ZEE जानकारीः दोष.. भारत में नहीं बल्कि बुद्धिजीवियों Selective सोच में है

जिस परिवार के साथ रहते हैं वही हमें अच्छा नहीं लगता. और जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. भारत के संस्कार तो ऐसे कभी नहीं थे. फिर ऐसा कैसे हो गया ?सही मायने में यही लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. आप आजकल बार बार अलग अलग लोगों से ये सुन रहे होंगे कि भारत का लोकतंत्र ख़तरे में है. लेकिन सच ये है कि लोकतंत्र को जिस तरह के विचारों से ख़तरा है. उन पर किसी का ध्यान जाता ही नहीं.

ZEE जानकारीः  दोष.. भारत में नहीं बल्कि बुद्धिजीवियों Selective सोच में है

आज सबसे पहले आपसे एक सवाल - अगर कोई आपको अपमानित करे, आपके बारे में दूसरों से झूठ बोले और आपकी छवि को खराब करे तो क्या आपको गुस्सा आएगा ? ज़ाहिर सी बात है आपको तुरंत गुस्सा आ जाएगा .  लेकिन अगर कोई आपके देश को अपमानित करे , आपके देश के बारे में विदेशियों से झूठ बोले और एक ख़ास एजेंडे के तहत आपके देश की छवि को खराब करे तो क्या आपको गुस्सा आएगा ? शायद आपमें से बहुत से लोगों को गुस्सा नहीं आएगा. आपके खून में कोई उबाल नहीं आएगा . क्योंकि अब हमारे देश के लोगों को इसकी आदत पड़ चुकी है. हम जिस घर में रहते हैं उसी की आलोचना करते हैं.

जिस परिवार के साथ रहते हैं वही हमें अच्छा नहीं लगता. और जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. भारत के संस्कार तो ऐसे कभी नहीं थे. फिर ऐसा कैसे हो गया ?सही मायने में यही लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. आप आजकल बार बार अलग अलग लोगों से ये सुन रहे होंगे कि भारत का लोकतंत्र ख़तरे में है. लेकिन सच ये है कि लोकतंत्र को जिस तरह के विचारों से ख़तरा है. उन पर किसी का ध्यान जाता ही नहीं.

आज हम पूरे भारत का ध्यान डिज़ाइनर लेखिका Arundhati Roy के एक नये बयान की तरफ ले जाना चाहते हैं . Arundhati Roy, मानवाधिकारों की स्वयं-भू चैंपियन हैं. कहने को तो ये भारतीय नागरिक हैं, लेकिन इनकी बातों को सुनकर भारत विरोधी गैंग के लोग, तुरंत इनके फैन बन जाते हैं. वो बुकर पुरस्कार विजेता हैं, देश और दुनिया में मौजूद बुद्धिजीवियों का वर्ग Arundhati को बहुत योग्य लेखिका मानता हैं, लेकिन उनके बयान अक्सर भारत के खिलाफ चलाए जाने वाले एजेंडे को हवा देते हैं.

सबसे पहले आप Arundhati Roy का ये नया बयान सुनिए फिर हम उनके इस बयान का विश्लेषण करेंगे . भारत में डर का वायरस फैल चुका है... सब डरे हुए हैं. ऐसा लगता है जैसे... पाकिस्तान के तराने गुनगुनाने वाला बुद्धिजीवी वर्ग, आजकल इराक और सीरिया से काफी प्रभावित है . और वो हर वक़्त भारत में इराक़ और सीरिया जैसी निशानियां ढूंढता रहता है.

Arundhati Roy ने भी अपने बयान से ये साबित करने की कोशिश की है कि भारत में लोकतंत्र को खतरा है. और इसके लिए भारत की सरकार ज़िम्मेदार है. किसी की आलोचना करने में कोई बुराई नहीं है, हर व्यक्ति को ऐसा करने का अधिकार है, लेकिन Arundhati Roy के ये विचार Selective हैं. पिछले महीने पूरे देश ने ये देखा कि पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में बहुत हिंसा हुई. Arundhati Roy, पश्चिम बंगाल से ही हैं लेकिन उन्हें वहां होने वाली हिंसा दिखाई नहीं दी और उन्होंने इसके बारे में कुछ नहीं कहा. उन्हें पश्चिम बंगाल के दंगे और हिंदुओं का पलायन कभी नज़र नहीं आया ? क्योंकि शायद ये उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाता और उन्हें सूट नहीं करता. ऐसे बुद्धिजीवियों और लेखकों की पक्षपात पूर्ण सोच ये साबित करती है कि ये सिर्फ एक पार्टी के राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह व्यवहार करते हैं. 

महापुरुषों के बारे में अक्सर आपने ये पढ़ा होगा कि भारत के बारे में कोई भी राय बनाने से पहले उन्होंने भारत का भ्रमण किया . जैसे, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती और महात्मा गांधी . और भी बहुत सारे महापुरुष हैं जिन्होंने भारत के बारे में कुछ भी बोलने से पहले भारत को अच्छी तरह समझा लेकिन हमारे डिज़ाइनर बुद्धिजीवी, भारत भ्रमण में भरोसा नहीं करते. और दिल्ली और मुंबई की Posh Colonies के Air-Conditioned घरों में बैठकर ये तय कर देते हैं कि भारत में लोकतंत्र कहां-कहां खतरे में है.

वो भारत को अपने एजेंडे वाले चश्मे से देखते हैं . इन बुद्धिजीवियों की Breakfast Table पर चाय या कॉफी होती है और कुछ चुने हुए अखबार होते हैं . वो इन्हीं अखबारों को पढ़कर भारत के बारे में अपनी राय बनाते हैं . और फिर अपने इन्हीं विचारों का प्रदूषण ये पूरी दुनिया में फैलाते हैं. जिसकी वजह से भारत, दुनिया में बदनाम होता है . 

इस Interview में Arundhati Roy ने कठुआ गैंगरेप मर्डर केस का ज़िक्र किया है . लेकिन उन्होंने कहा कि ये Rape कश्मीर में हुआ . ये भ्रामक, आधा-अधूरा और गलत तथ्य है . सही तथ्य ये है कि ये रेप, जम्मू कश्मीर राज्य के जम्मू क्षेत्र में हुआ है ना कि कश्मीर में . Note करने वाली बात ये भी है कि बुद्धिजीवी अक्सर जम्मू-कश्मीर राज्य को सिर्फ कश्मीर कहकर संबोधित करते हैं . शायद इसके पीछे भी उनका छुपा हुआ एजेंडा है. इनकी नज़रों में ये कश्मीर किस दिन Pakistan Occupied कश्मीर में मिल जाएगा, ये भी कोई नहीं कह सकता.

Arundhati Roy ने सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों की Press Conference का ज़िक्र भी किया है. और इसके आधार पर ये कहने की कोशिश की है कि भारत का लोकतंत्र बहुत बड़े संकट में है. लेकिन सच ये है कि भारत की न्यायपालिका ने 26/11 के आंतकवादी हमलों के गुनहगार अज़मल कसाब को भी अदालत में अपना पक्ष रखने का मौका दिया . भारत में एक आतंकवादी याकूब मेमन के पक्ष में दी गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े आधी रात को खोले गए थे. और इसी सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के गवर्नर के फैसले को पलट दिया था. ये भारत के इतिहास की अभूतपूर्व घटना थी लेकिन इसके बाद भी बुद्धिजीवियों को भारत की संस्थाओं में दोष नज़र आता है. सही बात ये है कि दोष.. भारत में नहीं बल्कि उनकी Selective सोच में है.

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