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Zee Jankari: प्रदूषण में गायब होती दिल्ली का DNA टेस्ट

हम इस विश्लेषण को आगे बढ़ाएं..उससे पहले आपको आज ये समझ लेना चाहिए कि फिलहाल दिल्ली-NCR और पूरे देश में प्रदूषण के हालात क्या हैं

Zee Jankari: प्रदूषण में गायब होती दिल्ली का DNA टेस्ट

हम इस विश्लेषण को आगे बढ़ाएं..उससे पहले आपको आज ये समझ लेना चाहिए कि फिलहाल दिल्ली-NCR और पूरे देश में प्रदूषण के हालात क्या हैं...और इस दौरान आपको क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.कल देश के कई हिस्सों में छठ का त्योहार मनाया गया. ये त्योहार पूरी तरह प्रकृति को समर्पित है. इसमें श्रद्धालु पानी में खड़े होकर...सूर्य की पूजा करते हैं . यानी ये त्योहार जीवन देने वाले प्राकृतिक स्त्रोतों को सम्मान देने का त्योहार है. लेकिन विडंबना ये है कि देश भर की जिन नदियों में उतरकर सूर्य को अर्घ्य

दिया गया..उनमें में ज्यादातर नदियां अंतिम सांस ले रही हैं . दिल्ली में यमुना नदी की हालत तो इतनी खराब हो चुकी है कि लोग ज़हरीले झाग वाले पानी में उतकर पूजा कर रहे थे. दूर से देखने पर ऐसा लग रहा था जैसे ये नदी बर्फ से ढकी है और इसलिए लोग इस नदी में उतरकर Selfies भी ले रहे थे . लेकिन सच ये है कि यमुना नदी प्रदूषण के आगे लगभग निर्जीव हो चुकी है यानी उसमें ज़रा भी प्राण नहीं बचे और ये ज़हरीला झाग..इसी की गवाही दे रहा है. पुराणों में यमुना नदी को यमराज की बहन माना गया है. लेकिन फिलहाल यमुना की हालत खुद किसी यमलोक जैसी हो चुकी है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्ष 1957 में London से होकर गुज़रने वाली Thames नदी को Biologically मृत घोषित कर दिया गया था . यानी Thames नदी में Oxygen बिल्कुल समाप्त हो चुकी थी और उसमें मछलियां और जीव जंतु नहीं बचे थे . लेकिन ब्रिटेन में Thames को बचाने के लिए मुहिम छेड़ी गई . स्थानीय सीवेज सिस्टम में सुधार किया गया . 1970 और 1980 के दशक में Thames की सफाई के लिए कई अभियान चलाए गए . फैक्ट्रियों द्वारा इस नदी में जहरीले पानी की निकासी पर नियंत्रण किया गया . अब Thames नदी फिर से जीवित हो चुकी है और पूरा ब्रिटेन इस पर गर्व करता है .

अब आप सोचिए..हमारे देश में लोग नदियों को देवी मानते हैं और इन्हें अपने पापों का उद्धार करने का माध्यम समझते हैं . लेकिन इन देवियों की रक्षा कोई नहीं करना चाहता और कोई इन्हें फिर से जीवित करने में कोई रूचि नहीं दिखाता . जबकि जो देश नदियों को सिर्फ नदी मानते हैं, वो उन्हें प्राकृतिक संसाधनों की तरह इस्तेमाल करते हैं और उनका सम्मान करते हैं.

हमारे देश में ना तो हम नदियों को सम्मान देते हैं और ना ही अपने पर्यावरण की रक्षा करना चाहते हैं . यही वजह है दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने भी नाराज़गी जताई है .

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि दिल्ली में हालात हर साल खराब होते जा रहे हैं. और कोई इसे लेकर कुछ नहीं कर रहा . सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ये हालात हर साल सामने आते हैं . और सभ्य देशों में इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता . सुप्रीम कोर्ट ने बहुत सख्त लहज़े में कहा कि दिल्ली में कोई कमरा रहने लायक नहीं रह गया है. यहां तक कि लोग घरों में भी सुरक्षित नहीं है और लोग प्रदूषण की वजह से अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष खो रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि किसान अपनी आजीविका के लिए दूसरों की जान नहीं ले सकते . सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अगर किसान पराली जलाते हैं तो उनसे कोई सहानुभूति नहीं जता सकता . सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पाबंदी के बावजूद पराली जलाए जाने की घटना होती है तो इसके लिए गांव के सरपंच से लेकर...राज्य के संयुक्त सचिव तक की जिम्मेदारी होगी .

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को अदालत में हाज़िर होने के लिए कहा है .

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पाबंदी के बावजूद निर्माण कार्य करने वालों पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए और जो लोग सड़कों पर कूड़ा फेंक रहे हैं उनसे 5 हज़ार रुपये का जुर्माना वसूला जाए .

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की Odd-Even स्कीम पर भी सवाल खड़े किए हैं. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि Odd-Even योजना का मकसद क्या है ? कोर्ट के मुताबिक जब लोग Odd Even के दौरान Taxies, Auto Rikshaws और दोपहिया वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो फिर इससे प्रदूषण कैसे कम होगा . क्योंकि यातायात के इन साधनों से भी प्रदूषण होता है .

यानी प्रदूषण रोकने के लिए सरकारों द्वारा बनाई गई नीतियों पर देश की सर्वोच्च अदालत भी सवाल उठा रही है. लेकिन किसी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा . जज खांसते हुए...प्रदूषण भरे कमरों में फैसले लिख रहे हैं. लेकिन कोई इसके खिलाफ आंदोलन नहीं छेड़ रहा और सबकुछ ऐसे ही चलता जा रहा है .

दिल्ली में प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी ENVIRONMENT POLLUTION (PREVENTION & CONTROL) AUTHORITY यानी EPCA ने दिल्ली में Graded Response Action Plan यानी GRAP लागू कर दिया है . GRAP का मकसद दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में कमी लाना है . लेकिन दिल्ली अभी भी दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी हुई है. जबकि भारत के पड़ोसी देश चीन की राजधानी बीजिंग इसी GRAP की बदौलत प्रदूषण को हरा चुकी है . इसलिए आज आपको ये समझना चाहिए कि बीजिंग में GRAP कैसे सफल रहा .

दिल्ली में GRAP तब लागू किया जाता है..जब हालात बेकाबू हो चुके होते हैं. जबकि चीन में हर दिन प्रदूषण के स्तर पर नज़र रखी जाती है और इसका पूर्वानुमान भी लगाया जाता है .

दिल्ली में जब Air Quality Index 500 के पार जाता है...तो इमरजेंसी लागू कर दी जाती है. जबकि बीजिंग में अगर AQI लगातार दो दिनों के लिए भी 300 से ज्यादा होता है तो Red Alert जारी कर दिया जाता है .

बीजिंग में प्रदूषण का पूर्वानुमान लगाकर...कर्मचारियों की शिफ्टों में बदलाव किया जाता है और Odd-Even फार्मूला लागू होता है. यानी बीजिंग में Odd-Even को आनन फानन में लागू नहीं किया जाता बल्कि वहां इसके लिए पहले पूरी योजना बनाई जाती है और फिर इसे अमल में लाया जाता है .

आज से कुछ वर्ष पहले तक चीन की राजधानी बीजिंग की स्थिति भी दिल्ली की तरह थी . वहां अक्सर प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाया करता था . एक वक्त तो ऐसा था...जब बीजिंग को दिल्ली की ही तरह दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी होने का तमगा मिल गया था . लेकिन बीजिंग ने इस जानलेवा प्रदूषण के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता दिखाई और आज बीजिंग विश्न के 200 सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट से भी बाहर होने वाला है .

प्रदूषण पर नज़र रखने वाली स्विटज़रलैंड की कंपनी IQAir AirVisual के मुताबिक बीजिंग के वायु प्रदूषण में इस साल 20 प्रतिशत की कमी आई है और 2017 से लेकर अब तक बीजिंग की हवा में PM 2.5 कणों की मात्रा पहले के मुकाबले 33 प्रतिशत कम हुई है .

बीजिंग ने प्रदूषण के खिलाफ इस युद्ध की शुरुआत 2014 में की थी और सिर्फ 5 वर्षों में उसने इस युद्ध को लगभग जीत लिया है. लेकिन भारत में तो अभी ना सरकारें प्रदूषण को लेकर चिंतित हैं और ना ही आम लोग पर्यावरण के प्रति जागरुक हो पा रहे हैं .

हालांकि, प्रदूषण सिर्फ भारत की समस्या नहीं है.. प्रदूषण के बादल दुनिया के बड़े हिस्से पर छाए हुए हैं...और बढ़ता हुआ प्रदूषण दुनिया की बड़ी आबादी के लिए चुनौती बन गया है . लेकिन भारत में उत्तर भारत के राज्यों की हालत ज्यादा खराब है . इस इलाके में स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है इसे आपको इस Map के ज़रिए समझना चाहिए .

सबसे पहले आपको दिल्ली और उसके आस पास के इलाकों की तस्वीर दिखाते हैं . देश के इस हिस्से में ढाई करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं . यहां के नक्शे पर खतरे का रंग सबसे गहरा है... इसलिए यहां की हवा भी सबसे ज्यादा जहरीली है . दिल्ली के करीब नोएडा... गुरुग्राम... गाज़ियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों में AQI दिन में कई 400 के पार चला जाता है. वैसे Air Quality Index का ये औसत आंकड़ा है. इसलिए ये भी हो सकता है कि आपके शहर में AQI 500 या 600 से भी ज्यादा हो .

Air Quality Index में 401 से ज़्यादा के प्रदूषण में सांस लेना ख़तरनाक माना जाता है. अब आप खुद सोचिए कि जिन इलाक़ों में Air Quality Index 500 से ऊपर होगा.. वहां सांस लेने वाले लोगों की हालत क्या होगी ?

उत्तर प्रदेश के लखनऊ... कानपुर और वाराणसी सहित उत्तर भारत के कई शहर प्रदूषण की मार झेल रहे हैं . यानी उत्तर प्रदेश में आप कहीं भी हों प्रदूषण के अभिशाप से बच नहीं सकते यही हाल बिहार.. झारखंड... और बंगाल सहित देश के 11 राज्य के 60 करोड़ से ज्यादा लोगों का है. मध्य प्रदेश और आस पास के राज्यों में हालात थोड़े बेहतर हैं. लेकिन प्रदूषण अभी यहां भी बना रहेगा.

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना खतरनाक हो चुका है कि अब देश की राजधानी रहने लायक नहीं बची है . इसलिए हम कई बार ये बात कह चुके हैं कि शायद देश की राजधानी को बदलने का वक्त आ गया है और अगर दिल्ली को प्रदूषण से मुक्त नहीं किया गया तो ये शहर धीरे धीरे एक ऐसे गैस चैंबर में बदल जाएगा..जहां जीवन देने वाली सांस ही आपकी मौत की गारंटी बन जाएगी .

शायद यही वजह है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों के 40 प्रतिशत लोग इन शहरों को छोड़कर जाना चाहते हैं. ये सर्वे LocalCircles नामक एक वेबसाइट द्वारा 17 हज़ार लोगों पर किया गया है. इस सर्वे के मुताबिक 16 प्रतिशत लोग प्रदूषण वाले दिनों के दौरान शहर छोड़कर कहीं और चले जाना पसंद करते हैं. जबकि 13 प्रतिशत लोग मानते हैं कि उनके पास प्रदूषण झेलने के अलावा कोई उपाय नहीं है .

यानी प्रदूषण की वजह से दिल्ली और आसपास के शहरों के ढाई करोड़ लोगों में से 1 करोड़ लोग प्रदूषण से हार मान चुके हैं और अपने और अपने परिवार की खातिर यहां से दूर चले जाना चाहते हैं. लेकिन आपको ये जानकर दुख होगा कि भारत के कई बड़े शहरों के भी हालात बहुत अच्छे नहीं है .

आज हमने देश के 9 बड़े शहरों के AQI की जांच की और रात 8 बजे तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया . इन शहरों में दिल्ली, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, लखनऊ, बैंगलुरु, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम और पटना शामिल थे . इस विश्लेषण से हमे पता लगा कि आज की तारीख में सिर्फ तीन शहरों...पुणे, मुंबई और तिरुवनंतपुरम का AQI...100 से कम है . जबकि बाकी शहरों की हवा की गुणवत्ता सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है . यानी इतने बड़े देश में हम सिर्फ तीन बड़े शहरों को रहने लायक बना पाए हैं.