ZEE जानकारी: क्या देशभर में हुआ जश्न बलात्कारियों के एनकाउंटर पर जनादेश है?

देश की अलग अलग अदालतों में रेप के करीब 1 लाख 46 हज़ार मामले चल रहे हैं. आज स्थिती ये है ऐसे मामलों में दस में से एक आरोपी को ही सज़ा हो पाती है. स्वभाविक है कि ऐसे माहौल में देश के लोग खुद को सुरक्षित कैसे महसूस  कर सकते क्योंकि अदालतों में समय पर इंसाफ नहीं मिलता इसलिए ज्यादातर अपराधी..सबूतों के अभाव में छूट जाते हैं और यही कारण है देश के लोगों का भरोसा सिस्टम से उठने लगा है. आज के त्वरित न्याय पर देशभर में मनाइ गई खुशियां इसी अविश्वास का प्रमाण हैं. 

ZEE जानकारी: क्या देशभर में हुआ जश्न बलात्कारियों के एनकाउंटर पर जनादेश है?

हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ऐसा दुष्ट व्यक्ति जिसे हत्या करने में आनंद आता है, उसका तुरंत वध कर देना चाहिए. आज हैदराबाद में तेलंगाना पुलिस ने ऐसे ही चार राक्षसों का वध कर दिया जिन्होंने एक सप्ताह पहले एक महिला डॉक्टर के साथ रेप करके उसकी निर्मम हत्या कर दी थी. कलियुग में ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं. जब देश की जनता ऐसे राक्षसों के वध की गवाह बनती है. इसीलिए आज हैदराबाद की दिशा को Instant यानी तत्काल न्याय मिलने पर पूरे देश में खुशियां मनाई जा रही है.

आज आपके दिन की शुरुआत भी इसी खबर के साथ हुई होगी कि तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद की महिला डॉक्टर के हत्यारों को एनकाउंटर में मार गिराया. एक एनकाउंटर को लेकर पूरे देश में इतनी खुशी शायद कभी नहीं मनाई गई होगी. पूरा देश जश्न मना रहा है और विशेषकर देश की महिलाएं और बच्चियां इससे बहुत खुश हैं. ये शायद देश के इतिहास का सबसे Celebrated Encounter है. यानी ऐसी मुठभेड़ जिसे आने वाली पीढ़ियां. वर्षों तक याद रखेगीं.

इसलिए सबसे पहले आपको देश के अलग अलग हिस्सों से आई जश्न की कुछ तस्वीरें देखनी चाहिए. पहली तस्वीर घटना स्थल के पास से गुज़रती एक स्कूल बस की है. इस बस में सवार स्कूल जाने वाली बच्चियों को जब Encounter की सूचना मिली तो उन्होंने शोर मचाकर इसका स्वागत किया और हैदराबाद पुलिस का अभिनंदन भी किया. दूसरी तस्वीर भी Encounter स्थल के पास की ही है. जहां लोगों ने पुलिसकर्मियों पर फूल बरसाकर अपनी खुशी का इज़हार किया. तीसरी तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कैसे लोगों ने पुलिस कर्मियों को कंधे पर उठा रखा है. पुलिस को मिले ऐसे सम्मान की तस्वीरें आपने बहुत कम देखी होंगी. एक व्यक्ति ने तो पुलिस वालों के पैर छूकर उन्हें इस Encounter के लिए धन्यवाद दिया.

हैदराबाद में कहीं महिलाओं ने पुलिस कर्मियों को राखी बांधी..तो कहीं पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर खुशियां मनाईं. महिलाओं ने ढोल और नगाड़े बजाकर भी. पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया. इसके अलावा जम्मू, कोटा, पटना, गुरुग्राम, वाराणसी, मुरादाबाद, उज्जैन और ग्वालियर से भी जश्न की तस्वीरें आईं हैं. आपको देश भर में छाई इस खुशी की एक छोटा सी झलक देखनी चाहिए. हमारे देश में खाकी वर्दी को भ्रष्टाचार और अत्याचार से जोड़कर देखा जाता है. लोग खाकी से डरते हैं. लेकिन आज ऐसा क्या हुई की यही खाकी वर्दी वाले देश के हीरो बन गए.

आपने आतंकवादियों के एनकाउंटर की खबरें देखी होंगी. देश के दुश्मनों पर आधी रात में की गई Surgical Strikes के बारे में भी सुना होगा. लेकिन आज हैदराबाद में जो हुआ वो बलात्कारियों पर किया गया सबसे भीषण प्रहार है. जिसे आज पूरा देश एक पर्व की तरह मना रहा है. खासतौर पर देश के हर वर्ग, धर्म, जाति और हर उम्र की महिलाएं आज के दिन को एक महापर्व की तरह मना रही हैं. रेप और हत्या के आरोपियों के Encounter के बाद देश के कुछ लोग इसे मानव-अधिकारों का उल्लंघन भी कह रहे हैं. पुलिस ने इस मामले का On The Spot फैसला करके सही किया या गलत, इस पर बहस की जा सकती है. लेकिन कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि जब कोई जानवर नरभक्षी हो जाता है तो उसे गोली मारनी पड़ती है. हम उस जानवर के अधिकारों और न्याय प्रक्रिया की बातें नहीं करते. इसी तरह जब कोई इंसान दरिंदा बन जाता है तो क्या उसके मानव-अधिकारों की बातें होनी चाहिए?

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तेलंगाना पुलिस आज सुबह पौने 6 बजे रेप और हत्या के चारों आरोपियों मोहम्मद आरिफ, जोलु शिवा, जोलु नवीन और चेन्ना केशावलु को उसी जगह पर ले गई थी, जहां इन्होंने पीड़ित की लाश को जला दिया था.. पुलिस इन आरोपियों को वहां ले जाकर सबूत तलाश रही थी और आरोपियों की मदद से ये समझने की कोशिश की जा रही थी कि उन्होंने इस अपराध को कैसे अंजाम दिया. पुलिस के मुताबिक छान-बीन के दौरान ही आरोपियों ने पुलिसकर्मियों पर डंडों से वार करना शुरू कर दिया और उन पर पत्थर बरसाने लगे. इस दौरान आरोपी पुलिस कर्मियों से हथियार उन पर फायरिंग करने लगे. जवाब में पुलिस ने भी इन पर फायरिंग शुरू कर दी. आधे घंटे के बाद यानी सुबह सवा 6 बजे ये फायरिंग खत्म हई और चारों आरोपी मारे गए. जवाबी फायरिंग में गैंगरेप और हत्या के चारों आरोपी मारे गए. साइबराबाद पुलिस कमिश्नर VC सज्जनार के मुताबिक पुलिस ने ये Encounter Self Defence में किया है.

VC सज्जनार ना सिर्फ साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर हैं बल्कि वो हैदराबाद रेप और हत्याकांड को बहुत करीब से monitor भी कर रहे थे. IPS ऑफिसर, VC सज्जनार ने वर्ष 2008 में भी एक ऐसे ही मामले की जांच की थी. तब तेलंगाना के वारंगल जिले में दो महिलाओं पर Acid Attack किया गया था. इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया था. जब पुलिस आरोपियों के साथ घटनास्थल पर छानबीन कर रही थी. तब आरोपियों ने पुलिस पर हमला कर दिया. इस दौरान सज्जनहार की टीम ने तीनों आरोपियों को Encounter में मार गिराया था. आज 2008 का वो एनकाउंटर एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है. कुछ लोग पुलिस कमिश्नर सज्जनार को हीरो की तरह देख रहे हैं तो कुछ लोग उनके काम करने के तरीकों पर सवाल भी उठा रहे हैं.

हैदराबाद में पुलिस ने जिस जगह पर चारों आरोपियों का Encounter किया है वो नेशनल हाइवे 44 के पास है. इसी जगह पर आरोपियों ने पीड़ित की लाश को जलाया था. और आज सुबह उसी जगह पर चारों बलात्कारियों की लाशें बिछी थी. Zee News की टीम ने Ground Zero से एक विश्लेषण तैयार किया है. जिसे देखकर आप समझ जाएंगे कि पुलिस और आरोपियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान..क्या क्या हुआ.

इस Encounter पर हमारे देश के कई बुद्धीजीवी सवाल उठा रहे हैं. इन बुद्धिजीवियों ने मान लिया है कि ये Encounter Fake है, यानी फर्ज़ी है. लेकिन इन लोगों को शायद ये नहीं पता कि जब हत्या जैसे अपराध का कोई आरोपी पुलिस के हथियार छीनकर भागता है..तो पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए कानून रूप से बाध्य होती है. CRPC की धारा 46.2 और 46.3 के मुताबिक, पुलिस गिरफ्त से भागने वाले ऐसे खूंखार अपराधियों पर आत्मरक्षा में गोली भी चला सकती है.. फिर चाहे इस कोशिश में अपराधियों की जान ही क्यों ना चली जाए. इतना ही नहीं जो अपराधी ये जानते हैं कि उन्हें अदालत से सजा-ए-मौत मिलना तय है. वो पुलिस की हिरासत से भागने की हर संभव कोशिश करते हैं और इसके लिए वो किसी की जान भी ले सकते हैं. इसलिए आज इन बुद्धीजीवियों को ये सोचना चाहिए..कि अगर ये अपराधी भाग जाते तो ये कानून व्यवस्था और समाज के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकते थे. और अगर ये आरोपी पुलिस की गिरफ्त से भाग जाते तो यही बुद्धीजीवी पुलिस की आलोचना करते है और पूरे पुलिस विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते. जो लोग इस Encounter पर ये कहकर सवाल उठा रहे हैं कि ये आरोपियों का मानव-अधिकारियों का उल्लंघन है. क्या उन्हें पीड़ित के मानव-अधिकार ज़रूरी नहीं लगते.

सामान्यत: रेप और हत्या के आरोपियों को..कानूनी प्रक्रिया से गुज़रना होता है. पुलिस उनके खिलाफ केस बनाती है और फिर अदालत फैसला लेती है कि दोषी पाए गए अपराधी को क्या सज़ा दी जाए. लेकिन आज चार आरोपियों के साथ On The Spot इंसाफ किया गया है. पुलिस द्वारा किए गए इस Instant न्याय को लेकर पूरे देश में बहस चल रही है. हालांकी ज्यादातर लोग पुलिस के इस कदम से खुश हैं...पर प्रश्न खड़ा होता है क्या पीड़ितों को न्याय दिलाने का ये दीर्घकालिक तरीका हो सकता है ?. इस सवाल का जवाब हम तलाशेंगे लेकिन पहले ये समझ लीजिए कि आज देश इस Encounter को लेकर खुशियां क्यों मना रहा है. दरअसल न्याय को लेकर देश के लोगों की उम्मीद टूट चुकी है. ना तो पर्याप्त संख्या में पुलिस है. ना ही अदालतें हैं और ना ही अपराधियों के मन में कानून का कोई खौफ है.

Bureau of Police Research and Development के मुताबिक भारत में प्रति 520 लोगों पर एक पुलिसकर्मी उपलब्ध है. यानी हमारे देश में आम लोगों की रक्षा करने वालों की भारी कमी है और इसका खामियाज़ा देश के लोग अपराधियों का शिकार होकर उठाते हैं. अगर आपके साथ कोई अपराध हो जाए..और आप न्याय मांगने के लिए अदालत की शरण में जाएंगे...तो वहां भी इंसाफ मिलने की कोई गारंटी नहीं है. क्योंकि हमारे देश में हर 76 हज़ार लोगों पर मात्र एक जज है. देश भर की अदालतों में करीब 3 करोड़ 62 लाख मामले Pending हैं. Supreme Court में 59 हजार ...., High Courts में 44 लाख 89 हज़ार और निचली अदालतों में 3 करोड़ 16 लाख से ज्यादा Cases Pending हैं.

देश की अलग अलग अदालतों में रेप के करीब 1 लाख 46 हज़ार मामले चल रहे हैं. आज स्थिती ये है ऐसे मामलों में दस में से एक आरोपी को ही सज़ा हो पाती है. स्वभाविक है कि ऐसे माहौल में देश के लोग खुद को सुरक्षित कैसे महसूस  कर सकते क्योंकि अदालतों में समय पर इंसाफ नहीं मिलता इसलिए ज्यादातर अपराधी..सबूतों के अभाव में छूट जाते हैं...और यही कारण है देश के लोगों का भरोसा सिस्टम से उठने लगा है. आज के त्वरित न्याय पर देशभर में मनाइ गई खुशियां इसी अविश्वास का प्रमाण हैं. हैदराबाद की महिला डॉक्टर के परिवार को तो न्याय मिल गया. लेकिन देश में अब भी हज़ारों पीड़ित महिलाएं और उनके परिवार इंसाफ का इंतज़ार कर रहे हैं. आज हमने हैदराबाद की दिशा के परिवार से बात की. दिशा के परिवार ने आरोपियों के एनकाउंटर पर खुशी जताई और कहा कि इससे अपराधियों के मन में खौफ पैदा होगा.

आज संविधान निर्माता डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की पुण्यतिथी भी है. डॉक्टर अंबेडकर कहते थे कि उनके लिए किसी समाज की तरक्की का पैमाना यही है कि वहां महिलाओं ने कितनी तरक्की हासिल की है. संविधान का निर्माण करने वाले डॉक्टर भीम राव अंबेडकर चाहते थे कि भारत को एक ऐसा देश बनाया जाएं जहां महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि हो. लेकिन 70 वर्षों के बाद भी क्या हम डॉक्टर अंबेडकर के सपनों का देश बना पाए हैं.

आज ही एक दिन 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था. और आज हमारे देश में न्यायकि ढांचे को भी गिराया गया है. दोनों ही घटनाओं का संबंध न्याय में होने वाली देरी से है. क्योंकि आयोध्या का फैसला आने में भी 70 साल लग गए  6 दिसंबर 1992 की घटना को..कई लोग शौर्य दिवस के रूप में भी मनाते हैं. वो घटना कानून के दायरों के बाहर जाकर अंजाम दी गई थी. इसलिए उसे शौर्यता कहना शायद ठीक नहीं होगा लेकिन आज हैदराबाद में पुलिस ने जो किया, उसे भी कुछ लोग शौर्य की मिसाल कह रहे हैं. आज हम आपको ये भी बताएंगे कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाने वाले भारत में क्या इस तरह के Instant न्याय के लिए जगह होनी चाहिए. लेकिन पहले आप ये देखिए कि कैसे आज देश भर की महिलाओं ने तेलंगाना पुलिस के इस कदम की सराहना की है.

दिशा के साथ हुई वारदात ने पूरे देश को एकजुट कर दिया. तब हर महिला, हर बेटी दर्द से कराह रही थी और अब जब 10 दिन बाद दिशा का बदला लिया गया तो महिलाएं जश्न मनाने के लिए एकजुट हो गईं. क्या ये जश्न बलात्कारियों के एनकाउंटर पर जनादेश है? इस सवाल पर हमारे सिस्टम, सरकार और न्याय व्यवस्था को जरूर सोचना चाहिए. बहुत सारे लोग ये कहते हैं कि देश की व्यवस्था लोगों की भावनाओं पर नहीं चलती. लेकिन आज हमारा ये मानना है कि जहां लोगों का तंत्र हो. लोगों की मर्ज़ी हो. सरकारों को लोगों के वोट अच्छे लगते हैं लेकिन जनता की मर्ज़ी अच्छी नहीं लगती. आम लोगों के वोटों से सरकारें बन सकती है तो फिर कानून क्यों नहीं बन सकते. जब चुनाव आते हैं तो नेता इन्हीं आम लोगों से हाथ जोड़कर वोट मांगते है..फिर ये नेता लोगों के और कानून के हाथ मजबूत क्यों नहीं करना चाहते. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि न्याय की सभी अदालतों से भी ऊंची अदालत विवेक की अदालत होती है  और  ये किसी भी प्रकार की न्यायिक व्यवस्था से ऊपर है.  इसलिए आज ये समझना भी ज़रूरी है कि भारत एक विवेक शील देश बन रहा है या फिर..हम अपनी सोच और समझ खोकर विवेकहीन होते जा रहे हैं.