ZEE जानकारी: JNU के कुछ छात्रों ने वैचारिक तौर पर अभी भी नहीं छोड़ा धारा 370 का साथ

कश्मीर से धारा 370 हटे, करीब 4 महीने बीत चुके हैं लेकिन JNU के कुछ छात्रों ने वैचारिक तौर पर अभी भी धारा 370 का साथ नहीं छोड़ा है. ऐसा लगता है कि धारा 370 अब जम्मू-कश्मीर से हटने के बाद JNU में लग गई है.

ZEE जानकारी: JNU के कुछ छात्रों ने वैचारिक तौर पर अभी भी नहीं छोड़ा धारा 370 का साथ

DNA में आज हम सबसे पहले JNU के मुट्ठी भर छात्रों द्वारा की जा रही वैचारिक धक्का-मुक्की, नारेबाज़ी और उनकी असहनशीलता का विश्लेषण करेंगे. कश्मीर से धारा 370 हटे, करीब 4 महीने बीत चुके हैं लेकिन JNU के कुछ छात्रों ने वैचारिक तौर पर अभी भी धारा 370 का साथ नहीं छोड़ा है. ऐसा लगता है कि धारा 370 अब जम्मू-कश्मीर से हटने के बाद JNU में लग गई है. ये वो छात्र हैं जो धारा 370 से पहले वाले कश्मीर का Blu Print. JNU में लागू करना चाहते हैं. इसलिए ये लोग JNU के परिसर से अभिव्यक्ति की आज़ादी की बड़ी बडी बातें तो करते हैं लेकिन अगर कोई इनसे सवाल पूछता है तो ये लोग नारेबाज़ी और धक्का-मुक्की पर उतारू हो जाते हैं, Zee News-Go Back के नारे लगाते हैं और यहां तक कि महिला पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी करते हैं.

JNU के छात्र इन दिनों फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन की कवरेज के लिए Zee News की दो टीमें भी वहां मौजूद थीं. इनमें हमारी संवाददाता पूजा मक्कड़ और कविता शर्मा शामिल थीं लेकिन Zee News के पत्रकारों को JNU परिसर में देखकर प्रदर्शन कर रहे छात्र आपे से बाहर हो गए. ये लोग Zee News के पत्रकारों के साथ बहस करने लगे, हमारे कैमरों को धक्का देने लगे. ज़ी न्यूज़ के खिलाफ नारेबाज़ी करने लगे और अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगे .यानी अभिव्यक्ति की आज़ादी को ये छात्र सिर्फ अपने लिए रिज़र्व रखना चाहते हैं. 

साफ है कि JNU के इन छात्रों को अफज़ल प्रेमी गैंग बनाने की तो आज़ादी चाहिए, पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने की भी आज़ादी चाहिए, भारत के टुकड़े-टुकड़े वाले नारे भी इनके लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी हैं, इन्हें पत्रकारों के साथ बदतमीज़ी करने की भी आज़ादी चाहिए लेकिन ये लोग मीडिया के उस हिस्से को कोई आज़ादी नहीं देना चाहते हैं जो इनका सच दिखाता है. 

भारत महात्मा गांधी का देश है. विवेकानंद जैसे महापुरुषों का देश है. इन लोगों ने देश के सहनशीलता और आदर्शवाद के रास्ते पर चलने की सीख दी थी .लेकिन बहुत सारे लोग इस देश को अफज़ल गुरु का देश बनाना चाहते हैं,याकुब मेमन का देश बनाना चाहते हैं और देश को अलगाववादियों की सोच पर चलाना चाहते हैं लेकिन देश की एकता और अखंडता इनसे बर्दाश्त नहीं होती और जब Zee News जैसा चैनल अपने कैमरे में इनका सच रिकॉर्ड करता है तो ये छात्र कैमरा को भी निशाना बना लेते हैं. 

Zee News ने फरवरी 2016 में आपको सबसे पहले दिखाया था कि कैसे JNU में कुछ छात्र देश विरोधी नारेबाज़ी कर रहे थे और भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की बात कर रहे थे. हमारे द्वारा दिखाया गया वो सच JNU के कुछ छात्र पचा नहीं पाए और इन छात्रों ने Zee News को अपने जीवनभर का शत्रु मान लिया .वैसे हमे लगता हैं कि जो देश का शत्रु है. वो Zee News का दोस्त हो भी नहीं सकता. इसलिए हमें JNU के इन छात्रों के इस व्यवहार पर कोई हैरानी नहीं है.

JNU के कुछ छात्र Zee News की महिला पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की कर रहे थे और उन्हें कैंपस से बाहर निकल जाने के लिए कह रहे थे जबकि हमारे पास इस कवरेज के लिए JNU प्रशासन की इजाजत थी लेकिन जिस तरह हर शहर में एक मोहल्ला या इलाका ऐसा होता है...जहां पुलिस भी जाने से डरती है. ठीक उसी तरह ये छात्र JNU को भी वैसा ही मोहल्ला बनाने की कोशिश कर रहे हैं. आपने भी गौर किया होगा कि शहर के कुछ इलाके ऐसे होते हैं जहां कानून-व्यवस्था का राज नहीं चलता .वहां सिर्फ एक खास समुदाय का कब्ज़ा होता है. इन मोहल्लों में कुछ विशेष लोगों की गुंडागर्दी चलती है और अगर आप इस इलाके में फंस गए तो फिर पुलिस भी आपकी मदद नहीं कर पाती है. कुछ छात्र JNU को भी ऐसा ही मोहल्ला बनाना चाहते है जहां मीडिया नहीं घुस सकता. पुलिस नहीं घुस सकती और नियम कायदों के पालन का तो सवाल ही पैदा नहीं होता .आज जब हमारी टीम ने इन छात्रों से यही सारे सवाल किए तो ये छात्र  न्यूज़ के खिलाफ नारेबाज़ी करने लगे. 

जब Zee News को अपशब्द कहकर इनका दिल नहीं भरा तो ये मेरा नाम लेकर भी व्यक्तिगत हमले करने लगे. इन छात्रों की ये हरकतें देखकर हमें इस बात का यकीन हो गया है कि ये छात्र ज़ी न्यूज़ का भले ही कितना भी विरोध क्यों ना करें, ये छात्र छुप-छुपकर Zee News और DNA ज़रूर देखते हैं .और आज हमारे हाथ इस बात का सबूत भी लग गया. 

JNU के कुछ छात्रों ने असहनशीलता की सारी मर्यादाएं पार कर ली हैं. हमारी टीम ने आज JNU में करीब 12 घंटे तक मौजूद थी .इस दौरान हमें लगातार छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा. आज पूरे दिन कैसे JNU के इन छात्रों ने Zee News के पत्रकारों के साथ बदतमीज़ी की और हमारे खिलाफ आक्रमक रवैया अपनाया उसकी एक छोटी सी झलक आज आपको देखनी चाहिए. 

जेएनयू में 8 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं और आज के प्रदर्शन में करीब दो सौ छात्र शामिल थे .यानी कुल छात्रों में से सिर्फ ढाई प्रतिशत आज हुए प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे थे और इन मुट्ठीभर छात्रों की वजह से पूरे विश्वविद्यालय के माहौल पर असर पड़ता है. जेएनयू का नाम खराब होता है. प्रतिदिन होने वाली इस राजनीति की वजह से बाकी छात्रों की पढ़ाई लिखाई प्रभावित होती है. आज प्रदर्शन करने वाले छात्र Hostel Fees के लिए 150 रुपये भी नहीं देना चाहते हैं और पिछले 5 दिनों से फीस बढ़ोत्तरी का विरोध कर रहे हैं. लेकिन आज जब ज़ी न्यूज की टीम वहां पहुंची तो प्रदर्शन करने वाले छात्र जेएनयू प्रशासन का विरोध करने के बदले हमारे खिलाफ खड़े हो गए. 

यहां पर हम आपको ये भी जानकारी देना चाहते हैं कि JNU Act में क्या लिखा है. JNU Act कहता है कि "यूनिवर्सिटी उन सिद्धांतों को बढ़ावा देगी जिनके लिए जवाहर लाल नेहरू ने अपने जीवन काल में संघर्ष किया. यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, जीवन के लोकतांत्रिक तरीके, अंतर्राष्ट्रीय समझ और समाज की समस्याओं के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देगी"

वर्ष 1966 में संसद ने JNU Act बनाकर इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी लेकिन आज JNU की हालत ये हो चुकी है कि कैंपस के अंदर अभिव्यक्ति की आजादी को छीनने की कोशिश होती है. इससे पहले भी यहां पर भारत की बरबादी और पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए गए थे और हम सब चुपचाप शांत होकर ये सब सहन कर रहे हैं लेकिन हम आपको फिर से कह दें कि ज़ी न्यूज़ ऐसी किसी देश-विरोधी बातों को सहन नहीं करेगा. अपने खिलाफ नारेबाज़ी पर रिपोर्ट दिखाना आसान बात नहीं है. हमारे पास दो विकल्प थे.. एक ये कि हम इसके ना दिखाते और दूसरा कि इस सच्चाई को आपके सामने लाते और हमने दूसरा विकल्प चुना.