ZEE जानकारी: जानिए, किसके दम पर देश में विरोध के नाम पर फैलाई जा रही हिंसा!

आपने देखा है कि कैसे पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों के नाम पर टुकड़े टुकड़े गैंग का एजेंडा चलाया जा रहा है. 

ZEE जानकारी: जानिए, किसके दम पर देश में विरोध के नाम पर फैलाई जा रही हिंसा!

आपने देखा है कि कैसे पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों के नाम पर टुकड़े टुकड़े गैंग का एजेंडा चलाया जा रहा है. ये कानून देश की संसद से पास हो चुका है. इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हो चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक लगाने से इनकार कर चुका है. तो आप सोचिए कि फिर भी इन विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला रुक क्यों नहीं रहा. ऐसा इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि इन विरोध प्रदर्शनों की आड़ में एक बड़ा सच छिपाया जा रहा है. वो सच ये है कि ये विरोध प्रदर्शन लोग अपनी मर्ज़ी से और सिर्फ अपने दम पर नहीं कर रहे. बल्कि ये एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है. Enforcement Directorate यानी ED के मुताबिक इन विरोध प्रदर्शनों को कई संगठनों के द्वारा Funding की जा रही है.

ED की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस कानून के विरोध में हुई हिंसा के पीछे PFI यानी Popular Front of India का हाथ था. सूत्रों से पता चला है कि हिंसा भड़काने के लिए PFI ने फंडिंग की थी. और अकेले शाहीन बाग में PFI के 5 दफ्तर भी हैं.

National Investigation Agency यानी NIA के मुताबिक 1992 में अयोध्या का विवादास्पद ढांचा टूटने के बाद 1993 में केरल में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट का गठन हुआ था, जिसका नाम वर्ष 2006 में PFI यानी Popular Front of India हो गया. पहली बार ये संघटन 2010 में तब चर्चा में आया, जब इस पर केरल में एक प्रोफेसर का हाथ काटने का आरोप लगा. PFI पर केरल में  जबरदस्ती धर्मांतरण के बाद निकाह कराने के भी आरोप है.

आरोप है कि इस संगठन को सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देशों से फंड मिलता है . NIA के मुताबिक PFI के संबंध प्रतिबंधित प्रतिबंधित संगठन SIMI से भी हैं. पिछले साल PFI पर झारखंड सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था. आरोप था कि इसके संबंध आतंकवादी संगठन ISIS से हैं. हमें ये भी पता चला है कि शाहीन बाग़ में PFI और उससे जुड़े संगठनों के 5 दफ्तर हैं. कल हमने जब शाहीन बाग में उन दफ्तरों तक पहुंचने की कोशिश की तो हमें रोक दिया गया था. 

थोड़ी देर पहले हमने आपको बताया कि शाहीन बाग़ जैसे विरोध प्रदर्शन दिल्ली के कई इलाकों में हो रहे हैं. और आप इनमें से किसी भी इलाके में जाने की हिम्मत नहीं कर सकते. क्योंकि इन इलाकों में सिर्फ एक खास विचारधारा के लोगों को ही आने दिया जा रहा है.  ऐसा ही एक इलाका है निजामुद्दीन जहां PFI से जुड़े संगठन SDPI यानी  Social Democratic Party of India का दफ्तर है.

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जब हम यहां पहुंचे तो हमें SDPI एक अधिकारी मिले जिन्होंने ED की जांच में नाम आने के सवाल पर साफ कहा कि उनके संगठन का PFI से संबंध है. क्योंकि दोनों का नज़रिया एक जैसा है. देश को लेकर PFI का नज़रिया कैसा है. ये आप देख ही चुके हैं. ED की रिपोर्ट में National Confedration Of human Rights Organizations यानी NCHRO का भी जिक्र है.

जब हमारी टीम इस संगठन के दफ्तर पहुंची तो वहां हमे कोई अधिकारी तो नहीं मिला. लेकिन कुछ आपत्तिजनक पोस्टर्स ज़रूर दिखाई दिए. इनमें से कुछ पोस्टर्स पर भारत को Republic Of Lynchistan कहा गया था. जबकि बाकी के पोस्टर्स में नए नागरिकता कानून और नागरिकता रजिस्टर के विरोध में बातें लिखी हुई थी. हमने NCHRO के एक अधिकारी से जब इस बारे में फोन पर बात की तो उन्होंने भी इन सभी आरोपों से इनकार कर दिया.

इसके अलावा हम जंगपुरा में मौजूद Rehab India Foundation यानी RFI के दफ्तर भी पहुंचे. इस संगठन का नाम भी ED की रिपोर्ट में प्रमुखता से लिया गया है. ED की रिपोर्ट के मुताबिक RFI ने PFI के साथ लाखों रुपये का लेन-देन किया था. लेकिन अब RFI ने भी इन विरोध प्रदर्शनों से किसी तरह के कनेक्शन से इनकार किया है.