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Zee Jaankari: मलाला को जम्मू-कश्मीर को बदनाम करने का मलाल कब होगा?

अब हम कश्मीर पर...Nobel(नोबेल) शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के दुष्प्रचार का विश्लेषण करेंगे . शांति के लिए Nobel पुरस्कार जीतने वाली पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई...कश्मीर पर अशांति फैलाने वालों का साथ दे रही हैं.

Zee Jaankari: मलाला को जम्मू-कश्मीर को बदनाम करने का मलाल कब होगा?

अब हम कश्मीर पर...Nobel(नोबेल) शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के दुष्प्रचार का विश्लेषण करेंगे . शांति के लिए Nobel पुरस्कार जीतने वाली पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई...कश्मीर पर अशांति फैलाने वालों का साथ दे रही हैं. Nobel शांति पुरस्कार को विश्व का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है और कहते हैं जितना बड़ा सम्मान होता है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी होती है . लेकिन लगता है कि आज मलाला अपनी जिम्मेदारियां पूरी तरह से भूल गई हैं . और भारत के खिलाफ पाकिस्तान के दुष्प्रचार वाले एजेंडे को आगे बढ़ा रही हैं .पाकिस्तानी Activist मलाला ने, कश्मीर के बारे में 14 सितंबर को 7 Tweets किए. और दावा किया कि...

जम्मू कश्मीर में 4 हज़ार लोगों को गिरफ्तार करके जेल में रखा गया है और इनमें बच्चे भी शामिल हैं. भारत विरोधी एजेंडा चलाते हुए, मलाला ने बताया कि कश्मीर में लगभग 40 दिन से Students स्कूल नहीं जा पा रहे हैं .लेकिन ये खबर सुनने के बाद आपके मन में भी कई सवाल होंगे... सवाल ये कि... क्या मलाला को सिंध में पाकिस्तान के हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार दिखाई नहीं देता ?

पाकिस्तान के सिंध में 15 सितंबर को एक हिंदू शिक्षक पर दंगाइयों की भीड़ ने हमला कर दिया.. कट्टरपंथियों की भीड़ ने पहले स्कूल में और फिर मंदिर में तोड़फोड़ कर दी. हिंदू शिक्षक पर स्कूल के एक बच्चे ने ईशनिंदा का आरोप लगाया और इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज करके उनको गिरफ्तार कर लिया.

इसी तरह पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में भी लोगों पर अत्याचार हो रहा है. जिसके खिलाफ स्थानीय जनता लगातार प्रदर्शन कर रही है. पाकिस्तान की सेना बलोचिस्तान में भी लोगों को बिना वजह टॉर्चर करती है. लेकिन मलाला को पाकिस्तान की जमीन पर हो रहे अत्याचार नहीं दिखते हैं. मलाला को चीन में उइगर मुसलमानों पर किए जा रहे जुल्म भी नहीं दिखते.

अब आपको बताते हैं कि मलाला ने सिंध, बलोचिस्तान, PoK और उइगर मुसलमानों के बदले... सिर्फ कश्मीर पर ही आवाज क्यों उठाई? पिछले कुछ वक्त में पाकिस्तान को जम्मू कश्मीर पर इंटरनेशनल Support ना के बराबर मिला है... संयुक्त राष्ट्र से लेकर दुनिया के दूसरे मंचों पर... जम्मू कश्मीर को भारत का आतंरिक मामला बताया गया है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके मंत्रियों की विश्वसनीयता इतनी कम है कि... उनके बयानों पर पाकिस्तान की जनता भी भरोसा नहीं करती है. ऐसे वक्त में पाकिस्तानी मूल की मलाला युसूफजई का कश्मीर पर बयान... इमरान खान के भारत विरोधी एजेंडे को ऑक्सीजन दे रहा है . वैसे इमरान खान की तरह ही मलाला ने भी कश्मीर के बारे में कई फर्जी दावे किए हैं जिनकी सच्चाई आज आप जान लीजिए.

- मलाला के Tweet में कहा गया है कि... कश्मीर में माहौल ऐसा है कि 12 अगस्त को एक कश्मीरी लड़की परीक्षा नहीं दे पाई.
- सच्चाई ये है कि 12 और 13 अगस्त को कश्मीर में बकरीद की छुट्टियां थी. इसलिए मलाला का ये दावा झूठा है.
- मलाला ने एक और Tweet में कहा कि कश्मीर में संचार व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है और उन्हें दुनिया से अलग कर दिया गया है.
- मलाला के दुष्प्रचार वाले एजेंडे के बाद अब जम्मू कश्मीर का सच सुनिए... अभी कश्मीर घाटी में Landline सेवा सौ प्रतिशत काम कर रही है. सिर्फ मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध जारी है . जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद लगाए गए 95 प्रतिशत प्रतिबंध हटा लिए गए हैं... वहां स्कूल और कॉलेज खोल दिये गए हैं... और हिंसा ना के बराबर हुई है. असल में Nobel शांति पुरस्कार विजेता मलाला के Tweets पाकिस्तान का नया Propaganda है... हमारे देश में कई लोग मलाला के Tweets को Like और Retweet करके सवाल पूछ रहे होंगे.

उन्हें ये समझना चाहिए कि ऐसा करके वो पाकिस्तान के फर्जी प्रचार अभियान का हिस्सा बन रहे हैं . दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित Nobel शांति पुरस्कार... अक्सर विवादों में रहा है. इसकी वजह है इस पुरस्कार का राजनीति से जुड़ा होना . कई बार ऐसा हुआ कि जिन नेताओं को Nobel शांति पुरस्कार मिला वो बाद में किसी युद्ध या संघर्ष में शामिल हो गए . उम्मीद की जाती है कि Nobel शांति पुरस्कार के विजेता इसकी प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए फैसले लेंगे... और बयान देंगे . लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता .

वर्ष 2009 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा को Nobel शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई लेकिन Nobel Peace Prize मिलने से सिर्फ 7 दिनों पहले राष्ट्रपति ओबामा ने अफगानिस्तान में 30 हज़ार अमेरिकी सैनिकों को भेजने का फैसला लिया था . तब ये कहा गया कि राष्ट्रपति ओबामा को Nobel शांति पुरस्कार देने का फैसला वक्त से पहले ले लिया गया. लेकिन Nobel Prize नियमों के मुताबिक एक बार दिए जाने के बाद Nobel पुरस्कार वापस नहीं लिए जा सकते हैं . इसका मतलब ये है, कि मलाला युसूफजई की तरह.... अन्य Nobel शांति पुरस्कार विजेता भी भविष्य में विवादित बयान देते रहेंगे..

. लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी . Nobel पुरस्कार एक सदी से ज्यादा समय से... विश्व में शांति बनाए रखने के लिए दिया जाता है... पिछले 118 वर्षों में दुनिया के सिर्फ 133 लोगों को ही Nobel शांति पुरस्कार दिए गए हैं अभी विश्व की जनसंख्या 750 करोड़ है . अगर दुनिया की आबादी और Nobel शांति पुरस्कार का औसत निकाला जाए...

तो हर 5 करोड़ 60 लाख लोगों में सिर्फ एक व्यक्ति को Nobel शांति पुरस्कार मिला है. अंग्रेजी में एक कहावत है... With Great Power Comes Great Responsibility... यानी अगर आपके पास असाधारण शक्ति है तो आपके कंधों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है. इसलिए जरूरी है कि मलाला जैसे Nobel शांति पुरस्कार विजेता खुद ही अपनी सीमाओं और जिम्मेदारियों को समझें... और उसी के मुताबिक अपना काम और आचरण रखें . अब शांति के नोबल पुरस्कार से जुड़ा एक और विवाद जानिए... महात्मा गांधी को 20वीं शताब्दी में शांति के लिए संघर्ष करने वाला सबसे महान नेता कहा जाता है .

लेकिन फिर भी उन्हें कभी भी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला . आप ये बात सुनकर हैरान हो रहे होंगे और सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो गया? क्या नोबेल पुरस्कार देने वाली कमिटी की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी?
महात्मा गांधी को 5 बार.. यानी वर्ष 1937, 1938, 1939, 1947 और 1948 में नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था. पहली बार Norway के एक सांसद ने महात्मा गांधी का नाम नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया था . लेकिन नोबेल कमेटी ने उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया . ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस दौर में कई ताकतें नहीं चाहती थीं..

. कि महात्मा गांधी को शांति का नोबेल पुरस्कार मिले . आम तौर पर लोग ये सोचते हैं कि महात्मा गांधी को नोबेल पुरस्कार देकर Norway की Nobel Prize Committee.. ब्रिटेन को नाराज़ नहीं करना चाहती थी. ये हैरान करने वाली बात है कि महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर जिन लोगों ने काम किया उन्हें तो नोबेल पुरस्कार मिल गया..

लेकिन महात्मा गांधी को ये पुरस्कार नहीं मिला . मार्टिन लूथर किंग जूनियर और Nelson Mandela जैसे लोगों को जब नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था तो उन्होंने स्वीकार किया था कि उन्हें महात्मा गांधी से ही प्रेरणा मिली . हालांकि वर्ष 1989 में जब दलाई लामा को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था तब नोबेल कमेटी ने सार्वजनिक तौर पर ये स्वीकार किया था कि महात्मा गांधी को नोबेल पुरस्कार ना देना एक गलती थी.

हालांकि हम एक बार फिर ये कहना चाहते हैं कि अगर महात्मा गांधी को नोबेल पुरस्कार मिला होता तो इससे नोबल पुरस्कार की ही प्रतिष्ठा बढ़ती, महात्मा गांधी को कभी किसी पुरस्कार की इच्छा नहीं थी . मलाला को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला लेकिन वो कश्मीर पर दुष्प्रचार कर रही हैं. इसी तरह इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं...

लेकिन वो भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दे रहे हैं . अच्छा होता अगर मलाला...कश्मीर पर इमरान खान के एजेंडे को आगे बढ़ाने की बजाय उन्हें सच का आईना दिखातीं . अच्छा होता अगर मलाला...कश्मीर पर दुष्प्रचार करने की जगह...

वो समय..पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रहे पाकिस्तानी फौज के अत्याचार को उजागर करने में खर्च करतीं . मलाला को इमरान खान के जेहादी गैंग का हिस्सा होने से बचना चाहिए . नहीं तो पाकिस्तान की तरह मलाला भी दुनिया भर में महत्वहीन हो जाएंगी.