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Zee Jaankari: वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग का कौन कर रहा विरोध?

आज हम वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग का विरोध करने वालों की स्वार्थ और दुराग्रह वाली राजनीति का DNA टेस्ट करेंगे.

Zee Jaankari: वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग का कौन कर रहा विरोध?

राम और रोटी के बाद अब हम राष्ट्रवाद की बात करेंगे. शायद आप में से बहुत कम लोगों को पता होगा कि भूख के जो आंकड़े आज पूरे देश को परेशान कर रहे हैं, उसके खिलाफ भारत में आज से 100 साल पहले ही एक आंदोलन शुरू हो चुका था. और इसकी शुरुआत की थी महाराष्ट्र में पैदा हुए स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर ने .महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में वादा किया है कि वो वीर सावरकर को भारत रत्न दिलाने की हर संभव कोशिश करेगी. लेकिन बीजेपी के इस वादे पर विवाद शुरु हो गया है. आज हम वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग का विरोध करने वालों की स्वार्थ और दुराग्रह वाली राजनीति का DNA टेस्ट करेंगे.

कुछ इतिहासकारो और नेताओं ने मिलकर स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ा सच कभी सामने आने ही नही दिया, वीर सावरकर ने 100 साल पहले भारत मे जारी कुरीतियो के खिलाफ जो आंदोलन शुरू किए गए उन्हें विवादो के शोर मे दबा दिया गया,आज हम आपको उनके बारे मे जो बताने जा रहे है उस हकीकत को कभी भी लोगों के बीच आने ही नही दिया गया.

वीर सावरकर भाषा वैज्ञानिक थे. आज हम जिस समृद्ध हिन्दी भाषा पर गर्व करते हैं . उसे विकसित करने में वीर सावरकर ने बहुत बड़ा योगदान दिया है . वीर सावरकर ने आकाशवाणी..दूरदर्शन.संपादक ,पार्षद और क्रमांक जैसे सैकड़ो शब्दों का अविष्कार किया वीर सावरकर ने 6 हजार पन्नों से ज्यादा का साहित्य लिखा.

वीर सावरकर ऐसे पहले भारतीय स्वत्रतता सेनानी थे. जो भारत की आजादी के मुद्दे को International Court of Justice में लेकर गए . जिसे उस वक्त International Court of Arbitration कहा जाता था .वीर सावरकर सामाजिक समरसता के प्रवर्तक थे . वो समाज में व्याप्त जातिवादी मानसिकता के धुर विरोधी थे.

कालापानी की करीब 10 वर्ष की सजा काटने के बाद... वर्ष 1924 से वर्ष 1937 के बीच उन्होंने छूआछूत के खिलाफ क्रांतिकारी कदम उठाए. वीर सावरकर ने रत्नागिरी में रहने के दौरान ये नियम बनाया था कि...उनसे मिलने आने वालों को दलित समुदाय के व्यक्ति के हाथ से बनी चाय पीनी होगी . वीर सावरकर ने पतित पावन मंदिर का निर्माण किया था.

जिसमें दलित समुदाय के लोग भी गर्भगृह तक जा सकते थे .वीर सावरकर ने सर्वसमाज सहभोज की शुरुआत की . जिसमें सभी जातियों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते थे . उनके लिखे नाटको के मंचन के दौरान आगे की दो पक्तियों में दलितों के बैठने की व्यवस्था होती थी .वीर सावरकर ने ही एक व्यक्ति एक वोट का सिद्धांत दिया था.

इसके साथ ही उन्होंने औद्योगिकरण की पैरवी की थी. वो आधुनिक तकनीकों के प्रयोग करने के समर्थक थे . ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके .सावरकर सेना को देश की आवश्यकता के हिसाब से आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस करने के समर्थक थे .ये देश के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि इतिहास को गलत तरीके से लिखा और पेश किया गया.

जिसका परिणाम ये निकला कि आम लोगों तक कभी सच नहीं पहुंचा .अब बीजेपी ने वीर सावरकर के योगदान देखते हुए उनके लिए भारत रत्न की दिलाने की बात कही है. जिसके बाद राष्ट्रवाद का विरोध करने वाला Gang सक्रिय हो चुका है . जिसमें कई राजनेता, डिजाइनर पत्रकार शामिल हैं. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर सावरकर की Political Lynching करने वालों को जवाब दिया.

वर्षों से वामपंथी बुद्धिजीवी और इतिहासकार, वीर सावरकर पर कुछ गंभीर आरोप लगाते रहे हैं. कई विद्वान दावा करते हैं कि वीर सावरकर ने अपनी किताब 'हिंदुत्व' में 1920 में Two Nation Theory की बात कही थी . लेकिन सच ये है कि इस घटना से करीब 33 वर्ष पहले वर्ष 1887 में सर सैयद अहमद खान ने Two Nation Theory की बात की थी.

सर सैयद ने कहा था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग कौम हैं. अगर आप चाहें तो काजी मुहम्मद अदील अब्बासी की किताब ख़िलाफ़त आंदोलन के Page Number 26 पर सर सैयद के भाषण को पढ़ सकते हैं. इस किताब को नेशनल बुक ट्रस्ट ने प्रकाशित किया है. Two Nation Theory पर अपने विचार रखते हुए सावरकर ने भी हिंदू और मुसलमानों को अलग राष्ट्र कहा था.

लेकिन उन्होंने देश को बांटने की बात कभी नहीं की थी. सावरकर ने हमेशा अखंड भारत की बात कही. और आज भी आप देखते होंगे कि सावरकर की विचारधारा को मानने वाले लोग अखंड भारत की बात करते हैं.सावरकर के बारे में ये कहा जाता है कि उनकी विचारधारा में मुसमलानों के लिए कोई जगह नहीं थी .

संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने सावरकर के साहित्य का अध्ययन किया था. उन्होंने अपनी किताब 'पाकिस्तान या भारत का विभाजन' में सावरकर विचारों और उनके idea of india पर विस्तार से लिखा है.अंबेडकर की किताब के पेज नंबर 149 पर लिखा है. जिन्ना कहते हैं कि हिंदुस्तान के दो टुक़ड़े कर देने चाहिए.

हिंदुस्तान और पाकिस्तान . मुस्लिम कौम पाकिस्तान में रहे और हिंदू कौम हिंदुस्तान में रहे. लेकिन दूसरी तरफ मिस्टर सावरकर, इस बात पर ज़ोर देते हैं कि भारत में दो राष्ट्र हैं लेकिन भारत को हिंदू और मुसलमान में नहीं बांटा जाना जाएगा. अंबेडकर ने सावरकर के साहित्य को पढ़ने के बाद ये बात लिखी थी.

इससे पता चलता है कि सावरकर के राष्ट्र की कल्पना में मुसलमानों का भी स्थान था. सावरकर ने मुसलमानों को वोट का अधिकार देने की बात की थी. सावरकर ने भारत के बंटवारे का विरोध किया था . उन्होंने अल्पसंख्यकों को उनके सभी अधिकार देने का वादा किया था. वो मुस्लिम धर्म और संस्कृति की रक्षा के समर्थक थे.

वीर सावरकर की ब्रिटिश सरकार को भी भेजी गई याचिकाओं लेकर भी काफी भ्रम फैलाया जाता है. ये बात बिलकुल सही है कि वीर सावरकर ने अपनी रिहाई के लिए याचिकाएं दायर की थी. ये बात भी सही है कि उन्होंने अंग्रेज़ सरकार के प्रति विद्रोह ना करने का भरोसा दिलाया था . लेकिन इस चिट्ठी को सिर्फ एक माफीनामा माना जाए या फिर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध की रणनीति.

इसे लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं .जब वीर सावरकर 50 वर्ष की कालापानी की सजा सुनाई गई . तब उनकी उम्र मात्र 28 वर्ष थी . अगर 78 वर्ष की उम्र में वो जेल से रिहा होते तो वो देश के लिए क्या योगदान दे पाते . वीर सावरकर देश के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर चुके थे.

वो जेल से रिहा होकर देश को स्वतंत्र करने में..देश को एकता के सूत्र में बांधना चाहते थे . और ऐसा उन्होंने किया भी . वो ये मानते थे कि मातृभूमि की सेवा करने के लिए आज़ाद होना होगा. सिर्फ इस आधार पर सावरकर का मूल्यांकन करना, सावरकर के साथ अन्याय है.