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ZEE Jankari: अवैध और अनैतिक Toll Tax वसूली का DNA टेस्ट

देश भर में वाहन चालकों से Toll Tax इसलिए वसूला जाता है, ताकि सड़कों को बेहतर बनाया जा सके और पर्यावरण की भी रक्षा की जा सके. ऐसा Toll Tax के साथ साथ Green Tax और Environment Compensation Charge वसूल कर किया जाता है.

ZEE Jankari: अवैध और अनैतिक Toll Tax वसूली का DNA टेस्ट

अब हम देश में चल रही अवैध और अनैतिक Toll Tax वसूली का एक ज़रूरी DNA टेस्ट करेंगे. 3 दिन बाद स्वतंत्रता दिवस आने वाला है. लेकिन सुरक्षित..और Traffic जाम से मुक्त सड़कों का पूर्ण स्वराज अब भी देश को नहीं मिल पाया है. आम लोग Toll Tax इसलिए चुकाते हैं, ताकि उन्हें अच्छी सड़कों पर सुरक्षित चलने का अधिकार मिल सकें. लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं है..यहां Toll Tax ना देने पर लोगों को अपनी जान भी देनी पड़ सकती है.

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि..दिल्ली में एक Commercial वाहन चालक की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई, क्योंकि उसने अवैध तरीके से की जा रही टोल टैक्स वसूली का विरोध किया था. ये ड्राइवर.. वाहन लेकर नोएडा से दिल्ली जा रहा था.. इस दौरान इसने MCD के टोल Plaza पर अपना वाहन नहीं रोका, जिसके बाद टोल प्लाज़ा के कर्मचारियों ने उसका का पीछा किया और ड्राइवर से जुर्माने के रूप में 14 हज़ार 600 रुपये मांगे. आरोप है कि जुर्माना ना चुकाने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, जिससे उसकी मौत हो गई. नोएडा पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है.

देश भर में वाहन चालकों से Toll Tax इसलिए वसूला जाता है, ताकि सड़कों को बेहतर बनाया जा सके और पर्यावरण की भी रक्षा की जा सके. ऐसा Toll Tax के साथ साथ Green Tax और Environment Compensation Charge वसूल कर किया जाता है.

लेकिन हमारे देश में ज्यादातर Toll Plaza अवैध वसूली का अड्डा बन गए हैं. आपने गौर किया होगा कि जब भी आप किसी Toll Plaza से गुज़रते हैं तो वहां का माहौल आपके मन में एक तरह का भय पैदा कर देता है. अगर आप Commercial वाहन चालक हैं तो फिर आप इस डर को और अच्छी तरह पहचानते होंगे. Toll वसूलने का Contract अक्सर प्राइवेट कंपनियों को दे दिया जाता है. ये कंपनियां 12-15 हज़ार की सैलरी पर जो कर्मचारी Hire करती हैं वो लोगों के साथ किसी Bouncer की तरह व्यवहार करते हैं. आप सोचिए अगर आप अपनी सुरक्षा के लिए कोई Private Bouncer या सुरक्षा कर्मी रख लें, और वो लोगों को धमकी दे, गाली दे और मारपीट करे, तो क्या इसे जायज़ ठहराया जा सकता है? ज़ाहिर है आपका जवाब ना में होगा. फिर इन कंपनियों के कर्मचारी आखिर ऐसा कैसे कर सकते हैं?

कानून के मुताबिक अगर कोई वाहन चालक, Toll नहीं चुकाता तो शिकायत के बाद उस पर कार्रवाई करने का जिम्मा पुलिस का होता है. लेकिन Toll Plaza के कर्मचारी, वाहनों का पीछा करते हैं और कानून को हाथ में लेकर अवैध तरीकों से Toll वसूलते हैं.

दिल्ली-NCR में कई Entry-Exit Points पर Commercial वाहन चालकों से Toll वसूला जाता है. प्राइवेट Cabs से दिल्ली-NCR में सफर करते हुए आपने भी ध्यान दिया होगा कि अक्सर Cabs को इन Points पर रोक लिया जाता है. यहां ड्राइवर को 100 से लेकर 150 रुपये तक का MCD Toll Tax देना पड़ता है. कैब कंपनियां ये राशि ग्राहकों के बिल में जोड़ देती हैं. यानी Traffic में भी आप ही फंसते हैं और अतिरिक्त पैसा भी आपको ही चुकाना पड़ता है. हम कानूनी रूप से वसूले जा रहे इस Toll Tax का विरोध नहीं कर रहे हैं. लेकिन इसकी आड़ में हो रही अनैतिक और अवैध वसूली पर सवाल ज़रूर उठा रहे हैं.

अवैध तरीके से Toll वसूली के आरोपों की सच्चाई का पता लगाने के लिए Zee Media ने आज Ground Reporting की है. हमने Toll Tax चुकाने वाले आम लोगों के साथ-साथ, Toll कर्मचारियों और Toll Company का भी पक्ष जाना. इस दौरान Commercial Drivers ने आरोप लगाए कि टोल ना चुकाने पर Toll Plaza की Flying Fleets उनका पीछा करती हैं. उनके साथ मारपीट की जाती है और उनके वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया जाता है.

जबकि दिल्ली में Toll वूसलने वाली कंपनी MEP infrastructure ने सफाई दी है कि उसके कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप गलत और बेबुनियाद हैं. ये बात सही है कि Toll कर्मचारी, MCD और टोल प्लाज़ा संचालित करने वाली कंपनी के आदेशों के मुताबिक ही Tax वसूलते हैं. लेकिन ये वसूली किसी भी वक्त लड़ाई झगड़े में बदल जाती है और लोगों की जान तक चली जाती है.

दिल्ली में दाखिल होने वाली डीज़ल गाड़ियों पर Environment Compensation Charge लगाया जाता है, जिसे आम बोल चाल की भाषा में Green Tax भी कहते हैं. लेकिन जब कोई ड्राइवर ये Toll नहीं चुकाता तो उससे 10 गुना जुर्माना वसूला जाता है. वाहनों पर इस तरह के Tax लगाए जाने का असली मकसद प्रदूषण में कमी लाना होता है. लेकिन Toll वसूलने वाली कंपनियों के लालच की वजह से वाहनों की संख्या तो कम नहीं होती.. बल्कि देश की सड़कें जाम जरूर हो जाती हैं. टोल वसूलने के लिए कर्मचारी सड़क के बीच में खड़े हो जाते हैं. गुंडागर्दी का सहारा लेते हैं. वाहन चालकों से बहस करते हैं और इसका नतीजा ये होता है कि वहां वाहनों की लाइन लग जाती है.

देश में कई टोल Roads ऐसी हैं जो इच्छामृत्यु मांग रही हैं. लेकिन प्राइवेट कंपनियों का लालच और सरकारी भ्रष्टाचार इन Toll Roads के लिए Life Support System का काम कर रहा है. इसलिए आज हमने देश की सड़कों का दम घोंटने वाली इस अवैध वसूली का एक On The Spot.. DNA टेस्ट किया है. जिसे आपको ज़रूर देखना चाहिए.

दिल्ली में Toll Tax Collection की ज़िम्मेदारी South Delhi Municipal Corporation की है. जबकि इसका कॉन्ट्रेक्ट.. MEP Infrastructure नामक कंपनी के पास है. कंपनी ने हर साल 1 हज़ार 206 करोड़ रुपये Toll वसूलने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए कंपनी ने प्राइवेट कर्मचारियों को Hire किया है. जो प्रतिदिन के Target के हिसाब से Toll वूसलते हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या इन कर्मचारियों को इसके लिए Training दी जाती है? और क्या कंपनी इन लोगों के व्यवहार पर नज़र रखती है?

देश के आम लोग कई Toll Plazas पर गुंडादर्दी का सामना कर रहे हैं. बावजूद इसके देश में Toll Collection पिछले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ गया है. वर्ष 2015 में National Highways Authority Of India को टोल टैक्स से 18 हज़ार 148 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. जबकि 2017-18 में ये बढ़कर 22 हज़ार 820 करोड़ रुपये हो गई. इस वक्त देश भर में करीब 500 Toll Plaza काम कर रहे हैं. इनमें से करीब 160 Toll Plaza प्राइवेट कंपनियां चला रही हैं, जबकि बाकी Public Private Partnership के तहत चल रहे हैं.

ये बात ठीक है कि Toll tax की मदद से ही Highways और देश की दूसरी सड़कों का रखरखाव होता है. लेकिन Toll Plaza पर Miss Management की वजह से लगने वाला जाम, देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ दिल्ली,मुबई, बंगलुरु और कोलकाता में ही ट्रैफिक जाम की वजह से हर साल 1 लाख 50 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान होता है. मुंबई में वाहनों का घनत्व सबसे ज्यादा है. मुंबई में प्रति किलोमीटर 510 Cars हैं... जबकि पुणे में प्रति किलो मीटर 359 Cars हैं. तीसरे नंबर पर कोलकाता है जहां प्रति किलोमीटर 319 Cars हैं। चेन्नई चौथे नंबर पर है जहां कारों का घनत्व 297 प्रति किलोमीटर है.

सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने का एक तरीका ये भी है कि Toll का Collection Electronic तरीके से किया जाए. National Payments Corporation of India के मुताबिक फिलहाल देश में सिर्फ 25 प्रतिशत वाहन ही Digital तरीके से Toll चुकाते हैं. National Electronic Toll Collection के मुताबिक देश भर के Toll Plazas पर हर रोज़ 8 लाख 62 हज़ार इलेक्ट्रॉनिक Transactions होते हैं. देश भर के 22 बैंकों ने 46 लाख FAST Tags जारी किए हैं. ये Tags देश भर के 496 Toll Plazas पर स्वीकार किए जाते हैं. इनमें... radio-frequency identification तकनीक का इस्तेमाल होता है.

इसके तहत जैसे ही आपका वाहन Toll Plaza पर पहुंचता है, आपके Account से Toll की रकम कट जाती है. डिजिटल तरीके से Toll कलेक्शन की वजह से Toll Roads पर लगने वाले ट्रैफिक जाम को कम किया जा सकता है. इसके अलावा हमारा सुझाव ये है कि डीज़ल और पेट्रोल गाड़ियों की खरीद और Fuel पर भी ये टैक्स लगाया जाना चाहिए. इससे Toll वसूली के दौरान होने वाले भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी और Toll Plaza अपने असली मकसद में कामयाब हो पाएंगे.