close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

ZEE Jankari: चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा चंद्रयान, अब होगी चांद की सतह पर लैंडिंग

क़रीब 30 मिनट तक चक्कर लगाने के बाद सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया है. लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है. क्योंकि, चांद की सतह पर Soft Landing करना इतना आसान नहीं है.

ZEE Jankari: चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा चंद्रयान, अब होगी चांद की सतह पर लैंडिंग

अब हम चंद्रयान 2 के गृह प्रवेश का विश्लेषण करेंगे. आज भारत का अंतरिक्ष मिशन यानी चंद्रयान Two, क़ामयाब होने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है. इसने चांद के आस-पास क़रीब 30 मिनट तक चक्कर लगाने के बाद सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया है. लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है. क्योंकि, चांद की सतह पर Soft Landing करना इतना आसान नहीं है.

चंद्रयान-Two में मुख्य रूप से तीन हिस्से हैं.
पहला Orbiter है, जो चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाएगा. यानी इसका काम अब शुरु हो चुका है. और ये 1 सितम्बर तक चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाकर चांद से जुड़ी अहम जानकारियां इकट्ठा करेगा. 1 सितम्बर की रात को, चंद्रयान Two, चांद के सबसे क़रीब होगा.

इसका दूसरा हिस्सा Lander है, जिसे विक्रम नाम दिया गया है और ये 2 सितम्बर को चंद्रयान Two से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा. चांद की सतह के नज़दीक पहुंचने पर Lander अपनी कक्षा बदलेगा और फिर वो सतह की उस जगह को Scan करेगा, जहां उसे उतरना है, क्योंकि इस मिशन की क़ामयाबी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Soft Landing है. Soft Landing तकनीकी Term है. इसका मतलब Landing की Technique से है. आसान भाषा में कहें, तो Soft Landing का मतलब हुआ, एक ऐसी Technique, जिससे Instruments को बिना किसी नुकसान के चांद की सतह पर Land कराया जा सके. Hard Landing वो होती है, जिसमें Landing होने पर Instruments को नुकसान होता है. इसीलिए कहा जा रहा है, कि मिशन की क़ामयाबी के लिए आखिरी के 15 मिनट बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे.

एक बार चांद की सतह पर Land करने के बाद, Lander से एक Rover निकलेगा. दूसरी भाषा में कहें, तो Landing के बाद Lander यानी विक्रम का दरवाजा खुलेगा और वो Rover यानी प्रज्ञान को Release करेगा. 27 किलोग्राम का Rover, 6 पहिए वाला एक Robot वाहन है. इसका नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब 'ज्ञान' होता है और अपने नाम के ही मुताबिक, ये चांद की सतह पर घूमते हुए जानकारियां इकट्ठा करेगा. चांद की सतह पर उतरने की तारीख होगी, 7 सितम्बर 2019...और वक्त होगा...रात एक बजकर 55 मिनट.

यानी 7 सितम्बर को भारत का चांद वाला सपना साकार होने वाला है। इसलिए अब आप दिल पर हाथ रखकर, 7 सितम्बर तक का इंतज़ार कीजिए और पृथ्वी से 3 लाख 84 हज़ार किलोमीटर दूर मौजूद चांद को धीरे-धीरे अपने क़रीब आते महसूस कीजिए.