ZEE जानकारीः भारत के दुश्मनों पर ग्रहण लगाने वाले दो हेलिकॉप्टर्स की कहानी

कल ही कारगिल युद्ध की जीत को 19 साल पूरे हुए हैं. और आपको शायद ये बात पता नहीं होगी, कि कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना और वायुसेना को अटैक हेलीकॉप्टर्स की कमी सबसे ज्यादा महसूस हुई थी.

ZEE जानकारीः भारत के दुश्मनों पर ग्रहण लगाने वाले दो हेलिकॉप्टर्स की कहानी

पूरी दुनिया इस वक्त चंद्रगहण का इंतज़ार कर रही है. हमने भी आपके लिए सदी के सबसे लम्बे चंद्रगहण का DNA टेस्ट तैयार किया है. लेकिन...आज विश्लेषण की शुरुआत हम उस 'ग्रहण' से करेंगे, जो भारत के दुश्मनों के लिए किसी बुरी ख़बर से कम नहीं है. आज भारत के दुश्मनों पर ग्रहण लगाने वाले दो हेलिकॉप्टर्स, अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे.

आपमें से बहुत सारे लोग, शुक्रवार को अक्सर हिन्दी फिल्मों के Release होने का इंतज़ार करते होंगे. और First Day, First Show देखते होंगे. लेकिन कभी-कभी भारत की सुरक्षा से जुड़ी ख़बरों का First Day, First Show देखना भी अपने आप में एक अलग अनुभव होता है. इसीलिए आज हम आप सबके लिए एक 'स्पेशल स्क्रीनिंग' करेंगे.

भारत की सुरक्षा करने वाले इन दो दोस्तों के नाम हैं, Apache Attack Helicopter और शिनूक Helicopter...सितम्बर 2015 में भारत ने अमेरिका की Aviation कंपनी बोइंग से, 22 Apache और 15 शिनूक, Helicopters की डील साइन की थी. और आज आपको ये जानकर बहुत अच्छा लगेगा, कि Apache और शिनूक ने अपनी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी कर ली है. और ये उसी उड़ान की पहली झलक है. वैसे तो मूल रुप से इन दोनों ही Helicopters को अमेरिकी सेना और वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत कहा जाता है. लेकिन आज ये देखकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है, कि Apache Attack Helicopter पर भारत के तिरंगे के तीनों रंग पूरी शान और सम्मान के साथ दिख रहे हैं. जबकि, भारतीय वायुसेना का प्रतीक चिन्ह शिनूक Helicopter पर मौजूद है. इन दोनों Helicopters की क्या विशेषता है, ये हम आपको आगे बताएंगे. लेकिन उससे पहले ये समझिए, कि भारत को इनकी ज़रुरत क्यों महसूस हुई ?

कल ही कारगिल युद्ध की जीत को 19 साल पूरे हुए हैं. और आपको शायद ये बात पता नहीं होगी, कि कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना और वायुसेना को अटैक हेलीकॉप्टर्स की कमी सबसे ज्यादा महसूस हुई थी. क्योंकि, पाकिस्तानी घुसपैठिये ऊंची पहाड़ियों पर मोर्चे बनाकर छिपे हुए थे. और उन Posts को तबाह करने में अटैक हेलीकॉप्टर्स एक असरदार हथियार साबित हो सकते थे. वैसे तो, भारतीय वायुसेना ने अपने Fighter Jets से भारी बमबारी की थी. लेकिन अगर उस वक्त भारत के पास अटैक हेलीकॉप्टर्स होते, तो कारगिल में भारतीय सेना बहुत जल्द और कम से कम नुकसान उठाकर पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार सकती थी. हालांकि, अब इस समस्या का समाधान हो गया है. और अगले साल यानी जब कारगिल की लड़ाई को 20 वर्ष पूरे होंगे, तब तक ये कमी भी दूर हो जाएगी. क्योंकि, इन दोनों ही हेलीकॉप्टर्स की Delivery की प्रक्रिया वर्ष 2019 में शुरु होगी. 

अटैक हेलीकॉप्टर्स जंग के दौरान दुश्मन के सैनिक ठिकानों, Tanks के दस्ते और आगे बढ़ती हुई फौज को तबाह करते हैं. इसके अलावा पहाड़ों और जंगलों के बीच बने दुश्मन के ठिकाने भी इससे बच नहीं सकते. और Apache हेलिकॉप्टर को इसमें महारत हासिल है. इस अटैक हेलीकॉप्टर की ऊंचाई 15 फीट से ज़्यादा है. ये 279 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एक बार में 6 हज़ार 838 किलोग्राम का वज़न लेकर उड़ान भर सकता है. अपनी उड़ान के दौरान ये हेलीकॉप्टर हर मिनट में 2 हज़ार फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है. इसके बारे में कहा जाता है, कि ये दुनिया का सबसे ख़तरनाक Multi-Role Attack Helicopter है. जिसे खरीदने वालों में भारत सहित दुनिया के 16 अलग-अलग देश शामिल हैं. अमेरिका की सेना के पास मौजूद Apache Helicopters का बेड़ा जनवरी 2018 तक 43 लाख घंटों की उड़ान भर चुका है. जिसमें से 12 लाख घंटे से ज़्यादा की उड़ान युद्ध की स्थिति में पूरी की गई है. यानी इस हेलीकॉप्टर के पास, लंबा अनुभव है

शिनूक मूल रुप से एक ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर है. लेकिन ज़रुरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल युद्ध की स्थिति में भी किया जा सकता है. ये साढ़े 22 हज़ार किलोग्राम से ज़्यादा का वज़न लेकर, 302 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है. और इसकी सबसे बड़ी खासियत है, इसकी Vertical Lift करने की शक्ति. ये मुश्किल से मुश्किल इलाकों में बड़ी आसानी से रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरा कर सकता है. 

उदाहरण के तौर पर अफगानिस्तान की एक तस्वीर देखिए. जो US Army ने एक rescue mission के दौरान ली थी. तस्वीर में आप शिनूक हेलीकॉप्टर को एक पहाड़ी के ऊपर बने छोटे से घर की छत पर देख सकते हैं. इसमें अमेरिकी सैनिक एक घायल नागरिक को हेलीकॉप्टर के अंदर ले जा रहे थे. इस पूरे ऑपरेशन के दौरान ये हेलीकॉप्टर एक इंच भी इधर-उधर नहीं खिसका.

ठीक इसी तरह 13 जुलाई 2018 का ये वीडियो देखिए. अमेरिका के Mount Hood में एक पर्वतारोही 11 हज़ार फीट की ऊंचाई पर फंसा हुआ था. सभी लोगों ने उस पर्वतारोही तक पहुंचने की उम्मीद छोड़ दी थी. लेकिन इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए शिनूक हेलीकॉप्टर की मदद ली गई. और आप देख सकते हैं, कि कैसे ये हेलीकॉप्टर 11 हज़ार फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ के कोने पर बिल्कुल स्थिर खड़ा है. और ध्यान देने वाली बात ये है, कि शिनूक हेलीकॉप्टर का लगभग 90 फीसदी हिस्सा हवा में है. इसके बावजूद संतुलन नहीं बिगड़ा. और पर्वतारोही को सुरक्षित वहां से बाहर निकाल लिया गया. 11 हज़ार फीट की ऊंचाई पर इस तरह की लैंडिंग को Pinnacle Landing कहते हैं. 

इन दोनों हेलीकॉप्टर्स की विशेषता देखकर आप समझ गए होंगे, कि वर्ष 2019 तक इनका भारत आना, कितनी बड़ी बात है. 

जानकारों का मानना है कि जंग के मैदान में ये दोनों हेलीकॉप्टर्स भारत के लिए एक Game Changer साबित हो सकते हैं. अपाचे हेलीकॉप्टर्स को सेना...अपनी तीनों मौजूदा Strike कोर और चीन की सीमा के लिए खास तौर पर तैयार की जा रही Mountain Strike कोर में Deploy कर सकती है. इसी तरह शिनूक हेलीकॉप्टर ना सिर्फ भारतीय सेना की ताकत बढ़ाएगा....बल्कि इसका इस्तेमाल रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाकों में सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में भी किया जाएगा.