ZEE जानकारी: ये 3 सवालों के जवाब बता देंगे आप कैंसर से लड़ सकते हैं या नहीं?

आज World Cancer Day है. जब मैंने 5 शब्दों का ये वाक्य बोला, तब किसी को भी खुशी नहीं हुई होगी. किसी को भी अच्छा नहीं लगा होगा. बहुत सारे लोग डरे भी होंगे. जानते हैं ऐसा क्यों है ? ऐसा इसलिए है क्योंकि कैंसर डर का दूसरा नाम है.

ZEE जानकारी: ये 3 सवालों के जवाब बता देंगे आप कैंसर से लड़ सकते हैं या नहीं?

आज World Cancer Day है. जब मैंने 5 शब्दों का ये वाक्य बोला, तब किसी को भी खुशी नहीं हुई होगी. किसी को भी अच्छा नहीं लगा होगा. बहुत सारे लोग डरे भी होंगे. जानते हैं ऐसा क्यों है ? ऐसा इसलिए है क्योंकि कैंसर डर का दूसरा नाम है. आप भी महसूस करते होंगे कि कैंसर अब बहुत common बीमारी हो गई है. आए दिन आपको भी ऐसी खबरें मिलती होंगी कि आपके किसी जानने वाले को कैंसर हो गया. फिर आपको भी लगता होगा कि अभी तो वो आदमी बिल्कुल ठीक-ठाक था. पूरी तरह से तंदुरुस्त दिखाई देता था. उसे कैंसर कैसे हो सकता है.

आप के मन में अपने लिए, और अपने परिवार को लेकर भी तरह-तरह की आशंकाएं होती होंगी. आज हम आपसे कहना चाहेंगे कि आपका डर बिल्कुल वाजिब है. हकीकत यही है कि कैंसर तेजी से फैल रहा है. लेकिन, हम ये भी कहना चाहेंगे कि अगर आपने ठान लिया कि कैंसर को पास नहीं आने देना है, तो आप ऐसा करके दिखा सकते हैं.

World Cancer Day के मौके पर हम आपको सिर्फ 3 आंकड़ों की जानकारी देंगे, जिनका मकसद आपको डराना नहीं, बल्कि सावधान करना है. पहला आंकड़ा ये कि इस समय भारत में कैंसर के करीब 16 लाख मरीज़ हैं. दूसरा आंकड़ा ये कि हमारे देश में हर 20 साल में कैंसर के मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाएगी. और तीसरा आंकड़ा ये कि हर 10 में से एक भारतीय को उसके जीवन काल में कैंसर होने की आशंका है.

लेकिन, आज हमने अपनी रिपोर्ट को तैयार करते समय कई डॉक्टरों से बात की. और उस बातचीत के आधार पर हम आपको विश्वास दिलाना चाहते हैं कि कैंसर का इलाज मुश्किल ज़रूर है, लेकिन इससे बचाव आसान है. ऐसी कई छोटी-छोटी बातें हैं, जिनका ख्याल रख कर हम कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से हमेशा के लिए दूर रह सकते हैं. इसलिए आज हम आपको उन तरीकों के बारे में बताएंगे, जिसे अपनाने के बाद कैंसर की बीमारी आपके आस-पास आने से भी डरेगी.

अब हम आपसे तीन आसान सवाल करेंगे. जिनके जवाब से ये तय होगा कि आपके अंदर कैंसर जैसी बीमारी को खुद से दूर रखने की ताकत है या नहीं?
पहला सवाल- क्या आप तंबाकू खाते हैं ?
दूसरा सवाल- क्या आप सिगरेट पीते हैं ?
और तीसरा सवाल- क्या आप overweight हैं यानी आपका वज़न ज्यादा है ?

अगर इन तीनों सवालों का जवाब ना है तो आप कैंसर के खिलाफ अपनी लड़ाई करीब-करीब जीत चुके हैं. यानी कैंसर आपके आस-पास आने से भी डरेगा.आपसे आगे के सवाल थोड़े मुश्किल होने जा रहे हैं. लेकिन जवाब ज़रूर दीजिएगा. क्योंकि तभी आपको ये पता चल पाएगा कि खतरनाक बीमारियों से लड़ने के लिए आप कितने तैयार हैं ? हमारा सवाल ये है कि क्या आप हर रोज़ 40 से 50 मिनट तक व्यायाम करते हैं? डॉक्टरों की सलाह है कि आपको वैसे physical exercise करने चाहिए, जिनसे मांसपेशियां ज्यादा से ज्यादा सक्रिय हों. यानी आराम से टहलना काफी नहीं है.

आपको तेजी से टहलना चाहिए यानी brisk walk करना चाहिए. अगर आप jogging ... running, swimming या cycling करते हैं तो इससे अच्छा कुछ भी नहीं है. क्योंकि ऐसा करने से आपका immune system यानी बीमारी से लड़ने की क्षमता बेहद मज़बूत होती जाती है और खतरनाक बीमारियां आपके शरीर के अंदर सिर नहीं उठा पाती हैं. तो अगर आपका जवाब हां है यानी आप हर रोज़ 40 से 50 मिनट व्यायाम करते हैं तो यकीन मानिए.

कैंसर या ऐसी दूसरी खतरनाक बीमारियां आपके आस-पास नहीं आ सकती हैं. और अगर आपका जवाब ना है तो हमारी एक सलाह मानिए.आज ही से ये संकल्प लीजिए कि कल सुबह से आप एक नई शुरुआत करेंगे. दौड़ना एक संपूर्ण व्यायाम है. और दौड़ने के लिए आपके पास सिर्फ दो चीजें होनी चाहिए- जूते और इच्छाशक्ति. और सबसे ध्यान देने की बात ये है कि किसी बीमारी की चपेट में आकर अस्पतालों के चक्कर लगाने से बेहतर है कि आप हर रोज़ दौड़ने के लिए किसी पार्क के चक्कर लगाएं.

आगे के सवाल-जवाब से पहले एक ज़रूरी बात. आपको कोई भी व्यायाम मुश्किल लगे उसे ज़बरदस्ती ना करें. किसी जानकार की, या डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें.आज हम सवालों के जरिये पता कर रहे हैं कि आप कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों को दूर रखने के लिए कितने तैयार हैं. सवालों का हमारा अगला राउंड और मुश्किल होने जा रहा है .

अगला सवाल ये है कि क्या आप प्लास्टिक से बने कप में चाय पीते हैं?
क्या आप प्लास्टिक से बनी किसी प्लेट में, कोई गर्म चीज खाते हैं?

पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन ऐसा माना जाता है कि गर्म होने के बाद प्लास्टिक एक खास तरह का केमिकल छोड़ने लगती है, जो खाने-पीने की चीजों से मिलकर आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो जाता है और इससे कैंसर भी हो सकता है. FDA...यानी Food and Drug Administration का कहना है कि प्लास्टिक के गर्म होने पर 55 से 60 तरह के केमिकल निकलते हैं.

जिनसे Breast Cancer, Colon cancer, Prostrate Cancer और दूसरी खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं. ऐसी बीमारियों की लिस्ट लंबी है. लेकिन, हम आज उनकी चर्चा नहीं करेंगे. हम ये मानकर चल रहे हैं कि आप पहले से ही अपने खाने-पीने का ख्याल रखेंगे तो आने वाले दिनों में आपको दवाइयों नहीं खानी पड़ेंगी. हमने आपसे सवाल पूछा था कि क्या आप प्लास्टिक से बने कप या प्लेट का इस्तेमाल करते हैं अगर आपका जवाब ...ना...है तो आपने एक और मोर्चा जीत लिया. कैंसर अब आपसे और ज्यादा दूर हो गया.

वर्ल्ड कैंसर डे के मौके पर आज हम आपसे कुछ सवाल पूछ रहे हैं. सवालों का अगला राउंड और कठिन होने जा रहा है, लेकिन आपको उसका जवाब ईमानदारी से देना होगा. क्योंकि तभी आपको ये पता चल पाएगा कि कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए आप कितने तैयार हैं?

और हमारा अगला सवाल ये है कि क्या आप प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं? ये सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि प्रदूषण अब हमारे देश में जाड़ा, गर्मी, बरसात की तरह एक मौसम हो गया है. और एक आकलन के मुताबिक प्रदूषण जब खतरनाक स्तर पर होता है तब हम दिन भर में करीब 40 सिगरेट पीते हैं. पहले राउंड के सवाल में हमने आपसे पूछा था कि क्या आप सिगरेट पीते हैं.

अगर उसके जवाब में आपने ना कहा था...तब भी इस सवाल से आप बच नहीं सकते. क्योंकि प्रदूषण से वही नुकसान होता है, जो सिगरेट पीने से होता है. हवा में तय से ज्यादा मात्रा में मौजूद सल्फर डाई ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड से भी कैंसर का ख़तरा है. हमने ये सवाल पूछा था कि क्या आप प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं ? हम जानते हैं कि आपमें से ज्यादातर लोगों के पास इसका जवाब हां होगा.

ये आधुनिक होते समाज के लिए सबसे ख़तरनाक बात है कि आज हमारी सांसों में ज़हर घुल रहा है. हमारे आखिरी सवाल का जवाब देते समय आपमें से बहुत से लोगों को डर लगा होगा, गुस्सा भी आया होगा और अफसोस भी हुआ होगा. क्योंकि सारे सवालों में पास होने के बाद आखिरी सवाल के सामने आपने खुद को बेबस पाया होगा. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि आप अगर खान-पान सही रखें और नियमित व्यायाम करें तो आपको एक लंबी और सेहतमंद उम्र मिल सकती है.

इसलिए ये आपको तय करना है कि आप अस्पताल जाना पसंद करेंगे या Spa जाना? आप अस्पताल की Opd के चक्कर लगाना चाहेंगे या किसी हेल्थ क्लब के ? आप Operation Theater जाना पसंद करेंगे या फिर जिम जाना ? अगर आपने इन सभी सवालों के जवाब में दूसरा विकल्प चुना है..तो फिर आपके लिए आगे की राह आसान है .

वर्ल्ड कैंसर डे के मौके पर हम आपको ये बता रहे हैं कि आप कैसे कैंसर या कैंसर जैसी बीमारियों को खुद से दूर रख सकते हैं. इसका सीधा फॉर्मूला ये है कि आपको अस्पतालों के चक्कर से बचने के लिए हर रोज़ पार्कों के चक्कर लगाने हैं यानी कि दौड़ना है, तेज़ टहलना है, या कोई ना कोई व्यायाम करना है. आपको दवाइयां खाने से बचने के लिए अपने खान-पान को अनुशासित रखना है.

अब हम आपको एक स्वस्थ और कामयाब इंसान का रुटीन बताने जा रहे हैं. हमने इसके लिए टेनिस के नंबर 1 खिलाड़ी, नोवाक जोको-विच को चुना है. सर्बिया के टेनिस खिलाड़ी जोको-विच की उम्र 32 वर्ष है . उनकी सबसे नई कामयाबी ये है कि जोको-विच ने आठवीं बार ऑस्ट्रेलियाई ओपन का खिताब जीत लिया है. ऐसा करके उन्होंने रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे महान टेनिस खिलाड़ियों की बराबरी कर ली है.

लेकिन, यहां आपको ध्यान देना है नोवाक जोको-विच के डेली रुटीन पर. जोको-विच हर रोज सूर्योदय से पहले जाग जाते हैं. उनके साथ उनका परिवार भी उठ जाता है. उनका पूरा परिवार एक साथ उगते हुए सूर्य को देखता है. और इसके बाद जोको-विच दो और काम करते हैं. वो घरवालों के साथ गाना गाते हैं. और योग भी करते हैं.

जोको-विच की खास बात ये है कि वो शाकाहारी हैं. एक टीवी कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि वो खुद भी शाकाहारी हैं और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करेंगे. इसके अलावा जोको-विच को जैसे ही मौका मिलता है वो प्रकृति के करीब जाते हैं. ऑस्ट्रेलियाई ओपन जीतने के बाद भी उन्होंने एक अंजीर के पेड़ पर चढ़कर जश्न मनाया. उन्होंने कहा कि अंजीर का पेड़, उनका दोस्त है. यानी जोको-विच के जीवन में ऐसी कई अच्छी आदतें हैं, जिनका हमने थोड़ी देर पहले आपसे ज़िक्र किया.

जोको-विच का बचपन अभावों के बीच बीता, उन्होंने सूखे स्विमिंग पूल में टेनिस की प्रैक्टिस की. लेकिन, नियमित अभ्यास, योग और ध्यान, अनुशासित खान-पान और प्रकृति से प्रेम हमेशा उनके जीवन में शामिल रहा. इसलिए उन्हें निरोगी काया और कामयाबी दोनों मिली.

आयुर्वेद कहता है कि सुबह सूरज उगने से पहले जागना समय पर भोजन करना और अपनी सोच को सकारात्मक रखना दीर्घ जीवन की...यानी लंबी उम्र की कुंजी है. ये सोचने की बात है कि भारत के इस वैदिक फॉर्मूले को विदेशों में भी अपनाया जा रहा है. कोशिश कीजिए कि आप भी इसका पालन करें. और खतरनाक बीमारियों को अपने आस-पास भी ना आने दें.