ZEE ज़ानकारी: दीवाली पर निकला पर्यावरण का दीवाला, अगले 3 दिनों तक राहत के संकेत नहीं

प्रदूषण से हर दिन देश का नुकसान होता है इसलिए इस पर चिंता और कार्रवाई प्रतिदिन होनी चाहिए. प्रदूषण पर बात करने के लिए दीवाली का इंतजार नहीं करना चाहिए. 

ZEE ज़ानकारी: दीवाली पर निकला पर्यावरण का दीवाला, अगले 3 दिनों तक राहत के संकेत नहीं

पूरी दुनिया में आतंकवाद का जानलेवा प्रदूषण फैलाने वाले आतंकवादी बगदादी के बाद हम दीवाली पर पटाखों के लिए लोगों की ''दिल है कि मानता नहीं'' वाली सोच का विश्लेषण करेंगे. हर वर्ष धूमधाम से दीवाली मनाने के बाद अगले दिन प्रदूषण पर सवाल उठाने की परंपरा निभाई जाती है. लेकिन हमारा मानना है कि प्रदूषण से हर दिन देश का नुकसान होता है इसलिए इस पर चिंता और कार्रवाई प्रतिदिन होनी चाहिए. इसलिए दीवाली के अगले दिन प्रदूषण की बात करने वाले लोगों को. साल के बाकी 364 दिन भी यही सवाल सरकार और जनता दोनों से पूछना चाहिए. प्रदूषण पर बात करने के लिए दीवाली का इंतजार नहीं करना चाहिए. वैसे इस बार दीवाली पर देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण में कमी आई है लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान से ऊपर था. आज हम पिछले 3 वर्षों में दीवाली के अगले दिन आए प्रदूषण के आंकड़ों का विश्लेषण करेंगे ताकि इस वर्ष हुए सुधार का पता लगाया जा सके. 

कल यानी दीवाली के दिन दिल्ली का औसत Air Quality Index यानी AQI... 337 था जो आज घटकर 328 हो गया है. AQI आम तौर पर प्रदूषण फैलाने वाले 8 अलग अलग तत्वों को मिलाकर तैयार किया जाता है. इससे ये पता चलता है कि हवा कितनी प्रदूषित है और इससे लोगों के स्वास्थ्य को कितना ज्यादा खतरा है. वैसे AQI... 328 होने का मतलब ये है कि दिल्ली की हवा बेहद खराब है और ये लोगों के सांस लेने के काबिल नहीं है. इससे पहले वर्ष 2018 में दीवाली के अगले दिन AQI... 390 था. इसका मतलब है प्रदूषण...''बेहद खराब'' के स्तर तक पहुंच गया था. वर्ष 2017 में दीवाली के अगले दिन AQI... 403 और वर्ष 2016 में ये 445 हो गया था. प्रदूषण का 400 से ऊपर का आंकड़ा ''ख़तरनाक'' की श्रेणी में आता है. ((20 अक्टूबर 2017 को))((31 अक्टूबर 2016))

वैसे आपके लिए अच्छी खबर ये है कि इस वर्ष वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण का स्तर भी कम हुआ है. दिल्ली में 6 जगहों पर Monitoring करके ये पता चला है कि पिछले 5 वर्षों के मुकाबले इस बार पटाखों से होने वाला शोर कम हुआ है. इस कमी का ये मतलब है कि पहले की तुलना में कम पटाखे चलाए गए हैं. 

सिर्फ दिल्ली और NCR ही नहीं, देश के दूसरे हिस्सों की भी हवा भी आज बहुत ख़राब थी. यूपी के मुजफ्फरनगर में प्रदूषण का स्तर देश में सबसे ज्यादा 426... मुरादाबाद में 398... नोएडा में 397...और गाज़ियाबाद में 396 रहा. यानी इन सभी जगहों पर प्रदूषण का स्तर बेहद खराब से लेकर खतरनाक के स्तर पर है. वायु प्रदूषण के इन आंकड़ों का मतलब है कि दीवाली पर पर्यावरण का दीवाला निकला गया है और इसके लिए तुरंत काम किए जाने की जरूरत है. 

हवा में प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण का स्तर घटा है लेकिन कम होते हुए इन आंकड़ों को देखकर आपको खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि ये काफी नहीं है. प्रदूषण का स्तर अभी भी बेहद खराब है क्योंकि कल मनाई गई दीवाली के Side effects आज भी दिखाई दे रहे हैं. 

दिल्ली सहित देश के कई इलाक़ों में आज सूरज कुछ धुंधला दिखाई दिया. प्रदूषण के काले साये में दिन भर सूरज की लुका-छिपी चलती रही. इसे देखकर... शायद आपको भी ये भ्रम हुआ हो कि आसमान में बादल छाए हुए हैं। लेकिन ये प्रदूषण का काला रंग था. कुल मिलाकर हर बार की तरह इस बार भी दीवाली.. भारत के तमाम शहरों की हवा में.. अपना जानलेवा असर छोड़ गई है. हो सकता है कि आज के बाद आप भी प्रदूषण को भूल जाएं.. लेकिन आपको ये याद रखना होगा कि भारत में हवा की Quality बहुत ख़तरनाक है और प्रदूषित हवा... किसी को मारने में संकोच नहीं करती. प्रदूषण को भूल जाने से.. ना तो हवा साफ होगी और ना ही इस समस्या का कोई इलाज निकलेगा. होगा सिर्फ इतना.. कि आपकी मौत, आपके सामने.. अपने तय समय से कुछ साल पहले आ जाएगी और दिल्ली में रहने वाले लोगों का सबसे बड़ा डर यही है. 
 
वैसे अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो अगले 3 दिनों तक आपके लिए राहत की कोई खबर नहीं है. दिल्ली में अगर 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चले तो यहां का प्रदूषण हट सकता है या उसके स्तर में कमी आ सकती है। लेकिन अभी दिल्ली में हवा की रफ्तार सिर्फ 8 किलोमीटर प्रति घंटा है. मौसम विभाग के मुताबिक 31 अक्टूबर तक तेज हवा चलने का कोई अनुमान नहीं है. इसलिए दिल्ली के प्रदूषण में कमी आने की संभावना नहीं के बराबर है. 

अब आपको दिल्ली की एक और तस्वीर दिखाते हैं... कल दीवाली के मौके पर लोगों ने अपने घर, दुकान और दूसरी जगहों पर पूजा पाठ किया होगा... और आज उनमें से कुछ लोगों ने यमुना नदी को प्रदूषित करने का काम किया है. दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाले DND पुल पर आज कुछ लोग पूजा सामग्री फेंकते नजर आए. इनमें से कुछ लोगों ने ZEE NEWS का कैमरा देखकर यमुना में गंदगी नहीं फेंकी. 
National Green Tribunal ने यमुना में गंदगी फेंकने पर 5 हजार रुपए और निर्माण सामग्री का मलबा फेंकने पर 50 हजार रुपए जुर्माना तय किया है लेकिन इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है.
वैसे हमारे देश में नदियों को देवी माना जाता है... उनकी पूजा की जाती है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक यमुना का किनारा भगवान कृष्ण की कर्मभूमि रहा है लेकिन आज उसी यमुना में कूड़ा डालकर नदी को नाला बनाने का काम हो रहा है. 

वैसे अगर आपको ये लग रहा है कि दिल्ली में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह दीवाली पर चलाए जाने वाले पटाखे हैं तो आपको इस विचार में सुधार करना चाहिए. एक रिसर्च के मुताबिक दिल्ली में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह है... गाड़ियों से निकलने वाला धुआं.... धूल और फैक्ट्रियों से होने वाला प्रदूषण गाड़ियों का धुआं 17 से 28 प्रतिशत तक प्रदूषण का कारण है. यानी ये धुआं प्रदूषण फैलाने की सबसे बड़ी वजहों में एक है. राजधानी के अलग अलग इलाकों में होनेवाला Contruction या फिर सड़कों को बनाते वक्त उड़नेवाली धूल 17 से 38 प्रतिशत तक प्रदूषण की वजह है. इसे प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह माना जाता है. तीसरे नंबर पर है औद्योगिक प्रदूषण। दिल्ली और आसपास के इलाकों में चलनेवाली फैक्ट्रियों से भी 22 से 30 प्रतिशत तक प्रदूषण होता है. 

इसके अलावा खेतों में पराली जलाने और दूसरी वजहों से होने वाले प्रदूषण भी दिल्ली और आस पास के लोगों के लिए बड़ी मुसीबत हैं लेकिन वायु प्रदूषण में इनका हिस्सा काफी कम है. ऐसी किसी रिसर्च में दीवाली के दिन चलाए जाने वाले पटाखों पर अलग से जानकारी नहीं है... क्योंकि ऐसा साल में सिर्फ एक दिन होता है। दीवाली के पटाखों से प्रदूषण बढ़ता है ये सही है... लेकिन दिल्ली और देश की हवा खराब होने की वजह, सिर्फ पटाखे नहीं हैं. 

इस दीवाली पर देश में बहुत से लोगों ने ग्रीन पटाखे खरीदे और चलाए. एक रिसर्च के मुताबिक सामान्य पटाखों के मुकाबले ग्रीन पटाखों से प्रदूषण करीब 40 प्रतिशत तक कम होता है. इन पटाखों को चलाने से हवा में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता है. ग्रीन पटाखों को बनाने में प्रतिबंधित केमिकल का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता है. हालांकि ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल से पर्यावरण को नुकसान कम होता है लेकिन भारत में साफ हवा वाली दीवाली मनाने के लिए अभी लंबा इंतज़ार करना होगा. देश के 135 करोड़ लोगों को दीवाली के अलावा बाकी 364 दिन होने वाले प्रदूषण का भी इलाज ढूंढना होगा क्योंकि प्रदूषण के आंकड़े ख़तरनाक से जानलेवा स्तर पर पहुंच चुके हैं लेकिन सिस्टम की नींद अब भी टूटी नहीं है.