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ZEE जानकारी: भारतीय सेना को लेकर टुकड़े-टुकड़े गैंग फैला रहा है Fake News

JNU छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शहला रशीद ने जम्मू कश्मीर को लेकर कुछ फर्ज़ी Tweets किए हैं. इनमें उन्होंने भारतीय सेना पर कई आरोप लगाए हैं.

ZEE जानकारी: भारतीय सेना को लेकर टुकड़े-टुकड़े गैंग फैला रहा है Fake News

ये तस्वीरें जम्मू की तवी नदी में फंसे दो मछुआरों की हैं. ये मछुआरे इस नदी पर बन रहे एक ब्रिज पर मौजूद थे, तभी नदी का पानी खतरनाक स्तर तक बढ़ गया. इनके सामने बचने का कोई रास्ता नहीं था. इसके बाद इनके रेस्क्यू के लिए वायुसेना से मदद मांगी गई. कुछ ही मिनटों में वायुसेना का एक MI 17 हेलिकॉप्टर इस जगह पर पहुंच गया. इसके बाद इस हेलिकॉप्टर से एक गरुड़ कमांडो नीचे उतरा और उसने इन दोनों मछुआरों की कमर पर हार्नेस बांध दिया. फिर केबल की मदद से इन दोनों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया.

वायुसेना को इस घटना की सूचना दोपहर 12 बजे मिली थी और सिर्फ 29 मिनटों में ब्रिज पर फंसे लोगों को बचा लिया गया. ये रेस्क्यू ऑपरेशन बहुत मुश्किल था क्योंकि तेज़ हवा के बीच हेलिकॉप्टर को स्थिर रखना आसान नहीं है. इसके अलावा ब्रिज की चौड़ाई भी बहुत कम थी. लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल गरुड़ कमांडो ने अपनी जान की परवाह नहीं की. पहले मछुआरों को बचाया गया. इसके बाद हेलिकॉप्टर वापस लौट कर आया और फिर कमांडो को एयरलिफ्ट किया गया. 

इन लोगों की जान बचाने से पहले सेना ने ना तो इनकी जाति पूछी और ना ही इनका धर्म पूछा, यानी सेना के लिए सभी इंसान बराबर हैं. कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र के सांगली से भी ऐसी तस्वीरें आईं थीं. इन तस्वीरों में एक महिला बाढ़ से बचाए जाने के बाद सैनिक के पैर छू रही थी. इस तस्वीर ने पूरे देश का दिल जीत लिया था और सभी हमारे देश की सेना को सलाम कर रहे थे.

अब हमारे देश में हर एक इंसान की जान को कीमती समझा जाने लगा है. पहले अक्सर मुसीबत में फंसे आम लोगों तक मदद नहीं पहुंच पाती थी और कई बार लोगों की जान भी चली जाया करती थी. लेकिन नया भारत इंसानों की जान के साथ भेदभाव नहीं करता. सिर्फ VIP ही नहीं आम लोगों की जिंदगी को भी अब महत्व मिलने लगा है. इसमें हमारे देश की सेना का बहुत बड़ा रोल है. सेना सिर्फ लोगों की जान ही नहीं बचा रही, बल्कि सदा Positive यानी सकारात्मक बने रहने का संदेश भी दे रही है. लेकिन देश के कुछ अंग्रेज़ी बोलने वाले बुद्धिजीवियों को सेना का ये संदेश समझ नहीं आ रहा है. 

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटे, 15 दिन बीत चुके हैं. जब सरकार ने ये फैसला किया था, तब हमारे देश के कई बुद्धिजीवियों और राजनीतिक दलों ने इसे आत्मघाती कदम बताया था. इन लोगों को उम्मीद थी कि कश्मीर से जल्द ही कोई ना कोई Bad News आ जाएगी. खून खराब होगा, हिंसा की खबरें आएंगी और सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ेगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, कश्मीर एकदम शांत बना हुआ और वहां के हालात बहुत तेज़ी से सामान्य हो रहे हैं. इसका श्रेय भी हमारी सेना को ही जाता है. 

ये बात इन बुद्धिजीवियों को चुभ रही है. इसलिए ये लोग झूठ का सहारा लेकर, कश्मीर के बारें में अफवाहें फैला रहे हैं. जबकि सच ये है कि कश्मीर पिछले 15 दिनों से Paradise Of Positivity बना हुआ है. टुकड़े-टुकड़े गैंग जम्मू-कश्मीर की शांत फिज़ाओं में अफवाहों का बारूद घोलना चाहता है और इसमें उन्हें कांग्रेस का भी साथ मिल रहा है.

आज कांग्रेस नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि सरकार को अपना फैसला वापस ले लेना चाहिए. क्योंकि जम्मू कश्मीर में कोई भी खुश नहीं है. इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी कुछ Tweets किए हैं. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि कश्मीर में कुछ भी सामान्य नहीं है. यानी कांग्रेस कश्मीर की शांति में अशांति ढूंढ रही है.

गुलाम नबी आज़ाद को जम्मू कश्मीर के लोग नाखुश लग रहें हैं, तो टुकड़े टुकड़े गैंग सेना के खिलाफ Fake News का सहारा ले रहा है. कश्मीर का अमन और चैन देखकर ये लोग बेचैन हैं. यही वजह है कि ये लोग कश्मीर को लेकर झूठी कहानियां गढ़ रहे हैं. JNU छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शहला रशीद ने जम्मू कश्मीर को लेकर कुछ फर्ज़ी Tweets किए हैं. इनमें उन्होंने भारतीय सेना पर कई आरोप लगाए हैं. शहला रशीद ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में जो भड़काऊ Tweets किए, उनका करारा जवाब भारतीय सेना ने दिया है. 

सेना की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि शहला के आरोप बेबुनियाद और झूठे हैं. सेना ने ये भी कहा कि इस तरह की Fake News, विरोधी मानसिकता के लोगों और संगठनों द्वारा फैलाई जा रही है, जिनका मकसद जम्मू कश्मीर के लोगों को भड़काना है. वहीं, दिल्ली के एक वकील ने शहला रशीद के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है. जिसमें उनकी गिरफ्तारी के साथ-साथ उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग भी की गई है.

जम्मू-कश्मीर के नाम पर Fake News की ये फैक्ट्रियां इसलिए चलाई जा रही हैं, क्योंकि अभी तक वहां से कोई बुरी खबर नहीं आई है. इसलिए हमारे देश के अलगाववादी नेता, बुद्धिजीवी और विरोधी पार्टियां उदास हैं. इन सबको उम्मीद थी कि कश्मीर में कुछ ना कुछ बुरा ज़रूर होगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ये लोग कश्मीर में बड़े विरोध प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन ऐसा कोई प्रदर्शन भी वहां नहीं हुआ और No Protest भी इन लोगों के लिए Bad News ही है. 

एक रिसर्च के मुताबिक सिर्फ 0.1 फीसदी Twitter Accounts के ज़रिए 80 फीसदी Fake News फैलाई जाती है. Reaserchers ने पिछले 12 वर्षों के दौरान अंग्रेज़ी में किए 30 लाख Tweets का अध्ययन किया और पाया कि फर्ज़ी खबरें, सही और सच्ची खबरों के मुकाबले ज्यादा तेज़ी से फैलती हैं.

यानी मुट्ठी भर लोग फर्ज़ी खबरों की Entry सोशल मीडिया में करवा देते हैं और फिर ये झूठी खबरें लगातार फैलती रहती हैं. इन फर्ज़ी खबरों के ज़रिए लोगों के मन में ज़हर घोला जाता है. इसलिए आपको Social Media पर इन Anti Social लोगों को पहचानना होगा. ताकि आप गलती से भी इनके ज़हरीले एजेंडे का हिस्सा ना बन जाएं. 

एक सर्वे के मुताबिक भारत के 52 प्रतिशत लोग Facebook और Whatsapp के ज़रिए News हासिल करते हैं. जबकि Instagram से 26 प्रतिशत और Twitter से 18 प्रतिशत लोगों को खबरों की जानकारी मिलती है. यानी सोशल मीडिया अब एक News Plateform में बदल गया है और अब इसका फायदा देश विरोधी लोग भी उठा रहे हैं.

ये लोग पिछले कुछ दिनों से देश को डरा रहे थे और कश्मीर में खौफ का माहौल बना रहे थे. लेकिन भारतीय सेना ने कश्मीर के लोगों का दिल जीत लिया और इन लोगों के हौसले पस्त हो गए. बेचैनी और घबराहट में ये लोग देश के लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन हमें यकीन है कि ये अपने मकसद में कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे. 

अनुच्छेद 370 के खात्मे ने जम्मू कश्मीर को नए जम्मू कश्मीर में बदल दिया है. कश्मीर से पत्थरबाज़ी वाला पाषाण युग खत्म हो गया है. अलगाववाद की आग भी ठंडी पड़ गई है और कश्मीर को अपनी निजी संपत्ति मानने वाले परिवार भी अब अपनी राजनीति बदलने पर विचार कर रहे हैं. कश्मीर की ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां भारत के पक्ष में होने का दिखावा तो करती थीं, लेकिन अलगाववादियों और आतंकवादियों के प्रति इनकी हमदर्दी किसी से छिपी नहीं है. Soft Separatism के नाम पर इन दलों ने कश्मीर की जनता को कई दशकों तक Highjack कर रखा था. लेकिन भारत सरकार के एक कदम ने इनकी सारी कोशिशें बेकार कर दी है.

कश्मीर में पत्थरबाज़ों, अलगाववादियों और आतंकवादियों की दुकाने बंद हो चुकी हैं. कश्मीर का युवा नए भविष्य की तरफ देख रहा है. जम्मू-कश्मीर में पिछले वर्ष नवंबर और दिसंबर में पंचायत चुनाव हुए थे. इस दौरान करीब 74 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला था. ये Voter Turnout अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इन चुनावों में करीब 35 हज़ार सरपंच चुने गए थे. इनमें हजारों युवा और महिलाएं भी शामिल हैं. अब ये लोग मिलकर कश्मीर का भविष्य तय करेंगे. क्योंकि कश्मीर की किस्मत की चाभी अब अलगाववादियों के हाथ में नहीं, बल्कि Positive सोच रखने वाले युवाओं के हाथों में है.

कुछ लोगों कश्मीर में आग लगाने का सपना देखते हैं. लेकिन आज ये लोग हमारा अगला वीडियो विश्लेषण देखकर बहुत निराश होने वाले हैं. जम्मू-कश्मीर में सबकुछ सामान्य है. जिंदगी पटरी पर लौट रही है. लोग कामकाज पर जा रहे हैं और बच्चों ने भी स्कूल जाना शुरू कर दिया है. हमारा ये विश्लेषण झूठ की फैक्ट्री चलाने वालों को आज उदासी और हताशा से भर देगा. जबकि देश के बाकी नागरिक उत्साह से भर जाएंगे.

कश्मीर में सब अच्छा रहे, यही हम सबकी कामना है. यही पूरा देश चाहता है. लेकिन पाकिस्तान ऐसा नहीं चाहता इसलिये उसने अब भारतीय सेना के ख़िलाफ़ नया Propaganda शुरू कर दिया है. भारत में बैठे पाकिस्तान को चाहने वाले नेता भी इसमें उसकी मदद कर रहे हैं. पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय का प्रचार विभाग यानी ISPR ने इसकी कमान संभाली हुई है. और अब वो भारतीय सेना के अफ़सरों के नाम से झूठी ख़बर सोशल मीडिया पर फैला रहा है.

Indian Army के एक रिटायर्ड कर्नल विजय आचार्य के नाम से तो एक Fake Profile बनाया गया और फिर उससे Tweet किया गया कि कश्मीर में उनकी यूनिट के 25 जवानों की पाकिस्तान के हमले में मौत हो गई है. जिसे लेकर उन्होंने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. क्योंकि सेना इस बात को छुपा रही है और मीडिया कवरेज भी नहीं हो रही. ये पूरी तरह झूठ था. जिस Twitter Account से ये Fake News Tweet की गई, उसमें कर्नल विजय आचार्य की तस्वीर ज़रूर लगी थी. लेकिन ये नक़ली Account था. दरअस्ल कर्नल आचार्य इसी वर्ष मार्च में ही रिटायर हो चुके हैं और अब जयपुर में रहते हैं.

भारतीय सेना ने भी इस फ़र्ज़ी Twitter Handle की शिकायत की और अब ये Account Suspend किया जा चुका है. पाकिस्तान ने सोचा होगा कि इस तरह वो भारतीय सेना में बग़ावत वाले हालात पैदा कर देगा. लेकिन उसको शायद मालूम नहीं कि कर्नल आचार्य को लेकर ये Fake News सबसे पहले पहचानने वाला एक बच्चा था. जिसने इस Fake News के पोस्ट होने के 16 मिनट बाद ही कर्नल विजय आचार्य को फ़ोन पर बता दिया था कि उनके नाम से झूठी ख़बर फैलाई जा रही है. Fake News से बचने के लिये बस कुछ होशियारी की ज़रूरत है.

आपको देखना चाहिये कि ख़बर का Source क्या है. ये ख़बर किसने लिखी है. उसने किन तथ्यों का हवाला दिया है. हमेशा देखें कि ख़बर की तारीख़ कौन सी है, आजकल कश्मीर में हुई पत्थरबाज़ी के ऐसे वीडियो भी पोस्ट किये जा रहे हैं जो कई साल पुराने हैं. कभी किसी ख़बर को बिना पुष्टि किये शेयर ना कीजिये. आप इसके लिये विशेषज्ञों से भी बात कर सकते हैं.

अगर आपको लगता है कि सोशल मीडिया पर जो पोस्ट किया गया है, वो ग़लत है. और उसके ज़रिये नफ़रत फैलाई जा रही है, हिंसा के लिये उकसाया जा रहा है. तो आप उस Social Media Platform पर शिकायत कर सकते हैं. Twitter और Facebook पर इसके लिये Report करने का बाक़ायदा Option है. केंद्र सरकार की सख़्ती के बाद अब ऐसी पोस्ट पर नज़र भी रखी जा रही है. आप इसके लिये पुलिस से भी संपर्क कर सकते हैं, अब हर राज्य की पुलिस का अपना IT Cell भी है, जो इस तरह की गतिविधियों पर नज़र रखता है.

हमारे अपने देश के अंदर जानबूझकर जम्मू-कश्मीर को 'असहाय' साबित करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन, दूसरी तरफ पाकिस्तान में, प्रतिदिन भारत की कश्मीर वाली 'कूटनीतिक क्रांति' के झटके महसूस किए जा रहे हैं. 'कड़ी निन्दा' का दौर ख़त्म हो चुका है. क्योंकि, 2019 का नया भारत, जम्मू-कश्मीर के विषय पर अपने नियम खुद बना रहा है. और अब इस सूची में पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर को भी शामिल कर लिया गया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने पूरे देश के सामने कल अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी है.

PoK के संदर्भ में इन दोनों नेताओं द्वारा कही गई बातों के पीछे का एक 'इतिहास' है. हम वो इतिहास भी आपको बताएंगे. लेकिन उससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 6 अगस्त 2019 को कही गई वो बात सुननी भी ज़रुरी है. जिसमें उन्होंने कहा था, कि वो जम्मू-कश्मीर सहित पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के लिए 'जान' भी दे सकते हैं.