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Zee Jaankari: लाल बहादुर शास्त्री के निधन के पीछे क्या कोई साजिश थी?

2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती है. और कल ही देश के एक महान सपूत लाल बहादुर शास्त्री की भी 116 वीं जयंती हैं. महात्मा गांधी की हत्या हुई थी. लेकिन, लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु का रहस्य आज तक सुलझाया नहीं जा सका है.

Zee Jaankari: लाल बहादुर शास्त्री के निधन के पीछे क्या कोई साजिश थी?

2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती है. और कल ही देश के एक महान सपूत लाल बहादुर शास्त्री की भी 116 वीं जयंती हैं. महात्मा गांधी की हत्या हुई थी. लेकिन, लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु का रहस्य आज तक सुलझाया नहीं जा सका है. शास्त्री जी का निधन 11 जनवरी 1966 को उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में हुआ था. तब उजबेकिस्तान सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था. कुछ लोग शास्त्री जी की मृत्यु को स्वाभाविक मानते हैं तो कुछ लोग कहते हैं कि उनके साथ षडयंत्र हुआ था . इसलिए आज हमने शास्त्री जी से जुड़े इतिहास का अध्ययन किया है.

उनकी मृत्यु के समय की घटनाओं पर रिसर्च किया है और ये पता लगाने की कोशिश की है ... कि जनवरी 1966 में ताशकंद में क्या हुआ था. आज शास्त्री के निधन को 53 वर्ष बीत चुके हैं . लेकिन शास्त्री जी के निधन का रहस्य आज भी बना हुआ है . लाल बहादुर शास्त्री सही मायनों में जन-नेता थे . मुझे ये कहते हुए अफसोस हो रहा है कि देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में से एक शास्त्री जी की मृत्यु का सच आज भी देश नहीं जानता है .

सबसे दुख की बात तो ये है कि इन 53 वर्षों में देश में कई सरकारें आईं और चली गई .लेकिन किसी भी सरकार ने शास्त्री जी के मृत्यु का सच जानने की कोशिश नहीं की . वर्ष 1965 के युद्ध का परिणाम आज भी पाकिस्तान को शर्मसार करता है . तब भारतीय सेना लाहौर तक पहुंच गई थी . और पाकिस्तान का अहंकार चूर चूर हो गया था .

इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के कहने पर भारत और पाकिस्तान युद्धविराम के लिए तैयार हुए .और समझौते के लिए ताशकंद को चुना गया . 10 जनवरी वर्ष 1966 को ताशकंद में भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ . जिसमें लाल बहादुर शास्त्री भारत द्वारा जीती गई ज़मीन पाकिस्तान को लौटाने पर राज़ी हो गए. समझौते के बाद शास्त्री जी सोने के लिए चले गए.

इसके बाद रात 2 बजे दुनिया को उनके निधन का समाचार मिला. शास्त्री के निधन को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं. लेकिन सच क्या है, ये कोई नहीं जानता . हमारे देश में अगर एक अभिनेता की रहस्यमयी हालात में मृत्यु हो जाती है....तो पूरा देश चर्चा करने लगता है . लेकिन एक प्रधानमंत्री की मृत्यु पर ऐसा नहीं हो हुआ . कोई आपको ये नहीं बताता, कि आखिर किन परिस्थितियों में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ था. और क्यों उनकी मृत्यु का सच आज तक देश के सामने नहीं आ पाया है.

आज हम इसी रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उससे पहले आपको आज शास्त्री के व्यक्तित्व के बारे में जानना चाहिए. शास्त्री जी ने जब देश की कमान संभाली, तब देश बहुत बड़े अनाज के संकट का सामना कर रहा था . तब लाल बहादुर शास्त्री ने अपने परिवार के साथ हफ्ते में एक दिन उपवास रखना शुरु किया.

जिसके बाद उन्होंने देश से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की . शास्त्री जी की इस अपील को पूरे देश ने दिल से स्वीकार किया और इसका पालन भी किया. शास्त्री जी प्रधानमंत्री बन चुके थे. लेकिन उनके पास एक कार तक नहीं थी. उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद पंजाब नेशनल बैंक से पांच हजार का लोन लेकर एक फिएट कार खरीदी. जिसकी पूरी किश्त भरने के पहले ही उनका निधन हो गया .

जिसके बाद इस लोन को शास्त्री जी की पत्नि ने अपनी पेंशन से चुकाया. पाकिस्तान से समझौते के लिए शास्त्री जी जब ताशकंद गए..तो उनके पास एक गर्म कोट तक नहीं था . ताशकंद में बहुत अधिक सर्दी पड़ रही थी. तब सोवियत संघ के प्रधानमंत्री Alexei Kosygin ( अलेक्सी कोशिगीन ) ने तोहफे में शास्त्री जी को एक गर्म ओवर कोट दिया. जिसे उन्होने अपने साथ गए एक कर्मचारी को दे दिया.

ताकि उसे ठंड ना लगे. इस घटना का पता चलने पर रूसी नेता अलेक्सी कोशिगीन ने कहा था कि हम कम्युनिस्ट हैं लेकिन प्रधानमंत्री शास्त्री एक सुपर कम्युनिस्ट हैं. आज हमने शास्त्री जी के निधन की घटना से जुड़ी फाइलें पढ़ने के बाद एक विश्लेषण तैयार किया है . ये विश्लेषण 53 साल पहले देश के दूसरे प्रधानमंत्री की मृत्यु से जुड़े रहस्य को समझने में आपकी मदद करेगा.

आज इस विश्लेषण के लिए हमने कई राजनेताओं, विशेषज्ञों और इतिहासकारों से बात की . इस दौरान हमें पता चला कि पंडित नेहरू की मृत्यु के बाद..लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री के तौर पर कांग्रेस की पहली पसंद नहीं थे . इस रेस में मोरारजी देसाई का नाम सबसे आगे चल रहा था . लेकिन तब कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र आज की तरह नहीं था, और सिर्फ एक परिवार या उसकी पसंद को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी . इसलिए प्रधानमंत्री पद के लिए शास्त्री जी का नाम एक Neutral Candidate के तौर पर चुना गया . लाल बहादुर शास्त्री उस वक्त कांग्रेस के संकट मोचक माने जाते थे.

उनके प्रधानमंत्री बनने से कुछ वक्त पहले कश्मीर में प्रदर्शन हो रहे थे . तब लाल बहादुर शास्त्री ने वहां जाकर समस्या का हल निकाला . इसीलिए पंडित नेहरू भी लाल बहादुर शास्त्री से बहुत प्रभावित थे . 1965 में युद्ध में भारत की जीत के बाद..देश का मनोबल वापस लौटने लगा...देश की जनता में राष्ट्रवाद की भावना भर गई . शास्त्री जी के नेतृत्व में अनाज के संकट का सामना भी देश ने बहुत हिम्मत के साथ किया .

उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया और ये नारा...उस वक्त के भारत के स्वाभिमान का प्रतीक बन गया . लेकिन 11 जनवरी 1966 को शास्त्री जी के निधन से पूरे देश को एक बड़ा झटका लगा. आज भी देश जानना चाहता है कि क्या शास्त्री जी के साथ ताशकंद में कोई साजिश हुई थी ? क्या शास्त्री जी का निधन किसी अंतरराष्ट्रीय साजिश का परिणाम था.

क्या इसमें उस वक्त के सोवियत संघ या पाकिस्तान का भी कोई रोल था ?. या फिर शास्त्री जी की मृत्यु के पीछे देश की घरेलू राजनीति थी .शास्त्री जी के निधन से किसे फायदा पहुंचा .क्या लाल बहादुर शास्त्री को उनके हिस्से का सम्मान मिला ?. इन सवालों के जवाब पूरा देश जानना चाहता है. शास्त्री जी के निधन से जुड़े इन्ही सवालों को लेकर एक फिल्म बनी है.

जिसका नाम है The Tashkent Files . इस फिल्म का World Television Premiere कल यानि 2 अक्टूबर को &PICTURES पर दोपहर 12 बजे और ZEE NEWS पर दोपहर 2 बजे होगा . इस फिल्म को देखने के बाद आपको इस सवाल का जवाब जरुर मिलेगा कि क्या शास्त्री जी की मौत के पीछे कोई साजिश थी .