ZEE जानकारी: E-rickshaw सड़क पर अनुशासनहीनता वाला प्रदूषण फैला रहा है

ZEE जानकारी: E-rickshaw सड़क पर अनुशासनहीनता वाला प्रदूषण फैला रहा है

E-rickshaw....वातावरण के लिए भले ही अच्छा हो...लेकिन सड़क पर चलने वाले आम लोगों की ज़िंदगी के लिए हानिकारक है. सड़क दुर्घटनाओं पर आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2016 में 380 लोगों की मौत, E-rickshaw की वजह से हुई. इस रिपोर्ट के मुताबिक, E-rickshaw की वजह से सबसे ज़्यादा मौतें....तेलंगाना में हुई, जहां 71 लोग मारे गए. उत्तर प्रदेश में 66, हरियाणा में 56, दिल्ली में 20 और महाराष्ट्र में 47 लोगों की मौत E-rickshaw की वजह से हुई. यानी E-Rickshaw भले ही वातावरण को शुद्ध कर रहा हो...लेकिन आपकी और हमारी जान के लिए ये किसी खतरे से कम नहीं है.

हमने आपको बताया था...कि कैसे वर्ष 2015 में E-Rickshaw को Motor Vehicles Act में शामिल करने के लिए एक अध्यादेश लाया गया था. और बाद में इस Act में संशोधन कर दिया गया. जिसके तहत  E-Rickshaw को किसी Permit की ज़रूरत नहीं होती. हालांकि...राज्य सरकारें अगर चाहें...तो क़ानून के तहत ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन करने वाली ऐसी गाड़ियों पर कार्रवाई कर सकती है. उत्तर प्रदेश के Transport Commissioner ने मार्च 2017 में RTO और ट्रैफिक पुलिस डिपार्टमेंट को एक आदेश भी जारी किया था. जिसके तहत E-Rickshaw चलाने के लिए क़ानूनी तौर पर Licence के लिए Apply करना ज़रुरी है.

यानी इस नियम के बाद नोएडा में अगर कोई E-Rickshaw ड्राइवर... नियमों का उल्लंघन करता है, तो पुलिस उसका चालान काट सकती है. नोएडा में गाइडलाइंस का पालन ना करने वाले E-Rickshaw को जब्त भी किया जा सकता है. लेकिन, हमें ऐसा देखने को नहीं मिलता.  ठीक इसी तरह चंडीगढ़ में भी E-rickshaw और E-Carts चलाने वालों के लिए ज़रुरी नियम बनाए गए हैं. जिसमें Penalty का भी प्रावधान है. इसके अलावा, इन गाड़ियों में First-Aid Boxes और आग बुझाने वाले यंत्र का होना भी ज़रुरी हैं.
लेकिन बात चाहे दिल्ली की हो...नोएडा की हो या देश के किसी और हिस्से की हो...हर जगह स्थिति लगभग एक जैसी ही है.

नोएडा में रहते हुए जब मैं खुद ऑफिस आता हूं....तो हर रोज़ मुझे E-Rickshaw की ऐसी ही डरावनी तस्वीरें दिखाई देती हैं...और हमेशा ऐसा लगता है....कि कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है.  DNA के लिए Office आते वक्त आज मैंने भी Ground Reality का पता लगाने की कोशिश की...और तस्वीर बिल्कुल वैसी ही थी...जैसी आपने हमारी रिपोर्ट में देखी.  यहां हम आपको थोड़ी सी Extra Knowledge भी देना चाहते हैं. भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा Auto Market है.वर्ष 2015 में भारत ने एक Scheme...Launch की थी, जिसका नाम था...FAME यानी Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles. इसका मकसद था...Clean Fuel Technology वाली Cars को बढ़ावा देना.  

वर्ष 2030 तक, भारत का सपना है..कि यहां की सड़कों पर चारों तरफ Electric Vehicles दौड़ने लगें और इसके लिए तेज़ी से प्रयास भी हो रहे हैं. भारत Paris Climate Agreement पर दस्तखत कर चुका है. इसलिए ये भारत की ज़िम्मेदारी बनती है, कि वो अपने हिस्से के Global Emissions कम करे. इस दिशा में आगे बढ़ते हुए 10 हजार Battery Operated Cars की खरीद के लिए Global Tender भी जारी किया गया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है, कि क्या हमारा देश Electric Cars के लिए पूरी तरह तैयार है ? सिर्फ Electric Vehicles बनाने से बात नहीं बनेगी. इसे इस्तेमाल करने के लिए Basic Platform और Infrastructure की भी ज़रुरत है. जो फिलहाल भारत में नहीं है. हमारे देश में Electric Vehicles के Charging Stations ना के बराबर हैं. जिस तरह Petrol...Diesel और CNG आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं....उसी तरह Electric Vehicles के लिए Charging Stations का भी होना ज़रुरी है.

हमारे देश में CNG को लाए हुए 15 साल से ज़्यादा का वक्त हो चुका है. लेकिन आपने ध्यान दिया होगा, कि आज भी CNG गैस भरवाने के लिए लोगों को लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े रहना पड़ता है. यानी इतने वर्षों में जब हम CNG के लिए ही सही तरीके का Infrastructure खड़ा नहीं कर पाए...तो Electric Vehicles का सपना बहुत सुहावना नहीं लगता.सच तो ये है, कि हमारे देश में सरकारों ने गाड़ियों की बढ़ती संख्या को अपनी ढाल बना लिया है.. और अक्सर नेता यही कहते हैं कि गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है तो Traffic jams तो होंगे ही.. लेकिन ट्रैफिक Jams सिर्फ गाड़ियों की बड़ी संख्या की वजह से ही नहीं लगते.. हमारी यातायात व्यवस्था में दूसरे Loopholes भी हैं..

दिल्ली सहित देश के तमाम शहरों की ट्रैफिक पुलिस और यातायात व्यवस्था अपने स्तर पर पूरी तरह नाकाम रही है.. क्योंकि हमारे सिस्टम के तरीके पुराने पड़ चुके हैं.. ट्रैफिक पुलिस के पास न तो आधुनिक ट्रेनिंग है और ना ही संसाधन.. E-Rickshaw को लाने से पहले ये दलील दी गई थी...कि इससे वातावरण पर अच्छा असर पड़ेगा....लेकिन उस वक्त हम ये भूल गए...कि सिर्फ संसाधन लाने से कोई काम पूरा नहीं हो सकता. हमें एक ऐसा वातावरण पैदा करने की ज़रुरत है...जहां सुविधाओं का सही इस्तेमाल किया जा सके. इसके लिए लोगों को भी अनुशासित करना होगा.. तभी भारत का Future Electric होगा.

हमारे देश का मीडिया कोई भी ख़बर दिखाने से पहले किसी के मरने का इंतज़ार करता है या फिर किसी दुर्घटना के होने का इंतज़ार करता है. आपने नोट किया होगा कि जब स्कूल में किसी बच्चे का मर्डर होता है तो स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर बात होने लगती है.. इसी तरह जब रेल दुर्घटना होती है.. तो रेल सुरक्षा पर ख़बरें दिखाई जाने लगती हैं. इस हिसाब से जब तक ई-रिक्शा से कोई बहुत बड़ी दुर्घटना ना हो.. तब तक उसकी ख़बर मीडिया में नहीं आनी चाहिए.. लेकिन हम इस चलन को तोड़ना चाहते हैं. ई-रिक्शा की वजह से बहुत बड़ा हादसा नहीं हुआ.. लेकिन आगे ऐसा हो सकता है. और हमे ऐसे हादसों को रोकना होगा.

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