ZEE जानकारी: आपके बच्चे के स्कूल के बैग का वजन कब कम होगा

भारी बैग इस बात की गारंटी नहीं है कि आपके बच्चे को भविष्य में रोज़गार मिल ही जाएगा बल्कि इसके लिए आपको अपने बच्चे को ऐसी शिक्षा देनी होगी जिसमें पढ़ाई का बोझ संतुलित हो और रचनात्मकता और कल्पनशीलता ज्यादा हो. योग्यता पढ़ाई लिखाई से भी हासिल की जा सकती है और कई बार ये नैसर्गिक भी होती है.

ZEE जानकारी: आपके बच्चे के स्कूल के बैग का वजन कब कम होगा

आज हमने गुजरात की रूही और अमेरिका की 7 साल की गरिमा की स्कूली जिंदगी का एक तुलनात्मक विश्लेषण किया है. ये विश्लेषण देखकर आप समझ जाएंगे कि देश का भविष्य तभी बन सकता है. जब बच्चों के भविष्य को ठंडे बस्ते में ना डाला जाए. भारत में स्कूल जाने वाले बच्चों पर पढ़ाई का अत्याधिक बोझ है. स्कूल बैग के वज़न से बच्चों की कमर टूट रही है और अगर बच्चे और माता-पिता इतनी कुर्बानी दे रहे हैं तो फिर भारत को पढ़े-लिखे लोगों का देश बनने से कोई नहीं रोक सकता और भारत इन्हीं पढ़े लिखे बच्चों के दम पर एक दिन महाशक्ति भी बन जाएगा लेकिन आपको जानकर दुख होगा कि भारत में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों का भविष्य कुछ खास सुखद नहीं है. 

दिल्ली में 10 वीं और 12वीं में पढ़ने वाले बच्चों पर वर्ष 2006 से 2016 के बीच एक स्टडी की गई. इस स्टडी के अनुसार..भारत में CBSE से 12वीं पास करने वाले छात्रों की संख्या हर साल 8 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है लेकिन 14 से 18 वर्ष के सिर्फ 40 प्रतिशत बच्चे ही ये बताने में सक्षम हैं कि MRP पर 10 प्रतिशत डिस्काउंट के बाद..खरीदी गई शर्ट उन्हें कितने की पड़ेगी. जबकि 60 प्रतिशत बच्चे एक analog यानी सुईंयों वाली घड़ी में देखकर सही वक्त भी नहीं बता पाए. Annual Status of Education की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 17 प्रतिशत ग्रेजुएट युवा ऐसे हैं..जो नौकरी करने के लायक ही नहीं हैं. 

अब सोचिए कि अगर इतनी मेहनत के बाद और इतना पैसा खर्च करने के बाद भी हम भविष्य में नौकरी हासिल करने लायक छात्र तैयार नहीं कर पा रहे तो देश का भविष्य क्या होगा. भारत की 65 प्रतिशत आबादी की उम्र 35 वर्ष से कम है लेकिन युवाओं के इस शक्ति पुंज का भी भारत फायदा नहीं उठा पा रहा है. भारत सरकार के Periodic Labour Force Survey के मुताबिक देश के 15 से 29 वर्ष के 30 प्रतिशत ऐसे युवा बेरोज़गार हैं जिनके पास किसी ना किसी तरह ही Skill यानी योग्यता है. अब सोचिए जब योग्यता रखने वाले 30 प्रतिशत युवा बेरोज़गार हैं..तो फिर अयोग्य़ बेरोज़गारों की संख्या क्या होगी. 

इसलिए हम कह रहे हैं कि भारी बैग इस बात की गारंटी नहीं है कि आपके बच्चे को भविष्य में रोज़गार मिल ही जाएगा बल्कि इसके लिए आपको अपने बच्चे को ऐसी शिक्षा देनी होगी जिसमें पढ़ाई का बोझ संतुलित हो और रचनात्मकता और कल्पनशीलता ज्यादा हो. योग्यता पढ़ाई लिखाई से भी हासिल की जा सकती है और कई बार ये नैसर्गिक भी होती है. अब हम आपको बेल्जियम के एक ऐसे बच्चे से मिलवाएंगे जो 9 साल की उम्र में ही ग्रेजुएशन पूरी करने वाला है. इस बच्चे का नाम है LAURENT SIMONS और LAURENT अगले कुछ हफ्तों में ELECTRICAL ENGINEERING में स्नातक की डिग्री हासिल कर लेगा. 

ऐसा होते ही LAURENT का नाम दुनिया के गिने-चुने बच्चों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा. इस बच्चे ने 4 साल की उम्र में प्राइमरी स्कूल और 6 साल की उम्र में High School की पढ़ाई पूरी कर ली थी । ग्रेजुएशन करने के बाद..LAURENT का सपना मेडिसिन की पढ़ाई करना और PHD हासिल करना है. हमारे सहयोगी अंतर्राष्ट्रीय चैनल WION ने इस बच्चे से एक खास बातचीत की..उस बातचीत का एक छोटा सा हिस्सा आपको भी सुनना चाहिए. 

9 साल के LAURENT की कहानी सुनकर कोई भी माता-पिता सोचेंगे कि काश उनका बच्चा भी ऐसा ही हो लेकिन LAURENT के पास पढ़ाई करने की कुदरती योग्यता है और हो सकता है कि आपके बच्चे के पास कोई और योग्यता हो इसलिए अपने बच्चे को कामयाबी की दौड़ में शामिल करने से अच्छा. उसे बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करें क्योंकि बच्चों के मन को Edit करके..उसमें अपनी पसंद की योग्यता को Install करना संभव नहीं है. हालांकि चीन ये कोशिश भी कर रहा है. चीन में माता-पिता पैदा होते ही बच्चे का DNA टेस्ट कराकर ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि उसमें कौन सा Talent छिपा है.

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चीन में ऐसे कई Clinic हैं जो बच्चे के पैदा होते ही उसका DNA सैंपल लेते हैं और फिर उसके आधार पर Genetic Report-card तैयार करके ये पता लगाते हैं कि बच्चा भविष्य में डॉक्टर बनेगा, Mathematician, वकील , वैज्ञानिक या फिर एस्ट्रोनॉट. चीन में इसे DNA TALENT TESTING नाम दिया गया है. इस टेस्ट के परिमाणों के मुताबिक..सलाहाकर माता-पिता को बताते हैं कि उन्हें किस करियर के लिए तैयार करना है. भारत में बच्चों को ऐसे पढ़ाया जा रहा है जैसे वो किसी Factory के Product हो और चीन में DNA की मदद से बच्चों का भविष्य तैयार करने की कोशिश की जा रही है. दुनिया की दौड़ में बच्चे पीछे ना छूटें..इसके लिए माता-पिता क्या कर रहे हैं. ये हमने आपको दिखाया लेकिन अब आप ज़रा चीन के बच्चों का भविष्य भी देख लीजिए. 

आप National Commission for Protection of Child Rights को कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. आप www.ebaalnidan(E-बाल निदान) .nic.in पर Login करके भारी School Bags के मुद्दे पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं. आप CBSE के हेल्प लाइन नंबर पर फोन करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. अगर आपके बच्चे को भी भारी स्कूल बैग उठाने पर मजबूर किया जाता है तो आप अपने ज़िला शिक्षा अधिकारी से भी इसकी शिकायत कर सकते हैं. हम मानते हैं कि स्कूलों से ज्ञान हासिल करने में किताबों और कॉपियों की अहम भूमिका होती है लेकिन सिस्टम में थोड़ा सा बदलाव करके बच्चों को भारी School Bags की समस्या से छुटकारा दिलाया जा सकता है. इसके लिए माता पिता के तौर पर आपको भी आवाज़ उठानी होगी.. हम आपसे वादा करते हैं कि हम भारमुक्त शिक्षा का स्वराज दिलाने में आपकी पूरी मदद करेंगे.