ZEE Jankari: न साफ हवा, न साफ पानी, फिर भी देश की राजधानी!

आपको जानकर दुख होगा कि इंसानों ने वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से जीवन के लिए आवश्यक इन तत्वों का विनाश करना शुरू कर दिया है.

ZEE Jankari: न साफ हवा, न साफ पानी, फिर भी देश की राजधानी!

प्रदूषित विचारों के बाद..अब हम प्रदूषित पानी का DNA टेस्ट करेंगे. हिंदू धर्म में कहा जाता है कि मानव शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है..ये तत्व हैं- जल, आकाश, वायु, अग्नि और पृथ्वी. ये पांचों तत्व पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं. लेकिन अगर भविष्य में इंसानों को किसी दूसरे ग्रह पर बसना होगा...तो किन तत्वों की ज़रूरत होगी ?

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के Ames Research Center के मुताबिक किसी दूसरे ग्रह पर मानव सभ्यता बसाने के लिए 5 चीज़े सबसे ज्यादा ज़रूरी हैं- ये है...जल, सूर्य की रोशनी, वायु...यानी ऑक्सीजन...इंसानों के रहने लायक तापमान, और नाइट्रोजन .

आपको जानकर दुख होगा कि इंसानों ने वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से जीवन के लिए आवश्यक इन तत्वों का विनाश करना शुरू कर दिया है . यानी जो चीज़ें पृथ्वी पर जीवन के लिए अनिवार्य हैं...उनमें से ज्यादातर हम बर्बाद कर चुके हैं . हमारे देश के ज्य़ादातर शहरों में हवा सांस लेने लायक नहीं है...ज़मीन पर चलने के लिए जगह नहीं है...जलवायु परिवर्तन ने पृथ्वी के तापमान पर दुष्प्रभाव डालना शुरू कर दिया है और अब भारत के ज्यादातर शहरों में पीने का पानी भी जहरीला हो चुका है .

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक देश के 21 में से 15 शहरों का पानी पीने लायक नहीं है . सिर्फ 6 शहरों को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी शहरों में पानी के जितने सैंपल लिए गए...सबके सब जांच में फेल हो गए . इन शहरों में 21 राज्यों की राजधानियां और बड़े शहर शामिल हैं .

Bureau Of Indian Standards द्वारा की गई इस Study के मुताबिक पीने के पानी की गुणवत्ता के मामले में देश की राजधानी दिल्ली सबसे बुरी स्थिती में है . दिल्ली में 11 अलग-अलग जगहों से पानी के Samples लिए गए थे . लेकिन सभी Samples जांच में बुरी तरह से फेल हो गए . अलग-अलग शहरों से लिए गए पानी के इन Samples की जांच 19 पैमानों पर की गई थी और दिल्ली का पानी सभी पैमानों पर फेल हो गया . जिन जगहों से पानी के ये नमूने लिए गए उनमें उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का घर और उनका ऑफिस भी शामिल है .

इस Study के मुताबिक...पूरे भारत में मुंबई का पानी सबसे बेहतर है . मुंबई में 10 जगहों से पीने के पानी के Samples लिए गए थे और जांच में ये सभी Samples....सभी पैमानों पर खरे उतरे . पानी की गुणवत्ता के मामले में दूसरे नंबर पर हैदराबाद और भुवनेश्वर हैं . जबकि झारखंड की राजधानी को रांची इस Ranking में तीसरा स्थान मिला है .

सबसे बुरी हालत देश की राजधानी दिल्ली की है..जो इस रैंकिंग में आखिरी यानी 15वें स्थान पर है . दिल्ली के बाद कोलकाता, चेन्नई, देहरादून, जयपुर, जम्मू और लखनऊ की हालत सबसे ज्यादा खराब है .यानी अगर आप देश के इन शहरों में रहते हैं और जल को जीवन मानते हैं..तो हो सकता है कि यही जल आपके जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका हो .

NITI आयोग के मुताबिक भारत मे उपलब्ध 70 प्रतिशत पानी...दूषित है . और पानी की गुणवत्ता के मामले में भारत दुनिया के 122 देशों में 120वें नंबर पर है .उपभोक्ता मंत्रालय ने जिन 21 शहरों पर Study की है उन सभी शहरों को Smart City और भविष्य के शहरों के तौर पर विकसित किया जा रहा है . अब आप खुद सोचिए कि जिन शहरों में पीने का पानी तक..ज़हरीला हो चुका है..उन्हें Smart City कैसे बनाया जाएगा .

आज ये मुद्दा...देश की संसद में भी उठा...जहां नेताओं ने पानी के प्रदूषण को लेकर चिंता जताई..लेकिन सवाल ये है कि क्या इस चिंता से इस समस्या का कोई हल निकलेगा ?एक अनुमान के मुताबिक..भारत में दूषित पानी को साफ करने वाले RO सिस्टम का बाज़ार फिलहाल 4 हज़ार 200 करोड़ रुपये का है. और वर्ष 2024 तक ये 7 गुना बढ़कर करीब 29 हज़ार करोड़ रुपये हो जाएगा .

सरकारें आम लोगों को साफ पानी उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं...और लोग Water Purifires की मदद से गंदे पानी को साफ करके...पीने लायक बना रहे हैं . लेकिन क्या आपको पता है कि RO आपके एक लीटर पानी को पीने लायक बनाने के लिए करीब 3 लीटर पानी बर्बाद कर देता है . यानी अगर एक परिवार में पांच लोग रहते हैं और वो प्रतिदिन 20 लीटर पानी का इस्तेमाल खाना बनाने और पीने के लिए करते हैं...तो ये 20 लीटर पानी...60 लीटर पानी को बर्बाद करके...हासिल होता है..यानी महीने भर में करीब 1800 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है .

Central Ground water Authority के मुताबिक...भारत में एक मध्यवर्गीय परिवार में प्रति व्यक्ति पानी की खपत करीब 135 लीटर है . लेकिन ये 135 लीटर पानी उन खुशनसीब भारतीयों को मिल पाता है...जिनके घरों तक पानी पहुंचता है . क्योंकि NITI आयोग के मुताबिक..भारत के 60 करोड़ लोग...गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं . और 2020 तक..देश के 21 शहरों में Ground Water पूरी तरह से खत्म हो जाएगा . इनमें बैंगलुरू, दिल्ली और चेन्नई जैसे शहर भी शामिल हैं .

यानी एक तरफ तो हमारे देश में लोगों के पास पीने का पर्याप्त पानी ही नहीं है...और जिन्हें ये पानी मिल भी रहा है...उनकी सेहत को इससे नुकसान हो रहा है . वायु प्रदूषण के मामले में दुनिया के 10 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 7 भारत के हैं . और 30 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 22 भारत के हैं . यानी हम एक ऐसा देश बना रहे हैं..जो ना तो अपने नागरिकों को साफ हवा दे पा रहा है और ना ही साफ पानी.

देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 5 वर्षों में सिर्फ 61 दिन... हवा सांस लेने लायक थी..तो दिल्ली के किसी भी इलाके में पानी पीने लायक नहीं है . अब खुद सोचिए कि क्या दिल्ली को देश की राजधानी कहलाने का हक है . आज हमने भारत के उन तमाम शहरों से पानी को लेकर Ground Reporting की है...जहां का पानी पीने लायक नहीं है.

अक्सर हमारे देश का मीडिया...दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों की समस्या पर बात करता है...और इस बहस में देश के उन शहरों को जगह नहीं मिल पाती..जहां देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा रहता है. भारत में कुल शहरी आबादी...46 करोड़ है. जबकि दिल्ली और मुंबई की आबादी करीब साढ़े चार करोड़ है .

यानी हमारे देश में ज्यादातर मौकों पर 35 करोड़ लोगों की समस्याओं की बात कोई नहीं करता . इसलिए आज आपको पानी वाली इस समस्या पर हमारा Pan India..यानी अखिल भारतीय विश्लेषण ज़रूर देखना चाहिए .

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि दिल्ली में पीने का पानी एक दम स्वच्छ है . लेकिन आज एक विरोधाभास का ज़िक्र करना भी ज़रुरी है. और इसके लिए हम अमिताभ बच्चन की फिल्म, मैं आज़ाद हूं के एक Scene की मदद लेंगे. ये फिल्म वर्ष 1989 में Release हुई थी. यानी ये वो वक्त था, जब भारत की आज़ादी को 42 साल हुए थे. लेकिन भारत की आज़ादी के 72 वर्ष बीत जाने के बावजूद, इस फिल्म के एक Scene में कही गई एक-एक बात आज भी प्रासंगिक नज़र आती है.