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ZEE Jankari: शरद पवार के मुश्किल थी राजनीतिक लड़ाई, हार नहीं मानी; की की शानदार वापसी

32 नेताओं के पार्टी छोड़ देने के बाद भी शरद पवार ने हार नहीं मानी और वो अपने राजनीतिक जीवन की सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ते रहे. यही वजह है कि उनकी पार्टी बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.

ZEE Jankari: शरद पवार के मुश्किल थी राजनीतिक लड़ाई, हार नहीं मानी; की की शानदार वापसी

भुपेंद्र सिंह हुड्डा की तरह..महाराष्ट्र में शरद पवार ने भी शानदार वापसी की है. उनके लिए ये राजनीतिक लड़ाई बहुत मुश्किल थी .क्योंकि चुनाव से ऐन पहले उनकी पार्टी में फूट पड़ गई थी और बहुत सारे नेता NCP से अलग हो गए थे . जबकि अब NCP कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए महाराष्ट्र की मुख्य विपक्षी पार्टी बनने की स्थिति में आ गई है . भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तरह पवार ने भी ये चुनाव लगभग बिना किसी से मदद लिए लड़ा . यानी ना तो हुड्डा को कांग्रेस से कुछ ख़ास मदद मिली और ना ही शरद पवार को .

चुनाव से पहले NCP के कई विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे और शरद पवार के कई रिश्तेदारों ने भी उनका साथ छोड़ दिया था . यहां तक कि NCP की टिकट पर सतारा से लोकसभा चुनाव जीतने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज उदयन राजे भोसले भी चुनाव से पहले NCP छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे लेकिन NCP की टिकट पर 10 वर्षों से चुनाव जीतने वाले उदयनराजे भोसले...बीजेपी की टिकट पर लोकसभा का उप चुनाव हार गए हैं. 32 नेताओं के पार्टी छोड़ देने के बाद भी शरद पवार ने हार नहीं मानी और वो अपने राजनीतिक जीवन की सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ते रहे. यही वजह है कि उनकी पार्टी बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.

विदर्भ में NCP ने अच्छा प्रदर्शन किया है . बीजेपी ने वर्ष 2014 में विदर्भ में 62 में से 44 सीटें जीती थी जबकि इस बार बीजेपी को 28 सीटें मिली हैं जबकि यहां NCP की सीटों की संख्या 1 से बढ़कर 6 हो गई है. इसी तरह पश्चिम महाराष्ट्र में पिछली बार NCP को 19 सीटें मिली थी जो इस बार बढ़कर 27 हो गई हैं. इसी तरह ग्रामीण इलाकों में भी NCP बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी बन गई है . NCP के इस प्रदर्शन का श्रेय सिर्फ और सिर्फ शरद पवार को दिया जा सकता है . और वो अपने दम पर कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को भी ढंकने में कामयाब रहे हैं . यानी 79 साल के शरद पवार के कंधों पर 49 साल के राहुल गांधी की पार्टी का भी बोझ था. 

शरद पवार एक ऐसे राजनेता रहे हैं, जिनके संबंध सभी राजनीतिक पार्टियों से हैं. यही वजह है कुछ चुनावी पंडित कह रहे हैं कि पवार...महाराष्ट्र में कोई बड़ा उलटफेर भी कर सकते हैं . यानी वो बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए कोई बड़ा दांव चल सकते हैं . वो दांव क्या हो सकता है ये समझने के लिए पहले आप शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का आज का ये बयान सुनिए.

बेटे को मुख्यमंत्री बनाए जाने का सवाल पूछने वालों से उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि आपके मुंह में घी शक्कर. लेकिन क्या उद्धव के सपनों को Sweet Dream में बदलने का काम...शक्कर के उत्पादन वाले इलाके से आने वाले शरद पवार करेंगे ? . इसके लिए आपको महाराष्ट्र के मौजूदा सियासी हालात को समझना होगा.

शिवसेना इस बार महाराष्ट्र में 124 सीटों पर लड़ी जबकि बीजेपी ने 164 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. इस बार 57 सीटें जीतने वाली शिवसेना चाहती है, कि राज्य में FIFTY-FIFTY फॉर्मूले के तहत सरकार बनाई जाए . यानी ढाई साल..बीजेपी का मुख्यमंत्री हो..और ढाई साल शिवसेना का . बीजेपी इसके लिए तैयार होगी ऐसा फिलहाल मुश्किल लग रहा है . और शरद पवार यहां पर बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं . शरद पवार के रिश्ते शिवसेना के साथ भी बहुत अच्छे रहे हैं, वो शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे के भी अच्छे दोस्त थे . और जब पवार की बेटी सुप्रिया सुले चुनावी मैदान में उतरी थी तो बाल ठाकरे ने उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया था . यही वजह है कि बहुमत से बहुत दूर होने के बाद भी..शरद पवार को महाराष्ट्र में सरकार बनाने की उम्मीद दिखाई दे रही है.

शरद पवार ने 2014 में 122 सीटें जीतने वाली...बीजेपी को भी बाहर से समर्थन देने का प्रस्ताव दिया था . उनके इस प्रस्ताव के बाद ही शिवसेना पर दबाव बना था और शिवसेना...कमज़ोर स्थिति में सरकार में शामिल हो गई थी. शरद पवार ने इस बार शतरंज की बाज़ी फिर से पलटने की कोशिश की है..क्योंकि इस बार वो शिवसेना को समर्थन देने की बात कर रहे हैं और इससे बीजेपी दबाव में आ सकती है. हमने एनसीपी की रणनीति पर शरद पवार की बेटी और NCP से लोकसभा सांसद..सुप्रिया सुले से भी बात की...सुप्रिया सुले के कहना है कि उनकी पार्टी..किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएगी

शरद पवार ना सिर्फ राजनीति की बड़ी शख्सियत हैं. बल्कि इस बार के चुनावों में उन्होंने बड़े अनूठे तरीके से वोटरों को लुभाने की कोशिश की. करीब एक हफ्ते पहले जब वो सतारा में रैली कर रहे थे . तब वहां मूसलाधार बारिश शुरु हो गई . लेकिन शरद पवार ने ना तो मंच छोड़ा और ना ही कार्यकर्ताओं से छाता मांगा . बल्कि वो आम जनता की तरह बारिश में भीगते रहे . उनके इस वीडियो को 1 घंटे में लाखों लोगों ने Youtube पर देखा और Social Media पर शेयर भी किया गया . यानी शरद पवार को जनता के बीच जाने की कला भी आती है और जनता से जुड़ने का उनका अंदाज़ भी बाकियों से अलग है.