान में है . सिखों के सबसे बड़े गुरु के बारे में कहा जाता है...कि उन्होंने अपने व्यक्तित्व में...दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, समाज सुधारक और देशभक्त के गुण समेटे हुए थे .गुरु नानक के इन गुणों को समझने के लिए...आज हमने, उनके जीवन और भगवान राम के प्रति उनकी आस्था पर एक विश्लेषण तैयार किया है .

हम अक्सर जीवन में आने वाली छोटी छोटी चुनौतियों से परेशान हो जाते हैं . अपना धैर्य खो देते हैं और एकदम टूट जाते हैं. लेकिन गुरु नानक कहा करते थे कि 'हुकुम रजाई' चलना चाहिए . यानी ऊपर वाले की मर्ज़ी के बगैर कुछ नहीं होता और हमें उसके ही आदेशों का पालन करना चाहिए ...इसलिए जीवन की परेशानियों से विचलित होने की ज़रूरत नहीं है .

गुरु नानक एक दार्शनिक थे...योगी थे और उन्होंने आत्मा और परमात्मा के मिलन को करीब से समझा था . लेकिन अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान भी उन्होंने कभी परिवार का साथ नहीं छोड़ा और वो कर्म को भी ईश्वर भक्ति का मार्ग मानते रहे . यही वजह थी कि वो प्रभु का ध्यान भी करते थे और अपने खेतों में काम भी करते थे . यानी जीवन में सुख की अनुभूति के लिए कर्म की साधना भी की जा सकती है और इसमें परिवार भी बाधा नहीं बनता .

गुरु नानक हिंदू और मुस्लिम एकता के भी परिचायक थे . उनके दो सबसे प्रिय शिष्यों का नाम..भाई मर्दाना और भाई बाला था .गुरु नानक ने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में लगाया . सन 1499 से 1521 के बीच, उन्होंने 4 धार्मिक यात्राएं की...और सिर्फ भारत में ही नहीं...बल्कि अफगानिस्तान, ईरान और अरब देशों में भी जाकर उपदेश दिए .

ऐसा माना जाता है...कि इस दौरान सन 1510 में, गुरु नानक अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में भी गए थे . राम जन्मभूमि विवाद के फैसले में भी...सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का जिक्र किया है . गुरु नानक देव की इस यात्रा और उससे जुड़ी बातों का विवरण...धार्मिक पुस्तक ''जन्म साखियां'' में लिखा गया है .

इस पुस्तक के मुताबिक...तब तक बाबर ने भारत पर आक्रमण नहीं किया था . ये गुरु नानक देव जी की दूसरी धार्मिक यात्रा थी...जिसे पंजाबी में 'उदासियां' कहा जाता है . अपनी इस यात्रा में गुरु नानक..दिल्ली, हरिद्वार और सुल्तानपुर होते हुए अयोध्या गए थे .जानकारों के मुताबिक...गुरु ग्रंथ साहिब में...पेज नंबर 7 से लेकर 1400 तक, कई जगह भगवान राम का जिक्र किया गया है .गुरु ग्रंथ साहिब में...सिखों के नौवें और दसवें गुरु...गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह के भी...राम जन्मभूमि मंदिर जाने का जिक्र है .

गुरु नानक कहा करते थे...कि ईश्वर को बांटा नहीं जा सकता . इसलिए गुरु नानक ने...''ओम'' शब्द के साथ... ''एक'' लगाकर...''एक ओंकार'' नाम दिया, जिसका अर्थ होता है ईश्वर एक है .गुरु नानक देव ने...धर्म और जाति के बंधनों को तोड़ते हुए, समाज को संगठित करने का काम किया . उन्होंने समाज से...अमीर गरीब और जात पात के भेदभाव को मिटाया .

गुरु नानक ने...अपने एक ऐसे भक्त के यहां भोजन किया, जिसे पूरा गांव अछूत समझता था . उन्होंने उस वक्त कहा था...कि परिश्रम से कमाकर और उसमें से कुछ बचाकर....भूखे को खिलाने वाला ही सबसे श्रेष्ठ व्यक्ति है .

गुरु नानक ने...जब समाज को अनेक भागों में बंटा हुआ देखा...तो उन्होंने एक ऐसा समूह बनाने का निश्चय किया, जिसमें धर्म और जाति के लिहाज से कोई छोटा या बड़ा ना हो . इसलिए उन्होंने सामुदायिक उपासना की प्रथा शुरू की . इस उपासना में शामिल लोगों के लिए धर्म और जाति का कोई बंधन नहीं था.

गुरु नानक ने...समाज में फैले छुआछूत को खत्म करने पर भी जोर दिया . इसके लिए उन्होंने गुरुद्वारे में झाड़ू लगाने वाले लोगों के साथ भोजन करना शुरू किया . इसी घटना के बाद लंगर प्रथा की शुरुआत हुई . गुरु नानक देव ने जो तीन बड़ी शिक्षाएं दीं...वो लोगों के लिए खुशहाली से जीवन जीने का एक मंत्र हैं . ये शिक्षाएं हैं...नाम जपना, कीरत करना और वंड छकना .

यानी ईश्वर का नाम जपो, ईमानदारी से मेहनत करो और मिल बांट कर खाओ . आज इन्हीं तीन मंत्रों पर सिख धर्म चलता है . ये सीखें कर्म से जुड़ी हुई हैं और कर्म को बेहतर करने की ओर ले जाती हैं . यानी मन को मजबूत, कर्म को ईमानदार और कर्मफल के सही इस्तेमाल की सीख देती हैं . गुरु नानक ने...बहुत ही साधारण तरीके से अपना पूरा जीवन जीया . वो केवल भूख मिटाने जितना ही भोजन करते थे...और अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा...गरीबों को खाना खिलाने में खर्च कर देते थे .

आज आपको गुरु नानक देव के जीवन से 5 महत्वपूर्ण बातों को सीखना चाहिए .
सबसे पहली बात है...ईमानदारी . गुरु नानक का मानना था...कि हर व्यक्ति को अपना जीवन, पूरी ईमानदारी के साथ जीना चाहिए . क्योंकि भ्रष्टाचार और बेईमानी से अगर आप कुछ हासिल करते हैं...तो आपको जिंदगी में कभी न कभी उसका भुगतान जरूर करना होगा . सबसे बड़ी खुशी तभी मिल सकती है...जब हम पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ जीते हैं . यानी आपको भी पूरी ईमानदारी के साथ जीवन जीना चाहिए .

दूसरी बात...गरीबों की सेवा ही सबसे अच्छा व्यवसाय है . गुरु नानक के पिता ने उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए 20 रुपये दिए थे . लेकिन उन्होंने उस पैसे का इस्तेमाल...गरीबों को खाना खिलाने के लिए किया . क्योंकि उनका मानना था...कि गरीबों की सेवा करना ही सच्चा व्यवसाय है . गुरु नानक देव इसे “सच्चा सौदा” कहा करते थे . यही कारण है कि गुरुद्वारे...किसी भी जाति या धर्म के लोगों के लिए हमेशा खुले रहते हैं .

गुरु नानक का तीसरा संदेश है...समानता . गुरु नानक सभी को समान मानते थे . जाति या धर्म के आधार पर उन्होंने कभी भेदभाव नहीं किया . उनका ये दर्शन गुरुद्वारों में "लंगर" की परंपरा में भी दिखाई देता है...जहां छोटे बड़े और अमीर गरीब, एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करते हैं . गुरु नानक देव के जीवन से हम सभी को ये सीखना चाहिए...कि हम सब एक हैं और जाति और धर्म के नाम पर कोई हमें नहीं बांट सकता .

चौथी बात है...महिलाओं का सम्मान . गुरु नानक...सिर्फ समानता की बात नहीं करते थे, बल्कि महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ भी उन्होंने आवाज उठाई . उनका कहना था...कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है . इसलिए आज हम सभी को ये प्रण लेना होगा...कि हम महिलाओं का सम्मान करेंगे .

और पांचवी बात...अंधविश्वासों का हमेशा विरोध करना चाहिए . गुरु नानक कहा करते थे कि अंधविश्वास के बजाय...उसके पीछे छुपे कारणों पर सवाल उठाना चाहिए . तभी हम अंधविश्वास को जड़ से खत्म कर पाएंगे .

गुरु ग्रंथ साहिब के शुरुआती 940 शब्द गुरु नानक देव के ही हैं . सन 1522 में गुरु नानक करतारपुर आकर बसे थे...और वहीं उन्होंने सिख धर्म की स्थापना की थी . करतारपुर में ही सन 1539 में गुरु नानक की मृत्यु हुई और यहीं सिखों के दूसरे गुरु...अंगद देव जी को गद्दी सौंपी गई थी . इसी वजह से करतारपुर साहिब गुरुद्वारे से...भारत और दुनियाभर में मौजूद सिख समुदाय के...करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं .

गुरु नानक की सबसे बड़ी सीख थी...कि संसार को जीतने के लिए, अपनी कमियों और विकारों पर विजय पाना जरूरी है . आज हम सभी को, गुरु नानक देव से प्रेरणा लेते हुए...अपने जीवन में सकारात्मक विचारों को जगह देनी चाहिए और नकारात्मक बातों से खुद को दूर रखना चाहिए .