Zee जानकारी : डॉक्यूमेंट्री से भारत की छवि ख़राब करने वाले BBC को लगा झटका

कहते हैं मुसीबत ना तो बताकर आती है और ना ही वक्त देखकर आती है। DNA में अब मैं एक ऐसी ही मुसीबत की बात करुंगा। वैसे इस ख़बर में आपके लिए परेशान होने वाली बात नहीं है। बल्कि ये ख़बर आपको खुश कर देगी। क्योंकि भारत पर कीचड़ उछालने वाले पश्चिम मीडिया की दूषित सोच के ख़िलाफ हमारी एक ख़बर का बड़ा असर हुआ है।

Zee जानकारी : डॉक्यूमेंट्री से भारत की छवि ख़राब करने वाले BBC को लगा झटका

नई दिल्ली : कहते हैं मुसीबत ना तो बताकर आती है और ना ही वक्त देखकर आती है। DNA में अब मैं एक ऐसी ही मुसीबत की बात करुंगा। वैसे इस ख़बर में आपके लिए परेशान होने वाली बात नहीं है। बल्कि ये ख़बर आपको खुश कर देगी। क्योंकि भारत पर कीचड़ उछालने वाले पश्चिम मीडिया की दूषित सोच के ख़िलाफ हमारी एक ख़बर का बड़ा असर हुआ है।

ख़बर ये है, कि भारत की छवि ख़राब करने वाली डॉक्यूमेंट्री दिखाने के लिए BBC और उसके साउथ एशिया कॉरेसपॉडेंट जस्टिन रॉलैट पर 5 साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है। ये प्रतिबंध नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी यानी NTCA ने लगाया है, जो भारत में मौजूद सभी टाइगर रिजर्व्स को गवर्न करती है। NTCA ने एक मेमोरेंडम जारी करके सूचना दी है, कि BBC विदेश मंत्रालय के पास अपनी बनाई हुई डॉक्यूमेंट्री को, प्रसारित करने से पहले प्रिव्यू के लिए भेजने में नाकाम रहा। 

इसीलए सभी राज्यों के टाइगर रिजर्व्स में संबंधित अधिकारियों को ये कहा गया है, कि वो अगले 5 वर्षों तक BBC को किसी भी तरह की फिल्म शूट करने की इजाज़त ना दें। यानी काज़ीरंगा के साथ साथ देश के तमाम नेशनल पार्क्स में BBC की एंट्री पर प्रतिबंध लग गया है। आपको याद होगा कि 16 फरवरी को हमने BBC के पाखंड का विश्लेषण किया था। मैंने आपको जानकारी दी थी, कि कैसे BBC ने 'Our World: Killing for Conservation' नाम की डॉक्यूमेंट्री में काजीरंगा नेशनल पार्क में भारत सरकार की 'अवैध शिकार विरोधी रणनीति' की चर्चा की थी। 

BBC की इस डॉक्यूमेंट्री में ये बताने की कोशिश की गई थी, कि किस तरह से अवैध शिकार के नाम पर वहां के लोगों को मारा जा रहा है। डॉक्यूमेंट्री  में ये भी दावा किया गया था, कि वन रक्षकों को 'Shoot And Kill' का अधिकार दिया गया है और उस वक्त भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने BBC की इस रिपोर्टिंग को 'निहायत ही ग़लत' बताते हुए, उसके प्रोड्यूसर और कॉरेसपॉडेंट को काली सूची में रखने का सुझाव दिया था। 

हमारे पास जब ये ख़बर आई थी, उस वक्त हमने विस्तार से इसका विश्लेषण किया था। विदेशी मीडिया के पाखंड पर हमें बहुत सारी प्रतिक्रियाएं भी मिली थीं। इन्हीं प्रतिक्रियाओं में से एक प्रतिक्रिया थी। IPS अधिकारी S.N Singh की। उन्होंने हमसे जो जानकारियां शेयर की थीं, वो आपको भी हैरान कर सकती हैं। ज़ी न्यूज़ से बातचीत के दौरान STF के Additional Director General of Police, एस एन सिंह ने बताया, कि गैंडों को मारकर उनके सींगों को ऊंची कीमत पर बेचा जाता है।

गैंडों के एक सींग की कीमत क़रीब एक करोड़ 25 लाख रुपये है जबकि भारतीय बाज़ार में 1 किलो सोना क़रीब 29 लाख रुपये का बिकता है यानी गैंडे का सींग सोने से भी कई गुना ज़्यादा कीमती होता है। गैंडे के एक सींग का औसत वजन 4 किलो होता है यानी एक सींग 5 करोड़ रुपये की कीमत में बिकता है। इस सींग को म्यांमार ले जाया जाता है जहां इसकी कीमत 3 गुना बढ़ जाती है।

इस अपराध में कमाई की गुंजाईश काफी ज़्यादा है, इसलिए शिकारी गिरफ़्तार होने से भी नहीं घबराते। एस एन सिंह ने हमें ये भी बताया, कि Kaziranga National Park में ऐसे कई शिकारियों को पकड़ा गया है, जो जेल से छूटने के फ़ौरन बाद फिर से गैंडों का शिकार करने लगते हैं। यहां आपको ये भी समझना होगा, कि गैंडों का शिकार कैसे होता हैं। इसके लिए एक ग्रुप सबसे पहले इलाके की छानबीन करता है औऱ पता करता है, कि गैंडा किस जगह पर मौजूद है।

वो ये भी देखता है, कि गैंडों के आस-पास कोई फॉरेस्ट गार्ड ड्यूटी पर ना हो। इसके बाद शिकार करने वालों का शूटर ग्रुप अपना काम करता है। गैंडे की हत्या करने के बाद आगे का काम सींग काटने वाला व्यक्ति करता है। और इसके बाद गैंडे का सींग, पहले दीमापुर में बेचा जाता है और फिर देश से बाहर इसका व्यापार किया जाता है।

वर्ष 2014 में स्पेशल टास्क फोर्स के गठन के बाद से लेकर अब तक 235 से ज़्यादा शिकारियों को पकड़ा जा चुका है। 1 जनवरी 2016 के बाद से लेकर अब तक, STF और हथियारों से लैस शिकारियों के बीच एनकाउंटर के 6 मामले सामने आए हैं जिसमें 7 शिकारियों की मौत हुई। हालांकि, BBC ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया और दुनियाभर में भारत की ग़लत छवि पेश करने की कोशिश की है। 

दुनिया में भारत के सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों की कमी नहीं है। बातों को घुमा-फिरा कर पेश करने में और अपना एजेंडा चलाने में पश्चिमी देशों के कई मीडिया हाउसेज को महारत हासिल है। वो भारत को अपमानित करने का एक भी मौका हाथ से जाने नहीं देते। भारत चाहे कितनी भी मिसाइल बना ले चाहे कितने भी सैटेलाइट लॉन्च कर ले या फिर चांद और मंगल तक पहुंच जाए। पश्चिमी मीडिया हमेशा भारत को संपेरों का देश ही समझता है और ये सोचता है कि भारत में जो कुछ भी हो रहा है बुरा ही हो रहा है। ये सोच बदलनी चाहिए।

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