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ZEE जानकारी: भारत Electronic कचरा पैदा करने वाला दुनिया का 5वां सबसे बड़ा देश है

दुनिया के सबसे सस्ते Laptop, Desktop और Mobile Phones भारत में ही बेचे जाते हैं. और इनके खराब हो जाने या इनसे मन भर जाने पर.. लोग इन्हें अक्सर फेंक देते हैं. ये ऐसा कचरा है, जो धीमी मौत देता है, और आपको इसके बारे में कुछ पता नहीं चलता. 

ZEE जानकारी: भारत Electronic कचरा पैदा करने वाला दुनिया का 5वां सबसे बड़ा देश है

ये हमारे देश की एक अजीब विडंबना है...कि हम 'मेरा प्रदूषण...तेरा प्रदूषण और किसका प्रदूषण' करते रह जाते हैं. लेकिन कभी ये नहीं सोचते...कि ये हम सबके द्वारा फैलाया जा रहा 'प्रदूषण' ही है. अब ऐसी स्थिति पैदा हो गई है...कि हम प्रदूषण को लेकर भी Odd...Even वाली सोच तक सीमित रह गए हैं. यानी अपनी तकलीफ के हिसाब से प्रदूषण हमारे लिए Odd है....और अपनी सहूलियत के हिसाब से प्रदूषण हमारे लिए Even है.
लेकिन, आज Zee News देश की राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में, वायु प्रदूषण से जुड़ा एक ऐसा खुलासा करेगा, जिसे सुनकर Odd-Even का खेल, खेलने वालों को 440 Volt का झटका लग सकता है.

अगर हम आपसे ये कहें...कि International Criminal Police Organization....यानी Interpol...भारत में हो रहे प्रदूषण और उसे फैलाने वालों की खोज ख़बर ले चुका है, तो आपको इस पर भरोसा नहीं होगा. क्योंकि, आमतौर पर Interpol या CBI जैसी संस्थाएं....अपराधियों को खोजने और उन्हें पकड़ने का काम करती हैं. आप सोचेंगे कि Interpol का प्रदूषण से क्या लेना देना ? 

इसका जवाब मेरे 'हाथ' में है. ये Interpol द्वारा, 1 अगस्त 2014 को लिखी गई एक चिट्ठी है. ये चिट्ठी  Interpol के Environmental Security Sub-Directorate ने National Central Bureau (Interpol) New Delhi... को लिखी थी. हमारा आज का खुलासा...इस चिट्ठी में लिखी बातों के एक-एक सच को Decode करेगा. ये चिट्ठी भले ही 3 साल पुरानी हो...लेकिन इसमें दिल्ली NCR में हो रहे Environmental Crime के बारे में कई गंभीर बातें लिखी हैं. इस चिठ्ठी में जिस Electronic Waste का ज़िक्र किया गया है, उसकी तस्वीरें आज भी ज़िन्दा हैं और हमने बाकायदा Ground Reporting करके अपने कैमरे से प्रदूषण वाले इस पाप को रिकॉर्ड किया है. ये रिपोर्टिंग देखकर आपको पता चलेगा कि दिल्ली और NCR के आसमान में छाए.. ज़हरीले धुएं का मुजरिम कौन है? लेकिन इससे पहले मैं आपको इस चिट्ठी में लिखी कुछ मुख्य बातें बता देता हूं.

पिछले 4 दिनों से दिल्ली...हरियाणा...उत्तर प्रदेश और पंजाब की सरकारें...वायु प्रदूषण को लेकर तरह-तरह की बातें कर रही हैं. आप इसे Blame Game भी कह सकते हैं. लेकिन, इस बीच किसी का ध्यान उस Electronic Waste को जलाने वाले 'संगठित अपराध' पर नहीं गया...जो पिछले 4 दिनों से नहीं...बल्कि लगभग 11 साल से चल रहा है. और ये स्थिति तब है, जब एक साल पहले ही...National Green Tribunal ने दिल्ली से लगे इलाकों में E-Waste के कारोबार को बंद करने का आदेश दिया था. लेकिन, इसके बावजूद, सरकारें सोती रहीं.. भ्रष्ट सिस्टम पैसे खाता रहा,  Electronic Waste जलता रहा...प्रदूषण फैलता रहा और लोगों का दम घुटता रहा. 

गहरी नींद में सोई सरकार और भ्रष्ट सिस्टम की सोच का पूरा 'कच्चा-चिट्ठा' हमारे कैमरे पर रिकॉर्ड हो चुका है. हमारी Report देखने के बाद आज कई लोग.. चैन से सो नहीं पाएंगे. लेकिन, सबसे पहले आपको ये बताना ज़रुरी है....कि Electronic Waste होता क्या है...और इससे आपकी सेहत को क्या नुकसान पहुंचता है. 

आपको ये जानकर झटका लग सकता है, कि भारत Electronic कचरा पैदा करने वाला दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है. भारत में सिर्फ 2 प्रतिशत E-Waste ऐसा होता है, जिसे सालाना Recycle किया जाता है. वर्ष 2016 में भारत में 18 लाख Metric Tonnes से ज़्यादा E-Waste पैदा हुआ, जो दुनिया के कुल  E-Waste Production का 12 फीसदी था. एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2018 तक भारत में Electronic Waste का Production... 30 Lakh Metric Tonnes प्रति वर्ष तक पहुंच सकता है. 

Electronic कचरे में मुख्य तौर पर...Computer Monitor, Motherboard, Cathode Ray Tube, Printed Circuit Board, Mobile Phones और उसके Charger, Compact Disk, Headphone, Lcd, Plasma TV, AC और फ्रिज जैसे सामान होते हैं.  ये ऐसा E-Waste है, जिसमें एक हज़ार से ज़्यादा ज़हरीले पदार्थों का इस्तेमाल होता है. 

Electronic Machines को बनाते वक्त कई ज़हरीले केमिकल्स का प्रयोग होता है. इनमें Lead, Para, Cadmium और Arsenic शामिल हैं.  ये पर्यावरण में शामिल होकर ज़मीन, हवा और पानी को ना सिर्फ प्रदूषित करते हैं, बल्कि उन्हें ज़हरीला बना देते हैं.

अनुमान के मुताबिक, सिर्फ गाज़ियाबाद और नोएडा में ही छोटी-बड़ी करीब 1 हज़ार ऐसी जगहें हैं, जहां पर E-Waste को ग़ैर-कानूनी तरीके से जलाया जाता है. जलाने पर इनसे Lead Acid, और Battery Chemical निकलते हैं. इसके अलावा Insulated Copper Wire, Circuit, Pipe और दूसरे Hard Waste की तोड़फोड़ से खतरनाक Chemicals हवा में फैलते हैं.  Assocham के मुताबिक, Delhi-NCR में सालाना 50 से 55 हजार Metric टन, Electronic कचरा निकलता है, जो हर वर्ष 25 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है. इस कचरे के लगातार संपर्क में रहने से सिरदर्द, उल्टी और आंखों की बीमारियों के अलावा कैंसर तक हो सकता है.

अब आप सोच रहे होंगे...कि दिल्ली-NCR में जलाए जाने वाले E-waste में Interpol को इतनी दिलचस्पी क्यों थी? इसका जवाब है, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से भारत में आयात होने वाला Electronic कचरा.  कुछ मौकों पर Interpol के Agents को अपनी जांच में ये भी पता चला, कि European Union के देशों से रवाना होने वाले हर तीन Containers में से एक Container में, गैरकानूनी E-Watse मौजूद होता है. 

भारत में 42 फीसदी E-Waste अमेरिका से Import होता है, 30 फीसदी चीन से, 18 फीसदी Europe से और 10 फीसदी E-Waste....Taiwan, South Korea और Japan जैसे देशों से होता है. एक Study के मुताबिक, दुनिया के 49 देशों से इस तरह का कचरा भारत में आयात होता है. लेकिन, इसे Recycle करने के लिए हमारे देश में उचित प्रबंध नहीं हैं.

एक सच्चाई ये भी है, कि दुनिया के सबसे सस्ते Laptop, Desktop और Mobile Phones भारत में ही बेचे जाते हैं. और इनके खराब हो जाने या इनसे मन भर जाने पर.. लोग इन्हें अक्सर फेंक देते हैं. ये ऐसा कचरा है, जो धीमी मौत देता है, और आपको इसके बारे में कुछ पता नहीं चलता. 

2014 से ही National Green Tribunal ने Delhi-NCR के Electronic कचरे वाली समस्या की Monitoring की है. लेकिन, इसका दुखद पहलू ये है...कि तमाम निर्देशों के बावजूद आज भी ऐसे Dumping Yard हैं..जो बिना रोक-टोक के चल रहे हैं.

ये स्थिति तब है, जब Ministry of Environment, Forest and Climate Change ने E-Waste Management को लेकर नियम बनाए हुए हैं. नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान भी है. लेकिन भारत में लोग ज़ुर्माने का मुकाबला जुगाड़ से करते हैं और सारे नियमों और कानूनों का मज़ाक बनाकर आगे बढ़ जाते हैं. मानव सभ्यता का विनाश करने वाले इस संगठित अपराध में सब मिले हुए हैं....इसलिए, आज आपकी सेहत का ख्याल रखते हुए, ऐसे लोगों को Expose करना ज़रुरी है.

अब आपको पता चल गया होगा कि हमारे देश की सरकारें और Authorities... सुप्रीम कोर्ट और National Green Tribunal के निर्देशों का कितना सम्मान करती हैं. ऐसे ही चलता रहा तो... आज जिस तरह भारत के महानगरों में कूड़े के पहाड़ दिखाई देते हैं.. उसी तरह आने वाले समय में E-Waste के पहाड़ दिखाई देने लगेंगे. और हमारा देश पूरी दुनिया के लिए E-Waste का Dustbin बन जाएगा.

बढ़ती हुई जनसंख्या, बढ़ते शहरीकरण और Consumer Culture की वजह से भी E-Waste काफी बढ़ गया है. और ये ख़तरा सिर्फ भारत के लिए ही नहीं..बल्कि ये पूरी दुनिया के लिए किसी संकट से कम नहीं है. दुनिया के कई देश अपने तरीके से इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं. हमें लगता है, कि भारत को भी तत्काल प्रभाव से कदम उठाना चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि देश में Electronic कचरे का पहाड़ इतना बड़ा हो जाए कि इसे हटाना नामुमकिन हो जाए.