ZEE जानकारी: 2 हफ्तों में दिल्ली का बदल गया माहौल!, जानिए शाहीन बाग पर क्या बोले योगी?

आज हम आपके लिए इस साल का अब तक का सबसे बड़ा इंटरव्यू लेकर आए हैं. ये इंटरव्यू उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है. मैंने ये इंटरव्यू दिल्ली के शाहीन बाग़ से सिर्फ 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर किया.

ZEE जानकारी: 2 हफ्तों में दिल्ली का बदल गया माहौल!, जानिए शाहीन बाग पर क्या बोले योगी?

आज हम आपके लिए इस साल का अब तक का सबसे बड़ा इंटरव्यू लेकर आए हैं. ये इंटरव्यू उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है. मैंने ये इंटरव्यू दिल्ली के शाहीन बाग़ से सिर्फ 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर किया. इस इंटरव्यू के दौरान मैंने योगी आदित्यनाथ से बहुत सारे सवाल पूछे? लेकिन इस इंटरव्यू का केंद्र दिल्ली का शाहीन बाग़, दिल्ली के चुनाव और नए नागरिकता कानून को लेकर देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शऩ थे.

शाहीन बाग़ पर जब हमने योगी आदित्यनाथ से उनका फॉर्मूला पूछा तो उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता बुलेट से नहीं बल्कि बैलेट से जवाब देगी. योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री है. लेकिन वो दिल्ली में बीजेपी के स्टार प्रचारक की भूमिका में हैं. बीजेपी को उम्मीद है कि चुनाव प्रचार में उनकी एंट्री से दिल्ली की राजनीति के सारे समीकरण बदल जाएंगे.

लेकिन क्या सच में ऐसा है? क्या योगी आदित्यनाथ शाहीन बाग़ पर शब्दों वाली सर्जिकल स्ट्राइक करने के इरादे से ही दिल्ली आए हैं? मैंने आज उनसे ये भी पूछा कि अगर शाहीन बाग़ जैसे प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ या फिर किसी और शहर में हो रहे होते..तो वो इन विरोध-प्रदर्शनों से कैसे निपटते?.

दिल्ली में करीब एक महीना पहले जब चुनाव प्रचार शुरू हुआ था तो किसी को भी अरविंद केजरीवाल की जीत को लेकर कोई शंका नहीं थी. लोग कह रहे थे कि आएंगे तो केजरीवाल ही. आम आदमी पार्टी ने बहुत मजबूत स्थिति में चुनाव प्रचार शुरू किया था. लेकिन इसके बाद शाहीन बाग़ का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया और बीजेपी ने इसे चुनाव का मुख्य एंजेंडा बना लिया और चुनाव प्रचार में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी उतार दिया.

जो बीजेपी एक महीना पहले तक बहुत कमज़ोर लग रही थी उसे हर दिन फायदा हो रहा है. पिछले 2 हफ्तों में दिल्ली का माहौल पूरी तरह बदल गया है. अब बीजेपी के कई नेता भी मान रहे हैं कि दिल्ली में लड़ाई.. टक्कर की है. ये चमत्कार कैसे हुआ और क्या अरविंद केजरीवाल नए नागरिकता कानून और शाहीन बाग़ के अंडर करंट को समझ नहीं पाए? क्या अरविंद केजरीवाल की इसी भूल ने शाहीन बाग़ को राजनीति की नई प्रयोगशाला बना दिया?

दिल्ली में सिर्फ 6 दिनों यानी 144 घंटों के बाद चुनाव होने हैं. क्या दिल्ली की 70 सीटों पर होने वाला चुनाव अब सिर्फ शाहीन बाग़ और नए नागरिकता कानून जैसे मुद्दों पर ही लड़ा जा रहा है. या फिर इसमें विकास के मुद्दों को भी जगह मिलेगी? क्या दिल्ली के लोग अब अरविंद केजरीवाल के काम पर नहीं बल्कि शाहीन बाग़ पर वोट देंगे?