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ZEE जानकारीः Google हमारी Privacy का उल्लंघन कर रहा है

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अगर आपका Android Phone Airplane Mode में हो, तब भी आपकी Location की सारी जानकारी Store होती रहती है. और जैसे ही आप अपने फोन को Airplane Mode से हटाते हैं, आपकी लोकेशन की जानकारियां Google के सिस्टम में अपलोड हो जाती हैं. 

ZEE जानकारीः Google हमारी Privacy का उल्लंघन कर रहा है

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अगर आपका Android Phone Airplane Mode में हो, तब भी आपकी Location की सारी जानकारी Store होती रहती है. और जैसे ही आप अपने फोन को Airplane Mode से हटाते हैं, आपकी लोकेशन की जानकारियां Google के सिस्टम में अपलोड हो जाती हैं. 

जैसे ही हम Airplane Mode on करते हैं, तो हम फोन का Cellular Signal बंद कर देते हैं. यानी मोबाइल नेटवर्क देने वाली कंपनी से हमारे फोन का कनेक्शन टूट जाता है. कोई हमें फोन भी नहीं कर सकता. लेकिन हमारे फोन का Operating System इस Mode में भी काम कर रहा होता है. 

यानी Airplane Mode एक तरह का Do not Disturb Mode होता है. लेकिन इसके बावजूद Google आपके फोन को Track करना नहीं छोड़ता, क्योंकि आपके फोन का GPS Tracker, Satellite के ज़रिये काम करता है मोबाइल नेटवर्क के ज़रिए नहीं.

हमारे देश में अक्सर ये कहा जाता है कि हर आदमी अपने घर में राजा होता है. और अपने घर में उसके अधिकार राजा की तरह होते हैं. इसका एक अर्थ ये भी है कि कोई भी व्यक्ति अपने घर में क्या करता है, कैसे रहता है, किन वस्तुओं को पसंद करता है.. ये उसका निजी अधिकार है. और अपनी पसंद को वो किसी से शेयर करे या ना करे... ये भी उसकी अपनी मर्ज़ी पर निर्भर है. 

ये प्राचीन भारत का एक विचार है, जिसके केन्द्रबिंदु में निजता यानी Privacy का अधिकार है. लेकिन अब विदेशी कंपनियों द्वारा इस Privacy का उल्लंघन हो रहा है. और इसके लिए हम भी बहुत हद तक ज़िम्मेदार हैं.  सबसे हैरानी की बात ये है कि जब कोई स्वदेशी सुविधा या योजना आती है तो भारत के लोग तुरंत शोर मचाने लगते हैं, कि उनकी Privacy का क्या होगा, उनके अधिकारों का क्या होगा. लेकिन गूगल जैसी कंपनियों से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. गूगल से कोई गलती भी हो जाए तो उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया जाता है.

कुछ दिन पहले गूगल ने बिना लोगों की सहमति लिए... आधार का हेल्पलाइन नंबर मोबाइल फोन में Pre-Store कर दिया था. जब इस मामले में आपत्ति जताई गई तो गूगल ने बड़े आराम से ये कह दिया कि ये गलती से हो गया था. और फिर किसी ने कुछ नहीं कहा. यानी हमारे देश के लोगों को गूगल जैसी कंपनियों से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन ऐसी गलतियों पर स्वदेशी कंपनियों की लिंचिंग हो जाती है. ये दोहरे मापदंड हैं और इसके ख़िलाफ एक डिजिटल स्वदेशी आंदोलन की ज़रूरत है

लेकिन आज के दौर में डिजिटल स्वदेशी आंदोलन से क्या होगा ? क्योंकि ये हमारी आज़ादी के 70 वर्षों की असफलता है कि हम गूगल और फेसबुक जैसे बड़े और सफल Internet Platforms नहीं बना पाए. 

आप कहेंगे कि भारत तो IT के लिए मशहूर है, बैंगलुरू को भारत की Silicon Valley कहा जाता है. लेकिन भारत अपनी Services के लिए मशहूर है, किसी Innovation के लिए नहीं. भारत में सरकार मेक इन इंडिया का अभियान चला रही है, लेकिन इस नारे को बदलकर Discover, Invent and Make in India कर देना चाहिए . अब सवाल ये है कि नई तकनीकों की खोज और रिसर्च करने में भारत का कितना दिमाग चलता है ?..इस विषय पर हमने गहन शोध किया है..जिसमें ये पता चला है कि...

भारत में 2013 से लेकर 2017 तक सिर्फ 30 हज़ार 504 Patents हुए हैं. इनमें 2017 में सिर्फ 9 हज़ार 847 Patents हुए. जबकि चीन में वर्ष 2017 में 4 लाख 20 हज़ार Patents हुए हैं.  आपको बता दें कि Patent का मतलब होता है किसी नए आविष्कार या खोज को आधिकारिक रूप से पहचान देना. यानी नई चीज़ों को खोजने और नई तकनीक विकसित करने में भारत बहुत पीछे है.. इसी वर्ष यानी 2018 के Global Innovation Index के मुताबिक नए आविष्कार करने के मामले में भारत का स्थान पूरी दुनिया में 57वां है. 

जबकि चीन 17वें नंबर पर है. पहले नंबर पर Switzerland है, ब्रिटेन चौथे नंबर पर है और अमेरिका सातवें नंबर पर है. अब आप समझ सकते हैं कि भारत की स्थिति कितनी खराब है. 

भारत के मुकाबले चीन लगातार नए नए आविष्कार कर रहा है, इसीलिए उसने Google की तरह Baidu नाम का सर्च इंजन बनाया है. Twitter की तरह Sina Weibo नाम की सोशल नेटवर्किंग साइट बनाई है  Whatsapp की तरह Wechat है  Facebook की तरह Ren- ren बनाया है. और Youtube की तरह Youku Tudou बनाया है.  चीन ने ये सब इसलिए किया, क्योंकि वहां Google, Twitter, WhatsApp और फेसबुक जैसी Websites और Apps प्रतिबंधित हैं. 

चीन की आबादी - 142 करोड़ है लेकिन उसका काम, Google, Facebook और ऐसी ही दूसरी कंपनियों के बगैर चल गया. क्योंकि चीन ने इन कंपनियों का स्वदेशी विकल्प बना लिया. भारत की आबादी - 135 करोड़ है,कुल मिलाकर दोनों देशों में 277 करोड़ लोग रहते हैं. अगर भारत ने भी ऐसा कर लिया होता, तो दुनिया के 277 करोड़ लोगों का काम इन बड़ी बड़ी कंपनियों के बगैर ही चल जाता. और इन कंपनियों की दुकानें बंद हो जातीं.

एक ज़माने में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था और भारत का GDP दुनिया में सबसे ज़्यादा था. इसके बाद भारत पर हमले हुए, भारत को बार बार लूटा गया और भारत का GDP गिरता चला गया. अब आज के डिजिटल युग में भारत एक बार फिर सोने की चिड़िया बन गया है. भारत में करीब 34 करोड़ Smartphone Users हैं, ये संख्या अमेरिका की जनसंख्या से भी ज़्यादा है. शाय़द इसीलिय़े तमाम विदेशी कंपनियां आज भी भारत को सोने की चिड़िया समझती हैं. और ये कंपनियां चाहती हैं कि सोने की ये चिड़िया इन्हीं के पिंजरे में कैद रहे.

आज आज़ादी के 71 साल बाद भी हमें विदेशी प्रोडक्ट्स, विदेशी कपड़े, विदेशी सामान और विदेशी लोगों का जीवन ही अच्छा लगता है. जबकि हमारे देश के लोग किसी भी स्वदेशी कंपनी या सुविधा के खिलाफ नारे लगाने लगते हैं. उसे खारिज करने में जुट जाते हैं. आधार, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. आधार के खिलाफ बहुत सारे लोगों ने आंदोलन करना शुरू कर दिया. वो कोर्ट भी चले गये. लेकिन उसे कभी स्वीकार नहीं किया. जब तक ऐसा होता रहेगा, तब तक आप पूरी तरह आज़ाद नहीं हो सकते.