ZEE जानकारी: कहीं आप भौतिक वस्तुओं के मोह में पड़कर खुद को परेशान तो नहीं कर रहे है?

आप चाहें तो इस बार दिवाली की सफाई करते वक्त इन गैरज़रूरी वस्तुओं से छुटकारा पा सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ उपाय अपनाने होंगे. 

ZEE जानकारी: कहीं आप भौतिक वस्तुओं के मोह में पड़कर खुद को परेशान तो नहीं कर रहे है?

आज धनतेरस का त्योहार है इस मौके पर आपने भी खरीददारी की होगी और घर में कुछ ना कुछ नया सामान ज़रूर लाए होंगे. हम कामना करते हैं कि ये दिवाली आपके जीवन में खुशियां लेकर आएं. आपके घर को धन और धान्य से भर दे और आप जीवन में जो चाहते हैं उसे हासिल कर पाए लेकिन सबकुछ हासिल कर लेने की चाहत के बीच आपको एक पल के लिए ये भी सोचना चाहिए कि जो कुछ आपके पास पहले से है. क्या वो पर्याप्त नहीं है? और कहीं ये ज़रूरत से ज्यादा या फिर गैरज़रूरी तो नहीं है? कहीं आप भौतिक वस्तुओं के मोह में पड़कर अपने आप को परेशान तो नहीं कर रहे हैं?

दिवाली से पहले लोग अपने घरों की सफाई करते हैं. घर में रखा अतिरिक्त सामान घर से निकाल देते हैं या फिर निकालने का विचार करते हैं लेकिन अक्सर होता ये है कि घर का एक सदस्य किसी सामान को निकालने के पक्ष में होता है तो दूसरा सदस्य चाहता है कि वो सामान घर में ही रहे. इस तरह अधिकतर लोग, अपने घर में बहुत सारा ऐसा सामान जमा करके रख लेते हैं जिसकी शायद उन्हें ज़रूरत भी नहीं होती.

दिवाली पर सफाई का असली उद्देश्य सिर्फ चीज़ों पर जमी धूल को साफ करना नहीं होता बल्कि इसका उद्देश्य मन को लालच के कब्ज़े से मुक्त कराना भी होता है. दिवाली पर सफाई इसलिए भी की जाती है क्योंकि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी को गंदगी बिल्कुल पसंद नहीं है और वो सिर्फ साफ सुथरे घर में ही प्रवेश करती है. लक्ष्मी अपने साथ सुख, समृद्धि और वैभव लेकर आती हैं. दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है इसलिए घर की साफ सफाई मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की एक प्रक्रिया भी है.

हिंदू शास्त्रों में मोक्ष को मनुष्य का सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है लेकिन अक्सर ये धारणा फैलाई जाती है कि मोक्ष सिर्फ धन और भौतिक सुखों का त्याग करने से ही प्राप्त होता है लेकिन क्या ये बात पूरी तरह से सही है?

आपको जानकर हैरानी होगी कि आप मां लक्ष्मी को प्रसन्न करके भी मोक्ष हासिल कर सकते हैं..क्योंकि हिंदू धर्म में धन को भी मुक्ति का मार्ग माना गया है. हिंदू परंपरा में धन को शुभ माना जाता है इसलिए हम पैसों की निंदा नहीं करते. यहां तक कि हम अपने देवी देवताओं के सिर पर भी सोने का मुकुट पहनाते हैं और मंदिरों में बहुत सारा धन-दान में भी देते हैं. यानी धन के साथ हमारा रिश्ता सकारात्मक है लेकिन सकारात्मक चीजें आपके जीवन में तभी ठहर सकती हैं जब आप उन चीज़ों से छुटाकारा पा लेते हैं जिनकी आपको अब ज़रूरत नहीं है और जो नकारात्मक हो गई हैं. इस दिवाली पर हम आपको घर के साथ-साथ मन की सफाई के भी तरीके बताएंगे. इसलिए आपको ये विश्लेषण बहुत ध्यान से देखना चाहिए और आप चाहें तो इन तरीकों को नोट भी कर सकते हैं.

हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में अपरिग्रह का बहुत महत्व माना गया है. इसका अर्थ है आवश्यक्ता से ज्यादा वस्तुओं का संग्रह ना करना यानी आपको जितनी वस्तुओं और साधनों की ज़रूरत है सिर्फ उन्हें ही अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए. लेकिन ज्यादातर लोग जीवन भर तरह-तरह का सामान खरीदते रहते हैं. कई बार इसमें दोहराव भी हो जाता है यानी एक ही चीज़ को लोग कई बार खरीद लेते हैं. लोग कई जोड़े जूते खरीद लेते हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर का इस्तेमाल नहीं करते. यही हाल कपड़ों का भी होता है. आजकल लोग Gadgets खरीदने के भी शौकीन हैं.. लेकिन कई Gadgets ऐसे होते हैं जिनका इस्तेमाल कभी हो ही नहीं पाता. रसोई के बर्तनों से लेकर किताबें और फर्नीचर से लेकर...घर के Decoration की कई Items ऐसी होती हैं जो हम सिर्फ शौक में खरीद लेते हैं लेकिन वो हमारी ज़रूरत का हिस्सा नहीं होतीं. 

आप चाहें तो इस बार दिवाली की सफाई करते वक्त इन गैरज़रूरी वस्तुओं से छुटकारा पा सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ उपाय अपनाने होंगे. पहला उपाय है कोनमारी पद्धति..आज जब हम इस विषय पर रिसर्च कर रहे थे तो हमारे हाथ The Life-Changing Magic of Tidying Up नाम की एक किताब लगी. इस किताब की लेखिका हैं Marie Kondo..Marie को कोनमारी के नाम से भी जाना जाता हैं. 

कोनमारी के मुताबिक सबसे पहले आप उस वस्तु को हाथ से छुएं..जिसे आप घर से बाहर निकालना चाहते हैं. इस प्रक्रिया के दौरान ये नोट करें कि क्या वो वस्तु आपको कोई सुखद अनुभव प्रदान करती है. अगर उस वस्तु को छूने भर से ही आपको खुशी का एहसास होता है तो आप उसे घर में रख सकते हैं. नहीं तो आप उसे किसी को दान में दे सकते हैं. 

कोनमारी पद्धति से घर की सफाई करने के लिए आप 5 चरणों का पालन कर सकते हैं. पहला चरण है कि आप पूरे घर की सफाई एक साथ करें. यानी ऐसा ना करें कि आज एक कमरा साफ कर लेते हैं और कल दूसरा कमरा साफ कर लेंगे. इसके लिए आपको वो सारा सामान एक जगह इकट्ठा करना होगा जिससे छुटकारा पाने को लेकर आप दुविधा में हैं. 

दूसरे चरण में आप खुद से ये सवाल करें कि आप अपने घर को भविष्य में कैसा देखना चाहते हैं. खुद से ये भी पूछें कि क्या आप एक खुले-खुले और साफ सुथरे घर में रहना चाहते हैं जहां फालतू के सामान की बजाय सिर्फ ज़रूरत भर की चीज़ें हो. तीसरे चरण में आप इन वस्तुओं को हाथ से छूकर देखें और उससे अपने जुड़ाव को महसूस करें..अगर आपको उस वस्तु को छूने पर खुशी का एहसास नहीं होता है.. तो आप उसे धन्यवाद कहकर बाहर कर सकते हैं या किसी को दान में दे सकते हैं. 

चौथे चरण में आपको ये देखना है कि एक ही तरह की वस्तु घर में अलग-अलग जगहों पर तो नहीं रखी गई है. उदाहरण के लिए कपड़े. हो सकता है कि आपने अपने कपड़ों को अलग-अलग अलमारियों में रखा हो या फिर Bed के Storage Space में भी कुछ कपड़े हो सकते हैं। इसलिए ये सारा सामान एक जगह इकट्ठा कर लें. जो कपड़े ज़रूरी है उन्हें आप जगह का ठीक से इस्तेमाल करते हुए रखें...ये आप कैसे कर सकते हैं हम आपको आगे बताएंगे लेकिन..इस तरीके से आप अपनी कपड़ों की अलमारी में बहुत सारी जगह बचा सकते हैं. 

पांचवे चरण में आपको ये ध्यान रखना है कि आप वस्तुओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर..उनका भविष्य तय करें. जैसे कपड़ों की अलग श्रेणी बनाएं, किताबों की अलग, कागज़ों की अलग, और अपनी यादों से जुड़े सामान की अलग. Marie Kondo कहती हैं कि बहुत सारा सामान हम इसलिए जमा करके रखते हैं..क्योंकि हमे लगता है कि एक दिन इसकी ज़रूरत पड़ सकती है। लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसा होता नहीं है

महात्मा बुद्ध सिद्धार्थ के रूप नें एक राजसी परिवार में पैदा हुए थे. उनके पास सभी तरह की सुख सुविधाएं , धन और वैभव था लेकिन जब उन्हें ये बात समझ आ गई कि मृत्यु इस वैभव को एक पल में छीन सकती है तो वो ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग पर निकल गए और वर्षों की कड़ी तपस्या के बाद बुद्धत्व को प्राप्त हुए और गौतम बुद्ध कहलाए लेकिन आज के ज़माने में ये ज़रूरी नहीं है कि आप धन,वैभव का त्याग करके ही बुद्ध के मार्ग पर चल सकते हैं. बल्कि आप दान करके भी आध्यात्म के मार्ग पर चल सकते हैं क्योंकि हो सकता है कि जिस वस्तु की आपको ज़रूरत नहीं है वो दुनिया में किसी का जीवन बदलने में सक्षम हो. 

आध्यात्मिक गुरु ओशो ने अपनी एक किताब में कहा है कि पैसा आपको आराम दिला सकता है लेकिन इससे आप सुखी हो जाएं ये ज़रूरी नहीं है. असुविधाओं के बीच दुखी होने से बेहतर है..सुविधाओं के बीच दुखी होना. वो खुद को अमीरों का गुरु कहते थे...क्योंकि उन्हें लगता था कि जिस व्यक्ति के पास खाने के लिए अन्न का दाना भी नहीं है उसकी पहली ज़रूरत..धन कमाना है... ध्यान अर्जित करना नहीं. 

हिंदू धर्म में भी पैसा कमाने को बुरा नहीं माना जाता..बल्कि इसे एक प्रकार का यज्ञ कहा जाता है..क्योंकि इस यज्ञ में आपको शारीरिक और मानसिक श्रम करना पड़ता है और इसके बदले में आपको जो प्राप्त होता वही आपकी आय होती है. इसलिए इस दिवाली पर लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पहले अपने घर की सफाई कीजिए. फिर अपने धन का मूल्य पहचानिए लेकिन अगर आप धनवान हैं तो इसे अहंकार में परिवर्तित ना होने दें .

7 SECRETS OF THE GODDESS यानी देवियों के सात रहस्य नामक किताब लिखने वाले लेखक.. देवदत्त पटनायक कहते हैं कि लक्ष्मी का स्वभाव इधर से उधर विचरण करना है इसलिए लक्ष्मी के पीछे भागने की बजाय...उन्हें अपने घर में प्रवेश देना चाहिए. अपने घर में गंदगी फैलाकर...या गैरज़रूरी सामान का अंबार लगाकर आप लक्ष्मी के पीछे भागेंगे तो वो कभी आपके घर में प्रवेश नहीं करेंगी इसलिए इस दिवाली आप मां लक्ष्मी के लिए सिर्फ अपने घर के दरवाज़े ही ना खोलें..बल्कि उन्हें ये संदेश भी दें...कि आप वस्तुएं जमा करने के लालची नहीं हैं. आप पैसों का सम्मान करते हैं...लेकिन उसके पीछे नैतिकता को दांव पर लगाकर भागते नहीं हैं. अगर आप ऐसा करेंगे तो आप पर लक्ष्मी की कृपा बरसती रहेगी. 

Minimalism यानी कम चीज़ों के साथ सुखी जीवन जीने का तरीका कैसे आपको प्रसन्न,स्वस्थ्य और सफल बना सकता है..ये समझाने के लिए हमने आज एक विश्लेषण किया है। अगर आपको भी घर में 

गैरज़रूरी चीज़ें जमा करने की आदत है..तो आपको हमारा ये विश्लेषण ज़रूर देखना चाहिए. इस विश्लेषण के दौरान हमने Minimal-ism शब्द का कई बार इस्तेमाल किया. इसका अर्थ होता है बहुत कम चीज़ों के साथ जीवन जीना. यानी न्यूनतम सुख सुविधाओं वाला जीवन लेकिन आप सोच रहे होंगे कि क्या भारत के संदर्भ में भी Minimal-ism की धारणा फिट बैठती है ? क्योंकि आपको अपने आसपास शायद ज्यादा ऐसे लोग दिखाई नहीं देते होंगे जो कम सुविधाओं के साथ भी खुश हैं. क्योंकि भारत में लगभग हर व्यक्ति सफलता की सीढ़िया चढ़ते हुए...ज्यादा से ज्यादा सुख, सुविधाएं हासिल करना चाहता है और ज्यादा से ज्यादा वस्तुएं इकट्ठी करना चाहता है. वैसे ये विडंबना है कि जिस Minimalism यानी अपरिग्रह को लेकर दुनिया आज इतनी उत्साहित है वो भारत की ही देन है और हमारे धर्म ग्रंथ कई हज़ार वर्षों से इस मार्ग पर चलने का संदेश दे रहे हैं. लेकिन फिलहाल दुनिया में इसका सबसे ज्यादा पालन कर रहे हैं millennials. साधारणतया millennials उस पीढ़ी को कहा जाता है जिनका जन्म 1981 से 1996 के बीच हुआ है. इन्हें Generation Y भी कहा जाता है । लेकिन Generation Y के जीवन में आखिर ऐसा क्या हो रहा हो जो ये पीढ़ी अपरिग्रह जैसे सिद्धांतो का पालन कर रही है. हमने आज इस विषय पर कई लेखकों और विशेषज्ञों से बात की और हमारे Office में मौजूद millennials से भी ये समझने की कोशिश की...कि क्या वो भी कम वस्तुओं के साथ जीवन जीना पसंद करते हैं?

पहला कारण जो हमे समझ आया वो ये है कि अब कई लोग कम खर्च करके ज्यादा सुखी जीवन जीने में विश्वास रखते है. दूसरी वजह ये है कि कोनमारी जैसी पद्धतियों ने इस पीढ़ी को जीवन जीने का एक ऐसा तरीका सुझाया है..जिसमें खुश रहने के लिए वस्तुओं का संचय करने की ज़रूरत नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक तीसरी वजह ये है कि Minimal-ism का पालन करने वाले लोग मानते हैं कि घर में जितनी जगह खाली होती है मन में भी नए विचारों के लिए उतनी ही जगह खाली हो जाती है. यानी अगर आपके आसपास गंदगी और गैरज़रूरी वस्तुओं का अंबार नहीं होता तो आप बेहतर सोच पाते हैं. चौथी वजह ये है कि अपरिग्रह का पालन करने वाले बहुत सारे लोगों को पर्यावरण की भी चिंता होती है और वो ये बात जानते हैं कि बहुत सारी वस्तुओं का निर्माण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर किया जाता है.

अमेरिका में हुए हैरिस पोल नामक सर्वे के मुताबिक पिछली पीढ़ी के मुकाबले 58 प्रतिशत millennials मानते हैं कि वो वस्तुओं से ज्यादा किसी अनुभव पर पैसा खर्च करना पसंद करेंगे लेकिन इसका मतलब ये है नहीं है कि नई पीढ़ी पैसे खर्च नहीं कर रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक millennials फिलहाल हर साल 14 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं और अपने पूरे जीवन काल में ये लोग 700 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करेंगे . भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी जेनरेशन Y की श्रेणी में आती है..यानी इस आबादी का ज्यादातर हिस्सा 35 वर्ष से कम का है. और अगर इस आबादी को ये बात समझ आ जाती है कि संसाधनों की मात्रा सीमित है...और इनका इस्तेमाल संभलकर करना चाहिए..तो फिर भारत का भविष्य बहुत उज्जवल हो सकता है.

आपको आपका पैसा कहां खर्च करना है..ये आप पर निर्भर करता है. आप चाहें तो इसे घर बनाने, कार खरीदने, करड़े खरीदने आदि पर खर्च कर सकते हैं. आप चाहें तो इसे अनुभव पर खर्च कर सकते हैं . और आप चाहें तो निवेश के ज़रिए अपने भविष्य को सुखी बना सकते हैं . लेकिन आप जो भी करें..ये ध्यान रखकर करें कि लक्ष्मी चलायमान है. यानी लक्ष्मी को एक जगह ठहरना पसंद नहीं है. इसलिए आप भी जब भी खूब सारा पैसा कमाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि आपके ज़रिए किसी और का भला हो रहा है या नहीं ? पैसा अर्थव्यवस्था का केंद्र बिंदू है और अगर आपका पैसा चलायमान नहीं है यानी दूसरे को सुख पहुंचाने में उसका कोई योगदान नहीं है..तो आपका पैसा व्यर्थ है .

भारत में प्राचीनकाल में बड़े बड़े राजा गौदान किया करते थे. और उसका कारण सिर्फ इतना था कि गाय के ज़रिए एक पूरी अर्थव्यवस्था चलती थी, कई लोगों को रोज़गार मिलता था . इसलिए अपने धन के एक हिस्से का इस्तेमाल दूसरों को खुशी देने के लिए ज़रूर कीजिए . लक्षमी की बात हो रही है तो हम आपको उनसे जुड़ी एक दिलचस्प जानकारी भी दे देते हैं . करीब 2 हज़ार साल पहले इटली के Vesuvious ज्वालामुखी में विस्फोट हो गया था . इस विस्फोट की वजह से पोंपोई शहर मलबे और लावे के नीचे दब गया था . 1938 में जब इस इलाके की खुदाई हुई..तो यहां से लक्ष्मी की एक मूर्ती मिली..जिसे पोंपोई लक्ष्मी के नाम से जाना जाता है. ये भारत और रोम के हज़ारों वर्ष पुराने रिश्तों का भी प्रतीक है और इस बात का भी कि व्यापार और व्यवसाय में मां लक्ष्मी को हमेशा से जगह मिली है .

अब आपको आखिर में ये भी समझना चाहिए कि घर की सफाई के साथ साथ मन की सफाई भी ज़रूर है . जिस तरह घर में मौजूद गैर ज़रूरी सामान से छुटकारा माना चाहिए..उसी तरह मन में मौजूद दूषित विचारों को भी बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए . आप Minimal-ism के Concept का इस्तेमाल मन की शांति के लिए भी कर सकते हैं. यानी अपने जीवन में और मन मस्तिष्क में सिर्फ उन्हीं लोगों को जगह दें..जो आपको सकारात्मक बनाते हैं. आपमें ऊर्जा का संचार करते हैं और आपमें आत्मविश्वास बढ़ाते हैं. नकारात्मक, और लालची किस्म के लोगों को आप अपने जीवन, अपने मन और अपने दिल से बाहर निकाल दें . इसलिए आप ये प्रण लीजिए कि आने वाले साल में आप अपने घर से गैर ज़रूरी सामान और मन से दूषित विचार ज़रूर निकाल देंगे.