ZEE जानकारी: कैसे चीन बिना युद्ध लड़े, पूरे भारत पर विजय पाने के देख रहा है सपने

आज से ठीक 57 वर्ष पहले यानी 21 नवंबर 1962 को भारत और चीन के बीच युद्ध विराम की घोषणा हुई थी. चीन ने उस युद्ध में भारत के 43 हज़ार वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्ज़ा कर लिया था. आज चीन ने बिना भारत में घुसे ही भारत के बहुत सारे इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया है तो आप शायद हैरान हो जाएंगे लेकिन ये पूरी तरह से सच है.

ZEE जानकारी: कैसे चीन बिना युद्ध लड़े, पूरे भारत पर विजय पाने के देख रहा है सपने
भारत के करोड़ों लोग आज चीन का चलता-फिरता उपनिवेश बन चुके हैं.

आज से ठीक 57 वर्ष पहले यानी 21 नवंबर 1962 को भारत और चीन के बीच युद्ध विराम की घोषणा हुई थी. चीन ने उस युद्ध में भारत के 43 हज़ार वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्ज़ा कर लिया था. ये इलाका आकार में स्विटज़रलैंड के बराबर है. इन 57 वर्षों के दौरान चीन बार-बार भारत के कई इलाकों पर कब्ज़ा करने की कोशिशें करता रहा है. इनमें डोकलाम और अरुणाचल प्रदेश के कई इलाके शामिल हैं. चीन एक शक्तिशाली देश है और सीमाओं पर उसका मुकाबला करना आसान नहीं है लेकिन अगर हम ये कहें कि ये सीमा विवाद अब उतने खतरनाक नहीं रह गए हैं और चीन ने बिना भारत में घुसे ही भारत के बहुत सारे इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया है तो आप शायद हैरान हो जाएंगे लेकिन ये पूरी तरह से सच है.

चीन ने ये कब्ज़ा बिना एक भी गोली चलाए और बिना सरहद लांघे किया है क्योंकि अब करोड़ों भारतीयों की जिंदगी का Remote Control और DATA चीन के हाथ में है. आपको मेरी ये बातें अतिशयोक्ति लग रही होंगी लेकिन आज जो आंकड़े हम आपको दिखाएंगे वो चीन के प्रति आपकी सोच को हमेशा के लिए बदलकर रख देंगे.

इस बात की 67 प्रतिशत संभावना है कि इस वक्त जो मोबाइल फोन आपके हाथ में है वो एक Chinese Mobile Phone है . क्योंकि भारत में बिकने वाले 67 प्रतिशत मोबाइल फोन Chinese कंपनियों के ही है . इनमें Xiaomi, Oppo, ViVO, Realmi और दूसरे Chinese Mobile Phone Brands शामिल हैं . इनमें Xiaomi करीब 27 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ...भारत का नंबर एक मोबाइल फोन ब्रांड बन चुका है .

इस बात की लगभग 22 प्रतिशत संभावना है कि जिस Internet Browser का आप इस्तेमाल कर रहे हैं वो भी एक Chinese Browser है क्योंकि 22 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ चीन का UC Browser भारत का नंबर 2 इंटरनेट Browser बन चुका है. इतना ही नहीं आपके Mobile Phone में जितनी Applications मौजूद हैं उनमें से भी करीब 44 प्रतिशत Applications के Chinese होने की पूरी-पूरी संभावना है. FactorDaily नाम की एक कंपनी की रिसर्च के मुताबिक भारत में इस्तेमाल होने वाले Top 100... Mobile Apps में से 44 चीन के हैं. मोबाइल फोन पर PUBG जैसा गेम खेलने वाले भारतीयों की संख्या 5 करोड़ से ज्यादा है . और आपको Gaming की लत लगाने वाला PUBG भी.. एक चाइनीज़ कंपनी Tencent द्वारा संचालित है.

लेकिन आप ये बात जानकर हैरान रह जाएंगे कि इस कंपनी को चीन में ही ये Game Launch करने की इजाजत नहीं मिली. वहां की सरकार के आदेश पर Tencent को PUBG की जगह..Force for Peace नाम का एक गेम लॉन्च करना पड़ा . जो देश भक्ति की भावना से भरपूर था.

Mobile Apps का विश्लेषण करने वाली एक अमेरिकन कंपनी App Annie के मुताबिक.. 2018 में भारतीयों ने 22 हज़ार करोड़ घंटे..Android Mobile Applications का इस्तेमाल करते हुए बिताए थे . ये ढाई करोड़ वर्षों के बराबर है. भारत में Download होने वाले कुल Android Applications में चीन की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है तो इसका अर्थ ये हुआ कि भारतीयों ने 1 करोड़ 13 लाख वर्षों के बराबर का वक्त चीन द्वारा बनाए गए Apps को इस्तेमाल करते हुए बिताया होगा लेकिन अगर अब भी आपको लग रहा है कि चीन ने आपको और आपकी जिंदगी को अपना उपनिवेश नहीं बनाया है तो ज़रा कुछ और तथ्यों के बारे में जान लीजिए.

जिस Online Cab Service का इस्तेमाल आप करते हैं वो भी चीन के इशारे पर ही चल रही है. अगर आप Ola से सफर करते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि अलग-अलग Chinese कंपनियां इसमें करीब 8 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी हैं. यहां तक कि आपको किस तरह का खाना पसंद है. इस पर भी चीन की नज़रें हैं. Online खाना Order करने की सेवाएं देने वाली कंपनी Zomato में चीन की कंपनी Alibaba और Shunwei (शुनवे) 3 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश कर चुकी है . इसी तरह Swiggy में भी चीन की Tencent और Meituan (मेटुआन) 9 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा लगा चुके हैं.

इस बात की भी पूरी संभावना है कि आप या आपके परिवार का कोई ना कोई सदस्य मशहूर Mobile App. Tik-Tok पर ज़रूर होगा. Tik-Tok भी एक Chinese Mobile App है और भारत में लोकप्रियता के मामले में ये बडे-बड़े Social Media Platforms को पीछे छोड़ चुका है . Tik-Tok का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर युवा हैं और इनमें से ज्यादातर युवा देश के छोटे शहरों से आते हैं .

Research Firm Sensor Tower के मुताबिक पूरी दुनिया में टिक टॉक के 150 करोड़ यूजर्स हैं और इनमें से सबसे ज्यादा यानी करीब 46 करोड़ यूजर्स भारत में हैं . भारत में Tik-Tok का इस्तेमाल करने वाले Users की संख्या...इंस्टाग्राम के Users से भी ज्यादा हो चुकी है. इतना ही नहीं Paytm जैसे Online Payment App में भी चीन की कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी है. ये हिस्सेदारी 9 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा की है.

बच्चों को Online शिक्षा देने वाले Platform BYJU'S में भी चीन की कंपनी TENCENT की हिस्सेदारी है. TENCENT..BYJU'S में 525 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश कर चुकी है . BYJU'S अब भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी को भी Sponser करती है. इसके अलावा चीन की कंपनी VIVO भारत में PRO-कबड्डी टूर्नामेंट की Sponsor है . यानी भारत के सबसे लोकप्रिय खेलों को भी अब चीन की कंपनियों द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है . यानी भारत के लोगों की खेल से जुड़ी भावनाओं का दोहन भी अब विदेशी कंपनियां कर रही हैं. इससे पहले भी भारतीय क्रिकेट टीम की Sponsor एक चाइनीज़ मोबाइल फोन कंपनी..Oppo थी . 

इसी तरह Big Basket, Flipkart, Practo, PaisaBazar और Snapdeal जैसी कंपनियों में भी चीन की कंपनियों का भारी-भरकम निवेश है . ये सभी कंपनियां किचन के सामान से लेकर Online दवाईंयां और यहां तक की insurance भी बेचती हैं . यानी चीन चाहे तो ये भी पता लगा सकता है कि आप घर में क्या खाते हैं, आप कितना कमाते हैं और आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को कौन सी बीमारी है.

यानी चीन ने भारत से एक युद्ध आज से 57 वर्ष पहले जीता था. उसमें गोलियां भी चली थी, खून भी बहा था और लोगों की जान भी गई थी लेकिन अब चीन को ये सब करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि भारत के करोड़ों लोग आज चीन का चलता-फिरता उपनिवेश बन चुके हैं. यानी चीन चाहें तो आपकी वित्तीय स्थिति से लेकर आपकी सेहत, आपकी शिक्षा और यहां तक कि आपके खान-पान की आदतों का भी पता लगा सकता है. चीन ये भी पता लगाने में सक्षम है कि आप कहां जा रहे हैं, क्या खरीद रहे हैं और आप भविष्य को लेकर क्या सपने देखते हैं.