ZEE जानकारी: JNU में 300 रुपए महीने की फीस देने में परेशानी क्यों?

JNU के छात्र पिछले 15 दिनों से कैंपस के अंदर इस तरह का प्रदर्शन कर रहे थे. इन छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान ना सिर्फ नारेबाज़ी की...बल्कि JNU के Professors के लिए भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. 

ZEE जानकारी: JNU में 300 रुपए महीने की फीस देने में परेशानी क्यों?

अब हम आपको कुछ तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं. ये तस्वीरें JNU के छात्रों की है. दिल्ली की सड़कों को आज 10 घंटे तक इन छात्रों ने हाइजैक कर लिया. ये छात्र अपनी कुछ मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. इस वक्त गले में फंदा लगाए. जिन छात्रों को आप देख रहे हैं, उन्हें असल में Hostel की 300 रुपए महीने की फीस देने में परेशानी है. अब तक ये छात्र 10 रुपए महीने में JNU के Hostel में रहा करते थे. छात्रों का ये हाल तब है जब JNU के आसपास के किसी इलाके में एक कमरा, Minimum 10 हजार रुपए प्रति माह के ​किराये पर मिलता है. यानी दिल्ली में रहने के लिए 300 रुपए खर्च करना भी इन छात्रों को भारी लग रहा है.

वहीं...अब आप पुलिसवालों को धक्का देते हुए इन छात्रों को देखिए. इन छात्रों की मांग है कि वो रात 11 बजे बाद भी Hostel के बाहर रहना चाहते हैं. JNU के नए Hostel Manual के मुताबिक..रात 11 बजे तक छात्रों को अपने Hostel में वापस लौटना होगा. अगर कोई भी छात्र इस नियम का पालन नहीं करता है...तो उसे Hostel से निकाल दिया जाएगा. अब ये छात्र चाहते हैं कि वो रातभर बाहर घूमते रहें. और इसलिए वो इस तरह का हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं.

JNU के छात्र पिछले 15 दिनों से कैंपस के अंदर इस तरह का प्रदर्शन कर रहे थे. इन छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान ना सिर्फ नारेबाज़ी की...बल्कि JNU के Professors के लिए भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. एक महिला Professor के साथ छात्राओं ने हाथापाई भी की. इस दौरान इन छात्राओं ने उनके कपड़े फाड़ने की भी कोशिश की.

फरवरी 2018 में भी...JNU के छात्रों ने लगभग 12 घंटों तक, University के दो उप-कुलपतियों सहित कुछ अधिकारियों और वहां काम करने वाले लोगों को बंधक बनाया था. इस पूरे मामले पर...JNU प्रशासन का कहना है, कि कुछ छात्र नेता Hostel Manual और फीस बढ़ोत्तरी के नाम पर छात्रों को गुमराह कर रहे हैं.

इस पूरे मामले को समझने के लिए...आज आपको ये पता होना चाहिए, कि JNU में एक छात्र की पढ़ाई पर. सरकार कितने पैसे खर्च करती है और आपको ये भी ध्यान रखना चाहिए कि ये पैसा, आपकी जेब से Tax के तौर पर जाता है.

JNU को हर वर्ष सरकार से करीब साढ़े 500 करोड़ रुपये की रकम Aid और Subsidies के तौर पर मिलती है. JNU में लगभग 8 हजार 310 छात्र पढ़ते हैं. यानी एक छात्र की पढ़ाई पर सरकार. करीब 6 लाख 88 हजार 127 रुपए खर्च करती है.

JNU में औसतन 15 छात्रों पर 1 Teacher है...जबकि देश की दूसरी Universities और कॉलेजों में. औसतन 26 छात्रों पर 1 Teacher है. वर्ष 2018 के आंकड़ों के अनुसार...JNU के Hostel में 5 हजार 652 छात्र रहते हैं. किसी भी Full Time Course में Admission लेने वाला छात्र...Hostel के लिए Apply कर सकता है.

M.A. करने वाला एक छात्र 2 वर्षों तक Hostel में रह सकता है . M.Phil का छात्र भी अधिकतम 2 वर्षों तक Hostel में रह सकता है . जबकि Ph.D. के Student 4 वर्षों तक Hostel में रह सकते हैं. यानी M.A. से Ph.D. करने तक कोई छात्र कुल 8 वर्ष Hostel में रह सकता है.

इसके लिए अब तक इन छात्रों को सिर्फ 10 रुपए महीने की फीस देनी होती थी. इसी वजह से JNU के छात्र नेता वर्षों तक इन्हीं Hostels में रहते थे और अपनी राजनीति चमकाते थे. `

आपको जानकर हैरानी होगी कि टुकड़े टुकड़े गैंग के सदस्य कन्हैया कुमार ने 7 साल JNU के Hostel में बिताए हैं. वहीं उमर खामिद ने 9 साल Hostel में गुजारे हैं. शहला राशिद भी पिछले 8 वर्षों से JNU के Hostel में ही रहती हैं. यानी हर महीने 10 रुपए की फीस देकर इन लोगों ने JNU के माध्यम से सिर्फ और सिर्फ अपनी राजनीति चमकाई है. लेकिन अब JNU प्रशासन ने 10 रुपए की इस फीस को बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया है और इसी वजह से ये छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं.

इस घटना से सबसे बड़ा सवाल ये उठता है...कि JNU के मुठ्ठीभर छात्र, शिक्षा संस्थान को धर्मशाला बनाने पर क्यों तुले हुए हैं ? इन छात्रों के लिए पढ़ाई जरूरी है...या फिर ये JNU में अपना राजनीतिक Career बनाने के लिए आए हैं ? क्या JNU को जनता की गाढ़ी कमाई से Subsidy इसलिए चाहिए...ताकि ये छात्र पढ़ाई के बदले प्रदर्शन कर सकें ?

विश्वविद्यालयों में देश के भविष्य का निर्माण होता है. लेकिन JNU जैसे विश्वविद्यालय...टुकड़े-टुकड़े गैंग का गढ़ बनते जा रहे हैं. और अब ये लोग शिक्षा के मंदिरों से देश का सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

9 फरवरी 2016 को JNU में देश विरोधी नारेबाज़ी हुई थी. JNU कैंपस से अब एक बार फिर देश को बांटने वाली सोच का एक वीडियो सामने आया है.

शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद पर अपना फैसला सुनाया था. कोर्ट के इस फैसले को हिंदू और मुस्लिम, दोनो पक्षों ने बहुत ही गरिमा के साथ स्वीकार किया. लेकिन JNU में मौजूद टुकड़े टुकड़े गैंग ने...इस फैसले पर भी देश को बांटने वाला एजेंडा शुरू कर दिया है. पहले आप इस वीडियो को देखिए. इसके बाद हम अपना विश्लेषण आगे बढ़ाएंगे .

अभिव्यक्ति की आजादी...इंसान के बुनियादी अधिकारों में शामिल है . लेकिन हमारे देश में कुछ लोग ऐसे हैं..जो अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर, देश के टुकड़े टुकड़े करने की आजादी चाहते हैं. ये ना तो इस केस के पक्षकार हैं...और ना ही देश के लोगों की भावनाओं से इन्हें कोई मतलब है . लेकिन सिर्फ मंदिर मस्जिद के नाम पर ये लोग देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं...और अपना एजेंडा चला रहे हैं .

इन लोगों को आज इस केस के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी को भी सुनना चाहिए...जिनका इस फैसले के बाद आया बयान, हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मिसाल है.