ZEE जानकारी: चीन के इस डिजिटल आक्रमण को कैसे रोक सकता है भारत

अगर कोई और देश चीन में प्रवेश करना चाहें तो ये काम बिल्कुल आसान नहीं है. चीन ने दूसरे देशों को रोकने के लिए तकनीक की मदद से एक ऐसी दीवार बना ली है जिसे पार करना दुनिया भर के देशों के लिए मुश्किल है. चीन चाहता है कि उसकी पहुंच दुनिया के दूसरे बाज़ारों तक हो लेकिन अपने बाज़ार को वो दुनिया के लिए बंद करके ही रखना चाहता है.

ZEE जानकारी: चीन के इस डिजिटल आक्रमण को कैसे रोक सकता है भारत
आधुनिक युग में युद्ध के मैदान बदल चुके हैं. युद्ध के हथियार भी बदल चुके हैं.

किसी भी देश के बाज़ार को कब्जे में करने का, सबसे अच्छा तरीका ये होता है कि वहां की संस्कृति पर असर डाला जाए. भारत वैसे भी त्योहारों का देश है और ये त्योहार हमारी संस्कृति की पहचान हैं . हमारे देश में मेलों और त्योहारों का मौसम कभी खत्म नहीं होता और ये बाज़ार के लिए बहुत अच्छी बात है . इसी का फायदा उठाते हुए चीन ने दिवाली और होली जैसे त्योहारों पर भी कब्जा कर लिया है. पिछले महीने दिवाली के त्योहार पर शायद आपने भी Made in China लाइट्स और हो सकता है देवी देवताओं की मूर्तियां भी खरीदी होंगी. पहले हमारे देश में मिट्टी के दीप जलाए जाते थे लेकिन लगातार इनका इस्तेमाल कम हो रहा है. इसी तरह होली में भी चीन में बनी पिचकारियां, रंग और गुलाल ज्यादा उपयोग किए जाते हैं. हमारे त्योहारों में चीन की इस घुसपैठ के बारे में देश के करोड़ों लोगों को शायद कोई जानकारी नहीं होगी. उद्योग संगठन ASSOCHAM के मुताबिक अगर बाजार में 4 पिचकारियां या लाइट्स बिकती हैं तो उनमें से तीन का निर्माण चीन में होता है और सिर्फ 1 को ही भारत में बनाया जाता है. चीन में बना सामान ज्यादा इसलिए खरीदा जाता है क्योंकि ये भारत के मुकाबले 55 प्रतिशत सस्ता होता हैं.

यहां ये बात भी नोट करने वाली है कि चीन खुद तो हर देश में हर तरीके से घुसना चाहता है. लेकिन अगर कोई और देश चीन में प्रवेश करना चाहें तो ये काम बिल्कुल आसान नहीं है. चीन ने दूसरे देशों को रोकने के लिए तकनीक की मदद से एक ऐसी दीवार बना ली है जिसे पार करना दुनिया भर के देशों के लिए मुश्किल है. चीन चाहता है कि उसकी पहुंच दुनिया के दूसरे बाज़ारों तक हो लेकिन अपने बाज़ार को वो दुनिया के लिए बंद करके ही रखना चाहता है. चीन की पहुंच भारत जैसे देशों में किस हद तक हो चुकी है. ये हमने आपको दिखाया लेकिन अब आपको ये समझना चाहिए कि भारत चीन के इस डिजिटल आक्रमण को कैसे रोक सकता है.

भारत में स्वदेशी BHIM UPI जैसे Payment Apps हैं. इन्हें बढ़ावा देकर चीन के डिजिटल आक्रमण को रोका जा सकता है. चीन के मोबाइल Phones का भारत के बाज़ार पर कब्ज़ा है. भारत स्वदेशी कंपनियों को प्रोत्साहन देकर बाज़ार से चीन के एकछत्र राज को खत्म कर सकता है. इसी तरह भारत में बने Mobile Apps को भी बढ़ावा देकर चीन की विस्तारवादी नीति का जवाब दिया जा सकता है. सबसे ज़रूरी ये है कि भारत में निवेश का माहौल बनाया जाए. ये माहौल ऐसा हो कि नए Start-Ups में विदेशी कंपनियों की बजाय़ भारत की ही कंपनियां निवेश करें.

इसके अलावा, Payment Apps से जुड़े Data को भारत में भी Store करने की व्यवस्था होनी चाहिए. फिलहाल ग्राहकों से जुड़ा ज्यादातर DATA विदेशी Servers में Store किया जाता है और Reserve Bank Of India भी इसे लेकर आगाह कर चुका है. दुनिया के कई देश अपनी अर्थव्यवस्था और Data की सुरक्षा के लिए ऐसे ही कदम उठा रहे हैं और भारत को भी अब इस दिशा में ज़रूरी कदम उठाने होंगे.
 
आधुनिक युग में युद्ध के मैदान बदल चुके हैं. युद्ध के हथियार भी बदल चुके हैं. आपका Data और आपसे जुड़ी जानकारी अब सबसे बड़े हथियार है. अगर ये सुरक्षित है तो ये आपके हित में है और अगर ये दुश्मनों के हाथ लग जाएं तो आपको और आपके देश को बर्बाद कर सकते हैं. इसलिए सवाल चीन के खिलाफ जाने का नहीं है बल्कि आपको इन Digital आक्रमणकारियों के प्रति सजग होनी की ज़रूरत है. आप चीन से आई वस्तुओं या उसके Digital Products का पूरी तरह से बहिष्कार तो नहीं कर सकते लेकिन अपने Data की सुरक्षा के प्रति जागरूक बनकर चीन के इरादों को नाकाम कर ज़रूर सकते हैं.