ZEE जानकारी: निर्भया के 7 साल का इंतज़ार Vs दिशा को 10 दिन में इंसाफ

वर्ष 2012 के निर्भया केस और वर्ष 2019 में दिशा के साथ गैंगरेप मामले में कुछ समानताएं हैं लेकिन इनमें एक बड़ा अंतर है और वो है इंसाफ मिलने में लगने वाला समय. 7 साल बीतने के बाद भी निर्भया मामले के 4 दोषियों को फांसी की सज़ा अब तक नहीं मिली है. यानी निर्भया का परिवार अब तक इंसाफ मिलने का इंतजार कर रहा है. जबकि सिर्फ 10 दिनों में ही दिशा के आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया गया. और दिशा का परिवार कह रहा है कि इससे उन्हें न्याय मिल गया है. लेकिन क्या हम देश में ऐसा ही न्याय चाहते हैं?

ZEE जानकारी: निर्भया के 7 साल का इंतज़ार Vs दिशा को 10 दिन में इंसाफ

आज हैदराबाद एनकाउंटर पर देश का जश्न देखकर लोगों को निर्भया मामले की याद आ गई. तब लोगों ने प्रदर्शन किया था और आज जश्न मनाया जा रहा है. वर्ष 2012 के निर्भया केस और वर्ष 2019 में दिशा के साथ गैंगरेप मामले में कुछ समानताएं हैं लेकिन इनमें एक बड़ा अंतर है और वो है इंसाफ मिलने में लगने वाला समय. 7 साल बीतने के बाद भी निर्भया मामले के 4 दोषियों को फांसी की सज़ा अब तक नहीं मिली है. यानी निर्भया का परिवार अब तक इंसाफ मिलने का इंतजार कर रहा है. जबकि सिर्फ 10 दिनों में ही दिशा के आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया गया. और दिशा का परिवार कह रहा है कि इससे उन्हें न्याय मिल गया है. लेकिन क्या हम देश में ऐसा ही न्याय चाहते हैं?

निर्भया के आरोपियों को साल 2013 में ही कोर्ट ने फांसी की सजा दे दी थी. यानी 9 महीने में ही मामले में सजा का ऐलान हो गया था. लेकिन कुल मिलाकर 7 वर्ष बीत चुके हैं फिर भी अबतक दोषी जिंदा हैं. निर्भया मामले के एक दोषी विनय शर्मा की दया याचिका पर अब राष्ट्रपति फैसला लेंगे. आज गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति से इस दया याचिका को खारिज करने की सिफारिश की है.

यानी निचली अदालत से सजा दी गई है लेकिन फांसी पर लटकाने के लिए कोई तारीख़ तय नहीं हुई है. कहा जाता है कि Justice delayed is justice denied. यानी न्याय मिलने में देरी भी. अन्याय ही है. हमारे देश में न्यायालयों को न्याय का मंदिर कहा जाता है लेकिन लगता है अदालतों में तारीख पर तारीख वाली देरी से इस मंदिर पर लोगों की आस्था कम हो रही है. एक बड़ी समस्या ये भी है कि हमारे देश में... आतंकवादियों की फांसी रुकवाने के लिए आधी रात में भी सबसे बड़ी अदालत में सुनवाई शुरु हो जाती है. अब आशंका है कि निर्भया मामले में भी दोषियों की फांसी को टालने के लिए तरह तरह के उपाय किए जाएंगे. यही वजह है कि निर्भया की मां 7 साल के इंतजार के बदले... 10 दिनों में मिले एनकाउंटर वाले इंसाफ से खुश हैं. आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ये भी कहा है कि POCSO Act के तहत दुष्कर्म के दोषियों को दया याचिका दायर करने का अधिकार नहीं होना चाहिए.

वर्ष 2012 में Pocso Act यानी The Protection Of children From Sexual Offences Act बनाया गया था.ताकि नाबालिग और बच्चों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न को रोका जा सके. वर्ष 2012 में निर्भया केस के बाद बलात्कारियों को फांसी की सज़ा देने का कानून बनाया गया था. भारत सहित दुनिया के कई देशों में जघन्य अपराधों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है. लेकिन हैदराबाद, उत्तर प्रदेश और बिहार में हाल की घटनाओं को देखकर ऐसा लगता है. मानो अपराधियों ने अपनी जान बचाने का एक नया तरीका ढूंढ लिया है. इसलिए Rape के बाद महिलाओं की हत्या करने और जला देने के कई मामले सामने आए हैं. ऐसा करने से अपराध से जुड़े सबूत नष्ट हो जाते हैं या उन सबूतों की विश्वसनीयता कम हो जाती है और कई बार तो पीड़ित की पहचान भी नहीं हो पाती है.

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न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत में ऐसे अपराधियों पर दोष सिद्ध करना मुश्किल हो जाता है और कमजोर सबूतों की वजह से उनके बरी होने की संभावना बढ़ जाती है. लेकिन अब ऐसी सोच रखनेवाले अपराधियों को पुलिस के एनकाउंटर का डर होगा. अब तक आपने आतंकवादियों और बड़े अपराधियों के एनकाउंटर की खबरें सुनी होंगी... लेकिन गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर की शायद ये पहली घटना है. मानव अधिकारों की बात करने वाले Activists इसका विरोध करेंगे और ये दलील भी देंगे कि कानून में इनके लिए फांसी की सजा का प्रावधान पहले से ही है.

लेकिन National Crime Records Bureau यानी NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2012 में हुए निर्भया केस के बाद से लेकर 2017 तक 1 लाख 76 हज़ार से ज्यादा रेप के मामले हो चुके हैं. अकेले वर्ष 2017 में ही महिलाओं के साथ रेप के 32 हज़ार 559 मामले दर्ज किये गए थे. यानी उस वर्ष भारत में प्रति दिन 89 महिलाएं बलात्कार का शिकार हुईं थीं. इसका मतलब ये है कि अपराधियों को निर्भया कांड के बाद बने सख्त कानून का भी डर नहीं है... इसलिए महिलाओं के खिलाफ बलात्कार के मामले घटने की बजाय बहुत तेज़ी से बढ़े हैं.

वर्ष 2017 में Rape या Gangrape के बाद पीड़िता की हत्या किए जाने की 223 घटनाएं हुई थीं. ऐसे 64 शर्मनाक मामलों के साथ उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है. और पिछले 1 महीने में ही देशभर में 5 से ज्यादा ऐसी घटनाएं हुई हैं. ऐसे मामलों के अचानक बढ़ने की वजह जानने के लिए आज हमने कानून के जानकारों से भी बात की. और उनके मुताबिक इसकी एक बड़ी वजह है रेप के साथ हत्या के मामले के लिए बनाया गया नया कानून. क्या हैदराबाद Encounter के बाद इन घटनाओं में कमी आ सकती है? आपने देखा होगा कि फिल्मों और कहानियों में पुलिस... अपराधियों से दो कदम आगे रहती है... लेकिन इस बार Real Life में पुलिस ने अपराधियों की इस सोच पर Encounter वाली Surgical Strike की है.