Zee जानकारी : आंकड़ों की मानें तो रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना तय है

हमारे देश में कई बार राष्ट्रपति को रबड़ की मुहर यानी रबड़ स्टॉम्प कहा जाता है क्योंकि राष्ट्रपति के अधिकार सीमित होते हैं। आपने नागरिक शास्त्र और राजनीतिक विज्ञान की किताबों में कई बार राष्ट्रपति की सीमित शक्तियों के बारे में पढ़ा होगा। लेकिन हमारे संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में बहुत से ऐसे मौके आए, जब राष्ट्रपतियों ने अपनी रबड़ स्टॉम्प वाली छवि को तोड़ने की कोशिश की।

Zee जानकारी : आंकड़ों की मानें तो रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना तय है

नई दिल्ली : हमारे देश में कई बार राष्ट्रपति को रबड़ की मुहर यानी रबड़ स्टॉम्प कहा जाता है क्योंकि राष्ट्रपति के अधिकार सीमित होते हैं. आपने नागरिक शास्त्र और राजनीतिक विज्ञान की किताबों में कई बार राष्ट्रपति की सीमित शक्तियों के बारे में पढ़ा होगा. लेकिन हमारे संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में बहुत से ऐसे मौके आए, जब राष्ट्रपतियों ने अपनी रबड़ स्टॉम्प वाली छवि को तोड़ने की कोशिश की.

वैसे तो संविधान के मुताबिक मनी बिल को छोड़कर राष्ट्रपति किसी भी अध्यादेश को पुनर्विचार के लिए सरकार को वापस लौटा सकते हैं. लेकिन जब दूसरी बार राष्ट्रपति के पास वो अध्यादेश आता है, तो फिर उन्हें उस पर हस्ताक्षर करने ही होते हैं. लेकिन इस प्रक्रिया में लिखित नियमों और कानूनों के अलावा नैतिक नियम भी लागू होते हैं. क्योंकि अगर राष्ट्रपति, सरकार के किसी अध्यादेश का विरोध कर दे, तो फिर सरकार के लिए नैतिकता के आधार पर उस अध्यादेश में बदलाव करना ज़रूरी हो जाता है. 

-1987 में तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ैल सिंह ने इंडियन पोस्ट ऑफिस (संशोधन) बिल पर अपनी मंज़ूरी देने से इंकार कर दिया था. तब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे. 

-इसके अलावा 2006 में भी तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट बिल को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया था. तब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA की सरकार थी. 

-पूर्व राष्ट्रपतियों ने न सिर्फ सरकारों के अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने से इंकार किया है, बल्कि कई बार राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने से भी मना किया. 

-1998 में राष्ट्रपति केआर नारायणन ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव वापस भेज दिया था. 

-NDA के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद कानपुर से हैं . 

-कोविंद इससे पहले बिहार के राज्यपाल थे. 

-वर्ष 1994 से 2006 के बीच वो दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे.

-रामनाथ कोविंद ने 16 वर्षों तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोट में वकालत की है.

-वो दो बार बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं.

-कोविंद अगर राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो वो उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले देश के पहले राष्ट्रपति होंगे. 

-जबकि यूपीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार मीरा कुमार से तो देश परिचित है. 

-बिहार की रहने वालीं मीरा कुमार दिवंगत उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं 

-वो वर्ष 2009 से लेकर 2014 के बीच लोकसभा स्पीकर रही हैं. 

-और UPA वन में वर्ष 2004-2009 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रह चुकी हैं

-मीरा कुमार भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी रह चुकी हैं और बहुत से देशों में वो अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. 

-मीरा कुमार 5 बार लोकसभा सांसद रही हैं. हालांकि पिछला लोकसभा चुनाव वो हार गई थीं. और राष्ट्रपति चुनाव में भी उनकी हार लगभग तय है.

-रामनाथ कोविंद की जीत पक्की होने की वजह ये है कि उनके पक्ष में पूरा संख्याबल है. सवाल ये है कि संख्याबल नतीजे आने से पहले ही कैसे तय हो गया, ये समझने के लिए आपको राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया को समझना होगा. 

-राष्ट्रपति का चुनाव जनता नहीं बल्कि जनता के प्रतिनिधि करते हैं. यानी देश के सभी सांसद और विधायक मिलकर राष्ट्रपति को चुनते हैं. 
 
-राष्ट्रपति चुनने वाले सांसदों और विधायकों के मंडल को इलेक्टोराल कॉलेज कहा जाता है. 

-विधान परिषद के सदस्य और लोकसभा और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होते हैं.

-नोट करने वाली बात ये है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए सांसद और विधायक के वोट्स की वैल्यू अलग-अलग होती है. 

-लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के वोट की वैल्यू बराबर होती है, 

-जबकि विधायकों के वोट की वैल्यू उनके राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय होती है. 

-इस समय सांसदों के वोट की वैल्यू 5 लाख 49 हज़ार 408 है

-जबकि विधायकों के वोट की वैल्यू 5 लाख 49 हज़ार 474 है. 

-यानी इस हिसाब से टोटल वोट्स 10 लाख 98 हज़ार 882 हैं. 

-जीत के लिए 50% वोटों से 1 वोट ज़्यादा हासिल करने की ज़रूरत है. 

-बीजेपी का दावा है कि उनके उम्मीदवार को 40 से ज्यादा पार्टियों का समर्थन हासिल है. 

-जबकि UPA की उम्मीदवार मीरा कुमार को सिर्फ 17 पार्टियों का समर्थन मिला है. 

-रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाने से पहले NDA के पास 48.10% Votes थे, लेकिन अब NDA के पास करीब 63% वोट हैं. 

-कोविंद के नाम का ऐलान होने के बाद NDA को और भी कई पार्टियों ने समर्थन दिया. 

-जिनमें TRS के पास करीब 2% वोट हैं

-AIADMK के पास 5.39%

-YSR कांग्रेस के पास 1.53%

-JDU के पास 1.89%

-BJD के पास 2.99% Votes हैं.

-आपको शायद ये पता नहीं होगा भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद दोनों हाथों से लिखते थे. 

-डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद अकेले राष्ट्रपति थे जो दो बार चुने गए

-अभी तक 5 राष्ट्रपतियों को भारत रत्न से नवाज़ा जा चुका है. 

-प्रतिभा पाटिल देश के पहली महिला राष्ट्रपति थीं.

-नीलम संजीव रेड्डी अब तक के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति थे. वो 65 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति बने थे. 

-इतिहास में अब तक सिर्फ नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए थे.