ZEE जानकारीः अच्छा राजनेता वो माना जाता है जो जनभावनाओं को समझता है

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 11 अप्रैल को रात 9 बजे SIT की रिपोर्ट मिली थी. 11 अप्रैल को रात 11 बजे के आस-पास उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्नाव मामले की CBI से जांच करवाने का फैसला लिया. अगले दिन यानी 12 अप्रैल को दोपहर 12 बजे उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को CBI जांच की सिफारिश भेजी गई.

ZEE जानकारीः  अच्छा राजनेता वो माना जाता है जो जनभावनाओं को समझता है

राजनीति में जनभावनाओं का बड़ा महत्व होता है . अच्छा राजनेता वो माना जाता है जो जनभावनाओं को समझता है . आसान भाषा में कहें तो एक कुशल नेता की पकड़ जनता की नब्ज़ पर  होती है . उन्नाव गैंगरेप केस में दो सरकारों की तरफ जनता और मीडिया की निगाहें लगी हुई थीं . एक थी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और दूसरी थी केंद्र की मोदी सरकार . अब दोनों सरकारों ने इस मामले पर किस तरह Action लिया . ये देखने और समझने वाली बात है . 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 11 अप्रैल को रात 9 बजे SIT की रिपोर्ट मिली थी. 11 अप्रैल को रात 11 बजे के आस-पास उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्नाव मामले की CBI से जांच करवाने का फैसला लिया. अगले दिन यानी 12 अप्रैल को दोपहर 12 बजे उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को CBI जांच की सिफारिश भेजी गई . और यही वो समय है जब पता चलता है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के रवैये में कितना बड़ा फर्क है . जिस मामले में उत्तर प्रदेश की पुलिस पिछले कई महीनों से विधायक से पूछताछ करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रही थी.

उसी मामले में सिर्फ 5 घंटे के बाद केंद्र सरकार ने, CBI जांच की सिफारिश को मंज़ूर कर लिया. और CBI जांच की मंजूरी के सिर्फ 11 घंटे बाद ही विधायक को CBI ने अपनी गिरफ्त में ले लिया. विधायक को गिरफ्त में लेने से पहले CBI ने जो योजना तैयार की, उसपर भी गौर करना चाहिए . 12 अप्रैल को ही CBI जांच की मंज़ूरी मिली थी और उसी दिन रात 9 बजे के आसपास CBI ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए . CBI के अधिकारियों ने विधायक पर शिकंजा कसने की पुख्ता रणनीति तैयार की .

सबसे पहले CBI ने उत्तर प्रदेश पुलिस से इस मामले की पूरी जानकारी ली. CBI ने फौरन अलग-अलग टीमें बनाईं और रात भर विधायक की Location के बारे में जानकारियां इकट्ठा कीं . इस बीच CBI की टीमें लखनऊ में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के कुछ करीबी विधायको के घर पर भी गईं . जिस अस्पताल में कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी का इलाज चल रहा था, उस अस्पताल में भी CBI की एक टीम गई . आज सुबह लगभग साढ़े तीन बजे के आसपास CBI को कुलदीप सिंह सेंगर की Location का पता चला .

CBI सुबह 4 बजे लखनऊ में कुलदीप सिंह सेंगर के आवास पर पहुंची. और उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया .सुबह साढ़े 4 बजे CBI की टीम आरोपी विधायक को लेकर लखनऊ के CBI मुख्यालय पहुंची. जहां लगातार अब तक.. यानी इस वक्त भी कुलदीप सिंह सेंगर से पूछताछ चल रही है . CBI की दो और टीमें आज ही उन्नाव गईं और उन्होंने पीड़ित परिवार से मामले की जानकारी हासिल की और इसके अलावा Suspend किए गए 6 पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की . और इन सब कामों के बीच CBI सबूत भी इकट्ठा करती रही . 

आपने CBI के काम करने का तरीका तो देख लिया. अब ज़रा उत्तर प्रदेश की सरकार के काम करने के तरीके पर भी गौर कीजिए . पीड़ित लड़की ने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की कोशिश की, लेकिन जब वो नहीं मिले तो लड़की ने 8 अप्रैल को लखनऊ में मुख्यमंत्री के आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया. दूसरी तरफ जब पीड़ित लड़की के पिता के साथ विधायक के भाई और उसके साथियों ने मारपीट की तो पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की. और पीड़ित लड़की के पिता के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया, और उसे गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया. इसके बाद 9 अप्रैल को लड़की के पिता की मौत हो गई थी . 

यानी ये मामला करीब एक हफ्ते से चर्चा में था. लखनऊ से लेकर दिल्ली तक योगी सरकार पर सवाल खड़े किए जा रहे थे. योगी सरकार की विश्वसनीयता पर टिप्पणी की जा रही थी . लेकिन इसके बाद भी उत्तर प्रदेश की पुलिस कुलदीप सिंह सेंगर से पूछताछ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई . इस मामले पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने ये भी कह दिया कि विधायक के खिलाफ उनके पास कोई सबूत ही नहीं है. लेकिन इसी मामले में CBI ने 12 घंटे के अंदर ही विधायक पर कार्रवाई की. 

CBI की इस तेज़ कार्रवाई का राजनीतिक प्रभाव क्या हुआ ? ये भी समझने वाली बात है . बीती रात 12 बजे जिस मकसद से कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी इंडिया गेट पर मार्च निकाल रहे थे उस मकसद की ही हवा निकल गई . यानी राहुल गांधी की Mid Night March वाली Politics, Diffuse हो गई .