Zee जानकारी: निर्भया गैंगरेप कांड में चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार

Zee जानकारी: निर्भया गैंगरेप कांड में चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश को दी गई फांसी की सज़ा पर कोई माफी नहीं दी। इस मामले के पांचवे आरोपी राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी।

इस केस का छठा आरोपी घटना के वक्त नाबालिग था। इसलिए तीन साल तक Juvenile Justice Board में रहने के बाद नवंबर 2015 में उसे एक सिलाई मशीन और 10 हज़ार रुपये देकर छोड़ दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये घटना किसी दूसरी दुनिया की लगती है, जहां मानवता को अपमानित किया जाता है। जिस बर्बरतापूर्ण तरीके से इस घटना को अंजाम दिया गया, उस लिहाज से हाईकोर्ट का फैसला सही था। और इसमें रहम की कोई गुंजाइश नहीं है। 

फांसी की सज़ा सुनाते हुए अदालत ने ये भी कहा कि दोषियों का गरीब होना, उनकी उम्र का कम होना, उनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड ना होना, उनकी पारिवारिक परिस्थितियां या जेल में अच्छा चाल चलन होना उनके अपराध को Rarest of Rare Category से बाहर नहीं कर सकता। इतने बड़े अपराध के लिए माफी हरगिज़ नहीं दी जा सकती।

महिलाओं द्वारा शिक्षा और बाकी दूसरे क्षेत्रों में प्रगति के बावजूद महिलाओं के प्रति सम्मान में कमी आई है और महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। निर्भया कांड के बाद 2013 से लेकर 2015 तक देशभर में रेप की 1 लाख 5 हज़ार से ज़्यादा घटनाएं हुई हैं।

निर्भया कांड के बाद से यानी 1 जनवरी 2013 से लेकर 15 मार्च 2017 तक अकेले दिल्ली में बलात्कार की 8 हज़ार 532 घटनाएं हुई हैं।आज भी दिल्ली में हर रोज़ 5 महिलाओं के साथ बलात्कार होता है। दिल्ली में हर रोज़ कम से कम 11 महिलाओं के साथ छेड़छाड़ होती है। जबकि हर रोज़ 9 से ज्यादा महिलाएं Kidnap होती हैं।