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ZEE जानकारी: दिल्ली के 58% और बैंगलोर के 44% वाहन चालक रोज़ पार्किंग के लिए करते हैं बहस

आपको जानकर हैरानी होगी नोएडा शहर में सिर्फ़ 41 legal Parking हैं, जबकि 250 से भी ज़्यादा Parking गैरकानूनी रूप से चलाई जा रही हैं.

ZEE जानकारी: दिल्ली के 58% और बैंगलोर के 44% वाहन चालक रोज़ पार्किंग के लिए करते हैं बहस

हमारे देश में सिस्टम और समाज की लापरवाही की वजह से हुई मौत को....एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताकर उससे पल्ला झाड़ लिया जाता है. और अंत में ये कह दिया जाता है कि भगवान की मर्ज़ी के आगे किसी की नहीं चलती. भारत में ट्रैफिक Jam और पार्किंग एक राष्ट्रीय समस्या है. आप देश में कहीं भी चले जाएं...अगर आपकी गाड़ी ट्रैफिक Jam में नहीं फंसे, और अगर आपको गाड़ी के लिए आसानी से पार्किंग मिल जाए तो आप ख़ुद को उस दिन किस्मत वाला मान सकते हैं.. लेकिन इस मामले में आमतौर पर हम भारतीय इतने किस्मतवाले नहीं हैं. भारत के महानगरों में हालात ऐसे हैं कि घर से निकलते ही लोगों को अपने वाहन की पार्किंग की चिंता सताने लगती है. और ये चिंता कई बार पार्किंग को लेकर होने वाले लड़ाई झगड़े में भी बदल जाती है. लेकिन अब पार्किंग में होने वाली जल्दबाजी मौत की वजह भी बन रही है.

रविवार (12 नवंबर) को दिल्ली के पास नोएडा में ऐसा ही हुआ. नोएडा की एक Parking में बेकाबू कार ने एक गर्भवती महिला को टक्कर मार दी जिसमें उसकी मौत हो गई. अफसोस की बात ये है कि इस एक्सीडेंट के बाद वहां से गुज़रते हुए... लोग सिर्फ़ तमाशा देखते रहे लेकिन किसी ने भी महिला को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश नहीं की. ये हमारे समाज का वो संवेदनहीन चेहरा है जो किसी हादसे के बाद देश के सिस्टम पर सवाल उठाता है. इस दर्दनाक मौत को हमारे सिस्टम और समाज ने एक दुखद हादसा बताया और आगे बढ़ गये...लेकिन आप इसे हादसा कहेंगे या हत्या ?

नोएडा के Market में पति-पत्नी बाज़ार से गुजर रहे थे, तभी अचानक पीछे से आ रही बेकाबू कार ने एक गर्भवती महिला और उसके पति को टक्कर मार दी. टक्कर इतनी तेज थी कि कार का पहिया महिला पर चढ़ गया जिसकी वजह से महिला बुरी तरह घायल हो गयी, इस दुर्घटना में महिला का पति भी घायल हो गया..

महिला को बचाने के लिए उसके घायल पति ने रास्ते से गुज़रते लोगों से मदद मांगी लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की. अस्पताल पहुंचने में हुई देरी की वजह से महिला की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक कार.... Parking staff का एक कर्मचारी ही चला रहा था.. जो ठीक तरीके से कार चलाना नहीं जानता था...पुलिस ने कर्मचारी को गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया है.

इस घटना के बाद आम लोग डरे हुए हैं. लोगों का ये डर कुछ हद तक ठीक भी है क्योंकि सड़क पर घूम रहे आपकी जान के हत्यारे कभी भी ...और कहीं से भी आ सकते हैं. ये एक देशव्यापी समस्या है जिसमें पुलिस, सिस्टम और ठेकेदारों की मिलीभगत से अवैध Parking का धंधा फलफूल रहा है.

आपको जानकर हैरानी होगी नोएडा शहर में सिर्फ़ 41 legal Parking हैं, जबकि 250 से भी ज़्यादा Parking गैरकानूनी रूप से चलाई जा रही हैं, ये देश के एक शहर का हाल है तो आप सोच सकते हैं कि देश के दूसरे महानगरों में ये समस्या कितनी बड़ी है.

Parking की जगह लेने के लिए ठेकेदार ...Noida Authority में tender फाइल करते हैं और tender मिलने पर Authority उन्हें एक निश्चित जगह Allot करती है, लेकिन पुलिस और Authority  के कर्मचारियों की मिलीभगत से ठेकेदार तय जगह से ज़्यादा जगह पर कब्जा कर लेते हैं और Parking करवाते हैं.

Authority की ये ज़िम्मेदारी है कि वो Parking Staff के कर्मचारियों की पहचान तय करे और अवैध Paking करवाने से ठेकेदार को रोके लेकिन ऐसा होता नहीं है. एक सर्वे के मुताबिक दुनिया भर में Parking की जगह को लेकर सबसे ज्यादा विवाद दिल्ली और बैंगलुरु में होते हैं. दिल्ली के 58 फीसदी और बैंगलोर के 44 फीसदी वाहन चालक रोज़ Parking के लिए बहस करते हैं. भारत में एक वाहन चालक को Parking तलाशने में औसतन 31 से 40 मिनट तक का वक्त भी लग सकता है.

भारत में अक्सर लोग...किसी भी व्यस्त सड़क पर गाड़ी पार्क कर देते हैं और कहते हैं कि बस पांच मिनट में आ रहा हूं. ये हरकतें देश में अवैध पार्किंग वाले धंधे को बढ़ावा देती हैं और सड़क पर आपके सुरक्षित चलने के अधिकार को छीन लेती हैं.आज हमने Parking वाले इस अवैध व्यापार पर देश कई हिस्सों से रिपोर्ट तैयार की है,ये आपके और आपके परिवार की सुरक्षा से जुड़ा हुआ DNA टेस्ट है जिसे आज आपको ज़रूर देखना चाहिए.