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ZEE जानकारी: 72 वर्ष पहले आज ही 'तिरंगा' बना था हमारा राष्ट्रीय ध्वज, जानिए इसका पूरा इतिहास

17वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य ने भी भारत के अधिकांश हिस्से पर अपना प्रभाव जमा लिया था. लेकिन उस वक्त भी भारत का कोई राष्ट्रीय ध्वज नहीं था.

ZEE जानकारी: 72 वर्ष पहले आज ही 'तिरंगा' बना था हमारा राष्ट्रीय ध्वज, जानिए इसका पूरा इतिहास

पाकिस्तान का आज पूरी दुनिया में अपमान हो रहा है और भारत का तिरंगा पूरी दुनिया में लहरा रहा है. किसी भी देश का राष्ट्रीय ध्वज उस देश की राष्ट्रीय भावनाओं का प्रतीक होता है. राष्ट्रीय ध्वज किसी देश के हर धर्म, जाति, नस्ल, क्षेत्र और भाषा का प्रतिनिधित्व करता है. भारत के राष्ट्रीय ध्वज में ये सभी विशेषताएं मौजूद हैं. 72 वर्ष पहले आज ही के दिन 22 जुलाई 1947 को भारत की संविधान सभा ने तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार कर लिया था. उस वक्त तक भारत का कोई राष्ट्रीय ध्वज नहीं था. अगर हम भारत के इतिहास पर गौर करें तो आज से 2 हजार 300 वर्ष पहले मौर्य साम्राज्य का अधिकार लगभग पूरे भारत पर था. लेकिन उस वक्त भी भारत का कोई राष्ट्रीय ध्वज नहीं था.

17वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य ने भी भारत के अधिकांश हिस्से पर अपना प्रभाव जमा लिया था. लेकिन उस वक्त भी भारत का कोई राष्ट्रीय ध्वज नहीं था. आज़ादी से पहले भारत में 562 से ज्यादा रियासतें थीं. इन सभी रियासतों के भी अलग-अलग झंडे थे. गुलामी के दौर में ब्रिटिश भारत का झंडा Union Jack था. जिसका भारत की संस्कृति और इतिहास से कोई संबंध नहीं था. ये ध्वज, भारत का नहीं. भारत की गुलामी का प्रतीक था. जब भारत आज़ाद हुआ, तब आखिरी बार 15 अगस्त 1947 को Union Jack उतारा गया था. इस रस्म के दौरान भारत के आखिरी Viceroy Lord Louis Mountbatten भी मौजूद थे. Union Jack को उतरते हुए देखकर Mountbatten काफी भावुक हो गए थे. लेकिन सद्भावना के साथ उन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे को Salute भी किया था. 

 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज को डिज़ाइन करने में पिंगली वेंकैया का बहुत बड़ा योगदान था. वो एक स्वतंत्रता सेनानी थे. करीब 143 वर्ष पहले 2 अगस्त 1876 को पिंगली वैंकैया का जन्म आंध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में हुआ था. वर्ष 1916 से लेकर वर्ष 1921 तक पिंगली वेंकैया ने 30 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों पर गहराई से Research किया. वर्ष 1921 में Congress के सम्मेलन में उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज का अपना बनाया हुआ Design पेश किया. उस Design में मुख्य रुप से लाल और हरा रंग था. जिसमें लाल रंग हिंदू और हरा रंग मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करता था.

बाकी समुदायों को ध्यान में रखते हुए महात्मा गांधी ने उस Design में सफेद पट्टी डालने की बात कही. महात्मा गांधी ने झंडे के बीच में चरखे को शामिल करने की सलाह दी. चरखा, उस वक्त अंग्रेज़ों के खिलाफ क्रांति का प्रतीक था. अगस्त 1931 में कांग्रेस ऩे अपने वार्षिक सम्मेलन में तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का प्रस्ताव पारित किया. इस ध्वज में लाल रंग को हटा कर केसरिया रंग शामिल किया गया. केसरिया रंग को हिम्मत, त्याग और बलिदान का प्रतीक माना जाता है. यानी अब इस ध्वज में, केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियां थीं और बीच में चरखा था. 

22 जुलाई 1947 में संविधान सभा ने तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज से रूप में स्वीकार किया. लेकिन इस ध्वज में चरखे की जगह अशोक चक्र को शामिल किया गया. ये एक नीला चक्र था, जिसे अशोक का धर्म चक्र भी कहा जाता है. तिरंगे में धर्म चक्र को क्यों शामिल किया गया ? इसकी भी एक वजह है, धर्म चक्र का इस्तेमाल मौर्य साम्राज्य के सम्राट अशोक ने किया था. ये धर्म चक्र सम्राट अशोक के भारत की विशाल सीमाओं का प्रतीक है. उस वक्त पूरा भारत एक शासन व्यवस्था के सूत्र में बंधा हुआ था. सम्राट अशोक के साम्राज्य में पूरा पाकिस्तान और आज का बांग्लादेश भी मौजूद था. वैसे ये दुख की बात है कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज को डिजाइन करने वाले पिंगली वेंकैया को देश ने भुला दिया. इसीलिए आज हमने पिंगली वेंकैया के योगदान को पूरे देश के सामने रखा.