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ZEE जानकारी: होली पर रंगों की बौछार बनाती है हमें ऊर्जावान

होली का त्योहार ऐसे वक्त पर आता है, जब मौसम में बदलाव की वजह से शरीर पर आलस्य हावी होता है.

ZEE जानकारी: होली पर रंगों की बौछार बनाती है हमें ऊर्जावान

होली का नाम सुनते ही एक बात जो सबसे पहले दिमाग में आती है, वो ये है है कि होली रंगों और पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ त्योहार है. लेकिन आज हमारे पास आप सभी के लिए होली के त्योहार से जुड़ी कुछ अलग से जानकारियां भी हैं.  

होली का त्योहार जिस मौसम में आता है उसे ऋतु संधि काल कहा जाता है यानी एक ऐसा समय जब सर्दियां जा रही होती हैं और गर्मियां आ रही होती हैं. इस दौरान हमारे वातावरण और हमारे शरीर में जीवाणुओं की मात्रा काफी बढ़ जाती है. इसलिए हमारी परंपराओं में रंग खेलने से पहले होलिका दहन किया जाता है. अलग-अलग समूहों में बड़े पैमाने पर किया गया होलिका दहन, वातावरण और शरीर में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को खत्म करने में मदद करता है.

होली का त्योहार ऐसे वक्त पर आता है, जब मौसम में बदलाव की वजह से शरीर पर आलस्य हावी होता है. बार-बार नींद आती है और थकावट महसूस होती है. वैज्ञानिक इसे सिजनल एफेक्टिड डिसऑर्डर यानी SAD कहते हैं. सिजनल एफेक्टिड डिसऑर्डर मौसम में बदलाव के साथ इंसान को आलसी और उदास बना देता है. लेकिन होली पर रंगों की बौछार और मस्ती इस आलस्य को दूर भगाने में मदद करती है और ये त्योहार हमें दोबारा ऊर्जावान बना देता है.

वैज्ञानिक मानते हैं कि होली के मौके पर शोर-शराबा, गीत-संगीत, और नृत्य मौसम के बदलाव से पैदा हुई थकान को भगाने के तरीके हैं. होली में जिन रंगों का इस्तेमाल होता है वो इंसान के दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

अमेरिका की कलर एसोसिएशन की रिसर्च के मुताबिक लाल, पीला, नीला और हरा रंग इंसान के दिमाग पर अच्छा असर डालते हैं. इसलिए होली पर इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक रंग और गुलाल भी तनाव घटाने का काम करते हैं.

हमें पूरी उम्मीद है कि ये जानकारियां आपको अच्छी लगी होंगी. आप इसे अपने परिवार के साथ शेयर कीजिए और अगले साल का इंतज़ार कीजिए. जब रंगों का ये त्योहार एक बार फिर आपके जीवन को ढेर सारे रंग देगा.