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ज़ी जानकारी: Power Cut से होने वाले साइड इफेक्ट

ज़ी जानकारी: Power Cut से होने वाले साइड इफेक्ट

आपको याद होगा आज से 5 वर्ष पहले 30 जुलाई 2012 को हमारे देश में एक बड़ा Power Cut हुआ था. देश के उत्तरी हिस्से के 8 राज्य पूरी तरह से Blackout हो गए थे. जिसकी वजह से करीब 30 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे.इसके बाद अगले ही दिन यानी 31 July, 2012 को तीन electricity grids में गड़बड़ी हो गई थी. Power Cut की वजह से पूरे देश के 21 राज्यों और 1 केन्द्र शासित प्रदेश के करीब 62 करोड़ लोग प्रभावित हो गए थे. लेकिन तब किसी भी मंत्री ने अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए इस्तीफा नहीं दिया था.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल मार्च में महाराष्ट्र में सबसे कम बिजली कटी. महाराष्ट्र में मार्च के महीने में औसतन 1 घंटा 26 मिनट बिजली कटी. जिन 17 राज्यों के आंकड़ें उपलब्ध हैं, उनमें हरियाणा में सबसे ज्यादा बिजली कटी. मार्च में हरियाणा में औसतन 48 घंटे 17 मिनट तक Power cut हुआ. यानी हरियाणा में हर रोज़ 1 घंटे 33 मिनट तक Power Cut होता है.

इस रिपोर्ट में लिखा है कि 8 वर्षों के अंदर पेट्रोल और डीजल की कारें बेकार हो जाएंगी.. क्योंकि इलेक्ट्रिक कारों का दौर में Transportation को पूरी तरह से बदलकर रख देगा आज के दौर में पेट्रोल और डीजल पर चलने वाली कारों की Life करीब 3 लाख 21 हज़ार किलोमीटर होती है जबकि इलेक्ट्रिक कारों की Life16 लाख किलोमीटर होगी.

इस वजह से आने वाले समय में लोग इलेक्ट्रिक कारों और सेल्फ ड्राइविंग कारों की खऱीदना शुरू करेंगे.ये सारा बदलाव इसलिए होगा क्योंकि इलेक्ट्रिक कार और Self ड्राइविंग कार पर आने वाला खर्च पेट्रोल और डीजल वाली कार के मुकाबले 10 गुना सस्ता होगा.

इलेक्ट्रिक गाड़ियों में 18 से 25 Moving Parts होते हैं जबकि पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों में 2 हज़ार से ज़्यादा Moving parts होते हैं. ऐसे में Electric गाड़ियां एक तरह से Maintenance Free हो जाएंगी.

ऐसी स्थितियों में पेट्रोल और डीज़ल की खपत कम हो जाएगी और दुनिया भर में Crude Oil के दाम 25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक गिर जाएंगे. इसकी वजह से वो देश परेशान हो जाएंगे जिनकी अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर है. ख़ासतौर पर Russia, Nigeria, सऊदी अरब और Venezuela में आर्थिक संकट आ जाएगा.

इस अर्थशास्त्री ने ये भी लिखा है कि 2022 तक सामान्य और औसत दर्जे की इलेक्ट्रिक कारों की Range 300 किलोमीटर के पार चली जाएगी और उनकी कीमत भी गिर जाएगी और इसके बाद इन कारों की बिक्री बढ़ जाएगी. और इस वजह से दुनिया की पूरी पेट्रोलियम इंडस्ट्री खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगी.

भारत 2032 तक देश में इलेक्ट्रिक कारों की क्रांति लाना चाहता है.इस बीच चीन भी इस दिशा में बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है 2025 तक चीन में 70 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां सड़कों पर आ सकती हैं. ऐसे में पेट्रोल और डीज़ल का बिज़नेस करने वाली कंपनियों और इस पर निर्भर रहने वाले देशों के बुरे दिन आने वाले हैं.

इसके लिए सबसे पहले सरकारी दफ्तरों में इलेक्ट्रिक कारों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसी वर्ष नवंबर के महीने से देश के तमाम कैबिनेट मंत्री और सीनियर Bureaucrats इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं . भारत 10 हजार Electric Cars के लिए कई Electric Vehicle कंपनियों से समझौता करने वाला है. इन इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज करने के लिए दिल्ली-NCR में करीब 4 हज़ार Charging स्टेशन भी बनाए जाएंगे.

आपको याद दिला दें कि जलवायु परिवर्तन पर हुए पेरिस सम्मेलन में ग्लोबल वॉर्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है. एक International Energy Agency के अनुसार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2040 तक दुनिया को 60 करोड़ इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ज़रूरत होगी और इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा भारत में मौजूद होगा.