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Zee जानकारी: बिजली भरपूर फिर भी जनता से दूर क्यों?

Zee जानकारी: बिजली भरपूर फिर भी जनता से दूर क्यों?

भारत को एक कृषि प्रधान देश माना जाता है और भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा अन्न उगाते हैं. भारत अन्न और दूसरे Food Prouducts को Export भी करता है. यानी भारत अपने साथ साथ दूसरे देशों का पेट भी भरता है. ऐसा इसलिए हो पाता है क्योंकि भारत को जितने अन्न की ज़रूरत है. उससे ज्यादा अन्न भारत में उगाया जाता है. लेकिन अगर मैं आपसे कहूं कि अब भारत एक ऐसा देश बन चुका है. जिसके पास ज़रूरत से ज्यादा बिजली है. और अब भारत पहली बार बिजली का Net Exporter बन गया है. तो आपको शायद यकीन नहीं होगा.

हम जानते हैं कि गर्मियां आ चुकी हैं और बिजली की कमी आपकी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है. ऐसे में ये सुनकर आपको यकीन नहीं हो रहा होगा कि भारत में बिजली की कोई कमी नहीं है और भारत दूसरे देशों को बिजली निर्यात करने लगा है. लेकिन इतिहास में पहली बार में भारत बिजली का निर्यात करने की स्थिति में आ गया है. अब भारत नई Transmission Lines की मदद से नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार को बिजली बेच रहा है. आपको बता दें कि 1980 के दशक से भारत भूटान से बिजली खरीदता आ रहा है. लेकिन पहली बार दूसरे देशों को बेची गई बिजली की मात्रा. भूटान से खरीदी गई बिजली की मात्रा से 4 प्रतिशत ज्यादा है. 

इतना ही नहीं वर्ष 2016 औऱ 2017 में भारत Power Surplus Nation भी बन चुका है. यानी भारत अब एक ऐसा देश है. जिसके पास ज़रूरत से ज्यादा बिजली है. लेकिन इस खबर का दुखद पहलू ये है कि भारत के आम लोगों को अब भी भरपूर बिजली नहीं मिल पा रही है. भारत में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत सिर्फ 1075 किलोवाट है. जबकि चीन में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 4 हज़ार किलोवाट और विकसित देशों में 15 हज़ार किलोवाट है. बिजली मंत्रालय के मुताबिक भारत के पास इस वक्त कुल 315 गीगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है जबकि फरवरी महीने तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में बिजली की Peak Demand  सिर्फ 159 गीगावाट थी. फिर भी भारत के ग्रामीण इलाकों में करीब 26 प्रतिशत परिवारों को अब भी बिजली नहीं मिल पाई हैं.

अब आप सोच रहे होंगे कि अगर भारत में बिजली की कोई कमी नहीं तो फिर देश के ज्यादातर शहरों और गांवों को पर्याप्त मात्रा में बिजली क्यों नहीं मिल पाती है. तो हम आपको बता दें कि इसकी सबसे बड़ी वजह है Transmission Loss. भारत में करीब 23 प्रतिशत बिजली वितरण के दौरान ही बर्बाद हो जाती है. यानी 23 प्रतिशत बिजली कभी अपनी मंज़िल तक पहुंच ही नहीं पाती है. भारत के आधे से ज्यादा राज्यों में तो Transmission और Distribution के दौरान होना वाला Loss 30 प्रतिशत से भी ज्यादा है. जबकि कुछ राज्यों में तो 50 प्रतिशत बिजली Transmission के दौरान बर्बाद हो जाती है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर विकसित देशों में वितरण के दौरान सिर्फ 10 प्रतिशत बिजली ही बर्बाद होती है. इजरायल में तो Transmission And Distribution Loss सिर्फ 3 प्रतिशत है. अगर भारत में Transmission Loss सिर्फ 5 प्रतिशत भी कम हो जाए. तो बिना 1 रुपया खर्च किए भारत के पास 15 हज़ार मेगावाट अतिरिक्त बिजली आ जाएगी. और इससे 75 हज़ार करोड़ रुपये से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये तक की बचत भी होगी. भारत में बिजली की कमी की एक बड़ी वजह बिजली चोरी भी है. 2015 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक बिजली चोरी से पूरी दुनिया में हर वर्ष 5 लाख 84 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान होता है. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान भारत को उठाना पड़ता है. भारत को बिजली चोरी की वजह से हर वर्ष 1 लाख 3 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान होता है.

कुल मिलाकर भारत के पास इतनी बिजली है कि भारत दुनिया के कई देशों को Power BackUp दे सकता है. लेकिन अफसोस इस बात का है कि भारत के ज़्यादातर गांवों और शहरों में 24 घंटे बिजली आना आज भी एक दुर्लभ घटना मानी जाती है. भारत सरकार आम लोगों से अपील करती है. कि लोग बिजली बचाएं. क्योंकि जितनी बिजली बचाई जाएगी. उतनी ही बिजली और उपलब्ध होगी. लेकिन सच ये है कि आम लोगों के साथ साथ सिस्टम को भी खुद में सुधार करना होगा. क्योंकि करप्शन लापरवाही और अफसरशाही वाला Short Circuit अक्सर सुपर पावर बनने के सपने में Power cut लगा देता है.

भारत के जिन राज्यों में बिजली की भयंकर कमी है. वहां कि सरकारें भी इसके लिए जिम्मेदार है. बहुत सारे राज्यों की सरकारें बिजली खरीदना ही नहीं चाहती हैं. दरअसल भारत की ज्यादातर Power corporations घाटे में चल रही है. और अगर ये सरकारी कंपनियां बाहर से बिजली खरीदेंगी. तो इन्हें ज़्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे. Transmission के दौरान होने वाला नुकसान और बिजली चोरी की वजह से इन कंपनियों का घाटा और बढ़ जाएगा. बिजली कंपनियां प्रति यूनिट बिजली का दाम एक तय सीमा तक ही बढ़ा सकती है. इसलिए बिजली के दाम बढ़ाने पर भी घाटे की भरपाई नहीं हो पाएगी. बिजली कंपनियों को हो रहे नुकसान की सबसे बड़ी वजह है भ्रष्टाचार.
 
भारत को बिजली चोरी की वजह से हर वर्ष 1 लाख 3 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान होता है. ये सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि लोग बिजली की चोरी करते हैं. सवाल ये है कि क्या हमारा देश चोरी करने वाले लोगों का देश बनता जा रहा है. आखिर लोग अपने हिस्से की ईमानदारी क्यों नहीं बरतते? यहां हम आपको एक जानकारी और देना चाहते हैं अगर आप भारत के किसी ग्रामीण इलाके में रहते हैं. या आपका परिवार वहां रहता है. और आप जानना चाहते हैं कि आपके गांव तक बिजली पहुंची है या नहीं. तो आप garv.gov.in नामक वेबसाइट पर जा सकते हैं. यहां अपने ज़िले और गांव का नाम डालने पर आपको इस बात की जानकारी मिल जाएगी कि आपके गांव का विद्युतीकरण हुआ है या नहीं और अगर हुआ है तो कितने घरों को बिजली मिल पा रही है.

कुल मिलाकर स्थिति गंभीर है और बिजली का संकट दूर करने के लिए तेज़ गति से कुछ ऐतिहासिक फैसले लेने की ज़रूरत है. ताकि देश के आम नागरिक को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति का पूर्ण स्वराज मिल सके. हमने ये विश्लेषण इसलिए किया ताकि आप देश के बिजली संकट की बारीकियों को समझ सकें. आगे भी हम इस मुद्दे पर Follow Up और ज़रूरी विश्लेषण करते रहेंगे.