Zee Jaankari: आखिर पूरी दुनिया में धार्मिक असहनशीलता क्यों बढ़ रही है?

जो लोग कमलेश तिवारी की हत्या करने आए थे. उन्होंने भगवा रंग के कपड़े पहन रखे थे, उनके हाथ में कलावा भी बंधा था. और इन दोनों हत्यारों ने माथे पर तिलक भी लगाया हुआ था.

Zee Jaankari: आखिर पूरी दुनिया में धार्मिक असहनशीलता क्यों बढ़ रही है?

भारत में हिंदू धर्म को मानने वाले लोग जब भी किसी कार्य की सफलता के लिए पूजा करते है तो अंत में हमेशा लोकाह समस्ताहः सुखिनो भवंतु कहकर पूजा का समापन करते हैं. इसका अर्थ होता है कि पूरा विश्व सुखी रहे, प्रसन्न रहे. पूजा करने वाला व्यक्ति अपने घर-परिवार की सुख शांति की कामना करता है. लेकिन अंत में वो विश्व कल्याण और पूरी दुनिया की सुख शांति की कामना करना नहीं भूलता. ये हिंदू धर्म की वो सीख है जिसे अब धीरे धीरे पूरी दुनिया अपना रही है. आज हम आपको बताएंगे कि पूरी दुनिया में संस्कृति के इस मंत्र की चर्चा क्यों हो रही है. लेकिन आज सबसे पहले इस बात का विश्लेषण करना ज़रूरी है कि आखिर पूरी दुनिया में धार्मिक असहसनशीलता क्यों बढ़ रही है ?

अक्सर कहा जाता है कि हिंसा और आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. लेकिन जब कुछ लोग एक धर्म को ही हिंसा का हथियार बना देते हैं तो फिर धर्म को भी सवालों की कसौटी पर कसना ज़रूरी हो जाता है.आज हमारे विश्लेषण के केंद्र में इस्लाम और इस्लाम के नाम का गलत इस्तेमाल करके समाज और दुनिया में हिंसा और आतंकवाद फैलाने वाले लोग हैं.

18 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की दो लोगों ने हत्या कर दी. इस केस में तीन साजिशकर्ताओं... मौलाना मोहसिन शेख, खुर्शीद अहमद पठान ,और फैज़ान को गुजरात पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है. जबकि लखनऊ जाकर कमलेश तिवारी की हत्या करने वाले दो मुख्य आरोपी मोइनुद्दीन और शेख अशफाक अहमद अभी भी फरार हैं.

लेकिन आज हमारे इस विश्लेषण का आधार सिर्फ कमलेश तिवारी की हत्या नहीं है. बल्कि हम पूरी दुनिया में बढ़ रही धार्मिक असहनशीलता का एक DNA टेस्ट कर रहे हैं.कमलेश तिवारी पर आरोप था कि उन्होंने वर्ष 2015 में पैगम्बर मोहम्मद को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसके बाद पूरे देश के कई मुस्लिम संगठनों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए थे.

कुछ मुस्लिम नेताओं ने तो उनके लिए फांसी की मांग भी की थी और कुछ संगठनों ने उनकी हत्या करने वाले को ईनाम देने का वादा किया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाकर उन्हें जेल में डाल दिया था. बाद में हाईकोर्ट ने उनपर पर लगा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हटा दिया था.

उत्तर प्रदेश पुलिस का भी कहना है कि ये हत्या पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ की गई टिप्पणी का बदला लेने के लिए ही की गई है. ये बात सही है कि किसी भी धर्म और उससे जुड़े महापुरुषों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए. लेकिन किसी भी धर्म या मजहब की असली पहचान उसकी सहनशीलता से ही होती है.

ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हिंदू भगवानों, प्रतीकों और ग्रंथों का भी कई बार अपमान किया जाता है. लेकिन कभी कोई हिंदू इसका बदला लेने के लिए हथियार नहीं उठाता. इसे हम आपको उदाहरण के साथ समझाएंगे लेकिन पहले कमलेश तिवारी की हत्या से जुड़े कुछ और पहलूओं को समझिए.

जो लोग कमलेश तिवारी की हत्या करने आए थे. उन्होंने भगवा रंग के कपड़े पहन रखे थे, उनके हाथ में कलावा भी बंधा था. और इन दोनों हत्यारों ने माथे पर तिलक भी लगाया हुआ था.यानी ये दोनों.. हिंदू धर्म के प्रतीक चिन्हों का इस्तेमाल करके एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश कर रहे थे. एक तरफ इनका मकसद आसानी से कमलेश तिवारी तक पहुंचना था.

जबकि दूसरी तरफ ये लोग हिंदू धर्म को आतंकवाद और अपराध से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे. इतना ही नहीं आतंकवादियों को भी हिंदू प्रतीक चिन्हों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक आतंकवादियों को ये सिखाया जा रहा है कि वो कैसे पहले हिंदुओं के बीच घुल मिल जाए, उनके तौर तरीके सीख लें और फिर आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दें.

ताकि किसी पहले किसी तरह का शक ना हो. हिंदू धर्म को बदनाम करने के जिस फार्मूले पर आतंकवादी चल रहे हैं उसके आविष्कारक भारत में ही बैठे कुछ नेता हैं. इन नेताओं ने हिंदू आतंकवाद की झूठी थ्योरी को जन्म दिया और लोगों के बीच ये भ्रम फैलाने की कोशिश की ..कि हिंदू कट्टर होता जा रहा है. लेकिन इन लोगों का असली इरादा मुसलमानों का तुष्टिकरण करना था .

इन नेताओं के बयानों की वजह से ही ऐसे लोगों को शह मिली जो हिंदू धर्मों के प्रतीकों का इस्तेमाल आतंक फैलाने में कर रहे हैं . आज हमने कांग्रेस के कुछ नेताओं के वो पुराने बयान निकाले हैं..जिसमें वो हिंदू आतंकवाद की झूठी थ्योरी पेश कर रहे थे. आप भी ये बयान सुनिए..फिर हम अपने इस विश्लेषण को आगे बढ़ाएंगे. कांग्रेस ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए हिंदू आतंकवाद की झूठी थ्योरी को जन्म दिया.

क्योंकि इस शब्द के ज़रिए कांग्रेस अपने विरोधियों को आतंकवादियों की श्रेणी में खड़ा करना चाहती थी. हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश कांग्रेस पिछले लंबे समय से कर रही है. लेकिन इसके बावजूद हिंदुओं ने अपनी सहनशीलता कभी नहीं खोई. जबकि इस दौरान पूरी दुनिया में धार्मिक असहनशीलता बहुत तेज़ी से बढ़ी है. इसे आपको कुछ उदाहरणों के साथ समझना चाहिए. इसी वर्ष अप्रैल 2019 में श्रीलंका में बम धमाके हुए. इन बम धमाकों में 259 लोग मारे गए. इस आतंकवादी हमले को श्रीलंका के नेशनल तौहीद जमात नामक आतंकवादी संगठन ने अंजाम दिया था.

इस आतंकवादी संगठन के निशाने पर श्रीलंका के तीन बड़े चर्च थे. आतंकवादी न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की मस्जिद में हुए हमले का बदला ईसाइयों को मारकर लेना चाहते थे. इन धमाको के बाद श्रीलंका की सरकार ने बुर्के और नकाब के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. साथ ही मस्जिदों में दिए जाने वाले धार्मिक भाषणों पर भी नज़र रखनी शुरु कर दी.

श्रीलंका की जांच एजेंसियों का मानना था कि आतंकवादी हमले में कई ऐसी महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने बुर्का पहन रखा था. यानी एक तरफ आतंकवादी धार्मिक प्रतीकों और वस्त्रों का इस्तेमाल दूसरे धर्मों को बदनाम करने के लिए कर रहे हैं..तो दूसरी तरफ इनका इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए भी किया जा रहा है.

जनवरी 2019 में इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादियों ने फिलीपींस में भी एक चर्च को निशाना बनाया था. जिसमें 20 लोग मारे गए थे.वर्ष 2015 में पेरिस के एक अखबार Charlie Hebdo के ऑफिस पर भी आतंकवादी हमला किया गया था . इस हमले में 13 लोग मारे गए थे . हमलावर Charlie Hebdo के कवर पेज पर पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून छापे जाने से नाराज़ थे .

यानी इस्लाम को मानने वाले बहुत सारे लोग असल में असहनशील हैं और वो अपने धर्म पर की गई किसी भी टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करते. बहुत सारे विशेषज्ञ मानते हैं कि दुनिया के सभी धर्मों ने अपने अंदर सुधार किया है. उसे ज्यादा लचीला बनाया है. लेकिन इस्लाम के साथ ऐसा नहीं है. इस्लाम में सुधार की वकालत करने वाले Scholars मानते हैं कि इस्लाम परिवर्तन की इजाजत नहीं देता.

अमेरिका की लेखिका Ayaan Hirsi Ali ने Heretic-Why Islam Needs A Reformation नामक किताब लिखी है . इस किताब में वो कहती हैं कि इस्लाम में सुधार की बहुत ज़रूरत है . Ayaan Hirsi के मुताबिक इस्लाम Innovation यानी नई सोच की इजाजत नहीं देता. इसलिए इस्लाम में कट्टरता बढ़ गई है. आपको अयान हिरसी का एक बयान सुनना चाहिए . इसके बाद हम अपने इस विश्लेषण को आगे बढ़ाएंगे .

हांलांकि बहुत सारे लोग हिरसी की बातों से इत्तेफाक नहीं रखते और वो इस्लाम को जीवन जीने का एक वैज्ञानिक तरीका कहते हैं. ये बात सच है कि दुनिया के बड़े धर्म लोगों को शांति और सहनशीलता की राह पर चलना सिखाते हैं. लेकिन फिर ऐसा क्यों है कि कुछ लोग अपने धर्म के आधार पर पूरी दुनिया को जीतने का सपना देखते हैं,

दूसरे मज़हब के लोगों को काफिर मानते हैं, और अल्लाह के नाम पर पूरी मानव जाति को अपना गुलाम बनाना चाहते हैं . पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार हसन निसार भी मानते हैं कि इस्लाम की गलत परिभाषाओं ने मुस्लिमों को Technology और साइंस का विरोधी बना दिया और इसी वजह से मुस्लिम पिछड़ते गए .