ZEE जानकारी: सबसे सरल भाषा में समझिए, क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक?

कहते हैं कि इतिहास कभी गलत या सही नहीं होता है, हम इतिहास की व्याख्या गलत या सही तरीके से करते हैं. पिछले कई दिनों से आप Citizenship Amendment Bill यानी नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में सुन रहे होंगे .

ZEE जानकारी: सबसे सरल भाषा में समझिए, क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक?

कहते हैं कि इतिहास कभी गलत या सही नहीं होता है, हम इतिहास की व्याख्या गलत या सही तरीके से करते हैं. पिछले कई दिनों से आप Citizenship Amendment Bill यानी नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में सुन रहे होंगे . कुछ लोग इसे गलत ठहरा रहे हैं, और कुछ लोग इसे सही बता रहे हैं. गृहमंत्री अमित शाह (Amit shah) ने 11 दिसंबर को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) पेश किया. बिल पर बहस जारी है. चर्चा के बाद बिल पर वोटिंग होगी. इसलिए आज हम इस बिल का राजनीतिक और ऐतिहासिक विश्लेषण करेंगे.

सबसे पहले आपको आसान शब्दों में, सवाल-जवाब के जरिये इस बिल के बारे में बताते हैं:- 

पहला सवाल- इस बिल को Amendment Bill यानी संशोधन विधेयक क्यों कहा जा रहा है ?

जवाब- क्योंकि इस मुद्दे पर कानून पहले से है, सरकार इसमें संशोधन कर रही है. पहली बार 1955 में ये कानून बना था. और तब से 8 बार इसमें संशोधन किए जा चुके हैं.

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दूसरा सवाल- नागरिकता संशोधन बिल में क्या है?

जवाब- इस बिल में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. यानी जो शरणार्थी 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आए हैं, उन्हें नागरिकता मिल जाएगी.

तीसरा सवाल- गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक शरणार्थियों में कौन लोग आएंगे ?

जवाब- इनमें हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग आएंगे.

चौथा सवाल- क्या इसका फायदा सिर्फ शरणार्थियों को होगा ?

जवाब- शरणार्थियों को तो होगा ही, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में रह रहे, भारतीय मूल के लोग भी इसके लाभार्थी हो सकते हैं . खास तौर पर वो, जो धार्मिक आधार पर अत्याचार का शिकार हैं

पांचवां सवाल- इस बिल का विरोध क्यों हो रहा ?

जवाब- विपक्ष का कहना है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए, ये समानता के अधिकार का उल्लंघन है .

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असदुद्दीन ओवैसी ने बिल की फाड़ी थी कॉपी 
जब लोकसभा में इस मुद्दे पर बहस हो रही थी, तब AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बिल की कॉपी फाड़ दी . ओवैसी ने आरोप लगाया कि ये बिल मुसलमानों के खिलाफ है . हालांकि स्पीकर के आदेश पर इस घटना को कार्यवाही से हटा दिया गया .

नागरिकता संशोधन बिल के विरोधियों का कहना है कि केंद्र सरकार धार्मिक आधार पर भेदभाव कर रही है. लेकिन, ऐसे लोगों को आज हम इतिहास की दो घटनाएं याद दिलाना चाहेंगे - पहली घटना है बंटवारा. और दूसरी घटना है कश्मीरी पंडितों का पलायन.

विभाजन के समय करीब 8 से 10 लाख लोग मारे गए
विभाजन के समय करीब 8 से 10 लाख लोग मारे गए थे . जबकि कश्मीर में करीब 650 पंडितों की हत्या की गई. इन दोनों घटनाओं का आधार सांप्रदायिक ही था. लेकिन, सुविधा के मुताबिक नारेबाज़ी करने वाले नेताओं को ये आंकड़े कभी नहीं चुभते. सांप्रदायिकता के आधार पर एक अलग देश बन गया लेकिन इस मुद्दे पर हमारे देश के तथा-कथित बुद्धिजीवी और पत्रकार हमेशा चुप रहते हैं.

अब उसी देश में सताए जा रहे हिंदू जब अपनी भूमि पर लौटना चाहते हैं तो इन्हें परेशानी हो रही है. वैसे सरकार ने आज ये भी कहा कि अगर किसी देश का कोई मुस्लिम नागरिक भी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करेगा, तो खुले मन से उसपर विचार किया जाएगा.

आपके मन में ये सवाल आ सकता है कि इस कानून से आपके जीवन पर क्या फर्क पड़ जाएगा. देखा जाए तो आपको सीधे-सीधे कोई फायदा नहीं होने वाला है. आपको कोई धन नहीं मिलने वाला है, बैंक बैलेंस नहीं बढ़ने वाला है . लेकिन इससे आपका नैतिक बल ज़रूर बढ़ जाएगा.

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दुनिया भर के यहूदियों ने काफी संघर्ष करके अपना देश इजराइल बनाया
भारत की ये भूमि दुनिया भर के हिंदुओं की भूमि है . हिंदू चाहे किसी भी देश में रह रहे हों, उनका मूल स्थान भारत ही है.दुनिया भर के यहूदियों ने काफी संघर्ष करके अपना देश इजराइल बनाया. इसी तरह दुनिया भर के देशों में सताए हुए हिंदू, जब भारत के नागरिक बनकर रहेंगे तो उन्हें उनका खोया हुआ रिश्ता मिल जाएगा. और इसी के साथ आपके अंदर की भारतीयता और मज़बूत हो जाएगी. शरण देने का धर्म हिंदू परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. यानी इस नए कानून से आपके अंदर की शरणा-गत की भावना जाग उठेगी. और देश के प्रति आपका गौरव भी बढ़ जाएगा.