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Zee Jankari: कश्मीर में कल से एक देश, एक विधान, एक निशान

कल का दिन आज़ाद भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है. कल कश्मीर का गृह प्रवेश है और इस मौके पर पूरे देश के लोग सादर आमंत्रित हैं. 

Zee Jankari: कश्मीर में कल से एक देश, एक विधान, एक निशान

कल का दिन आज़ाद भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है. कल कश्मीर का गृह प्रवेश है और इस मौके पर पूरे देश के लोग सादर आमंत्रित हैं. आज हम आपको विस्तार से इस शुभ समाचार के बारे में बताएंगे. लेकिन सबसे पहले आपको आज से 91 वर्ष पुराना किस्सा बताते हैं. 14 मई 1928 को देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने गुजरात के बारडोली में किसानों को संबोधित किया था. ये किसान ब्रिटिश सरकार की कर नीतियों के खिलाफ बाऱडोली सत्याग्रह में हिस्सा ले रहे थे. अपने संबोधन में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किसानों से कहा था कि कुछ लोगों की लापरवाही एक बड़े जहाज़ को भी डुबो सकती है.

इसलिए जहाज़ को बंदरगाह तक सुरक्षित लाने के लिए उस पर मौजूद हर व्यक्ति के सहयोग की ज़रूरत होती है.किसी जहाज़ की तरह देश को भी सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए एकता और अखंडता की ज़रूरत होती है और इस एकजुटता और अखंडता में पैदा हुई छोटी सी दरार भी देश को तोड़ सकती है.

इस साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करना भी इसी दरार को भरने की दिशा में उठाया गया एक ज़रूरी कदम था. और अब, कल यानी 31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के एक विधान और एक निशान के तहत आ जाएंगे. क्योंकि कल सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंति के मौके पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो नए केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में अस्तित्व में आ जाएंगे.

जिस बारडोली सत्याग्रह का जिक्र हमने किया उसी की सफलता के बाद बारडोली की महिलाओं ने पहली बार वल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि दी थी ...और तब से वो सरदार पटेल कहलाने लगे थे. बारडोली आंदोलन की सफलता...स्वराज की दिशा में एक बड़ा कदम थी और जम्मू-कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश बन जाना जम्मू-कश्मीर को पूर्ण स्वराज दिलाने की तरफ उठाया गया सबसे मजबूत कदम है . क्योंकि अब जम्मू-कश्मीर को आतंकवादियों, अलगाववादियों और भारत को तोड़ने वाली राजनीति से आज़ादी मिल जाएगी .

जम्मू और कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाकर रखना सरदार वल्लभ भाई पटेल का सबसे बड़ा सपना था और कल उनके इस सपने को पूरा करने का दिन है . फिलहाल देश में 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं..इनमें अंडमान-निकोबार, दादर और नागर हवेली, लक्ष्वद्वीप, पुड्डुचेरी, चंडीगढ़, दमन दिउ और दिल्ली शामिल हैं. लेकिन कल से इनका संख्या 9 हो जाएगी क्योंकि इस सूची में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का नाम भी जुड़ जाएगा .

यानी आप कह सकते हैं कि कल की सुबह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नई सुबह होगी. इन क्षेत्रों में कल से जो बदलाव होंगे आप उन्हें भी सरल भाषा में समझ लीजिए.

सबसे बड़ा बदलाव ये होगा कि कल से जम्मू-कश्मीर में 106 नए कानून लागू हो जाएंगे. ये कानून फिलहाल भारत के बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हैं. विशेष राज्य के दर्जे के तहत जम्मू-कश्मीर में 153 विशेष कानून लागू थे..जिन्हें अब खत्म कर दिया जाएगा.

इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अब Ranbir Penal Code की जगह Indian Penal Code लागू हो जाएगा . यानी वहां कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय कानून के मुताबिक ही कार्रवाई होगी.

कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश बन जाने के बाद मुस्लिम बहुसंख्या वाले जम्मू और कश्मीर में..मुस्लिम आबादी अल्पसंख्यकों की श्रेणी में आ सकती है और उन्हें वो सब अधिकार मिल सकते हैं जो देश के बाकी क्षेत्रों के अल्पसंख्यकों को हासिल हैं. जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक कश्मीर घाटी की कुल आबादी 54 लाख 76 हज़ार से ज्यादा है और इसमें से 97 प्रतिशत यानी करीब 53 लाख मुस्लिम हैं . जबकि पूरे प्रदेश में मुस्लिमों की आबादी 69 प्रतिशत से ज्यादा है .

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू और कश्मीर में हिंदी और अंग्रेज़ी को आधिकारिक भाषा भी बनाया जा सकता है हालांकि भविष्य में विधानसभा द्वारा किसी तीसरी भाषा को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा दिए जाने का विकल्प भी मौजूद होगा. लेकिन इसे लेकर भी स्थिति अभी साफ नहीं है और इस विषय पर भी थोड़ा इंतज़ार किए जाने की ज़रूरत है. इससे पहले जम्मू-कश्मीर देश का अकेला ऐसा राज्य था जहां कि आधिकारिक भाषा ऊर्दू थी.

इसके अलावा एक बड़ा बदलाव ये होगा कि लद्दाख से जुड़े सभी फैसले लेने का अधिकार लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास होगा और उसकी अपनी विधासभा नहीं होगी. जबकि जम्मू-कश्मीर में दिल्ली की तर्ज पर विधानसभा का गठन होगा.

कल से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में राज्यपाल नहीं होंगे बल्कि कल गिरिश चंद्र मुर्मु जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल और राधा कृष्ण माथुर लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में शपथ लेंगे.

जम्मू-कश्मीर में नई विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष की बजाय 5 वर्ष का होगा. जम्मू-कश्मीर की नई विधानसभा में 107 सीटें होंगी . इनमें से 24 सीटें पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के लिए खाली रखी जाएंगी. यानी जिस दिन PoK का भारत में विलय होगा तब संपूर्ण जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व 107 विधायक करेंगे.

देश की संसद द्वारा बनाए गए कानून...राज्य की विधानसभा द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर होंगे और किसी भी विवाद की स्थिति में संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को ही लागू किया जाएगा.

विधानसभा द्वारा पास किए गए किसी भी बिल को मंजूरी के लिए LG के पास भेजा जाएगा और वही इस पर अंतिम फैसला लेंगे.

जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी और केंद्र सरकार के पास अनुच्छेद 360 के तहत राज्य में वित्तीय आपातकाल घोषित करने का भी अधिकार होगा.

कल पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस भी मनाया जाएगा. सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरुआत साल 2014 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने की थी. यानी सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिन के अवसर पर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरा देश एकता के मजबूत सूत्र में बंध जाएगा. यानी कल से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए विकास के नए रास्ते खुल जाएंगे और उन्हें केंद्र की उन सभी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा जिसका फायदा देश के बाकी राज्य उठा रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच संसाधनों के बंटवारे के लिए 300 दिनों का एक रोडमैप तैयार किया जाएगा. और दोनों क्षेत्रों के बीच...राजस्व का बंटवारा आबादी के आधार पर होगा. कुल मिलाकर कल से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख विकास के नए मार्ग पर चलने लगेंगे और देश.. सरदार पटेल के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ जाएगा.

लेकिन जम्मू-कश्मीर की ये उन्नति हमारे ही देश में मौजूद कुछ नेताओं, टुकड़े टुकड़े गैंग और डिज़ाइनर पत्रकारों से देखी नहीं जा रही. जबकि दुनिया के कई नेता और जन-प्रतिनिधि कश्मीर जाकर वहां के हालात को करीब से देख चुके हैं और भारत के प्रयासों की सराहना कर रहे हैं.

आज कश्मीर का दौरा करने वाले आठ यूरोपीय देशों के 23 सांसदों में से चार ने श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पूरी दुनिया को कश्मीर के हालात की जानकारी दी. इन सांसदों ने कश्मीर जाकर वहां के लोगों से बात की...कार्यकर्ताओं से मिले और आम कश्मीरियों के मन की बात समझने की कोशिश की . इन सभी सांसदों का एक मत से ये मानना है कि कश्मीरियों को मुख्य-धारा में लाया जाना बहुत ज़रूरी है. और ये तभी हो सकता है कि जब कश्मीर से अलगाववाद और आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए.

यानी दुनिया के अलग अलग देशों के बड़े नेता भी ये मान रहे हैं कि कश्मीर के विकास के लिए अनुच्छेद 370 को हटाया जाना ज़रूरी था. जबकि भारत के विपक्षी नेता कश्मीर पर पाकिस्तान की जुबान बोल रहे हैं. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि केंद्र सरकार ने यूरोपियन सांसदों को कश्मीर भेज कर...कश्मीर विवाद का अंतर्राष्ट्रीयकरण कर दिया है.

जबकि सच ये है कि कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय विवाद बनाने का पूरा श्रेय कांग्रेस को ही जाता है..क्योंकि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ही सबसे पहले कश्मीर मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र गए थे और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सामने जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराने का वादा भी कर दिया था. लेकिन आज कांग्रेस को लग रहा है कि बीजेपी दुनिया के नेताओं को कश्मीर घुमाकर कश्मीर मुद्दे पर भारत की पारंपरिक नीति से पीछे हट रही है.