Zee जानकारी : बॉलीवुड स्टार का जानलेवा स्टारडम

Zee जानकारी : बॉलीवुड स्टार का जानलेवा स्टारडम

अब हम बॉलीवुड Celebrities के जानलेवा Stardom का एक विश्लेषण करेंगे। और हम इस बात का भी पता लगाएंगे कि आखिर क्यों हमारे देश की जनता हमेशा भीड़ का हिस्सा बनकर रहना चाहती है। क्यों हमारे देश के लोग भीड़ में शामिल होकर कभी नेताओं की रैलियों के चक्कर लगाते हैं तो कभी फिल्मी सितारों के प्रमोशन वाले जाल में फंस जाते हैं। क्या हमारे देश के लोग हमेशा एक भीड़ बनकर रहना चाहते हैं? एक ऐसी भीड़ जिसका ना खुद का दिमाग होता है..जिसके पास ना खुद की सोचने-समझने की क्षमता होती है और जो सिर्फ नेताओं और फिल्मी सितारों के पीछे आंखे बंद करके दौड़ना जानती है। भीड़ नेताओं और फिल्मी सितारों को अपना हीरो मानती है। सिस्टम अक्सर भीड़ को रोकने में कामयाब नहीं रहता है। और नतीजा ये होता है कि भीड़ में शामिल कुछ लोग दूसरे लोगों के लिए विलेन बन जाते हैं। आज हम भीड़ में छिपकर लोगों की जान लेने वाले इन्ही खलनायकों की पहचान करेंगे और भीड़ की आड़ में अपनी गलती छिपाने वाले सिस्टम से भी सवाल पूछेंगे।

शाहरुख खान हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े अभिनेता हैं। देश में उन्हें Superstar का दर्जा हासिल है और यहां तक कि विदेशों में भी वो बेहद लोकप्रिय हैं। लेकिन फिर भी फिल्म रिलीज़ होने से पहले सभी फिल्मी सितारों की तरह शाहरुख खान को भी अपनी फिल्म का प्रमोशन करना पड़ता है। लेकिन इस बार उनका Film Promotion अपनी सारी हदें तोड़ते हुए.. देश की Essential Services यानी ज़रूरी सेवाओं के दायरे में घुस गया... इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई। 

शाहरुख खान अपनी आने वाली फिल्म का प्रमोशन कर रहे थे और इसके लिए उनकी टीम ने मुंबई से चलने वाली अगस्त क्रांति एक्सप्रेस को चुना। शाहरुख खान अपनी टीम के साथ कल शाम को 5 बजकर 40 मिनट पर इस ट्रेन में सवार हुए। शाहरुख खान को मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन से दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन तक सफर करना था । इस दौरान ये ट्रेन करीब 11 स्टेशनों पर रुकती है। इन्हीं में से एक स्टेशन है गुजरात का वडोदरा..शाहरुख खान जिस ट्रेन में सवार थे वो जब वडोदरा पहुंची तो शाहरुख को देखने के लिए वहां हज़ारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। ये ट्रेन ज्यादातर स्टेशनों पर सिर्फ 2 मिनट के लिए रुकती है। जबकि वडोदरा और कोटा 2 ऐसे रेलवे स्टेशन हैं..जहां इस ट्रेन का Stoppage टाइम 10 मिनट का है। जब ये ट्रेन वडोदरा पहुंची तो उससे कई घंटे पहले ही हज़ारों लोगों की भीड़ रेलवे स्टेशन पर पहुंच चुकी थी । भीड़ को काबू में करने के लिए प्लेटफॉर्म पर कई पुलिस कर्मी भी मौजूद थे । 

लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वहां भगदड़ मच गई और इसी भगदड़ के बीच 45 वर्ष के फरीद खान नीचे गिर गए। फरीद ख़ान दिल के मरीज़ थे..भीड़ की वजह से उनका दम घुटने लगा..लोग उनके ऊपर से गुजरने लगे । घायल फरीद को अस्पताल ले जाया गया..लेकिन उनकी मौत हो गई । ((फरीद के घरवालों का कहना है कि वो अगस्त क्रांति एक्सप्रेस में सवार अपनी रिश्तेदार से मिलने गए थे। जो कि पेशे से एक पत्रकार हैं। और एक पत्रकार के तौर पर वो उसी कैंपन का हिस्सा थीं जिसके तहत शाहरुख ख़ान ट्रेन में अपनी फिल्म का प्रचार कर रहे थे। )) इस बीच भगदड़ की वजह से दो पुलिसकर्मी घायल भी हो गए । 

इसी ट्रेन में ज़ी न्यूज़ की संवाददाता भावना मुंजाल भी मौजूद थीं..जो सफर के दौरान शाहरुख ख़ान का इंटरव्यू ले रही थीं। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि कैसे लगभग हर स्टेशन पर शाहरुख ख़ान को देखने के लिए हज़ारों लोग मौजूद थे, लेकिन भीड़ को काबू करने के लिए पुख्ता इंतज़ाम नहीं किए गए थे।

शाहरुख खान और उनकी टीम इस दौरान सोशल मीडिया पर पूरी तरह से Active थी और बार बार सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को बताया जा रहा था कि ट्रेन किस  स्टेशन पर पहुंचने वाली है। सोशल मीडिया पर खबर मिलने के बाद लोगों की भीड़ सभी रेलवे स्टेशनों पर बढ़ने लगी और ज्यादातर जगह हालात बेकाबू होते हुए दिखे। लेकिन इस बीच शाहरुख और उनकी टीम अपने सफर के बारे में Fans को लगातार Update करते रहे । 

यहां आपको पता होना चाहिए कि  National Disaster Management Authority ने वर्ष 2014 में Crowd Managment को लेकर कुछ Guidelines जारी की थी। जिसके तहत इस तरह के आयोजनों से पहले आयोजक, स्थानीय प्रशान और पुलिस को स्थानीय मीडिया के ज़रिए आम लोगों को सूचित करना चाहिए। 

- लोगों को ये भी बताना चाहिए कि वो आयोजन स्थल पर क्या ले जा सकते हैं और क्या नहीं।

- आयोजन स्थल तक पहुंचने और वहां से बाहर निकलने के रास्ते के बारे में भी लोगों को बताया जाना चाहिए। 

- आयोजन स्थल पर पुलिस और Fire Brigade के नंबर्स भी लिखे होने चाहिए ताकि कोई अनहोनी होने की सूरत में फौरन कार्रवाई की जा सके।

- आयोजन स्थल तक पहुंचने के लिए और वहां से वापस जाने के लिए यातायात के क्या संसाधन मौजूद होंगे ये भी आम लोगों को बताना चाहिए। 

- लोगों को ये भी बताया जाना चाहिए कि उन्हें आयोजन स्थल पर क्या करना और क्या नहीं ताकि भगदड़ की स्थिति पैदा ना हो। लेकिन शाहरुख और उनकी टीम ने Promotion की जो रणनीति बनाई , और प्रशासन और रेलवे ने जो इंतज़ाम किए उन्हें देखकर नहीं लगता कि इन Guidelines का कोई पालन किया गया था।

- माना जा रहा है कि वडोदरा स्टेशन पर करीब 15 हज़ार लोग शाहरुख खान को देखने के लिए जमा हुए थे, अब आप सोचिए कि क्या इतने सारे लोगों ने प्लेटफॉर्म टिकट लिया होगा? 

- यानी वडोदरा स्टेशन पर हुए हादसे के लिए , शाहरुख खान, उनकी टीम, रेलवे, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और आम लोगों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

सवाल ये भी है कि आखिर फिल्मी सितारे प्रमोशन के नाम पर ऐसी जगहों का चुनाव क्यों करते हैं...जो आम लोगों की सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी हुई हैं। अब आप सोच कर देखिए कि अगर कल को कोई Film Star ये फैसला ले लेता है कि वो अस्पताल में जाकर प्रमोशन करेगा..तो फिर क्या स्थिति हो जाएगी..अगर कोई Film Star  स्टार ये सोचने लगे कि वो बसों पर चढ़कर या बीच सड़क पर ट्रैफिक रोककर अपनी फिल्म का प्रमोशन करेगा तो फिर आम लोगों का क्या होगा?

प्रचार के नाम पर हदों से बाहर सिर्फ फिल्मी सितारे ही नहीं जाते..बल्कि हमारे नेता भी भीड़ का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं। नेताओं को फूल मालाएं पहनाने के लिए लोगों में होड़ मच जाती है। नेताओं की रैलियों तक लोगों को पहुंचाने के लिए कई बार शहर की सभी प्राइवेट बसों को किराए पर ले लिया जाता है।  नेता रोड शो करते हैं..ट्रैफिक Jam लगाते हैं। एक तरह से आम लोगों को तंग करते हैं। लेकिन फिर भीड़ नेता का साथ नहीं छोड़ती । लोगों की परेशानी की परवाह किए बगैर भीड़ में शामिल लोग नेताओं की जय जयकार करते हैं । दरअसल ऐसी तस्वीरें सिर्फ ये बताती है कि भारत की 132 करोड़ की आबादी में से एक बड़ा हिस्सा सिर्फ भीड़ है। जिसका इस्तेमाल कोई भी..कभी भी, और किसी भी तरह अपने फायदे के लिए कर सकता है।

हमें लगता है कि चाहे कोई नेता हो या अभिनेता वो देश की जनता से बड़ा नहीं हो सकता। Acting  करना फिल्मी सितारों का काम होता है और इसके लिए उन्हें मोटी Fees मिलती है। राजनीति करना नेताओं का काम होता है जिसके बदले में उन्हें क्या क्या मिलता है ये बात आप भी जानते और समझते हैं। ऐसे में सवाल ये है कि नेताओं और अभिनेताओं की अहंकार तृप्ति यानी Ego Satisfaction के लिए भीड़ अपनी आहूति क्यों दे देती है? हमें लगता है कि बिना सोचे समझे फिल्मी सितारों और नेताओं के इर्द गिर्द इकट्ठा होने वाली भीड़ समाज का एक विकृत चेहरा है.. इसी तरह भीड़ का इस्तेमाल करके खुद को नायक समझने वाले नेता और अभिनेता.. असलियत में समाज के लिए खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं ऐसे लोगों को आज आइना दिखाना ज़रूरी है।