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Zee Jankari: प्रदूषण से देश में हाहाकार लेकिन बाजार हुआ गुलजार

GRAP के मुताबिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब होने पर दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी जाएगी .

Zee Jankari: प्रदूषण से देश में हाहाकार लेकिन बाजार हुआ गुलजार

चार दिनों के बाद दिवाली का त्योहार आने वाला है. हमें उम्मीद है कि आपने भी अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और जान पहचान वालों को तोहफे और मिठाई देने का मन बनाया होगा. हो सकता है कि आपने इसके लिए Online Sale के दौरान कुछ Gifts.. ऑर्डर भी कर दिए हो . लेकिन अगर आपने ऐसा नहीं किया है तो आज हम आपको एक सुझाव देना चाहते हैं. आप चाहें तो तोहफे के रूप में लोगों को Anti Pollution Mask भी दे सकते हैं . ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो चुकी है, और आने वाले दिनों में ये और भी ज्यादा खराब होने वाली है.

दिल्ली-NCR के ज्यादातर इलाकों में आज भी AQI यानी Air Quality Index 238 से 359 के बीच था . इसे सेहत के लिए बहुत खतरनाक माना जाता है और इससे आपको कई तरह की गंभीर बीमारियां भी हो सकती है. दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए GRAP यानी Graded Response Action Plan लागू कर दिया गया है.

इसके तहत जब वायु प्रदूषण की स्थिती बहुत खराब होती है तो डीज़ल जेनरेटर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाती है. सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जाता है. पार्किंग फीस बढ़ा दी जाती है और ज़रूरत से ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया जाता है. इसके अलावा कूड़ा जलाने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी जाती है .

GRAP के मुताबिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब होने पर दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी जाएगी . और निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा .कागज़ों पर तो दिल्ली में ये सभी नियम लागू कर दिए गए हैं. लेकिन सच ये है कि दिल्ली में कई स्थानों पर खुलेआम इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं .

यहां तक कि प्रदूषण को लेकर सरकार को कई बार फटकार लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पास ही...धड़ल्ले से डीज़ल जेनरेटर चलाए जा रहे हैं . दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर से कुछ ही दूरी पर निर्माण कार्य हो भी रहा है. जहां लगातार धूल उड़ रही है .ऐसा लगता है कि दिल्ली वाले चेहरे पर Mask लगाकर घूमने पर मजबूर हैं तो दिल्ली सरकार ने आंखों पर काली पट्टी पहन रखी है, जिसे नियमों का ये उल्लंघन दिखाई नहीं देता .

GRAP को पहली बार 2017 में लागू किया गया था और अब एक बार इसे दिल्ली-NCR में लागू किया गया है. इसके कुछ नियम दिल्ली के अलावा NCR के शहरों..जैसे गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद और सोनीपत पर भी लागू होते हैं .

विशेषज्ञों के मुताबिक दिवाली के बाद दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो जाएगी इसलिए 4 नवंबर से दिल्ली में एक बार फिर से वाहनों के लिए Odd-Even की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया गया है . लेकिन ये व्यवस्थाएं भी दिल्ली को प्रदूषण से मुक्त करा पाएगी..ये कहना मुश्किल है. इसकी सबसे बड़ी वजह है दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने की घटनाओं में हो रही वृद्धि .

पंजाब और हरियाणा के बहुत सारे किसान..फसलों की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों का जला देते हैं. इससे बहुत ज्यादा मात्रामें धुआं निकलता है और ये धुआं बहती हवा के साथ दिल्ली और NCR के वातावरण में प्रवेश कर जाता है . सरकारों द्वारा पराली जलाए जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन फिर भी कई किसान इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं .

इसकी एक वजह ये है कि फसल के अवशेषों को जला देना बाकी उपायों के मुकाबले बहुत सस्ता पड़ता है. मौसम विभाग के मुताबिक इस वक्त जो हवाएं चल रही हैं वो पंजाब और हरियाणा से इस धुएं को दिल्ली की तरफ ला रही हैं . जिससे दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बहुत गंभीर हो गया है . दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण में और बढ़ोतरी होगी और तब ये कई लोगों के लिए जानलेवा भी बन जाएगा .

वर्ष 2017 के Global Burden Of Disease के मुताबिक...भारत में वायु प्रदूषण की वजह से हर तीन मिनट में एक बच्चे की मौत हो जाती है . World Health Organization के मुताबिक भारत जैसे विकासशील देशों में 5 वर्ष तक की उम्र के 98 प्रतिशत बच्चे वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर का सामना करते हैं .

WHO के मुताबिक पूरी दुनिया में 10 में से 9 लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां वायु प्रदूषण सुरक्षित मात्रा से ज्यादा है . वायु प्रदूषण को मानव जाति के स्वास्थय लिए चौथी सबसे बड़ी चुनौती माना गया है. पहले नंबर पर उच्च रक्तचाप, दूसरे नंबर पर खराब आहार और तीसरे नंबर पर धूम्रपान है .

यानी वायु प्रदूषण सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है . बाजार में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए anti Pollution mask से लेकर Air Purifier, Car sanitizer और Indoor Plants तक उपलब्ध हैं. यानी जब सरकारें वायु प्रदूषण से निपटने में असफल रहीं तो बाज़ार ने इसे मुनाफे वाले व्यापार में बदल दिया .

हमने जब इस विषय पर रिसर्च की तो हमें पता चला कि प्रदूषण से लड़ने वाले उपकरणों का बाज़ार 35 से 40 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहा है . एक E-Commerce बेवसाइट के मुताबिक वर्ष 2018 से अब तक Air Purifier की बिक्री में 50 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है. इसी तरह Anti Pollution mask की मांग भी 30 गुना बढ़ गई है.

अब लोग PM 2.5 कणों को फिल्टर करने में सक्षम Masks सबसे ज्यादा खरीद रहे हैं. यहां तक कि सिर्फ दिल्ली में ही Indoor Plants का बाज़ार 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो चुका है. यानी प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई के नाम पर..अब लोगों अलग से बजट बनाना पड़ रहा है .

हालांकि ये काम आम आदमी से Tax लेने वाली सरकारों का है, लेकिन जब सरकारें नाकाम रहती हैं तो आम लोग अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए बाज़ार पर निर्भर हो जाते हैं . भ्रष्ट सिस्टम ने लोगों की जान लेने वाले वायु प्रदूषण की घर-घर तक होम डिलिवरी सुनिश्चित कर दी है .

और इस असफलता का फायदा अब बाज़ार द्वारा उठाया जा रहा है . इसलिए आज हमने वायु प्रदूषण के इस आपातकाल के साथ साथ..इससे जुड़े बाज़ार का भी एक विश्लेषण किया है. ये विश्लेषण देखकर आप समझ जाएंगे कि कैसे हम भविष्य में Oxygen भी Online Order करने की मजबूरी की तरफ बढ़ रहे हैं.

एक अनुमान के मुताबिक भारत में air purifier का बाज़ार फिलहाल 350 करोड़ रुपये का है . जबकि 2024 तक ये बढ़कर 1500 करोड़ रुपये का हो जाएगा . इसी तरह प्रदूषण रोकने वाले मास्क का बाज़ार वर्ष 2023 तक 120 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो जाएगा . जबकि वर्ष 2017 में देश भर में 43 करोड़ रुपये की कीमत के मास्क बेचे गए थे.

लेकिन हमें लगता है कि आने वाले कुछ वर्षों में सबसे बड़ा बाज़ार होगा oxygen का . जो फिलहाल प्रकृति की तरफ से सबको मुफ्त में मिली है..लेकिन आगे चलकर ये एक बहुमूल्य उत्पाद बन जाएगी और लोगों को अपनी सांसे...एक बड़ी कीमत चुका कर खरीदनी पड़ेगी. ऐसी नौबत आए..उससे पहले ही सरकारों को प्रदूषण के खिलाफ एक गंभीर जंग छेड़नी होगी . क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो फिर भविष्य की पीढ़ियों को बचाना बहुत मुश्किल हो जाएगा.