ZEE जानकारी: महाराष्ट्र में क्या भतीजे ने चाचा को हरा दिया?

आज देश की राजनीति के लिए एक बड़ा दिलचस्प दिन था. क्योंकि आज देश ने महाराष्ट्र की राजनीति का महा Confusion देखा. 

ZEE जानकारी: महाराष्ट्र में क्या भतीजे ने चाचा को हरा दिया?

भारत के करीब 42 करोड़ लोग, रोज़ सुबह हिंदी-अंग्रेजी और देश की क्षेत्रीय भाषाओं में अखबार पढ़ते हैं. भारत में प्रतिदिन अखबार पढ़ने वालों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है. आज सुबह जब इन करोड़ों लोगों ने अखबार उठाया होगा..तो उन्हें पहने पन्ने पर यही हेडलाइन दिखाई दी कि उद्धव ठाकरे. महाराष्ट्र के मुख्य़मंत्री बनने वाले हैं. लगभग सभी समाचार पत्रों की Headlines कह रही थीं की कांग्रेस और NCP उद्धव ठाकरे को मुख्य़मंत्री पद देने पर सहमत है. लेकिन सुबह आठ बजे के आसपास देश के तमाम News Channels पर ये Breaking News चलने लगी कि बीजेपी के देवेंद्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है.

ये शायद भारत के इतिहास में पहला ऐसा मौका रहा होगा..जब अखबारों की Headlines और News Channels पर चलने वाली Breaking News एक दूसरे से एकदम विपरित थी. यानी अखबार पढ़ने वाले देश के करीब 42 करोड़ लोग कुछ मिनटों के लिए ये समझ ही नहीं पाए होंगे कि Television पर जो दिख रहा है वो सच है..या फिर उनके हाथ में जो अखबार हैं वो सच कह रहे हैं .

हालांकि जल्दी ही ये साफ हो गया कि TV पर दिख रही तस्वीरें एकदम सच है...और देवेंद्र फड़नवीस ने NCP के अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली है . यानी देश के जो बड़े बड़े अखबार...सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक महाराष्ट्र की खबर के मामले में ठीक थे..वो अखबार एक मिनट बाद यानी ठीक 8 बजे Outdated हो गए .

जब तक अखबारों ने Printing Press से लेकर आपके घर तक का सफर तय किया..तब तक महाराष्ट्र की राजनैतिक बाज़ी पूरी तरह पलट चुकी थी . यानी ये क्रिकेट की तरह राजनीति का Day एंड नाइट मैच था . एक ऐसा मैच जिसके नतीजे की भविष्यवाणी बहुत मुश्किल होती है..क्योंकि कई बार..आखिरी गेंद पर भी..खेल पलट जाता है .

लेकिन इस बड़े घटनाक्रम की शुरुआत.. शुक्रवार शाम हो चुकी थी . जब शिवसेना, NCP और कांग्रेस सरकार बनाने के लिए अंतिम दौर में थे..तब तक बीजेपी और अजित पवार ने..महाराष्ट्र के राज्यपाल से मिलने का फैसला कर लिया था . इसके बाद कल रात करीब सवा नौ बजे देवेंद्र फड़नवीस..ने राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी के पास जाकर...सरकार बनाने का दावा पेश किया .

फड़नवीस ने अपने दावे में कहा उनके पास 173 विधायकों का समर्थन है . इनमें NCP के 54 और 14 निर्दलीय विधायक शामिल थे .रात 11 बजकर 45 मिनट पर NCP विधायक दल के नेता..अजित पवार 54 विधायकों का समर्थन पत्र लेकर..राज्यपाल से मिलने पहुंचे .

इसके ठीक 15 मिनटों के बाद यानी राज 12 बजे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला लिया . राज्यपाल ने देवेंद्र फड़नवीस के पास विधायकों की पर्याप्त संख्या होने की जानकारी केंद्र सरकार को भेजी और राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश कर दी .इसके बाद सुबह 5 बजकर 45 मिनट पर महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया . सुबह 6 बजे राज्य़पाल ने फैसला किया कि वो आज ही देवेंद्र फड़नवीस को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे .

सुबह साढ़े 6 बजे...राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने देवेंद्र फड़नवीस को शपथ लेने का निवेदन भेजा . पौने सात बजे..देवेंद्र फड़नवीस ने इस बात की जानकारी राज्यपाल को दी कि...वो मुख्यमंत्री और अजित पवार उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे . इसके बाद सुबह 8 बजकर 7 मिनट पर राज्यपाल ने देवेंद्र फड़नवीस और अजित पवार को शपथ दिलाई...और 30 दिन बाद आखिरकार...महाराष्ट्र को नई सरकार मिल गई . इस सरकार के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और उप मुख्य मंत्री अजित पवार हैं .कुल मिलाकर आज सत्ता की जंग में शिवसेना और कांग्रेस की हार हुई..तो दर्शकों तक सही खबर पहुंचाने की जंग में News Channels..अखबारों से जीत गए .

आज देश की राजनीति के लिए एक बड़ा दिलचस्प दिन था. क्योंकि आज देश ने महाराष्ट्र की राजनीति का महा Confusion देखा. बीजेपी का दावा है कि NCP और कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन के बाद उसके पास 173 विधायक हैं. लेकिन शिवसेना, कांग्रेस और NCP का एक हिस्सा...इस दावे को खारिज कर रहा है . शिवसेना, कांग्रेस और NCP अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट भी ले गए हैं. और अजित पवार को NCP के विधायक दल के नेता के पद से हटा दिया गया है. लेकिन दुविधा की स्थिति अभी भी बनी हुई है.

इसलिए आज हम आपको महाराष्ट्र की इस महा कन्फ्यूज़न का सबसे सटीक विश्लेषण दिखाएंगे . ये विश्लेषण 10 Points में होगा..और इसे देखकर आप महाराष्ट्र की राजनीति के एक्सपर्ट बन जाएंगे .पहला Point ये है कि आज से तीन दिन पहले..यानी 20 तारीख को संसद में प्रधानमंत्री मोदी और NCP के अध्यक्ष शरद पवार के बीच एक मुलाकात हुई थी . तो क्या इस मुलाकात ने ही महाराष्ट्र की पूरी राजनीति को बदल कर रख दिया है ?

दूसरी अहम बात ये है कि पवार..परिवार में फूट पड़ गई है . शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने बीजेपी से हाथ मिला लिया है और शरद पवार अभी भी शिवसेना और कांग्रेस के साथ बने हुए हैं . तीसरी बात ये है कि NCP के तीन बड़े नेताओं, शरद पवार, अजित पवार और प्रफुल पटेल के खिलाफ ED की जांच चल रही है. और बदले हुए राजनीतिक घटनाक्रम में इस तथ्य को नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता .

चौथी बात ये है कि कलियुग की राजनीति में सिद्धांतों की उम्मीद करना बेईमानी है . बीजेपी कहती थी कि चुनाव के बाद..अजित पवार से चक्की पिसवाएंगे . कांग्रेंस और NCP धर्म निरपेक्षता की बाते करते थे और कहते थे कि शिवसेना और बीजेपी अछूत है . आज इनकी पोल खुल गई है. . यानी बीजेपी के लिए भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं रहा . NCP और कांग्रेस के लिए धर्मनिरपेक्षता कोई मुद्दा नहीं रहा . और शिवसेना के लिए मराठी मानुष और हिंदुत्व कोई मुद्दा नहीं रहा .

इस पूरे घटनाक्रम से पांचवी बात ये निकलकर आई है कि कांग्रेस पूरी तरह से नेतृत्व विहीन हो चुकी है. और वहां किसी को ये नहीं पता..कि क्या करना है . छठी बात ये है News Channels की बहसों और अखबारों में बड़ी बड़ी टिप्पणियां करने वाले राजनीतिक पंडितों को इस बारे में कुछ पता नहीं था और मीडिया के सूत्र भी कुछ कोई जानकारी नहीं जुटा पाए .

सातवीं बात ये है कि बीजेपी ने एक बार फिर साबित किया है कि वो सरप्राइज़ देने में माहिर है. और पार्टी का अंदूरूनी तंत्र ऐसा है..जिसमें से बातें आसानी से लीक नहीं होती हैं . आठवीं बात ये है कि इस पूरे खेल में सबसे बड़ी पराजय शिवसेना की हुई है . शिवसेना ने अपना आधार खोया है . NCP ने अपनी पार्टी खो दी है तो कांग्रेस के लिए अपना चेहरा बचाना भी मुश्किल हो गया है . जबकि बीजेपी इसमें सबसे बड़ी विजेता की तरह उभरी है . जिसे सत्ता भी मिल गई है और उसका जनाधार भी मजबूत हो सकता है . नौवीं महत्वपूर्ण बात ये है कि महाराष्ट्र देश की आर्थिक राजधानी है . जिसका आकार 28 लाख करोड़ रुपये का है, ये देश की कुल GDP का 15 प्रतिशत है . इसलिए महाराष्ट्र की राजनीति को हलके में नहीं लिया जा सकता .

और आखिरी बात ये है कि क्या वाकई ..इस पूरे मामले में शरद पवार की हार हुई है ? या फिर वो शिवसेना और कांग्रेस की आंख में धूल झोंक रहे हैं ? . क्या इस राजनीतिक घटनाक्रम की पटकथा खुद शरद पवार ने लिखी है और वही इसके निर्देशक भी हैं ?शऱद पवार BBCI के अध्यक्ष रह चुके हैं . क्रिकेट प्रेमी शरद पवार जानते हैं कि आखिरी गेंद पर भी मैच का रुख कैसे मोड़ा जा सकता है.