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ZEE Jankari: महुआ मोइत्रा अपने ख‍िलाफ उठने वाली आवाज को दबाकर फासिज्म का उदाहरण दे रही हैं

Mahua Moitra अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को दबाकर, फासिज्म का सबसे बड़ा उदाहरण दे रही हैं. वो अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलने की कोशिश कर रही हैं.

ZEE Jankari: महुआ मोइत्रा अपने ख‍िलाफ उठने वाली आवाज को दबाकर फासिज्म का उदाहरण दे रही हैं

अब हम तृणमूल कांग्रेस की सांसद Mahua Moitra की असहनशीलता का एक छोटा सा विश्लेषण करेंगे.

Mahua Moitra ने Zee News के खिलाफ अघोषित युद्ध का ऐलान कर दिया है और संसद में उनके द्वारा 25 जून को दिए गए भाषण पर दिखाई गई हमारी रिपोर्ट के आधार पर, मेरे खिलाफ दिल्ली की निचली अदालत में उन्होंने आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दर्ज कराया है. इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी. इससे पहले 4 जुलाई को लोकसभा में उन्होंने मेरे खिलाफ Breach Of Privilege Motion यानी विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था.

25 जून को Mahua Moitra ने संसद में एक भाषण दिया था और कहा था कि भारत में फ़ासीवाद आ गया है. इस भाषण में अमेरिका में Holocaust Museum में लगे एक पोस्टर का ज़िक्र था. जिसमें किसी भी देश में फासीवाद के प्रवेश के संकेत लिखे हुए थे. हमने अपने विश्लेषण में बताया था, कि संसद में दिया गया भाषण, उनके मौलिक विचार नहीं थे. उन्होंने इस विचार को कहीं और से उठाया और ऐसा करके उन्होंने भारत की गरिमा को ठेस पहुंचाई.

ये पूरा मामला एक सांसद के तौर पर Mahua Moitra की अभिव्यक्ति की आज़ादी और एक पत्रकार के तौर पर मेरी अभिव्यक्ति की आज़ादी के इर्द-गिर्द घूम रहा है. हमने उनके भाषण की आलोचना की, तो वो संसद में Breach Of Privilege Motion लेकर आ गईं और असहनशीलता की हद देखिए, कि अब उन्होंने मेरे खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा भी दर्ज करवा दिया है जिस फासीवाद शब्द का ज़िक्र करके उन्होंने लोकतंत्र के मंदिर में भारत की छवि को ठेस पहुंचाई थी. ऐसा लग रहा है कि अब उसी सोच का इस्तेमाल करके और सत्ता की ताकत के भरोसे वो कोर्ट चली गईं हैं क्योंकि, उनके पीछे तृणमूल कांग्रेस है, पैसा है और उन्हें ममता बनर्जी का समर्थन भी हासिल है. विडंबना ये है, कि Mahua Moitra अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को दबाकर, फासिज्म का सबसे बड़ा उदाहरण दे रही हैं. वो अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलने की कोशिश कर रही हैं. ये कितना बड़ा विरोधाभास है- कि 25 जून को Mahua Moitra का भाषण फासीवाद और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर ही केंद्रित था. इसलिए आज उन्हें, उन्हीं के भाषण के बारे में याद दिलाना ज़रुरी है.

महुआ मोइत्रा कह रही है कि संविधान खतरे में है
नरेंद्र मोदी पूरे मीडिया को कंट्रोल करते हैं.
राष्ट्रवाद की भावना से देश को खतरा है.
सवाल भी बर्दाश्त नहीं हैं.

Mahua Moitra ने एक प्रकार से अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर एजेंडा चलाने की कोशिश की है. जब उनके Freedom Of Expression की बात आती है, तो सबकुछ ठीक है. लेकिन, जब उसी Freedom Of Expression के नाते मैं, आप या कोई और व्यक्ति अपने विचार रखता है, तो Mahua Moitra और उनके समर्थक हमसे नाराज़ हो जाते हैं. हमारे खिलाफ Social Media पर एजेंडा चलाया जाने लगता है और ऐसा माहौल पैदा करने की कोशिश की जाती है, कि हम चाहकर भी कुछ ना बोल पाएं. इसके लिए सभ्यता की सारी सीमाएं लांघ कर गाली-गलौज भी की जाती है. और संसद में Breach Of Privilege Motion भी लाया जाता है. यकीन नहीं होता, तो आप खुद देखिए, Mahua Moitra ने अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल करके संसद के भीतर क्या किया...और संसद के बाहर उन्होंने Zee News की टीम के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया था.

Mahua Moitra ने संसद के बाहर Martin Longman नाम के लेखक का ज़िक्र किया था. ये वही व्यक्ति है, जिसने 2 जुलाई को आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए एक Tweet किया था और अपने Tweet में Assholes शब्द का ज़िक्र करते हुए, भारत की छवि को ठेस पहुंचाई थी. हमें लगता है, कि मानहानि का मुकदमा तो ऐसे लोगों के खिलाफ दर्ज होना चाहिए.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मौजूद फासीवादी सोच और घृणा से हम डरने वाले नहीं हैं. Zee News भी पूरी निडरता के साथ खड़ा रहेगा और देशहित में हर उस व्यक्ति से सवाल पूछेगा, जो हमारे लोकतंत्र की तुलना फासीवाद से करेगा. हमारी सबसे बड़ी ताकत आप हैं और हमें पूरा भरोसा है, कि आप पूरी ताकत के साथ हमारे पीछे खड़े रहेंगे. आज हम एक बार फिर पूरे ज़ोर से वही बात दोहराना चाहेंगे कि हमें अपने राष्ट्रवाद पर गर्व है, खेद नहीं है. अगर हमारे देश में कोई Imported विचारों के साथ बौद्धिक आतंकवाद फैलाएगा तो हम इसका विरोध करेंगे, और हमें इसका खेद नहीं है. हमारे राष्ट्रवाद को फासीवाद बताने वालों पर हम सवाल उठाते रहेंगे और फासीवाद के नाम पर भारत को बदनाम करने वाली सोच को करारा जवाब देते रहेंगे.