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ZEE जानकारी: कश्मीर में घुसपैठ और आतंकवादियों की भर्ती में आई कमी, एनकाउंटर बढ़े

आतंकवाद और घुसपैठ के खिलाफ जरा सी लापरवाही युद्ध की वजह बन सकती है. कारगिल युद्ध का उदाहरण आपके सामने है.

ZEE जानकारी: कश्मीर में घुसपैठ और आतंकवादियों की भर्ती में आई कमी, एनकाउंटर बढ़े

आज हम DNA में सबसे पहले भारत के पराक्रम की बात करेंगे. अक्सर कहा जाता है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं. यही बात हम पाकिस्तान और कश्मीर के आतंकवादियों के बारे में कह सकते हैं. लोकसभा में सरकार ने जो जानकारी दी है. उससे पता चलता है कि पिछले 6 महीनों में घुसपैठ और आतंकवादियों की भर्ती में कमी आई है जबकि एनकाउंटर बढ़े हैं. वर्ष 2018 के पहले 6 महीनों के मुक़ाबले इस वर्ष जनवरी से जून तक 22 प्रतिशत ज़्यादा आतंकवादी मारे गये हैं. घुसपैठ में 43 प्रतिशत तक कमी आई है. आतंकवादियों की भर्ती में 40 प्रतिशत कमी हुई है और इन सभी वजहों से आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में 28 प्रतिशत तक कमी आई है.

दरअसल, मोदी सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद को लेकऱ सख़्त नीति जारी रखी है और इसके नतीजे भी सामने आ रहे हैं. हालांकि ये भी सच है कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमला भी पिछले 6 महीने के दौरान ही हुआ है. 14 फरवरी को हुए इस हमले के बाद 26 फरवरी को भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी. आतंकवाद के ख़िलाफ़ इस सख़्त कार्रवाई को सुरक्षाबलों ने ज़मीन पर भी तेज़ किया है. साथ में कश्मीर के लोगों से भी अपील की जा रही है कि वो अपने बच्चों को आतंक की गतिविधियों में जाने से रोकें क्योंकि इस रास्ते पर चलने का मतलब सिर्फ़ और सिर्फ़ एनकाउंटर है.

सरकार ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिये इस वर्ष TMG का गठन भी किया है. TMG का मतलब है Terror Monitoring Group. इस ग्रुप में IB यानी Intelligence Bureau, CBI, NIA और आयकर विभाग शामिल हैं. इसके तहत आतंकवाद की फ़ंडिंग को ख़त्म करने की कोशिश की जा रही है. मोदी सरकार अपने पिछले कार्यकाल से ही कश्मीर में आतंकवादियों के ख़िलाफ़ आक्रामक नीति पर चल रही है. इसके अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं. वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर में 257 आतंकी मारे गये थे. 2019 में अब तक 123 से ज़्यादा आतंकी मारे जा चुके हैं. जबसे अमित शाह ने गृह मंत्रालय संभाला है, 22 से ज़्यादा आतंकवादियों का एनकाउंटर हो चुका है.

लेकिन इस दौरान 6 महीने में भारत के क़रीब 75 सुरक्षा बल भी आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए हैं. अमित शाह जब से देश के गृह मंत्री बने हैं, तब से उनका लगातार फोकस जम्मू-कश्मीर पर है. 27 जून को अमित शाह श्रीनगर में इन्हीं शहीदों में से एक, जम्मू-कश्मीर पुलिस के SHO अरशद ख़ान के घर जाकर उनके परिवार से मिले थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस को आतंकवाद के ख़िलाफ़ घाटी में First Line of Defence कहा जाता है. पिछले 3 दशकों में जम्मू-कश्मीर पुलिस के 1500 से ज़्यादा जवान और अफ़सर आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए हैं.

श्रीनगर में एक शहीद के परिवार से मिलकर गृह मंत्री अमित शाह ने सीधे आतंकवादियों और अलगाववादियों को संदेश दिया है कि भारत हमेशा अपने जवानों के साथ खड़ा है और उनके सुख-दुख में बराबर का भागीदार है. अपने कश्मीर दौरे से लौटकर 28 जून को लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने एक भाषण दिया था. उन्होंने बताया था कि कश्मीर को जहन्नुम बनाने वालों से सरकार कैसे कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रही है. जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा को भी और मज़बूत बनाया जा रहा है. सरकार के मुताबिक़ घुसपैठ रोकने के लिये Anti-Infiltration Obstacle Sytem कामयाब साबित हो रहा है. इस सिस्टम के तहत LoC पर बिजली वाले तार बिछे हैं...जो घुसपैठ रोकने में कारगर हैं. 

सरकार ने अपनी कश्मीर नीति को लेकर ये संदेश दिया है कि आतंकवाद को सख़्ती से कुचला जाएगा. और पाकिस्तान को हमेशा कड़ा जवाब दिया जाएगा. 29 सितंबर 2016 को नियंत्रण रेखा के पार की गई सर्जिकल स्ट्राइक इसकी बड़ी शुरुआत थी. तब भारत ने पाकिस्तान को ये पैग़ाम दिया था कि भारत अब आतंकवादी हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा. इसके बाद इस वर्ष 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक करके भारत ने अपने संदेश को दोहराया था.

इन दो तारीख़ों ने भारत को पूरी तरह बदल दिया है. एक Soft State कहा जाने वाला भारत वो देश बन चुका है जो अपने शहीदों का बदला लेना जानता है, और इसके लिये वो दुश्मन के घर में घुसकर मारता है. इसी वर्ष 8 मई को ज़ी न्यूज़ के एडिटर सुधीर चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू किया था. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि आतंकवाद से निपटने के लिये भारत को मज़बूत बनना होगा और इसके लिये उसकी जड़ पर हमला करना ज़रूरी है.

आतंकवाद और घुसपैठ के खिलाफ जरा सी लापरवाही युद्ध की वजह बन सकती है. कारगिल युद्ध का उदाहरण आपके सामने है. 20 वर्ष पहले पाकिस्तानी घुसपैठ की वजह से कारगिल युद्ध हुआ था. कारगिल युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को हराया था. कारगिल युद्ध 8 मई 1999 से 14 जुलाई 1999 तक चला. 14 जुलाई को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन विजय की कामयाबी की घोषणा की और 26 जुलाई को विजय दिवस मनाने का ऐलान हुआ.
आज से 17 दिन बाद यानी 26 जुलाई को हमलोग कारगिल विजय की बीसवीं वर्षगांठ मनाएंगे. इस ऐतिहासिक अवसर पर आपके लिए ज़ी न्यूज़ की टीम ने कारगिल विजय से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. 

डीएनए में कल आपने पहली बार द्रास सेक्टर में स्थित Point 4355 के बारे में देखा था लेकिन आज हम आपको उस गड़रिये से मिलाने जा रहे हैं जिसकी सावधानी और सूझ-बूझ की बदौलत भारत कारगिल युद्ध में विजयी हुआ. आपने सुना होगा या पढ़ा होगा कि कारगिल विजय में स्थानीय गड़रिये का अहम योगदान है. दरअसल सबसे पहले गरड़िये को ही कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ की जानकारी मिली थी. लेकिन क्या आप उस गड़रिये के बारे में जानते हैं जिसके एक संदेश की बदौलत आज कारगिल दुश्मन के कब्जे में जाने से बच गया. 

क्या आपने उस गड़रिये को देखा है जिसकी समझदारी से कारगिल को पाकिस्तानी घुसपैठियों से आज़ाद कराया जा सका...उस गरड़िये का नाम है यार मोहम्मद खान. किसी भी युद्ध को जीतने के लिए कुशल नेतृत्व और मजबूत सेना के साथ-साथ आम लोगों के सहयोग की आवश्यकता होती है. कारगिल युद्ध में भारत की विजय का बड़ा कारण ये भी था कि वहां पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई में यार मोहम्मद खान जैसे स्थानीय लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.