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बगदादी के पास थे 3 ऑप्शन, कुत्तों से खुद को नोचवाता या गोलियों से छलनी होता या फिर...

माना जा रहा है कि बगदादी तक पहुंचने के लिए अमेरिका ने इराकी सेना और कुर्दिश विद्रोहियों की मदद ली और इसकी शुरुआत तब हुई जब कुछ वक्त पहले बगदादी की एक पत्नी और उस तक संदेश पहुंचाने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. इन दोनों से अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA को बगदादी के ठिकानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली. 

बगदादी के पास थे 3 ऑप्शन, कुत्तों से खुद को नोचवाता या गोलियों से छलनी होता या फिर...

आज हम सबसे पहले दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी अबु बक्र अल बगदादी की मौत का विश्लेषण करेंगे. बगदादी दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन ISIS का सरगना था. कहते हैं कि बुरे काम का नतीजा भी बहुत बुरा होता है और बगदादी के मामले में भी ये बात सही साबित हुई. अपने आतंकवादी संगठन ISIS के दम पर दुनिया भर में 50 हज़ार लोगों की जान लेने वाला अबु बक्र अल बगदादी शनिवार को अमेरिकी सेना द्वारा मारा गया. 

 

इस मिशन का नाम था Operation KAYLA MUELLER...KAYLA अमेरिका की एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थीं जिनका वर्ष 2013 में ISIS ने अपहरण कर लिया था और 2 वर्ष बाद उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी । इस ऑपरेशन के अंत में जब बगदादी चारों तरफ से घिर गया और उसके सामने बचने का कोई रास्ता नहीं था तो उसने अपने शरीर में बंधी सुसाइड बेल्ट का बटन दबाकर खुद को उड़ा दिया और इसी के साथ दुनिया के इतिहास के सबसे खतरनाक, निर्मम और अत्याचारी आतंकवादी का अंत हो गया. 

कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सेना को इस बात की खबर लगी थी कि बगदादी सीरिया के बरिशा नामक एक छोटे से गांव में छिपा हुआ है जिस घर में बगदादी छिपा था वो सीरिया और टर्की के बॉर्डर से कुछ ही किलोमीटर दूर था लेकिन Operation KAYLA MUELLER को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए तकनीक की नहीं बल्कि Human Intelegence यानी इंसानी बुद्धिमत्ता की मदद ली गई. 

माना जा रहा है कि बगदादी तक पहुंचने के लिए अमेरिका ने इराकी सेना और कुर्दिश विद्रोहियों की मदद ली और इसकी शुरुआत तब हुई जब कुछ वक्त पहले बगदादी की एक पत्नी और उस तक संदेश पहुंचाने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. इन दोनों से अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA को बगदादी के ठिकानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली. 

इसके बाद CIA ने इराक और कुर्द सेना के अधिकारियों के साथ मिलकर आसपास के इलाकों में कई जासूसों की तैनाती कर दी. ये लोग मिलकर बगदादी की हरकत पर नज़र रखने लगे. इनके ज़रिये ये भी पता लगाया गया कि उसका पैटर्न यानी तरीका क्या है. कई हफ्तों की मेहनत के बाद, आखिरकार सीरिया के इद्लिब प्रांत के बरिशा गांव में बगदादी की मौजूदगी की पुष्टि हो गई. इसके बाद शुक्रवार को रात 2 बजकर 30 मिनट पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन KAYLA MUELLER को मंजूरी दे दी. 

इसके बाद अमेरिकी सेना की स्पेशल ऑपरेशन यूनिट Delta Force को इस मिशन पर रवाना किया गया. इस स्पेशल ऑपरेशन यूनिट ने इराक के एक एयरफील्ड से बरिशा के लिए उड़ान भरी. वर्ष 2011 में जब पाकिस्तान के एबटाबाद में आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मारा गया था, तब अमेरिका की Navy Seals ने उस ऑपरेशन को अंजाम दिया था लेकिन इस बार बारी Delta Force की थी.  Delta Force को दुनिया के खूंखार आतंकवादियों को पकड़ने और उन्हें मारने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, इसलिए इस मिशन के लिए Delta Force के Commandos को चुना गया. 

इस ऑपरेशन में आठ Chinook और Apache Helicopters शामिल थे. इन Helicopters का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि ये दोनों....गोलीबारी करने में सक्षम है. जब अमेरिका के Navy Seals Commandos ने ओसामा बिन लादेन को मारा था, तब वहां लादेन और उसके BodyGuards की तरफ से कुछ खास प्रतिरोध नहीं किया गया था जबकि इस ऑपरेशन को अंजाम देते वक्त इन Special Commandos को भारी गोलीबारी का सामना करना पड़ा । लेकिन ये Commandos आतंकवादियों को मारते हुए आगे बढ़ते रहे. 

इसके बाद Delta Force ने इस Compound को खाली कराया । इस दौरान कुछ आतंकवादी मारे गए तो कुछ ने आत्मसमर्पण कर दिया. इस Compound में बगदादी के 11 बच्चे भी मौजूद थे जिन्हें वहां से सुरक्षित निकाल लिया गया. बगदादी की तरह उसकी दो पत्नियों ने भी सुसाइड बेल्ट पहनी हुई थी लेकिन इनमें विस्फोट नहीं हो पाया और और Delta Force के Commandos ने दोनों को मार गिराया. इसके बाद बगदादी अपने तीन बच्चों के साथ एक सुरंग में दाखिल हो गया. तब अमेरिकी सेना ने उसके पीछे एक K9.. Dog को छोड़ दिया.  K9 Dogs को इस तरह के ऑपरेशन के लिए खास तौर पर प्रशिक्षण दिया जाता है. बगदादी जिस सुरंग में दाखिल हुआ वो एक तरफ से बंद थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के मुताबिक Delta Force को सामने खड़ा देख...बगदादी चीखने और चिल्लाने लगा और वो बच्चों की तरह रो भी रहा था. 

इसके बाद जब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा तो उसने खुद को एक सुसाइड बेल्ट की मदद से उड़ा लिया. इस धमाके में उसके तीनों बच्चे भी मारे गए. बाद में अमेरिकी सेना ने बगदादी के शव का On the Spot DNA टेस्ट किया और जैसे ही इस बात की पुष्टि हो गई कि मारा गया आतंकवादी अबु बक्र अल बगदादी ही था. तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा पूरी दुनिया के सामने कर दी.

बगदादी की मौत के कुछ घंटों के बाद ही ISIS के प्रवक्ता और खूंखार आतंकवादी अबु हसन अल मुहाजिर को भी Commandos द्वारा की गई एक Raid में मार दिया गया. ये दोनों आतंकवादी ऐसे वक्त पर मारे गए हैं जब अमेरिका ने सीरिया से अपने ज्यादातर सैनिकों को वापस बुला लिया है. माना जा रहा है कि अबु ब्रक अल बगदादी को मारे जाने की योजना कई महीने पहले ही बना ली गई थी लेकिन सीरिया को लेकर अमेरिका की रणनीति में आए बदलाव के बाद इस ऑपरेशन को आनन फानन में अंजाम दिया गया. 

48 साल के बगदादी के मारे जाने की कई खबरें पहले भी आती रही हैं लेकिन अमेरिका की सरकार या सेना की तरफ से कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई. 2015 से लेकर 2019 के बीच करीब 18 बार बगदादी के मारे जाने या फिर बुरी तरह घायल होने का दावा किया गया लेकिन हर बार ये खबरें झूठी साबित हुईं लेकिन इस बार ऐसा नहीं है..क्योंकि खुद अमेरिका के राष्ट्रपति ने इसकी पुष्टि कर दी है. 

अमेरिका ने सीरिया जिस इलाके से अपने सैनिक वापस बुलाए हैं उनमें इद्लिब भी शामिल हैं. यहां पर अमेरिका... कुर्द लड़ाकों की मदद से ISIS के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था और कहा जा रहा है कि बगदादी के संदर्भ में कुर्द लड़ाकों द्वारा दी गई गोपनीय सूचनाओं के आधार पर ही इतिहास के सबसे बड़े आतंकवादी को मारने में सफलता मिली है. 

ISIS यानी Islamic State of Iraq and Syria की स्थापना वर्ष 2006 में की गई थी तब ISIS, आतंकवादी संगठन अल कायदा का ही एक हिस्सा हुआ करता था. वर्ष 2010 में अबु बक्र अल बगदादी को इसका प्रमुख बनाया गया. 3 से 4 वर्षों में बगदादी ने ISIS को दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन बना दिया. जब ISIS अपने चरम पर था तब इसके कब्ज़े में इराक और सीरिया के कई बड़े इलाके और शहर थे. उस वक्त इसका कुल क्षेत्रफल ब्रिटेन के क्षेत्रफल से भी ज्यादा था और इस आतंकवादी संगठन की कमाई भी अरबों-करोड़ों रुपये में थी. 

वर्ष 2014 से पहले बगदादी को The Invisible Sheikh यानी अदृश्य शेख कहा जाता था क्योंकि उसे कभी किसी ने नहीं देखा था. वर्ष 2014 में अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल की एक मस्जिद में पहली बार बगदादी को देखा गया. ये वीडियो मोसुल पर ISIS के कब्ज़े के तुरंत बाद जारी किया गया था. इस वीडियो के ज़रिए पहली बार दुनिया ने सबसे खतरनाक और Most Wanted आतंकवादी की तस्वीरें देखी लेकिन इसके बाद बगदादी एक बार फिर गायब हो गया और फिर उसे कभी किसी ने नहीं देखा. 

बगदादी खुद को मुसलमानों का मसीहा बताता था और उन्हें एक इस्लामिक राज्य के सपने दिखाता था लेकिन कल उसका और उसके खतरनाक सपनों का अंत हो गया. अमेरिकी सैनिकों के सामने पहले उसने खुद को बम से उड़ाया और फिर Delta Force ने Drones की मदद से उसके ठिकाने को भी पूरी तरह तबाह कर दिया. आज आपको भी बगदादी और उसके आतंकवादी संगठन के उत्थान और पतन का एक वीडियो विश्लेषण देखना चाहिए और समझना चाहिए कि इस्लामिक आतंकवादी कैसे.. जिहाद और इस्लामिक राज्य के नाम पर....लाखों लोगों का खून बहाते हैं, डर का साम्राज्य स्थापित करते हैं और अंत में एक कायर की मौत मारे जाते हैं. 

अबु बक्र अल बगदादी सीरिया के इद्लिब प्रांत के एक गांव में मारा गया. इस गांव से करीब 300 किलोमीटर दूर है पलमायरा. जहां वर्ष 2017 में सीरियाई सेना और ISIS के बीच भीषण लड़ाई चल रही थी. तब मैंने पलमायरा में उस युद्ध के मैदान को बहुत करीब से देखा था. तब कई बार ISIS के आतंकवादियों की गोलियां मेरे बहुत करीब से होकर निकली. वो लड़ाई कितनी मुश्किल थी और कैसे सीरियाई सेना के जवान अपने देश को आतंकवादियों से आज़ाद कराने के लिए लड़ाई लड़ रहे थे..वो आज आपको एक बार फिर से देखना चाहिए. 

पलमायरा के साथ मैं तब सीरिया के Homs शहर भी गया था और मैंने तबाही की निशानियों को बहुत करीब से देखा था. आज आपको भी एक बार फिर से ये देखना चाहिए कि कैसे आतंकवाद की वजह से हंसता खेलता एक शहर...खंडर में बदल गया. 

भारत ने जब आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल और Air Strike को अंजाम दिया था. तब हमारे देश के कई नेताओं और पत्रकारों ने हमारी ही सरकार से सबूत मांगे थे. इन लोगों को यकीन नहीं था कि भारतीय सेना ने आतंकवादियों और उनके ठिकानों को तबाह किया है. अमेरिका में भी कुछ लोग अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर वहां की सरकार से इस मिशन से जुड़े सबूत मांग रहे हैं. डोनल्ड ट्रंप ने जब बगदादी के मारे जाने का ऐलान करने के बाद....एक बेसबॉल मैच देखने पहुंचे तो वहां मौजूद कुछ दर्शकों ने उनके खिलाफ नारेबाज़ी शुरू कर दी कुछ लोग ट्रंप के खिलाफ Lock Him Up..यानी उन्हें गिरफ्तार करो के नारे लगाने लगे. ये सब बगदादी के मारे जाने की घोषणा के कुछ ही घंटों के बाद हो रहा था. 

अमेरिका में बहुत सारे पत्रकार और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता कह रहे हैं कि ट्रंप इस पूरे मिशन को बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रहे हैं. वो घटना की ज़रूरत से ज्यादा और झूठी व्याख्या कर रहे हैं. अब ट्रंप की तुलना बराक ओबामा के साथ की जा रही है. कहा जा रहा है कि ओबामा ने बहुत सभ्य तरीके के साथ ..ओसामा बिन लादेन के मारे जाने का ऐलान किया था..जबकि ट्रंप सिर्फ सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए ऐसा कर रहे हैं...क्योंकि वर्ष 2020 में अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने जा रहे हैं. 

ट्रंप प्रशासन की तरफ से एक तस्वीर जारी की गई है. ये तस्वीर तब की है जब इस मिशन को अंजाम दिया जा रहा था और ट्रंप सेना और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठकर इस Mission को White House के Situation Room Live देख रहे थे. इस तस्वीर में ट्रंप कुर्सी पर बैठे हैं और शायद किसी टीवी स्क्रीन की तरफ देख रहे हैं. उनके साथ बैठे अधिकारी और मंत्री भी एक साथ एक तरफ देख रहे हैं. इसी तरह 2011 में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ हुए ऑपरेशन को भी उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अधिकारियों और मंत्रियों के साथ Live देखा था लेकिन तब ओबामा किनारे रखी एक कुर्सी पर बैठे थे और उनके चेहरे पर तनाव साफ देखा जा सकता था. उस वक्त की अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन तो तस्वीर में बहुत ज्यादा चिंतित दिख रही थी. अब ट्रंप के विरोधी कह रहे हैं कि उन्होंने इस मिशन से जुड़ी तस्वीर किसी Photo Op की तरह खिंचवाई है. जबकि ओबामा के वक्त की तस्वीर बहुत अनौपचारिक थी. 

बगदादी के मारे जाने के बाद..सवाल ये उठ रहा है कि क्या इसके बाद ISIS भी खत्म हो जाएगा लेकिन सच ये है कि इतिहास में कभी किसी बड़े आतंकवादी के मारे जाने से उसका संगठन खत्म नहीं हुआ है.  2006 में अमेरिका ने अल कायदा के एक बड़े आतंकवादी अबु मसाब अल ज़रकावी को मार दिया था. तब अमेरिका को उम्मीद थी कि अलकायदा कमज़ोर हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद 2011 में जब ओसामा बिन लादेन मारा गया तब भी अमेरिका ने दावा किया था कि अब दुनियाभर से आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा लेकिन असल में ऐसा हुआ नहीं बल्कि ओसामा बिन लादेन के मरने से जो जगह खाली हुई, उसे अबु बक्र अल बगदादी ने भर दिया.  

ISIS ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी और इस मामले में अल कायदा को भी बहुत पीछे छोड़ दिया. ISIS इतना क्रूर आतंकवादी संगठन बन गया कि उसके सामने अल कायदा भी शरीफ लगने लगा. ISIS ने खुद को एक व्यक्ति के इर्द गिर्द नहीं रखा बल्कि उसने आतंकवादियों की भर्ती के लिए सभी आधुनिक तरीके अपनाए. सोशल मीडिया की मदद ली. लोगों की हत्याओं और अपरहण के Videos भी सोशल मीडिया पर डाले. इसके लिए बाकायदा एक संचार विभाग बनाया और दुनिया भर के देशों से जिहाद की भावना से प्रभावित युवाओं की भर्ती की । ISIS का आकार पहले के मुकाबले बहुत कम हुआ है. उसने सीरिया और इराक के जितने हिस्सों पर कब्ज़ा किया था उसमें से ज्य़ादातर को आज़ाद करा लिया गया है लेकिन सच ये है कि ISIS की विचारधारा का अंत अभी नहीं हुआ है. कुछ विशेषज्ञ तो ये भी कह रहे हैं कि ISIS ने शायद अपने उत्तराधिकारी का चुनाव कर रखा है और वो जल्द ही इसकी घोषणा कर सकता है. 

अमेरिका के कई बड़े अखबार अक्सर जब भारत में फैल रहे आतंकवाद की बात करते हैं...तो वो आतंकवादियों को आतंकवादी ना कहकर बंदूकधारी, लड़ाके या फिर विद्रोही कहते हैं. इनमें The Washington Post जैसे बड़े अखबार भी शामिल हैं । इन अखबारों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर भी भारत की कई बार आलोचना की है.

इनकी Headlines पढ़कर कई बार ऐसा लगता है कि जैसे ये भारत की 135 करोड़ जनता के प्रति नहीं बल्कि आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी रखते हैं लेकिन The Washington Post जैसे अखबार भारत के साथ ही नहीं बल्कि अपने देश के साथ भी ऐसा ही करते हैं। बगदादी के मारे जाने को लेकर Washington Post ने एक Headline प्रकाशित की है जिसमें बगदादी को austere religious scholar" यानी एक कठोर धार्मिक विद्वान कहा गया है. यानी The Washington Post को बगदादी में एक आतंकवादी नहीं बल्कि एक धार्मिक विद्वान नज़र आता है । एक ऐसा धार्मिक विद्वान जिसके हाथ में इस्लामिक स्टेट की कमान थी. अब आप अंदाज़ा लगाइये कि जब कुछ अखबार दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी को इतना सम्मान दे सकते हैं तो फिर भारत के खिलाफ काम करने वाले आतंकवादी इन्हें ज़रूर किसी मसीहा से कम नहीं लगते होंगे.