ZEE जानकारी: 70 वर्षों में भारत के वो अहम पड़ाव जिन्होंने देश को पूरी तरह से बदल दिया

आज हम आपको उन महत्वपूर्ण पलों के बारे में बताएंगे जिन्होंने भारत को पूरी तरह बदल दिया लेकिन क्या बदलाव के इस पथ पर चलता हुआ भारत एक बार फिर से विश्वगुरू बन पाएगा?  

ZEE जानकारी: 70 वर्षों में भारत के वो अहम पड़ाव जिन्होंने देश को पूरी तरह से बदल दिया

आज हम आपको उन महत्वपूर्ण पलों के बारे में बताएंगे जिन्होंने भारत को पूरी तरह बदल दिया..लेकिन क्या बदलाव के इस पथ पर चलता हुआ भारत एक बार फिर से विश्वगुरू बन पाएगा? आज़ादी के बाद पहला Turning Point वर्ष 1950 में आया, जब भारत के संविधान का निर्माण पूरा हुआ. 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था और संविधान ने ही ये तय किया कि भारत के नागरिकों के अधिकार क्या होंगे और उनके कर्तव्य क्या होंगे.

1951 में योजना आयोग का गठन किया गया था जिसका काम था भारत के विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएं तैयार करना और इन्हें लागू कराना. इसका उद्धेश्य देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना था. 1952 में देश में पहली बार लोकसभा का चुनाव हुआ. भारत उस वक्त भी दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र था. 

इसके बाद, 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ. इस युद्ध से पहले भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने हिंदी चीनी भाई-भाई का नारा दिया था और तब देश को ऐसा लगा था कि चीन और भारत कभी युद्ध कर ही नहीं सकते लेकिन 1962 में चीन ने भारत पर युद्ध थोप दिया और ये युद्ध हारने के बाद. ये साफ हो गया कि चीन को दोस्त मानना भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक भूल थी. इस भूल का खामियाज़ा आज भी देश उठा रहा है.

इसके बाद 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ. चीन के हाथों मिली हार से सबक लेकर भारत ने अपनी सेनाओं को मजबूत बना लिया था. इसका नतीजा ये हुआ कि भारत ये युद्ध जीत गया. इस युद्ध के दौरान एक मौका तो ऐसा भी आया जब भारत की सेनाएं पाकिस्तान के शहर लाहौर तक पहुंच गई थीं. इस युद्ध के दौरान भारत के विरोध में अमेरिका ने भारत को अनाज देने से मना कर दिया था जिसके बाद ही भारत में हरित क्रांति की शुरुआत हुई और 10 वर्षों के अंदर ही भारत अपनी ज़रूरत से ज्यादा अनाज उगाने में सक्षम हो गया था. इसके बाद 1967 में सात राज्यों में चुनाव हारने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया ताकि किसानों को कर्ज़ लेने में आसानी हो सके.

1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच एक और युद्ध हुआ. 1960 का दशक खत्म होते-होते भारत में बांग्लादेश से आए शरणार्थियों की संख्या लगातार बढ़ने लगी. एक करोड़ शरणार्थियों की वजह से भारत की पहले से कमज़ोर अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ने लगा था. इस बीच, पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया और भारत ने इसके जवाब में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए और एक आजाद देश के रूप में बांग्लादेश का निर्माण हुआ. ये युद्ध पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण के साथ खत्म हुआ था और इस युद्घ ने पूरी दुनिया में ये साबित किया कि भारत की सेनाएं अपने देश की रक्षा के लिए किस हद तक जा सकती हैं.

ये वो दौर था जब पूरे देश में देशभक्ति की भावनाएं चरम पर थीं. पाकिस्तान से युद्ध जीतने के बाद पूरा देश जोश में था. 1974 में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण करके भी दुनिया को अपनी ताकत का एहसास करा दिया था लेकिन 26 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी और देश के लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया. इमरजेंसी को आजाद भारत के इतिहास का सबसे काला पन्ना भी कहा जा सकता है.

1977 में आपातकाल हटा लिया गया और इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी की बहुत बुरी हार हुई और पहली बार आजाद भारत में गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ लेकिन ये गठबंधन की सरकार थी और यहीं से केंद्र में गठबंधन वाली राजनीति का वो सिलसिला शुरू हुआ जो कई वर्षों तक चलता रहा और आज भी चल रहा है. 1979 में मंडल आयोग का गठन हुआ. 1980 में मंडल आयोग की रिपोर्ट आई. 1990 में वीपी सिंह की सरकार ने इस रिपोर्ट को मंजूरी दे दी और OBC वर्ग से आने वाले लोगों को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलने लगा. इसके विरोध में पूरे देश में जबरदस्त आंदोलन और हिंसा भी हुई और देश एक बार फिर जात- पात की राजनीति में बंट गया. 1983 में भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप जीता और देश में खेलों के प्रति लोगों का जोश नए स्तर पर पहुंच गया. 

1991 में भारत की अर्थव्यस्था संकट के दौर से गुजर रही थी तब भारत सरकार ने 47 टन सोना गिरवी रखकर International Monetry Fund और दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से करीब 405 मिलियन डॉलर्स का कर्ज़ लिया जो आज की कीमतों के हिसाब से 2800 करोड़ रुपये बैठता है. अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए भारत में उदारवाद का दौर शुरू हुआ. भारत की अर्थव्यवस्था के दरवाज़े दुनिया के लिए खोल दिए गए और भारत दुनियाभर की कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बाज़ार बन गया. 

इसके बाद 1998 में भारत ने दूसरा परमाणु परीक्षण किया. तब देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और इस परीक्षण के बाद दुनिया के कई देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध हुआ. इस युद्ध में भी पाकिस्तान की करारी हार हुई लेकिन अच्छी बात ये थी कि 1965 और 1971 की तरह इस युद्ध के दौरान दुनिया के ज्यादातर ताकतवर देश पाकिस्तान के साथ नहीं थे. 2008 में भारत ने अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील पर हस्ताक्षर किए और इसके बाद पूरी दुनिया ने भारत को एक परमाणु ताकत के तौर पर स्वीकार करना शुरू कर दिया. इसके बाद आने वाले कुछ वर्षों तक देश घोटालों और भ्रष्टाचार में डूबा रहा. देश की अर्थव्यवस्था तो तेज़ी से बढ़ रही थी लेकिन घोटाले और भ्रष्टाचार इसे धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर रहे थे. 

2011 में भारत को क्रिकेट के क्षेत्र में एक बार फिर बड़ी कामयाबी मिली और भारत ने इस वर्ष आयोजित Cricket World Cup जीत लिया. भारत को ये कामयाबी 28 वर्षों के बाद मिली थी. इसके बाद वर्ष 2014 में 70 वर्षों के इतिहास में पहली बार कांग्रेस के बाद पहली बार किसी पार्टी ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने.
2015 में योजना आयोग की जगह नीति आयोग की शुरुआत हुई. नीति आयोग का काम भी देश के लिए योजनाएं बनाना है. 2016 में भारत में नोटबंदी हुई और इसी साल भारत की सेना ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया. 

2019 में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक करके आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया. ये पहली बार था जब शांति काल में भारत ने पाकिस्तान में इतना अंदर जाकर. उसकी ज़मीन पर हमला किया था. 2019 में एक बार फिर लोकसभा के चुनाव हुए और बीजेपी ने एक बार फिर से बहुमत के साथ सरकार बनाई. लेकिन एक turning Point से हमारा देश आज भी गुज़र रहा है क्योंकि आज देश के लोगों को ये तय करना कि उन्हें टुकड़े टुकडे गैंग की विचारधारा के साथ खड़ा होना है या फिर उन संविधान निर्माताओं के साथ जिन्होंने देश को एक करने के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया.

किसी भी देश के इतिहास में 70 वर्ष का समय, एक बड़ा समय होता है. इस दौरान देश की एक छवि बन चुकी होती है, समाज की एक पहचान बन चुकी होती है, और कई आदतें देश का स्थायी स्वभाव बन चुकी होती हैं . पिछले 70 साल में कई पीढ़ियों ने देश की सेवा की . और देश में आए बदलाव को करीब से महसूस किया. हमने सेना में बहादुरी के लिए सम्मानित दो पूर्व अधिकारियों से पूछा कि वो भारतीय गणतंत्र में आए परिवर्तन को कैसे देखते हैं?

दुनिया में देश का मान बढ़ा है, लेकिन अपने ही देश में सेना पर सवाल उठाए जा रहे हैं. मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन बिना पूरी जानकारी लिए, किसी भी मुद्दे पर बोलने की आदत भी बढ़ गई है. अगर 70 साल के गणतंत्र की यही उपलब्धि है तो वाकई हमें सोचना होगा कि हम किस दिशा में जा रहे हैं .

आसान शब्दों में कहें तो इन 70 वर्षों के दौरान भारत राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह बदल चुका है लेकिन आज भी कुछ लोग हैं जो इस बदलाव को स्वीकार नहीं करना चाहते. ऐसे लोग चाहते हैं कि भारत हमेशा गुलाम बना रहे. इन लोगों को टुकड़े टुकड़े गैंग से भी समर्थन मिलता है और पाकिस्तान से भी. ऐसे लोग कश्मीर को हमेशा धारा 370 वाली ज़ंजीरों में जकड़कर रखना चाहते हैं. इन लोगों को आज कश्मीर की एक लड़की का बयान सुनना चाहिए जिसने हाल ही में शानदार अंकों के साथ 10वीं की परीक्षा पास की है. इस मुस्लिम लड़की ने अपनी सफलता का श्रेय देश की सेना को भी दिया है.