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ZEE जानकारी: TikTok के जरिये आतंकवाद की विचारधारा का समर्थन!

इन युवकों ने मिलकर कुछ Video बनाए. जिसमें झारखंड में Mob Lynching के एक मामले का इस्तेमाल आतंकवाद का समर्थन करने के लिए किया गया.

ZEE जानकारी: TikTok के जरिये आतंकवाद की विचारधारा का समर्थन!

भारत में आतंकवाद को बहुत सौम्य तरीके से महिमा मंडित किया जा रहा है. शायद आपको इस बात पर यकीन नहीं होगा लेकिन, Social Media पर Viral एक Video को देखने के बाद आपको बहुत आसानी से ये बात समझ में आ जाएगी. आजकल Social Media पर एक ही संदेश देने वाले कुछ Video Viral हैं. जिसमें बहुत सौम्य तरीके से आतंकवाद का प्रचार किया जा रहा है. Video में झारखंड में तबरेज़ अंसारी नामक एक व्यक्ति की मौत का इस्तेमाल करके आतंकवाद की विचाराधारा का समर्थन किया जा रहा है. ये सीधे-सीधे Social Media पर आतंकवाद का Promotion करना है. आज हम DNA में आतंकवाद के इन Promoters को Expose करेंगे. 

Social Media आज लोगों को प्रभावित करने का एक बहुत बड़ा माध्यम बन गया है. देश में 50 करोड़ से ज्यादा Smart Phones हैं और हर Viral Video या Viral Message भारत के जनमानस पर बहुत गहरा असर डालता है. ऐसे में अगर किसी Video को Viral करवाकर आतंकवाद का महिमा मंडन किया जा रहा है तो, ये देश के खिलाफ बहुत बड़ी साज़िश है जिसको Decode करना बहुत ज़रूरी है. ये Video सोशल मीडिया के एक Platform, Tiktok से पूरे देश में Viral हो गया. कुछ और Social Media Platforms पर भी एक खास विचारधारा के लोगों ने इस Video का खूब प्रचार-प्रसार किया. 

इस Viral Video में पांच युवकों ने जो संदेश दिया है वो बहुत ज़्यादा आपत्तिजनक है. ये सभी युवक मुंबई के हैं. इन युवकों ने Tiktok पर एक Group बनाया था. इस Group में फैसल शेख नामक एक व्यक्ति भी शामिल था, जिसके 2 करोड़ 40 लाख से ज़्यादा Follwers थे. इन युवकों ने मिलकर कुछ Video बनाए. जिसमें झारखंड में Mob Lynching के एक मामले का इस्तेमाल आतंकवाद का समर्थन करने के लिए किया गया. इस Video में इन युवकों ने कहा कि "तुमने उस तबरेज़ अंसारी को मार तो दिया है लेकिन जब उसकी औलाद बदला ले तो ये मत कहना कि मुसलमान आतंकवादी है" ये सीधे-सीधे आतंकवाद की Branding है. इस तरह के Video से पूरे देश को सावधान रहना चाहिए.

आज हम पूरे देश को ये Video दिखाना चाहते हैं ताकी आप इस तरह नफरत फैलाने वाले लोगों को अच्छी तरह पहचान सकें. कई Social media Platforms पर इस वीडियो की शिकायत हुई. 8 जुलाई को मुंबई पुलिस ने भी इस मामले में लिखित शिकायत दर्ज की. मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने Video बनाने वाले फैसल शेख, हसनैन खान, अदनान शेख, फ़ैज़ बलूच और सधान फारुखी के खिलाफ IPC की धारा 153(A) और IPC की धारा 34 के तहत मामला दर्ज़ कर लिया है .अब तक पुलिस एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है. सभी आरोपी फरार हैं. 

Tiktok ने इस Video की शिकायत करने वालों को धन्यवाद दिया है. Tiktok India के मुताबिक इस Video ने Tiktok की Guidelines का उल्लंघन किया है और इस Video को हटा दिया गया है. Tiktok India ने लिखा है कि इस तरह के हर Video के खिलाफ हम कार्रवाई जारी रखेंगे.

विवादित Video में आरोपी युवकों ने तबरेज़ अंसारी का नाम लिया है. पिछले महीने झारखंड के सरायकेला में कुछ लोगों ने तबरेज़ अंसारी की पिटाई करके उसका एक Video बनाया था. लोगों ने तबरेज़ अंसारी की पिटाई क्यों की? इसकी वजह अब भी साफ नहीं है. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने घायल हालत में तबरेज़ को अपनी हिरासत में ले लिया था. दो दिनों के बाद तबरेज़ की तबीयत खराब हुई और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया. अस्पताल में ही तबरेज़ अंसारी की मौत हो गई. तबरेज़ की पिटाई के Video को सांप्रदायिक रंग देकर पूरे देश में Viral करवाया गया. जिसके बाद कई राज्यों में मुस्लिम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए. 

सूरत, अलीगढ़ और रांची में Mob Lynching के विरोध में प्रदर्शन किए गए. रांची में 5 जुलाई को कुछ मुस्लिम संगठनों ने जन आक्रोश सभा की. इस सभा के बाद भीड़ ने एक बस पर हमला किया था और यात्रियों के साथ मारपीट भी की थी. कुछ उपद्रवी बस में आग लगाने की भी योजना बना रहे थे लेकिन, उनको रोका गया. सूरत में भी पिछले हफ्ते इसी मामले में हिंसा हुई. विरोध प्रदर्शन के बीच में ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हो गई. जिसके बाद भीड़ हिंसक हो गई. पुलिस ने इस हिंसा में शामिल 40 लोगों को गिरफ्तार किया है.

देश में ये स्थिति इसलिए हुई क्योंकि एक खास विचारधारा के लोगों ने तबरेज़ अंसारी के मामले को हिंदू-मुस्लिम का रंग देकर प्रचारित किया. इस तरह के Video को Viral करवाने लोगों का मकसद शायद ये दिखाना था कि अल्पसंख्यकों पर खतरा है. जिसके बाद हिंसा हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा. विवादित Video बनाने वाले इन युवकों के पीछे कोई बड़ा Gang भी हो सकता है. जिसका मकसद देश में अशांति फैलाना हो. इस मामले में Mob Lynching को आतंकवाद का औज़ार बनाने की कोशिश की गई है.

आतंकवादियों को Training के दौरान Mob Lynching के Video दिखाए जाते हैं. इसके पहले आतकंवादियों को तैयार करने के लिए अयोध्या में विवादित ढांचे को ढहाने की तस्वीरें भी दिखाई जाती थीं. लेकिन भारत में बहुत ही सौम्य तरीके से आतंकवाद को महिमा मंडित करने की कोशिश की गई है. हम उन सभी लोगों को शुक्रिया कहना चाहते हैं जिन्होंने इस Video की शिकायत Social Media Platforms पर की हैं. सभी लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि Social Media पर ऐसा कोई भी Video या Message, Share या Like नहीं करना चाहिए जो नफरत फैलाए. 

लेकिन आज हम पूरे देश में मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने वाले मसीहाओं से भी बात करना चाहते हैं. इस तरह के Video के खिलाफ उनकी जुबान पर ताला क्यों लग जाता है? आतंकवाद को प्रोत्साहित करने वाले इन Video के खिलाफ फतवा क्यों नहीं जारी किया जाता है? क्या ये देश के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने के खिलाफ नहीं हैं? अभी कुछ दिनों पहले फिल्म अभिनेत्री शबाना आज़मी ने कहा कि आज कल सरकार के खिलाफ बोलने को देशद्रोह कह दिया जाता है. बात सिर्फ शबाना आज़मी की नहीं है. इस तरह का Agenda चलाने वाला बुद्धिजीवियों का एक पूरा समूह है. जो कुछ मुद्दों पर अपनी बात कहते हैं लेकिन कुछ पर मौन व्रत धारण कर लेते हैं. 

सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काऊ संदेश फैलाने वाले इन लोगों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है. इनमें से एक आरोपी ने Social Media पर अपना माफीनामा Post किया है. इस तरह के लोगों की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए ताकी देश में एक कड़ा संदेश जाए और ऐसी घटनाएं कम से कम हों. Tiktok पहले भी कई विवादों में घिर चुका है. मद्रास हाईकोर्ट ने अप्रैल 2018 में Tiktok पर प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन बाद में ये प्रतिबंध हटा लिया गया. इसके अलावा इंडोनेशिया और बांग्लादेश में भी Tiktok पर प्रतिबंध लग चुका है. अमेरिका में Tiktok पर करीब 39 करोड़ रुपए का जुर्माना लग चुका है.