ZEE जानकारी: वायु प्रदूषण से चीन और भारत में सबसे ज्यादा मौत, Smog के कहर से ऐसे करें बचाव

दिल्ली में Smog की परेशानी अभी खत्म नहीं होने वाली. आने वाले कुछ दिनों तक आपको इसी गैस चेंबर में घुट-घुट कर जीना पड़ेगा.

ZEE जानकारी: वायु प्रदूषण से चीन और भारत में सबसे ज्यादा मौत, Smog के कहर से ऐसे करें बचाव

दिल्ली में Smog की परेशानी अभी खत्म नहीं होने वाली. आने वाले कुछ दिनों तक आपको इसी गैस चेंबर में घुट-घुट कर जीना पड़ेगा. लेकिन, आपकी सेहत का ख्याल रखते हुए, आज हम आपको कुछ जरुरी टिप्स भी देंगे. साथ ही आपको ये भी बताएंगे कि वायु प्रदूषण कैसे इंसानियत का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है? वायु प्रदूषण आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक है और इस आतंकवाद को फैलाने वाला कोई और नहीं हमारे देश का सिस्टम और यहां के आम लोग हैं. 

आपको ये जानकर झटका लग सकता है कि दुनियाभर में वायु प्रदूषण से होने वाली आधी से ज्यादा मौतें सिर्फ चीन और भारत में ही होती हैं. 2017 की स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, वायु प्रदूषण की वजह से समय से पहले होने वाली मौतों के मामले में चीन पहले नंबर पर है और भारत दूसरे नंबर पर है.

ये रिपोर्ट कहती है, कि वर्ष 2015 में वायु प्रदूषण की वजह से चीन में 11 लाख से ज्यादा लोग मारे गए. जबकि भारत के करीब 10 लाख 90 हजार लोग वायु प्रदूषण वाले आतंकवाद का शिकार हुए. ये आंकड़ा, पाकिस्तान और बांग्लादेश में 1 लाख से थोड़ा ज़्यादा था.

यानी वर्ष 2015 में पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण की वजह से जितनी भी मौतें हुईं उनमें मारे गए 58 फीसदी लोग, इन्हीं चार देशों के थे. दुनिया के 90 फीसदी लोग ऐसे हैं जो आज भी अशुद्ध हवा में सांस लेते हैं.

इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के मुताबिक, दुनिया में मौत की पांच बड़ी वजहें हैं. जिनमें हाई बल्ड प्रेशर, स्मोकिंग, हाई ब्लड शुगर और हाई कोलेस्ट्रॉल के अलावा मुख्य वजह वायु प्रदूषण है. इसी संस्था के मुताबिक, भारत में होने वाली मौत की पहली वजह, कुपोषण है तो दूसरी सबसे बड़ी वजह वायु प्रदूषण है.

यानी आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इस वक्त भारत की स्थिति कितनी गंभीर और चिंताजनक है. हालत ये है कि अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो आपका बच्चा पैदा होते ही चेन स्मोकर बन जाता है. ये कोई मजाक नहीं है, बल्कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिल्ली की हवा बहुत खराब हो चुकी है. दिल्ली की हवा में पहली बार सांस लेने वाले बच्चे के 

लिए ऐसे हालात बन चुके हैं जैसे वो एक दिन में 10 से 12 सिगरेट पी रहा हो. अब आप सोचिए कि इन बच्चों का भविष्य कैसा होगा ? और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?

ऐसा नहीं है कि इन आंकड़ों से हमारी सरकारें और हमारा सिस्टम अनजान है. उन्हें सबकुछ पता है. लेकिन, तकलीफ तब होती है जब आम जनता से हाथ जोड़कर वोट देने की अपील करने वाली राजनीतिक पार्टियां और नेता आम लोगों को ही भूल जाते हैं. इसलिए, उन पर भरोसा करें भी तो कैसे करें ? स्थिति ऐसी हो गई है कि अब आपको अपना ख्याल खुद रखना होगा और हम इसमें आपकी थोड़ी मदद जरूर कर सकते हैं.

चाहे आप बीमार हों या स्वस्थ, आपको Smog की स्थिति में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए अगर निकलना भी पड़े तो मॉस्क लगा कर निकलें. आजकल हर मेडिकल स्टोर पर प्रदूषण से बचाने वाले मॉस्क मिलते हैं.

सुबह के वक्त स्मोग बहुत ज्यादा रहता है, इसलिए बेहतर होगा, कि सुबह 5 या 6 बजे की बजाय धूप निकलने के बाद करीब 8 बजे वॉक पर निकलें. लेकिन अगर, स्थिति खराब हो, तो आपको कुछ दिनों के लिए मॉर्निंग वॉक बंद कर देनी चाहिए.

सर्दियों में जहां वायु प्रदूषण ज्यादा रहता है, वहां लोग पानी भी कम पीते हैं. लेकिन ये खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए, दिन में करीब 4 लीटर पानी जरूर पिएं. प्यास लगने का इंतजार ना करें, थोड़ी-थोड़ी देर में 1 या 2 घूंट पानी पीते रहें.

घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं. इससे शरीर में ऑक्सिजन की सप्लाई सही बनी रहेगी और वातावरण में मौजूद जहरीली गैसें अगर खून तक पहुंच भी जाएंगी, तो कम नुकसान पहुंचाएगी.

नाक के अंदर के बाल हवा में मौजूद डस्ट पार्टिकल्स को शरीर के अंदर जाने से रोक लेते हैं. इसलिए हाइजीन के नाम पर बालों को पूरी तरह से ट्रिम ना करें.

बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें. हो सके तो भाप लें. अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं सही समय पर लें. 

कहीं बाहर जाने पर दवा या इनहेलर साथ ले जाएं और डोज को मिस ना करें. क्योंकि, ऐसा करने पर आपको अस्थमा का अटैक पड़ सकता है. साइकल चलाने वाले लोगों को भी मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए. 

5 साल से कम के बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है. बड़ों की तुलना में बच्चे, ज्यादा तेजी से सांस लेते हैं जिससे उनके लिए प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए बच्चों का खास ख्याल रखें और कम से कम घर के अंदर के वातावरण को प्रदूषण से मुक्त रखें.

दिन के मुकाबले रात में प्रदूषण का ज्यादा खतरा होता है. तापमान जितना कम और मौसम जितना ठंडा होगा, हवा में मौजूद प्रदूषण की मारक क्षमता उतनी ही ज्यादा होगी, इसलिए रात में बाहर जाने से बचें.

घर के अंदर लगाए जाने वाले कुछ पौधे जहरीली हवा को साफ कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर Weeping fig, Peace lily, Devil's Ivy, और Flamingo Flower, ये सारे ही पौधे इनडोर हैं. 5 से 6 बड़े गमलों में इन पौधों को लगाकर आप अपने घर के अंदर के प्रदूषण में 50 प्रतिशत तक की कमी ला सकते हैं.

एक और बात सोशल मीडिया के माध्यम से आप खुद भी दूसरे लोगों को जागरुक कर सकते हैं. इसलिए, इन जरूरी टिप्स को ना सिर्फ अपने परिवार के सदस्यों के साथ शेयर करें बल्कि हर उस व्यक्ति तक पहुंचाएं जो प्रदूषित हवा में सांस लेने पर मजबूर है. 

आपको याद होगा वर्ष 2015 में जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस समारोह के लिए भारत आने वाले थे उस वक्त भी दिल्ली की खराब हवा ने अंतरराष्ट्रीय हेडलाइन्स में जगह बना ली थी. क्योंकि, उनके आने से पहले अमेरिकी दूतावास ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि दिल्ली की हवा तय मानकों के मुकाबले बहुत ज्यादा प्रदूषित है. इसलिए बराक ओबामा का भारत में खुले वातावरण में नहीं रहना चाहिए. और आज जो हालात हैं उन्हें देखते हुए ऐसा लगता है, कि भविष्य में दुनिया के किसी भी देश का कोई भी राष्ट्राध्यक्ष भारत आने से पहले 100 बार सोचेगा.

इस अशुद्ध हवा का असर भारत की सेहत पर ही नहीं बल्कि इज्जत पर भी पड़ेगा. क्योंकि, इस बात की आशंका बढ़ जाएगी कि भविष्य में भारत में कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल आयोजन ना हो. या कोई बड़ी कॉन्फ्रेंस या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ना हो. अगर ऐसी स्थिति पैदा होती है तो ये एक देश के तौर पर हमारी सबसे बड़ी हार होगी. और इसीलिए हम लगातार ये बात कह रहे हैं कि ये एक इमरजेंसी है, जिसकी गंभीरता को समझना चाहिए.